Friday, January 3, 2025

Lesson 6 Manufacturing Industries CLASS 10TH GEOGRAPHY

 

अध्याय 6 विनिर्माण उद्योग

कक्षा 10 वीं

समकालीन भारत (भूगोल)

सामाजिक विज्ञान

प्रश्न : गन्ने से चीनी, लकड़ी से कागज, कपास से सूत बनाना आदि कों किस प्रकार की आर्थिक क्रिया में शामिल किया जाता है ?

   क).            प्राथमिक

  ख).            द्वितीयक

    ग).            तृतीयक

   घ).            चतुर्थक

उत्तर: द्वितीयक

प्रश्न : कच्चे पदार्थ कों मूल्यवान उत्पाद में परिवर्तित कर अधिक मात्रा में वस्तुओं के उत्पादन कों _______ कहते है |

   क).            कृषि

  ख).            सेवा

    ग).            विनिर्माण

   घ).            उपरोक्त सभी

उत्तर: विनिर्माण

प्रश्न :किसी उद्योग की स्थापना कों निम्नलिखित में से कौन सा कारक प्रभावित करता है ?

   क).            कच्चामाल

  ख).            कुशल श्रम (श्रमिक)

    ग).            बाजार

   घ).            उपरोक्त सभी

उत्तर: उपरोक्त सभी

प्रश्न :निम्नलिखित में से कौन सा उद्योग कृषि आधारित है ?

   क).            लौह –इस्पात उद्योग

  ख).            एल्युमिनियम प्रगलन उद्योग

    ग).            सूती वस्त्र उद्योग

   घ).            कार निर्माण उद्योग

उत्तर: सूती वस्त्र उद्योग

प्रश्न :निम्नलिखित में से कौन सा उद्योग खनिज आधारित है ?

   क).            चीनी उद्योग

  ख).            रबड़ उद्योग

    ग).            पटसन उद्योग

   घ).            एल्युमिनियम प्रगलन उद्योग

उत्तर : एल्युमिनियम प्रगलन उद्योग

प्रश्न : निम्नलिखित में से कौन सा उद्योग आधारभूत उद्योग है ?

   क).            लौह –इस्पात उद्योग

  ख).            एल्युमिनियम प्रगलन उद्योग

    ग).            ताँबा प्रगलन उद्योग

   घ).            उपरोक्त सभी

उपरोक्त सभी

प्रश्न : निम्नलिखित में से कौन सा उद्योग उपभोक्ता उद्योग है ?

   क).            चीनी उद्योग

  ख).            कागज़ उद्योग

    ग).            दंतमंजन उद्योग

   घ).            उपरोक्त सभी

उत्तर: उपरोक्त सभी

प्रश्न: निम्नलिखित उद्योगों का स्वामित्व के आधार पर सही मिलान करें |

a.     सार्वजनिक क्षेत्र                  1. महाराष्ट्र के चीनी उद्योग

b.     निजी क्षेत्र                         2. ऑइल इंडिया लिमिटेड    

c.      सहकारी क्षेत्र                     3. स्टील ऑथोरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड

d.     संयुक्त क्षेत्र                        4. बजाज ऑटो लिमिटेड

विकल्प

   क).            (a 1),   (b  2), (c  3), (d  4)

  ख).            (a 3),   (b  4),  (c 1), (d  2)

    ग).            (a  2),  (b  3),  (c 4),  (d 3)

   घ).            (a  4),  (b  1),  (c  2), (d 3)

उत्तर: (a 3),   (b 4),  (c 1) ,( d 2)

प्रश्न: भारत की इलैक्ट्रोनिक राजधानी किसे कहा जाता है ?

   क).            नई दिल्ली

  ख).            हैदराबाद

   ग).            बैंगलुरू

   घ).            मुंबई

उत्तर: बैंगलुरू

प्रश्न: टेलीविजन, सेल्युलर टेलिकॉम, टेलीफोन राडार तथा कंप्यूटर किस प्रकार के उद्योग के उत्पाद हैं ?

   क).            इलैक्ट्रोनिक उद्योग

  ख).            उर्वरक उद्योग

   ग).            एल्युमिनियम प्रगलन उद्योग

   घ).            लौह-इस्पात उद्योग

उत्तर:  इलैक्ट्रोनिक उद्योग

प्रश्न : भारत में कौन सी संस्था जल, खनिज तेल, गैस तथा ईंधन संरक्षण नीति की हिमायती है ?

   क).            SAIL

  ख).            BHEL

    ग).            NTPC

   घ).            MNCC

उत्तर: NTPC

प्रश्न :विनिर्माण उद्योग विकास की रीढ़ कहलाते है | निम्नलिखित में से कौन सा तथ्य विनिर्माण उद्योगों के महत्व कों दर्शाता है ?

   क).            कृषि के आधुनिकी करण में सहायक है |

  ख).            विनिर्माण उद्योग देश में बेरोजगारी कों कम करते है |

   ग).            विनिर्माण उद्योगों से विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है |

   घ).            उपरोक्त सभी

उत्तर: उपरोक्त सभी

प्रश्न :निम्नलिखित में से कौन सा सही है ?

   क).            नोएडा सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क महाराष्ट्र में स्थित है |

  ख).            जयपुर सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क उत्तर प्रदेश में स्थित है |

    ग).            पुणे सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क महाराष्ट्र में स्थित है |

   घ).            भुवनेश्वर सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क कर्नाटक में स्थित है |

उत्तर: पुणे सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क महाराष्ट्र में स्थित है |

प्रश्न: विनिर्माण या वस्तु निर्माण किसे कहते है?

उत्तर: कच्चे पदार्थ को मूल्यवान उत्पाद में परिवर्तित कर अधिक मात्रा में वस्तुओं के उत्पादन को विनिर्माण या वस्तु निर्माण कहते हैं | जैसे गन्ने से चीनी बनाना, लकड़ी से कागज बनाना, लौह-अयस्क से लौह इस्पात बनाना तथा बॉक्साइट से एल्युमिनियम बनाना |

प्रश्न: किसी देश की आर्थिक उन्नति किस के विकास से मापी जाती है ?

उत्तर: विनिर्माण उद्योगों के विकास से | 

प्रश्न: देश के विकास में  विनिर्माण उद्योग का क्या महत्व है ?

            अथवा

विनिर्माण उद्योग किसी देश के आर्थिक विकास की रीढ़ माने जाते है क्यों ? 

 

उत्तर: विनिर्माण उद्योग किसी देश के आर्थिक विकास की रीढ़ समझे जाते है | जिसके निम्नलिखित कारण हैं |

     (i)            विनिर्माण उद्योग न केवल कृषि के आधुनिकीकरण में सहायक है | बल्कि द्वितीयक व तृतीयक सेवाओं में रोजगार उपलब्ध कराकर कृषि पर हमारी निर्भरता को कम करता है |

   (ii)            देश में औद्योगिक विकास बेरोजगारी तथा गरीबी उन्मूलन की एक आवश्यक शर्त है | भारत में सार्वजनिक तथा संयुक्त क्षेत्र में लगे उद्योग, इसी विचार पर आधारित थे | जनजातीय तथा पिछड़े क्षेत्रों में उद्योगों की स्थापना का उद्देश्य भी असमानताओं को कम करना था |

 (iii)            विनिर्मित वस्तुओं का निर्यात वाणिज्य व्यापार को बढ़ाता है | जिससे अपेक्षित विदेशी मुद्रा की प्राप्ति होती है |

  (iv)            वे देश ही विकसित हैं जो कच्चे माल को विभिन्न तथा अधिक मूल्यवान तैयार माल में विनिर्मित करते हैं | अत : भारत का विकास भी विविध प्रकार के उद्योगों के विकास तथा शीघ्र विकास में ही निहित है |

प्रश्न : कृषि और उद्योग एक दूसरे के पूरक हैं ? इस आशय को स्पष्ट कीजिए ?

उत्तर: कृषि और उद्योग एक दूसरे से अलग नहीं है बल्कि ये एक दूसरे के पूरक हैं | उदाहरण के लिए भारत में कृषि पर आधारित उद्योगों ने  कृषि पैदावार बढ़ोतरी को प्रोत्साहित किया है | ये उद्योग कच्चे माल के लिए कृषि पर ही निर्भर हैं |

उद्योगों के द्वारा निर्मित उत्पाद जैसे – सिंचाई के लिए पम्प, उर्वरक, कीटनाशक दवाएँ, प्लास्टिक के पाइप, मशीनें तथा कृषि औजार आदि पर किसान निर्भर है |

इसलिए विनिर्माण उद्योग के विकास तथा स्पर्धा से न केवल कृषि उत्पाद को बढ़ावा मिला है | साथ ही उत्पादन प्रक्रिया भी सक्षम  हुई है |

प्रश्न: आज के वैश्वीकरण के युग में हमारे उद्योगों को अधिक प्रतिस्पर्धी तथा सक्षम होने की आवश्यकता हैं | इस कथन की समीक्षा कीजिए |

उत्तर : आज के वैश्वीकरण के युग में हमारे उद्योगों को अधिक प्रतिस्पर्धी तथा सक्षम होने की आवश्यकता हैं | क्योंकि केवल आत्मनिर्भरता ही काफी नहीं है | हमारी वस्तुएँ  गुणवत्ता में अंतर्राष्ट्रीय स्तर की होगीं तभी हम अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में प्रतिस्पर्धा कर पाएँगें |

प्रश्न: प्रयुक्त कच्चेमाल के स्त्रोत के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण कीजिए ?

उत्तर : प्रयुक्त कच्चेमाल के स्त्रोत के आधार पर उद्योगों को हम निम्नलिखित आधार पर बाँट सकते हैं | कृषि आधारित उद्योग तथा खनिज आधारित उद्योग |

कृषि आधारित उद्योग :  सूती वस्त्र उद्योग, ऊनी वस्त्र उद्योग, पटसन उद्योग, रेशम वस्त्र उद्योग, चीनी उद्योग, चाय उद्योग, रबड़ उद्योग, कॉफी उद्योग, वनस्पति तेल उद्योग आदि |

खनिज आधारित उद्योग:   लौहा –इस्पात उद्योग, सीमेंट उद्योग, एल्युमिनियम उद्योग, मशीनरी तथा औजार उद्योग तथा पैट्रोरसायन उद्योग  आदि |

प्रश्न: प्रमुख भूमिका के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण कीजिए ?

उत्तर : प्रमुख भूमिका  के आधार पर उद्योगों को हम निम्नलिखित आधार पर बाँट सकते हैं | आधारभूत तथा उपभोक्ता उद्योग |

आधारभूत उद्योग :  जिनके उत्पाद या तैयार माल पर दूसरे उद्योग निर्भर रहते है | या जिन उद्योगों का उत्पाद दूसरे उद्योगों को आधार प्रदान करता है वे उद्योग आधारभूत उद्योग कहलाते हैं | जैसे लौहा-इस्पात उद्योग,एल्युमिनियम प्रगलन उद्योग, ताँबा प्रगलन उद्योग आदि | 

उपभोक्ता उद्योग :  वे उद्योग जो वस्तुओं का उत्पादन उपभोक्ताओं से सीधे उपयोग किए लिए करते हैं | जैसे –चीनी उद्योग, दंतमंजन उद्योग, चाय उद्योग, कागज उद्योग, पंखा उद्योग, सिलाई मशीन उद्योग आदि |

प्रश्न: पूँजी निवेश  के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण कीजिए ?

उत्तर : पूँजी निवेश के आधार पर उद्योगों को हम निम्नलिखित आधार पर बाँट सकते हैं | लघु उद्योग तथा बड़े पैमाने के उद्योग |

लघु उद्योग : जिन उद्योगों में एक करोड़ तक की पूँजी निवेश की जाती है | उन्हें लघु उद्योग या छोटे पैमाने के उद्योग कहा जाता है |

बड़े पैमाने के उद्योग : जिन उद्योगों में एक करोड़ से अधिक की पूँजी निवेश की जाती है | उन्हें बड़े पैमाने के उद्योग कहा जाता है |

प्रश्न: स्वामित्व के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण कीजिए ?

उत्तर : स्वामित्व के आधार पर उद्योगों को हम निम्नलिखित आधार पर बाँट सकते हैं | सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग , निजी क्षेत्र के उद्योग  संयुक्त क्षेत्र के उद्योग तथा सहकारी क्षेत्र के उद्योग |

सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग:  सार्वजनिक क्षेत्र में लगे उद्योग वे उद्योग है जो सरकारी एजेंसियों द्वारा प्रबंधित तथा सरकार द्वारा संचालित होते है |जैसे भारत हैवी इलैक्ट्रिकल लिमिटेड(BHEL), स्टील ऑथोरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL),  नेशनल एल्युमिनियम कॉरपोरेशन (NALCO), नेशनल थर्मल पॉवर कॉरपोरेसन  या राष्ट्रीय तापीय विद्युतगृह कॉर्पोरेशन (NTPC)  आदि |

निजी या व्यक्तिगत क्षेत्र के उद्योग :  वे उद्योग जिनका एक व्यक्ति के स्वामित्व में संचालित या एक समूह के लोगों के स्वामित में संचालित या उनके द्वारा संचालित हैं  उन्हें निजी या व्यक्तिगत उद्योग कहा जाता है | जैसे- टिस्को (टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी ), बजाज ऑटो लिमिटेड , डाबर उद्योग, तथा रिलायंस इंडिया आदि |

संयुक्त उद्योग :  वे उद्योग जो राज्य सरकार और निजी क्षेत्र के संयुक्त प्रयासों से चलाये जाते हैं | उन्हें संयुक्त स्वामित्व वाले उद्योग कहा जाता है | जैसे ऑइल इंडिया लिमिटेड (OIL)

सहकारी उद्योग :  जिन उद्योगों का स्वामित्व कच्चे माल की पूर्ति करने वाले उत्पादों, श्रमिकों या दोनों के हाथों में होता है | संसाधनों का संयुक्त कोष होता है तथा लाभ-हानि का विभाजन भी अनुपातिक होता है उन्हें सहकारी क्षेत्र के उद्योग कहा जाता है | जैसे –महाराष्ट्र के चीनी उद्योग, केरल के मारियल आधारित उद्योग |

प्रश्न: कच्चे तथा तैयार माल की मात्रा व भार के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण कीजिए ?

उत्तर : कच्चे तथा तैयार माल की मात्र व भार के आधार पर उद्योगों को हम निम्नलिखित आधार पर बाँट सकते हैं |

भारी उद्योग : वे उद्योग जिनका कच्चा माल तथा तैयार माल दोनों भारी तथा अधिक मात्रा में होता है उन्हें भारी उद्योग कहते हैं | जैसे लौहा-इस्पात उद्योग |

हल्के उद्योग : वे उद्योग जो कम भार वाले कच्चे माल का प्रयोग करते हैं तथा हल्का तैयार माल का उत्पादन करते हैं उन्हें हल्के उद्योग कहा जाता है | जैसे विद्युतीय उद्योग |

प्रश्न : प्राकृतिक पर्यावरण और संसाधनों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय ताप विद्युतगृह निगम (NTPC) द्वारा सक्रिय दृष्टिकोण की व्याख्या कीजिए |

अथवा

प्रश्न : एन० टी० पी० सी० (NTPC) का क्या अर्थ है ? उन दो साधनों की सूची बनाओं  जिसके द्वारा  एन० टी० पी० सी० (NTPC) प्राकृतिक पर्यावरण को बचाने में योगदान देती है |

 

उत्तर:   एन० टी० पी० सी० का अर्थ है राष्ट्रीय ताप विद्युतगृह कॉर्पोरेशन  | यह भारत में विद्युत प्रदान करने वाला प्रमुख निगम है |

यह निगम प्राकृतिक पर्यावरण और संसाधन; जैसे जल, खनिज तेल गैस तथा ईंधन संरक्षण नीतियों का हिमायती है तथा इन्हें ध्यान में रखकर ही विद्युत संयंत्रों की  स्थापना करता है | इसके लिए इस निगम के पास पर्यावरण प्रबंधनतंत्र (EMS) 14001 के लिए आई०एस० ओ०  (ISO) प्रमाण पत्र है | 

राष्ट्रीय ताप विद्युतगृह कॉर्पोरेशन (NTPC) के द्वारा अपने संयंत्रों के आस पास प्राकृतिक पर्यावरण और संसाधनों के संरक्षण के लिए निम्नलिखित उपाय किए गए हैं |

     (i)            आधुनिकतम तकनीकों पर आधारित उपकरणों का सही उपयोग करके तथा विद्यमान उपकरणों में सुधार |

   (ii)            अधिकतम राख का इस्तेमाल कर अपशिष्ट पदार्थों का न्यून उत्पादन |

 (iii)            पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने के लिए हरित क्षेत्र कि सुरक्षा तथा वृक्षारोपण के लिए प्रेरित करना |

  (iv)            तरल अपशिष्ट प्रबंधन, राख युक्त जलीय पुनर्चक्रण तथा राख – संग्रह (Ash Pond) प्रबंधन द्वारा पर्यावरण प्रदूषण कम करना |

    (v)            सभी ऊर्जा संयंत्रों का  पारिस्थितिकीय रूप से मॉनीटर तथा समीक्षा करना एवं ऑनलाइन आँकड़ों का प्रबंधन करना |

प्रश्न : उद्योग पर्यावरण को किस प्रकार प्रदूषित करते हैं ?

अथवा

प्रश्न : औद्योगिक प्रदूषण के मुख्य प्रकारों का वर्णन कीजिए |

उत्तर :  उद्योगों की भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका है, तथापि इनके द्वारा बढ़ते हुए वायु, जल, भूमि, तथा पर्यावरण प्रदूषण को भी नकारा नहीं जा सकता |

उद्योग मुख्य रूप से चार प्रकार के प्रदूषण के लिए उत्तरदायी हैं | वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, भूमि प्रदूषण, तथा ध्वनि प्रदूषण |

 

वायु प्रदूषण :

         (i)         अधिक अनुपात में अनचाही गैसों की उपस्थिति जैसे सल्फर डाईऑक्साइड तथा कार्बन मोनोऑक्साइड वायु प्रदूषण का कारण है |

        (ii)        वायु में निलम्बित कणनुमा पदार्थों में ठोस व द्रवीय दोनों ही प्रकार के कण होते हैं | जैसे –धूलि, स्प्रे, कुहासा तथा धुआँ आदि |

       (iii)       रसायन व कागज उद्योग ईंटों के भट्टे, तेल शोधनशालाएँ , प्रगलन उद्योग, जीवाश्म ईंधन दहन तथा छोटे- बड़े कारखाने प्रदूषण के नियमों का उल्लंघन करते हुए धुआँ निष्कासित करते हैं |

       (iv)       जहरीली गैसों का रिसाव बहुत भयानक तथा दूरगामी प्रभावों वाला हो सकता है |

        (v)        वायु प्रदूषण, मानव स्वास्थ्य, पशुओं, पौधों इमारतों तथा पूरे पर्यावरण पर दुष्प्रभाव डालते हैं |

       (vi)       उदाहरण के लिए भोपाल गैस त्रासदी के कारण फैले वायु प्रदूषण से लाखों लोगों पर दुष्प्रभाव  देखने को मिला था |

   जल प्रदूषण :

         (i)         उद्योगों द्वारा कार्बनिक तथा अकार्बनिक अपशिष्ट पदार्थों के नदी में छोड़ने से जल प्रदूषण फैलता है |

        (ii)        जल प्रदूषण के  प्रमुख कारक –कागज, लुग्दी, रसायन, वस्त्र तथा रंगाई उद्योग, तेल शोधन शालाएँ, चमड़ा उद्योग तथा इलेक्ट्रोप्लेटिंग उद्योग हैं | जो रंग अपमार्जक अम्ल लवण तथा भारी धातुओं जैसे सीसा, पारा, कीटनाशक, उर्वरक,कार्बन, प्लास्टिक और रबड़ सहित कृत्रिम रसायन आदि जल में वाहित करते हैं |

       (iii)       भारत के मुख्य अपशिष्ट पदार्थों में फ्लाई एश, फोस्फो-जिप्सम तथा लौहा –इस्पात की अशुद्धियाँ हैं |

तापीय प्रदूषण :

         (i)         जब कारखानों तथा तापघरों से जल को बिना ठंडा किए ही नदियों तथा तालाबों में छोड़ दिया जाता है, तो जल में तापीय प्रदूषण होता है |  

        (ii)        जलीय जीवन पर तापीय प्रदूषण का बहुत अधिक बुरा प्रभाव पड़ता है |

       (iii)       प्रदूषण करने वाले उद्योगों में ताप विद्युतगृह भी शामिल है |

ध्वनि प्रदूषण :

         (i)         ध्वनि प्रदूषण से खिन्नता, तथा उत्तेजना ही नहीं बल्कि श्रवण अक्षमता हृदय गति, रक्तचाप तथा अन्य कायिक व्यथाएँ भी बढ़ती है |

        (ii)        अनचाही ध्वनि, उत्तेजना व मानसिक चिंता का स्त्रोत है |

       (iii)       औद्योगिक तथा निर्माण कार्य, कारखानों के उपकरण, जेनरेटर, लकड़ी चीरने के कारखाने, गैस यांत्रिकी तथा विद्युत ड्रिल भी अधिक ध्वनि उत्पन्न करते हैं | 

भूमि प्रदूषण :

         (i)         मृदा जल प्रदूषण आपस में संबंधित हैं |

        (ii)        मलबे का ढेर विशेषकर काँच, हानिकारक रसायन, औद्योगिक बहाव, पैकिंग, लवण तथा कूड़ा-कर्कट मृदा को अनुपजाऊ बनाता है |

       (iii)       वर्षाजल के साथ ये प्रदूषक जमीन से रिसते हुए भूमिगत जल तक पहुँच कर उसे भी प्रदूषित कर देते हैं |

 

अन्य प्रकार के प्रदूषण :

परमाणु ऊर्जा संयत्रों के निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों व परमाणु शस्त्र उत्पादक कारखानों के अपशिष्ट पदार्थों से कई प्रकार की बीमारियाँ जैसे  कैंसर, जन्मजात विकार तथा अकाल प्रसव (समय से पहले प्रसव) होती हैं |

 

प्रश्न : उद्योगों द्वारा पर्यावरण निम्नीकरण को कम करने के लिए उठाए गए विभिन्न उपायों की चर्चा कीजिए |

अथवा

प्रश्न : भारत में औद्योगिक विकास के कारण उत्पन्न पर्यावरणीय निम्नीकरण को कम करने के लिए सुझाव प्रदान करें |

पर्यावरणीय निम्नीकरण की रोकथाम के लिए निम्नलिखित सुझाव हैं |

1         कारखानों द्वारा निष्काषित एक लीटर अपशिष्ट से लगभग आठ गुणा स्वच्छ जल दूषित होता है | औद्योगिक प्रदूषण से स्वच्छ जल को बचाने के लिए कुछ सुझाव निम्नलिखित है |

                             (i)            विभिन्न प्रक्रियाओं में जल का न्यूनतम उपयोग तथा जल का दो या अधिक उत्तरोतर अवस्थाओं में पुनर्चक्रण द्वारा पुन: उपयोग |

                           (ii)            जल की आवश्यकता पूर्ति हेतु वर्षा जल संग्रहण |

                         (iii)            नदियों व तालाबों में गर्म जल तथा अपशिष्ट पदार्थों को प्रवाहित करने से पहले उनका शोधन करना |

औद्योगिक अपशिष्टों द्वारा शोधन तीन चरणों में किया जा सकता है |

                                                   क).           यांत्रिक साधनों द्वारा प्राथमिक शोधन | इसमें अपशिष्ट पदार्थों की छँटाई उनके छोटे –छोटे टुकड़े करना, ढकना तथा तलछट जमाव आदि सम्मलित हैं |

                                                  ख).            जैविक प्रक्रियाओं द्वारा द्वितीयक शोधन |

                                                    ग).            जैविक रासायनिक तथा भौतिक प्रक्रियाओं द्वारा तृतीयक शोधन | इसमें अपशिष्ट जल को पुनर्चक्रण द्वारा पुन: प्रयोग योग्य बनाया जाता है |

2         जहाँ भूमिगत जल का स्तर कम है वहाँ उद्योगों द्वारा इसके अधिक निष्कासन पर क़ानूनी प्रतिबंध होना चाहिए |

3         वायु में निलंबित प्रदूषण को कम करने के लिए कारखानों में ऊँची चिमनियाँ होनी चाहिए |

4         चिमनियों में एलेक्ट्रोस्टैटिक अवक्षेपण (Electrostatic precipitators), स्क्रबर उपकरण तथा गैसीय प्रदूषक पदार्थों को जड़त्वीय रूप से अलग करने के लिए उपकरण होना चाहिए |

5         कारखानों में कोयले की अपेक्षा तेल व गैस के प्रयोग से धुएँ के निष्कासन में कमी लायी जा सकती है |

6         मशीनों व उपकरणों का उपयोग किया जा सकता है तथा जेनरेटरों में साइलेंसर लगाया जा सकता है |

7         ऐसी मशीनरी का प्रयोग किया जाए जो ऊर्जा सक्षम हों तथा कम ध्वनि प्रदूषण करें | ध्वनि अवशोषित करने वाले उपकरणों के इस्तेमाल के साथ कानों पर शोर नियंत्रण उपकरण भी पहनने चाहिए |

प्रश्न : कारखानों (उद्योगों) द्वारा प्रदूषित स्वच्छ ( ताजा) जल को बचाने के लिए कुछ सुझाव क्या है ?

अथवा

प्रश्न : ताजे पानी के औद्योगिक प्रदूषण को कैसे कम किया जा सकता है ?

उत्तर :     कारखानों द्वारा निष्काषित एक लीटर अपशिष्ट से लगभग आठ गुणा स्वच्छ जल दूषित होता है | औद्योगिक प्रदूषण से स्वच्छ जल को बचाने के लिए कुछ सुझाव निम्नलिखित है |

     (i)            विभिन्न प्रक्रियाओं में जल का न्यूनतम उपयोग तथा जल का दो या अधिक उत्तरोतर अवस्थाओं में पुनर्चक्रण द्वारा पुन: उपयोग |

   (ii)            जल की आवश्यकता पूर्ति हेतु वर्षा जल संग्रहण |

 (iii)            नदियों व तालाबों में गर्म जल तथा अपशिष्ट पदार्थों को प्रवाहित करने से पहले उनका शोधन करना |

 औद्योगिक अपशिष्टों द्वारा शोधन तीन चरणों में किया जा सकता है |

(a)    यांत्रिक साधनों द्वारा प्राथमिक शोधन | इसमें अपशिष्ट पदार्थों की छँटाई उनके छोटे –छोटे टुकड़े करना, ढकना तथा तलछट जमाव आदि सम्मलित हैं |

(b)    जैविक प्रक्रियाओं द्वारा द्वितीयक शोधन |

(c)    जैविक रासायनिक तथा भौतिक प्रक्रियाओं द्वारा तृतीयक शोधन | इसमें अपशिष्ट जल को पुनर्चक्रण द्वारा पुन: प्रयोग योग्य बनाया जाता है |

प्रश्न : भारत में सूती वस्त्र उद्योग  का वर्णन कीजिए |

उत्तर : भारत में वस्त्र उद्योग का अपना महत्व है | इसका औद्योगिक उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान है | देश का यह अकेला उद्योग है जो कच्चेमाल से उच्चतम अतिरिक्त मूल्य उत्पाद तक एक श्रंखला में परिपूर्ण तथा आत्मनिर्भर है |

भारत में सूती वस्त्र उद्योग का विकास (इतिहास)

         (i)         प्राचीन भारत में सूती वस्त्र हाथ से कताई और हथकरघा बुनाई तकनीकों से बुने जाते थे |

        (ii)        अठारहवीं शताब्दी के बाद विद्युतीय करघों का उपयोग किया जाने लगा था |

       (iii)       औपनिवेशिक काल के दौरान हमारे परम्परागत उद्योगों को बहुत हानि हुई क्योंकि हमारे उद्योग इंग्लैंड के मशीन निर्मित वस्त्रों से स्पर्धा नहीं कर पाए थे |

       (iv)       भारत में पहला सूती वस्त्र उद्योग सन् 1854 में मुंबई में लगाया गया |

        (v)        यूरोप दो विश्व युद्धों से जुड़ा रहा था | तथा भारत इंग्लैंड के अधीन था | ऐसे में इंग्लैंड में कपड़े की आपूर्ति हेतु भारतीय सूती वस्त्र उद्योग को प्रोत्साहन मिला |

सूती वस्त्र उद्योग का महाराष्ट्र और गुजरात के कपास उत्पादन क्षेत्रों तक ही सीमित है 

सूती वस्त्र उद्योग का महाराष्ट्र और गुजरात के कपास उत्पादन क्षेत्रों तक ही सीमित थे |  जिसके निम्नलिखित कारण हैं |

कपास की उपलब्धता, बाज़ार, परिवहन, पत्तनों की समीपता, सस्ता तथा कुशल श्रम, नमीयुक्त जलवायु आदि कारकों ने इसके स्थानीयकरण को बढ़ावा दिया |

प्रश्न : सूती वस्त्र उद्योग किन लोगों को जीविका प्रदान करता है ?

उत्तर : इस उद्योग का कृषि से निकट का संबंध है और कृषकों, कपास चुनने वालों, गाँठ बनाने वालों, कताई करने वालों, रंगाई करने वालों, डिजाइन बनाने वालों, पैकेट बनाने वालों तथा सिलाई करने वालों को यह जीविका प्रदान करता है |

प्रश्न : सूती वस्त्र उद्योग के कारण किन उद्योगों का विकास होता है ?

उत्तर : इस उद्योग के कारण रसायन रंजक, मिल स्टोर, पैकेजिंग सामग्री और इंजिनयरिंग उद्योग की माँग बढ़ती है | फलस्वरूप इन उद्योगों का विकास होता है |

प्रश्न : सूती वस्त्र उद्योग की  समस्याओं का उल्लेख कीजिए |

उत्तर : सूती रेशे के विश्व व्यापार में हमारे देश की भागीदारी काफी महत्वपूर्ण है | यह कुल अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का लगभग एक चौथाई भाग है | हमारे कताई कारखाने विश्वस्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं और हम जो सूत पैदा करते हैं उसका उपभ्ग करने में सक्षम हैं | सूती वस्त्र उद्योग की निम्नलिखित  समस्याएं हैं |

लेकिन बुनाई और कताई तथा प्रक्रमण इकाईयाँ देश में उत्पन्न उच्च कोटि के धागे का उपयोग नहीं कर पाती हैं | इस क्षेत्र में कुछ ही बड़े और आधुनिक कारखाने हैं तथा अधिकतर छोटी व अधिकतर बिखरी हुई इकाईयाँ ही हैं  जिसका उत्पादन स्थानीय बाज़ार की माँग को ही पूरा कर पाता है | यह इस उद्योग की सबसे बड़ी कमी है है | जिसके परिणाम स्वरूप हमारे बहुत से कताई करने वाले सूती धागे का निर्यात करते हैं जबकि परिधान निर्मंताओं को कपड़ा आयात करना पड़ता है |

यद्यपि लंबे रेशे वाली कपास के उत्पादन में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है | फिर भी इसे आयात करने की आवश्यकता महसूस की जाती है | विशेषत: बुनाई व अन्य संबंधित क्षेत्रों में अनियमित विद्युत आपूर्ति को दूर करने तथा नई मशीनरी के उपयोग की आवश्यकता है |

अन्य समस्याओं में कम श्रमिक उत्पादकता तथा कृत्रिम वस्त्र उद्योग से प्रतिस्पर्धा आदि शामिल हैं |

प्रश्न : भारत में पटसन उद्योग का वर्णन कीजिए |

उत्तर : भारत पटसन (जूट) व पटसन निर्मित समान का सबसे बड़ा उत्पादक है तथा बांग्लादेश के बाद दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक भी है |

भारत में पहला पटसन उद्योग कोलकाता के निकट रिशरा नामक स्थान पर सन् 1855 में लगाया गया था | सन् 1947 में देश के विभाजन के बाद पटसन मिलें  तो भारत में रह गई लेकिन तीन –चौथाई जूट (पटसन) उत्पादक क्षेत्र पूर्वी पाकिस्तान या बांग्लादेश में चले गए थे |

 वर्ष 2010-11 में भारत में लगभग 80 पटसन उद्योग थे | इनमें से अधिकाँश पश्चिमी बंगाल में हुगली नदी के तट पर 98 किलोमीटर लम्बी तथा 3 किलोमीटर चौड़ी एक सँकरी मेखला में स्थित है |

भारत में पटसन उद्योग मुख्य रूप से हुगली नदी के आस पास  (पश्चिम बंगाल में ) फैला है जिसके निम्नलिखित कारण हैं |

     (i)            यह क्षेत्र पटसन उत्पादक क्षेत्रों के निकट स्थित है |

   (ii)            इस उद्योग का कच्चे माल को उद्योगों तथा तैयार माल को बाजार तक परिवहन करने के लिए सस्ता जल परिवहन उपलब्ध है साथ ही सड़क तथा रेल परिवहन का जाल बिछा हुआ है |

 (iii)            कच्चे पटसन को संसाधित करने में प्रचुर जल हुगली नदी से उपलब्ध हो जाता है |

  (iv)            पश्चिम बंगाल तथा समीपवर्ती राज्यों उड़ीसा, बिहार तथा उत्तर प्रदेश से सस्ता श्रमिक उपलब्ध हो जाता है |

    (v)            कोलकाता एक बड़े नगरीय केन्द्र के रूप में बैंकिंग, बीमा तथा बाज़ार की सुविधाएँ उपलब्ध करवाता है साथ ही जूट (पटसन) के समान के निर्यात के लिए पत्तन की सुविधाएँ भी प्रदान करता हैं |

प्रश्न : भारत में चीनी उद्योग का वर्णन कीजिए |

उत्तर : भारत का चीनी उत्पादन में विश्व में दूसरा स्थान है | लेकिन गुड व खांडसारी के उत्पादन में इसका प्रथम स्थान है |

इस उद्योग में प्रयोग होने वाला कच्चा माल मुख्य रूप से गन्ना है जो भारी होता है तथा ढुलाई में इसके सुक्रोज की मात्रा घट जाती है | इसलिए यह उद्योग गन्ना उत्पादक क्षेत्रों के निकट ही स्थापित किया जाता है |

यह एक मौसमी उद्योग है अत: सहकारी क्षेत्र के लिए उपयुक्त है |

चीनी मिलें उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक,  तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, गुजरात, पंजाब, हरियाणा तथा मध्यप्रदेश राज्यों में फैली हैं |  श की  60 प्रतिशत चीनी  मिलें उत्तर प्रदेश तथा बिहार राज्यों में स्थित हैं |

पिछले कुछ वर्षों में चीनी मीलों की संख्या दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों में बढ़ी हैं | उनमें भी विशेषकर महाराष्ट्र में अधिक बढ़ी हैं | इसका मुख्य कारण यहाँ के गन्ने में सुक्रोज की मात्रा अधिक होना है | अन्य राज्यों की अपेक्षाकृत यहाँ की ठंडी जलवायु भी गुणकारी है | इसके अलावा इन राज्यों में सहकारी समितियाँ भी सफल रही हैं |

प्रश्न : खनिज आधारित उद्योग से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर : वे उद्योग जो खनिज व धातुओं को कच्चे माल के रूप में प्रयोग करते हैं खनिज आधारित उद्योग कहलाते हैं |  जैसे : लोहा –इस्पात उद्योग, एल्यूमीनियम प्रगलन उद्योग तथा ताँबा प्रगलन उद्योग आदि |

प्रश्न : भारत में लोहा –इस्पात उद्योग का वर्णन कीजिए |

उत्तर : लौह-इस्पात उद्योग एक आधारभूत उद्योग

लौह-इस्पात उद्योग एक आधारभूत उद्योग है | क्योंकि अन्य सभी भारी, हल्के तथा मध्यम उद्योग इससे बनी मशीनरी पर निर्भर हैं | विविध प्रकार के इंजिनयरिंग सामान , निर्माण सामग्री, रक्षा, चिकित्सा, टेलीफोन वैज्ञानिक उपकरण और विभिन्न प्रकार की उपभोक्ता वस्तुओं के निर्माण के लिए इस्पात की आवश्यकता होती है | इस्पात के उत्पादन तथा खपत को प्राय देश के विकास का पैमाना माना जाता है |

लौह तथा इस्पात उद्योग एक भारी उद्योग

लौह तथा इस्पात उद्योग एक भारी उद्योग है |  क्योंकि इसमें प्रयुक्त कच्चा तथा तैयार माल दोनों ही भारी तथा स्थूल होते हैं और इसके लिए अधिक परिवहन लागत की आवश्यकता होती है |

लौह इस्पात उद्योग के लिए आवश्यक कारक

इस उद्योग के लिए लौह अयस्क, कोकिंग कोयला तथा  चूना पत्थर का अनुपात 4:2:1 का होता है | इस्पात को कठोर बनाने के लिए इसमें मैंगनीज की भी कुछ मात्रा में आवश्यकता होती है | इस उद्योग के निर्मित माल को बाज़ार तथा उपभोक्ता तक पहुँचाने के लिए सक्षम परिवहन की आवश्यकता होती है | 

भारत में लौह इस्पात उद्योग के क्षेत्र

भारत में छोटा नागपुर के पठारी क्षेत्र में अधिकाँश लोहा तथा इस्पात उद्योग सकेंद्रित है | इस प्रदेश ने इस उद्योग के विकास के लिए अधिक अनुकूल सापेक्षिक परिस्थितियाँ हैं | लौह-अयस्क की कम लागत, उच्च कोटि के कच्चे माल की निकटता, सस्ते श्रमिक और स्थानीय बाज़ार में इनके माँग की विशाल संभाव्यता सम्मलित है |

प्रश्न : इस्पात निर्माण की विभिन्न प्रक्रियाओं को उल्लेख |

उत्तर : इस्पात निर्माण के अंतर्गत निम्नलिखित प्रक्रियाएँ की जाती है |

     (i)            कच्चे माल का कारखानों तक परिवहन

   (ii)            झोंकदार भट्टी में लौह-अयस्क का गलाया जाना | इसमें चूना पत्थर एक सहायक खनिज है जो इसमें मिलाया जाता है | धातु का मैल हटाया जाता है | अयस्क को गर्म करने के लिए कोक का ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है |

 (iii)            तरल पदार्थ को सांचों में डाला जाता है जिससे ढलवाँ लौहा तैयार होता है |

  (iv)            रोलिंग, प्रेसिंग,ढलाई और गढाई के द्वारा धातु को आकार दिया जाता है |

    (v)            ढलवाँ लौहे को पुनः गलाकर आक्सीकरण द्वारा अशुद्धता हटाकर तथा मैंगनीज, निकल तथा क्रोमियम मिलाकर शुद्ध किया जाता है |

प्रश्न : भारत में एल्युमिनियम प्रगलन उद्योग वर्णन कीजिए |

उत्तर : भारत में एल्युमिनियम दूसरा सर्वाधिक महत्वपूर्ण धातु शोधन उद्योग है |

 यह हल्का, जंग अवरोधी, ऊष्मा का सुचालक, लचीला तथा अन्य धातुओं के मिश्रण से अधिक कठोर बनाया जा सकता है |

हवाई जहाज बनाने में बर्तन तथा तार बनाने में इसका प्रयोग किया जाता है | कई उद्योगों में इसका महत्व इस्पात, ताँबा, जस्ता व सीसे के विकल्प के रूप में प्रयोग होने से बढ़ा है |

देश के एल्युमिनियम प्रगलन संयंत्र ओडिसा, पश्चिम बंगाल, केरल, उत्तर प्रदेश, छतीसगढ़, महाराष्ट्र व तमिलनाडु राज्यों में स्थित है |

प्रगालकों में बॉक्साइट का कच्चे पदार्थ के रूप में प्रयोग किया जाता है | जो गहरे लाल रंग की चट्टान जैसा होता है |

इस उद्योग की स्थापना की दो महत्वपूर्ण आवश्यकताएँ हैं | नियमित ऊर्जा की पूर्ति तथा कम कीमत पर कच्चेमाल की सुनिश्चित उपलब्धता |

प्रश्न : भारत में रासायन उद्योग की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए |

उत्तर : भारत में रसायन उद्योग की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं |

     (i)            भारत में रसायन उद्योग तेजी से विकसित हो रहा है तथा फ़ैल रहा है | इसकी भागीदारी सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 3 प्रतिशत है |

   (ii)            यह उद्योग एशिया का तीसरा बड़ा तथा विश्व में आकार की दृष्टि से 12 वें स्थान पर है |

 (iii)            इसमें लघु तथा बृहत दोनों प्रकार की विनिर्माण इकाईयाँ सम्मलित हैं |

  (iv)            इस उद्योग में अकार्बनिक तथा कार्बनिक दोनों क्षेत्रों में तीव्र वृद्धि दर्ज की गई है |

    (v)            अकार्बनिक रसायनों में सल्फ्यूरिक अम्ल (उर्वरक, कृत्रिम वस्त्र, प्लास्टिक, गोंद, रंग-रोगन , डाई आदि के निर्माण में प्रयुक्त ) नाइट्रिक अम्ल क्षार, सोडा ऐश (काँच, साबुन, शोधक या अपमार्जक, कागज में प्रयुक्त होने वल्र रसायन) तथा कास्टिक सोडा आदि शामिल हैं | इस उद्योगों का देश में विस्तृत फैलाव है |  

  (vi)            कार्बनिक रसायनों में पैट्रोरसायन शामिल हैं जो कृत्रिम वस्त्र, कृत्रिम रबड़, प्लास्टिक, रंजक पदार्थ, दवाइयाँ, औषध रसायनों के बनाने में प्रयोग किए जाते हैं | ये उद्योग तेल शोधन शालाओं या पैट्रोरसायन संयंत्रों के समीप स्थित है |

(vii)            रसायन उद्योग अपने आप में एक बड़ा उपभोक्ता भी है | आधारभूत रसायन एक प्रक्रिया द्वारा अन्य रसायन उत्पन्न करते हैं जिनका उपयोग औद्योगिक अनुप्रयोग कृषि अथवा उपभोक्ता बाजारों के लिए किया जाता है |

प्रश्न : भारत में सीमेंट उद्योग की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए |

उत्तर : भारत में सीमेंट उद्योग की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं |

     (i)            निर्माण कार्यों जैसे –घर, कारखाने, पुल, सड़क, हवाई अड्डा, बाँध तथा अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठानों के निर्माण में सीमेंट आवश्यक है |

   (ii)            इस उद्योग को भारी व स्टूल कच्चे माल जैसे : चूना पत्थर, सिलिका और जिप्सम की आवश्यकता होती है |

 (iii)            रेल परिवहन के अतिरिक्त इसमें कोयला तथा विद्युत ऊर्जा भी आवश्यक है |

  (iv)            इस उद्योग की इकाईयाँ गुजरात में लगाई गई हैं, क्योंकि यहाँ से इसे खाड़ी देशों के बाज़ार की उपलब्धता है |

    (v)            भारत में पहला सीमेंट उद्योग सन् 1904 में चेन्नई में लगाया गया था | स्वतंत्रता के बाद इस उद्योग का प्रसार हुआ है |

  (vi)            गुणवत्ता में सुधार के कारण, भारत की बड़ी घरेलू माँग के अतिरिक्त, पूर्वी एशिया, मध्य पूर्व के देशों, अफीका तथा दक्षिणी एशिया के बाज़ारों में माँग बढ़ी है |

(vii)            यह उद्योग उत्पादन और निर्यात दोनों ही रूपों में प्रगति पर है |

(viii)            इस उद्योग को बनाये रखने के लिए पर्याप्त घरेलू माँग और पूर्ति में वृद्धि करने के प्रयास किये जा रहे हैं |

प्रश्न : भारत में उर्वरक उद्योग किस उर्वरक उद्योगों के इर्द –गिर्द केंद्रित हैं ? भारत में यह उद्योग के किन किन राज्यों में फैला है ?

उत्तर : उर्वरक उद्योग नाइट्रोजनी उर्वरक (मुख्यत: यूरिया), फास्फोटिक उर्वरक (D.A.P.) तथा अमोनिया फास्फेट और मिश्रित उर्वरक जिसमें तीन मुख्य उर्वरक नाइट्रोजन, फास्फेट व पोटाश शामिल हैं, के उत्पादन क्षेत्रों के इर्द-गिर्द केंद्रित है |

तीसरा अर्थात –पोटाश पूर्णत: आयात किया जाता है  क्योंकि म्=हमारे देश में वाणिज्यिक रूप में या किसी भी रूप में प्रयुक्त होने वाला पोटाश या पोटाशियम यौगिक के भण्डार नहीं हैं |

हरित क्रान्ति के पश्चात यह उद्योग देश के अन्य अनेक बह्गों में भी फ़ैल गया |  गुजरात, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पंजाब और केरल राज्य कुल उत्पादन का 50 प्रतिशत उत्पादन करते हैं |

अन्य महत्वपूर्ण राज्य आंध्रप्रदेश, ओडिसा, राजस्थान, बिहार, महाराष्ट्र, असम, पश्चिम बंगाल, गोआ , दिल्ली, मध्य प्रदेश तथा कर्नाटक है |

प्रश्न : भारत में मोटरगाड़ी उद्योग की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए |

उत्तर : भारत में मोटरगाड़ी उद्योग की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं |

     (i)            मोटरगाड़ी यात्रियों तथा सामान के तीव्र परिवहन के साधन हैं |

   (ii)            भारत में विभिन्न केन्द्रों पर ट्रक, बसें कारें मोटर साइकिल, स्कूटर, तिपहिया तथा बहुउपयोगी वाहन निर्मित किए जाते हैं |

 (iii)            उदारीकरण के पश्चात नए और आधुनिक मॉडल के वाहनों का बाज़ार तथा वाहनों की माँग बढ़ी है |

  (iv)            जिससे इस उद्योग में विशेषकर कार, दोपहिया तथा तिपहिया वाहनों में अपार वृद्धि हुई है |

    (v)            यह उद्योग दिल्ली, गुरुग्राम, मुंबई, पुणे, चेन्नई, कोलकाता, लखनऊ, इंदौर, हैदराबाद, जमशेदपुर तथा बेंगलूर के आस पास स्थित है |

प्रश्न : सूचना  प्रौधोगिकी एवं इलेक्ट्रोनिक उद्योग का वर्णन कीजिए |

उत्तर : इलैक्ट्रोनिक उद्योग के अंतर्गत आने वाले उत्पादों में ट्रांसजिस्टर से लेकर टेलीविजन, टेलीफ़ोन, सेल्युलर टेलीकॉम,  टेलीफ़ोन एक्सचेंग, राडार, कंप्यूटर तथा दूर संचार उद्योग के लिए उपयोगी अनेक उपकरण तक बनाये जाते हैं |

बेंगलूर भारत की इलैक्ट्रोनिक राजधानी के रूप में उभरा है | इलैक्ट्रोनिक सामान के अन्य महत्वपूर्ण उत्पादक केन्द्र मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद, पुणे, चेन्नई, कोलकाता तथा लखनऊ है |

इस उद्योग का सर्वाधिक सकेन्द्रण बेंगलुरु, नोएडा, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद और पुणे में है | 

यह भी अत्यंत रोचक बात कि भारत में सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग के सफल होने का कारण हार्डवेयर व साफ्टवेयर का निरंतर विकास होना है |

प्रश्न : सतत पोषणीय विकास की चुनौतियों के लिए किस प्रकार के विकास की आवश्यकता है ?

उत्तर : सतत पोषणीय विकास की चुनौतियों के लिए पर्यावरणीय संचेतना से युक्त आर्थिक विकास की जरूरत है |

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