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Saturday, September 7, 2024

LESSON 7 COMPOSITION AND STRUCTURE OF ATMOSPHERE (HINDI MEDIUM)


 

अध्याय 7

वायुमंडल का संघटन तथा संरचना

Composition and Structure of Atmosphere 

प्रश्न  1                    वायुमंडल किसे कहते हैं ?

उत्तर :           वायुमंडल विभिन्न गैसों का मिश्रण है जो पृथ्वी को चारों ओर से ढके हुए है |

प्रश्न  2                    वायुमंडल के द्रव्यमान का 99 प्रतिशत भाग कितने किलोमीटर की ऊँचाई तक पाया जाता है ?

उत्तर :           32 किलोमीटर

प्रश्न  3                    ऑक्सीजन गैस वायुमंडल में कितनी ऊँचाई तक पाई जाती है ?

उत्तर :           120 किलोमीटर

प्रश्न  4                    जलवाष्प वायुमंडल में कितनी ऊँचाई तक पाई जाती है ?

उत्तर :           90 किलोमीटर

प्रश्न  5                    कार्बन  डाई ऑक्साइड गैस वायुमंडल में कितनी ऊँचाई तक पाई जाती है ?

उत्तर :           90 किलोमीटर

प्रश्न  6                    ओज़ोन गैस वायुमंडल में कहाँ पाई जाती है ?

उत्तर :           ओज़ोन गैस वायुमंडल में समतापम मंडल में पृथ्वी की सतह से 10 से 50 किलोमीटर के बीच पाई जाती है |

प्रश्न  7                    ओज़ोन गैस पर संक्षिप्त नोट लिखों |

उत्तर :           ओज़ोन गैस वायुमंडल में समतापम मंडल में पृथ्वी की सतह से 10 से 50 किलोमीटर के बीच पाई जाती है | यह वायुमंडल का महत्वपूर्ण घटक है | इस गैस कि परत एक फिल्टर की तरह कार्य करती है | यह सूर्य से निकलने वाली पैराबैंगनी किरणों को अवशोषित कर लेती है और उनको पृथ्वी तक नहीं पहुँचने देती | जिससे पृथ्वी का तापमान अधिक नहीं हो पाता | ये पैराबैंगनी किरणों के हानिकारक प्रभावों से मानव तथा जीवों को बचाती है |

प्रश्न  8                    वायुमंडल के संघटन की व्याख्या करें |

अथवा

वायुमंडल में पाई जाने वाली विभिन्न गैसों, जलवाष्प तथा धूलकणों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए |

उत्तर :            वायुमंडल विभिन्न गैसों का मिश्रण है जो पृथ्वी को चारों ओर से ढके हुए है | इसके संघटन में विभिन्न प्रकार की गैसें, जैसे नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, आर्गन, कार्बन डाई ऑक्साइड, ओजोन, हीलियम, हाइड्रोजन, निओन, फ़्रीओन,  क्रेप्टो, जेनन आदि शमिल हैं |  इनके अलावा वायुमंडल में जलवाष्प तथा धूलकण भी पायें जाते हैं |  जिनकी संक्षिप्त व्याख्या निम्नलिखित है |

i)        नाइट्रोजन गैस  : इस गैस की मात्रा वायुमंडल में सबसे अधिक पाई जाती है | जो कि वायुमंडल के कुल द्रव्यमान का 78.8 प्रतिशत है | यह गैसे आसानी से अन्य तत्वों के साथ रासायनिक अभिक्रिया नहीं करती | यह मृदा में स्थिर हो जाती है | इस गैस का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह वस्तुओं को तेजी से जलने से बचाती है | नाइट्रोजन पेड़ –पौधों में प्रोटीन का निर्माण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है | नाइट्रोजन गैस के कारण ही वायुदाब, पवनों की शक्ति तथा प्रकाश के परावर्तन का पता चलता है |

ii)      ऑक्सीजन गैस : यह गैस जीवन दायनी गैस है | क्योंकि इसके बिना हम साँस नहीं ले सकते | ऑक्सीजन वायुमंडल के कुल द्रव्यमान का 20.95 भाग है | यह गैस वायुमंडल की निचली परतों में पाई जाती है | वायुमंडल में 120 किलोमीटर की ऊँचाई के बाद ऑक्सीजन गैस की मात्रा नगण्य हो जाती है | यह गैस ईंधन को जलाने के लिए आवश्यक है |  

iii)    आर्गन गैस  :       यह वायुमंडल में तीसरी सबसे अधिक मात्रा में पाई जाने वाली गैस है | जो वायुमंडल के कुल द्रव्यमान का 0.93 प्रतिशत है |

iv)    कार्बन डाई ऑक्साइड गैस:  यह गैस वायुमंडल में केवल यह गैस वायुमंडल वायुमंडल के कुल आयतन का केवल 0.036 भाग ही है | जो वायुमंडल में 90 किलोमीटर की ऊँचाई तक पाई जाती है | यह एक भारी गैस है और वायुमंडल की निचली परतों में पाई जाती है | इसका अधिकांश भाग पृथ्वी कि सतह के निकट ही होता है | कम मात्रा के होने के बावजूद भी यह एक महत्वपूर्ण गैस है | क्योंकि पेड़-पौधों के लिए प्रकाश संश्लेषण की क्रिया के लिए अनिवार्य गैस है | इसके अलावा यह लघु तरंगदैधर्य वाली सौर विकिरण के लिए पारगम्य है लेकिन दीर्घ तरंगदैधर्य वाली पार्थिव विकिरण के लिए अपारगम्य है | अत: यह गैस ग्रीन हाउस प्रभाव (हरित गृह प्रभाव) के लिए उत्तरदायी है | और वायुमंडल की निचली परतों को गर्म रखती है | जैव ईंधन के अधिक जलाए जाने के कारण इस गैस की मात्रा तेजी से बढ़ रही है |

v)      ओजोन गैस : ओज़ोन गैस वायुमंडल में समतापम मंडल में पृथ्वी की सतह से 10 से 50 किलोमीटर के बीच पाई जाती है | यह वायुमंडल का महत्वपूर्ण घटक है | इस गैस कि परत एक फिल्टर की तरह कार्य करती है | यह सूर्य से निकलने वाली पैराबैंगनी किरणों को अवशोषित कर लेती है और उनको पृथ्वी तक नहीं पहुँचने देती | जिससे पृथ्वी का तापमान अधिक नहीं हो पाता | ये पैराबैंगनी किरणों के हानिकारक प्रभावों से मानव तथा जीवों को बचाती है |

vi)    हाइड्रोजन  गैस : यह वायुमंडल में पाई जाने वाली सबसे हल्की गैसों में से एक है | जो वायुमंडल की ऊपरी परतों में पाई जाती है | यह वायुमंडल में बहुत ही कम मात्रा में विद्यमान है | यह बहुत ही ज्वलनशील गैस है |

 

vii)  हीलियम गैस : यह वायुमंडल में पाई जाने वाली सबसे हल्की गैसों में से एक है | जो वायुमंडल की ऊपरी परतों में पाई जाती है |

viii)अन्य गैसें : उपरोक्त गैसों के अलावा निओन, फ़्रीओन,  क्रेप्टो, तथा जेनन जैसी अन्य गैसें भी वायुमंडल में उपस्थित है |

ix)    जलवाष्प : जलवाष्प वायुमंडल में उपस्थित एक परिवर्तनीय तत्व है | जो ऊँचाई के साथ –साथ घटती है | वायुमंडल में अधिकतम वायुमंडल में अधिकतम यह वायु के द्रव्यमान का 4 प्रतिशत तक होती है | ठंडे ध्रुवीय क्षेत्रो में तथा गर्म रेगिस्तानों जैसे शुष्क प्रदेशों में यह बहुत कम होती है जबकि आर्द्र और उष्ण प्रदेशों में यह अधिक होती है | विषुवत वृत्त से ध्रुवों की ओर जाने पर जलवाष्प की मात्रा में कमी आने लगती है |

यह सूर्य से आने वाले ताप के कुछ भाग को अवशोषित करती है तथा पृथ्वी से उत्पन्न ताप को संग्रहित करती है | यह पृथ्वी के वायुमंडल को न टो अधिक गर्म होने देती और न ही अधिक ठंडा इस प्रकार यह पृथ्वी के लिए कम्बल का काम करती है |

 

x)      धूलकण : विभिन्न स्त्रोतों से प्राप्त वायुमंडल में उपस्थित छोटे –छोटे कण जैसे समुद्री नमक, महीन मिट्टी, धुएँ की कालिमा, राख, पराग, उल्काओं के टूटे हुए कण आदि को सम्मलित रूप से धूलकण कहा जाता है | धूलकण  प्राय: वायुमंडल के निचले भाग में ही मौजूद होते है | लेकिन कभी कभार संवहनीय धाराओं के द्वारा ये वायुमंडल में काफी ऊँचाई तक पहुँच जाते है | धूलकण आर्द्र्ताग्राही केन्द्र की तरह काम करते हैं इनके चारों ओर जलवाष्प की बूंदे संघनित हो जाती है और मेघों (बादलों) का निर्माण करती है | आकाश का नीला रंग भी धूलकणों के कारण ही दिखाई देता है | सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय आकाश का नारंगी तथा लाल रंग का दिखना इन्हीं के कारण होता है |

प्रश्न : वायुमंडल की संरचना का चित्र सहित वर्णन कीजिए |

अथवा

प्रश्न : वायुमंडल की विभिन्न परतों का चित्र सहित वर्णन करें |

 

उत्तर: वायुमण्डल अलग –अलग घनत्व तथा तापमान वाली विभिन्न परतों का बना होता है | पृथ्वी की सतह के पास घनत्व अधिक होता है | जबकि ऊँचाई बढ़ने के साथ –साथ यह घनत्व कम होता जाता है | इसी प्रकार विभिन्न परतों के तापमान में भी विभिन्नता पाई जाती है |

तापमान की स्थिति के अनुसार वायुमंडल को पाँच विभिन्न संस्तरों (परतों) में बाँटा गया है | ये परतें निम्नलिखित हैं | क्षोभ मण्डल, समताप मण्डल, मध्य मण्डल, बाह्यमण्डल तथा बहिर्मंडल |  इनका वर्णन निम्नलिखित है |

1. क्षोभ मण्डल Troposphere

यह वायुमंडल की सबसे नीचे की परत है | इसकी औसत ऊँचाई सतह से लगभग 13 किलोमीटर है | धुर्वों के निकट इसकी ऊँचाई 8 किलोमीटर तथा विषुवत वृत्त (भू मध्य रेखा ) के निकट  इस परत की ऊँचाईसबसे अधिक है जो 18 किलोमीटर है | भूमध्य रेखा के पास तेज वायु प्रवाह के कारण ताप का अधिक संवहन किया जाता है | सी संस्तर में धूलकण तथा जलवाष्प मौजूद होते हैं | मौसम संबंधी परिवर्तन भी इसी परत में होते हैं | इस संस्तर (परत) में प्रत्येक 165 मीटर की ऊँचाई पर  तापमान 1°  सेल्सियस घटता जाता है | जैविक क्रिया कलापों के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण परत है |

क्षोभ सीमा Tropopause  

क्षोभ मण्डल और समताप मण्डल को अलग करने वाली सीमा को क्षोभ सीमा कहते हैं | विषुवत वृत्त (भू मध्य रेखा ) के ऊपर  क्षोभ मण्डल वायु का तापमान -80° सेल्सियस और धुर्वों के ऊपर तापमान -45° सेल्सियस  होता है |  क्षोभ सीमा पर  तामपान स्थिर  रहता है |

2. समताप मण्डल  Stratosphere

क्षोभ सीमा के ऊपर 50 किलोमीटर की ऊँचाई तक समताप मण्डल पाया जाता है | इस परत का महत्वपूर्ण लक्षण यह है कि इस परत में ओजोन गैस की परत पाई जाती है | ओजोन गैस की यह परत  सूर्य से आने वाली हानिकारक पैराबैंगनी (Ultraviolet) किरणों को अवशोषित कर लेती है और पृथ्वी को ऊर्जा के तीव्र तथा हानिकारक तत्वों से बचाती है |

3. मध्य्मंडल Mesosphere

 समताप मण्डल के ठीक ऊपर 80  किलोमीटर की ऊँचाई तक मध्य मण्डल स्थित है | इस संस्तर (परत) में भी ऊँचाई के साथ –साथ तापमान में कमी आने लगती है | 80 किलोमीटर की ऊँचाई तक पहुँचकर तापमान -100° सेल्सियस हो जाता है | मध्य मण्डल की ऊपरी परत को मध्य सीमा कहते हैं |

4. बाह्य वायुमंडल  Thermosphere  (आयन मण्डल  Ionosphere )

यह मंडल मध्य मण्डल के ऊपर  80 से 400 किलोमीटर की ऊँचाई के बीच स्थित है | इसमें विद्युत आवेशित कण पाए जाते हैं, जिन्हें आयन कहा जाता है | इसलिए इस परत को आयन मण्डल भी कहते हैं | पृथ्वी के द्वारा भेजी गई रेडियो तरंगें इस संस्तर (परत) के द्वारा वापस पृथ्वी पर लौट आती हैं | यहाँ पर ऊँचाई बढ़ने के साथ ही तापमान में भी वृद्धि शुरू हो जाती है |

5. बाह्य मण्डल  Exosphere

वायुमंडल की सबसे ऊपरी परत (संस्तर) जो बाह्य मण्डल के ऊपर स्थित है उसे बहिर्मंडल कहते हैं | यह सबसे ऊँची परत है | इसके बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है | इस संस्तर में मौजूद सभी घटक विरल हैं जो धीरे-धीरे बाहरी बाहरी अंतरिक्ष में मिल जाते हैं |  

 प्रश्न : मौसम और जलवायु के तत्व कौन –कौन से हैं| 

तापमान, वायुदाब, हवा (पवन) आर्द्रता, बादल और वर्षण आदि वायुमंडल के महत्वपूर्ण तत्व हैं | जो पृथ्वी पर मनुष्य के जीवन को प्रभावित करते हैं | इन्हीं तत्वों को मौसम तथा जलवायु के तत्व कहा जाता है |  

Monday, August 8, 2022

Distribution of Continents and Oceans Lesson 4 class 11th Geography

अध्याय 4

महासागरों और महाद्वीपों का वितरण

(भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत )  कक्षा -11

 

प्रश्न : निम्न में से किसने सर्वप्रथम यूरोप, अफ्रीका व अमेरिका के साथ स्थित होने की सम्भावना व्यक्त की ?

उत्तर : अब्राहम ऑरटेलियस (Abraham Ortelius)

प्रश्न : पोलर फ्लीइंग बल (ध्रुवीय फ्लीइंग बल) निम्नलिखित में से किससे संबंधित है ?

क.     पृथ्वी का परिक्रमण

ख.     पृथ्वी का घूर्णन

ग.      गुरुत्वाकर्षण

घ.      ज्वारीय बल

 

 

उत्तर : पृथ्वी का घूर्णन

इनमें से कौन सी लघु प्लेट नहीं है ?

   क).            नजका

  ख).            फिलिपिन

    ग).            अरब

   घ).            अंटार्कटिक

उतर : अंटार्कटिक

प्रश्न :  सागरीय अधस्थल विस्तार सिद्धांत की व्याख्या करते हुए हैस ने निम्न में से किस अवधारणा पर विचार नहीं किया ?

   क).            मध्य महासागरीय कटकों  के साथ ज्वालामुखी क्रियाएँ  |

  ख).            महासागरीय नितल की चट्टानों में सामान्य व उत्क्रमण चुम्बकत्व क्षेत्र की पट्टियों का होना | 

    ग).            विभिन्न महाद्वीपों में जीवाश्मों का वितरण |

   घ).            महासागरीय तल की चट्टानों की आयु |

उतर : विभिन्न महाद्वीपों में जीवाश्मों का वितरण |

प्रश्न : हिमालय पर्वतों के साथ  भारतीय प्लेट की सीमा किस तरह की प्लेट सीमा है ?

   क).            महासागरीय - महाद्वीपीय अभिसरण

  ख).            अपसारी सीमा

    ग).            रूपान्तरण सीमा

   घ).            महाद्वीपीय - महाद्वीपीय अभिसरण

उतर : महाद्वीपीय - महाद्वीपीय अभिसरण

प्रश्न : महाद्वीपों के प्रवाह के लिए वेगनर ने किन बलों का उल्लेख किया है ?

उतर :  महाद्वीपों के प्रवाह के लिए वेगनर ने जिन  बलों का उल्लेख किया है  वे निम्नलिखित है |

   क).            पोलर फ्लीइंग बल (ध्रुवीय फ्लीइंग बल)   

यह बल पृथ्वी के घूर्णन से संबंधित है |  पृथ्वी भूमध्य रेखा पर उभरी हुई है जो ध्रुवीय फ्लीइंग बल के कारण ही है |

  ख).            ज्वारीय बल 

यह बल सूर्य और चंद्रमा के आकर्षण से संबंधित है | जिससे महासागरों में ज्वार पैदा होते है |

प्रश्न : मेंटल में संवहन धाराओं के आरम्भ होने तथा बने रहने के क्या कारण है ?

उतर :  पृथ्वी की मेंटल  परत में रेडियों एक्टिव (रेडियोधर्मी) पदार्थों से उत्पन्न ताप में भिन्नता पाई जाती है | इसी ताप भिन्नता के कारण ही मेंटल में संवहन धाराएँ  आरम्भ होती है और लगातार बनी रहती है |  आर्थर होम्स के अनुसार इस तरह की संवहन धाराएँ पुरे मेंटल परत में विद्यमान है |

प्रश्न : प्लेट की रूपान्तरण सीमा, अभिसरण सीमा और अपसारी सीमा में मुख्य अन्तर क्या है ?

उत्तर : प्लेट की रूपान्तरण सीमा, अभिसरण सीमा और अपसारी सीमा में अन्तर निम्न प्रकार से स्पष्ट है |

रूपान्तर सीमा ( Transform Boundaries):

जब  दो प्लेटें एक दूसरे के क्षैतिज दिशा में गति करती है  तो उन दोनों प्लेटों के बीच की सीमा कों रूपांतर सीमा कहते है | इन प्लेटों के द्वारा न तो नई पर्पटी निर्माण होता है और न ही विनाश क्योंकि इन सीमा पर प्लेटें एक दूसरे के साथ  क्षैतिज दिशा में सरक जाती है | इन्हें संरक्षी प्लेट सीमा भी कहते है |

चित्र : रूपान्तर सीमा

अभिसरण सीमा (Convergent Boundaries):

जब दो प्लेटें एक दूसरे के निकट आती है तो उन दोनों प्लेटों के बीच की सीमा कों अभिसारी सीमा कहते है | एक दूसरे के निकट आने  पर इन प्लेटों के किनारों का विनाश होता है |  क्योंकि एक प्लेट दूसरी प्लेट के नीचे धँस जाती है और टूट जाती है |  इन प्लेटों कों इसलिए विनाशकारी प्लेटें भी कहते है |

चित्र : अभिसरण सीमा

अपसारी सीमा (Divergent Boundaries ):

 जब दो प्लेटें एक दूसरे के विपरीत दिशा में गति करती है तो उन दोनों प्लेटों के बीच की सीमा कों अपसारी सीमा कहते है | एक दूसरे से दूर जाने पर इन प्लेटों के बीच नई पर्पटी का निर्माण होता है |  इन प्लेटों कों इसलिए रचनात्मक प्लेटें भी कहते है |

                             

                                                          चित्र : अपसारी सीमा

प्रश्न : दक्कन ट्रैप के निर्माण के दौरान भारतीय  स्थल खंड की स्थिति क्या थी ?

उत्तर :  दक्कन ट्रैप  का निर्माण आज से लगभग 6  करोड़ वर्ष पहले आरम्भ हुआ | इस समय  भारतीय  स्थल खंड  भूमध्य रेखा के निकट  स्थित था | यह भूमध्य रेखा के दक्षिण में  था |

प्रश्न : पृथ्वी के कितने प्रतिशत भाग पर महाद्वीप (स्थल ) है ?

उत्तर : 29 प्रतिशत

प्रश्न : पृथ्वी के कितने प्रतिशत भाग पर महासागर  (जल ) है ?

उत्तर : 71 प्रतिशत

प्रश्न : अब्राहम ऑरटेलियस कौन थे ?

उत्तर : अब्राहम ऑरटेलियस एक डच मानचित्रवेता थे जिन्होंने सन् 1596  में सर्वप्रथम यह सम्भावना व्यक्त की थी कि उत्तर और दक्षिणी अमेरिका, यूरोप तथा अफ्रीका एक साथ जुड़े हुए थे |

प्रश्न : किस विद्वान ने उत्तर और दक्षिणी अमेरिका, यूरोप तथा अफ्रीका महाद्वीपों कों अपने मानचित्र में इकट्ठा दिखाया था ?

उत्तर : एन्टोनियो पैलेग्रीनी  ( Antonio Pellegrini )

प्रश्न :  महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत कब और किसने दिया ?

उत्तर : सन् 1912 में जर्मन मौसमविद अल्फ्रेड वेगनर (Alfred Wegner) ने |

प्रश्न :  महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत किससे संबंधित है ?

उत्तर : महाद्वीपों और महासागरों के वितरण से

प्रश्न : अल्फ्रेड वेगनर ने सभी महाद्वीपों से जुड़े बड़े भू खंड कों क्या माना था ?

उत्तर : पेंजिया

प्रश्न : पेंजिया का क्या अर्थ है ?

उत्तर :संपूर्ण पृथ्वी

प्रश्न : अल्फ्रेड वेगनर ने सभी महाद्वीपों से जुड़े बड़े भू खंड कों  चारों ओर से घेरे हुए विशाल महासागर कों क्या माना था ?

उत्तर : पैन्थालासा

प्रश्न : पैन्थालासा का क्या अर्थ है ?

उत्तर : पैन्थालासा का अर्थ है जल ही जल |

प्रश्न : अल्फ्रेड वेगनर के महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत के अनुसार पेंजिया का विभाजन कब हुआ ?

उत्तर : लगभग 20 करोड़ वर्ष पहले |

प्रश्न : अल्फ्रेड वेगनर के महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत के अनुसार पेंजिया का विभाजन किन दो बड़े महाद्वीपों के रूप में हुआ ?

उत्तर : लारेसिया  (Laurasia ) : यह उत्तरी भूखंड  के नाम से जाना जाता है |

गोंडवानालैंड (Gondwana land ) : यह दक्षिणी भू खंड  के नाम से जाना जाता है |

प्रश्न :  लारेसिया  (Laurasia ) तथा गोंडवानालैंड (Gondwana land ) के बीच कौन से सागर की उत्पत्ति हुई ?

उत्तर : टेथिस सागर

प्रश्न :   कंप्यूटर प्रोग्राम की सहायता से अटलांटिक (अंध महासागर ) के तटों कों जोड़ते हुए मानचित्र  कब और किसने तैयार किया ?

 उत्तर : सन् 1964 में  बुलर्ड (Bullard)

प्रश्न : टिलाइट (Tillite) क्या है ?

उत्तर :टिलाइट वे अवसादी चट्टानें है जो हिमानी निक्षेपण से निर्मित होती है |

प्रश्न : संवहन धारा सिद्धांत (Conventional Current Theory) कब और किसने प्रतिपादित किया ?

 उत्तर :  1930 के दशक में आर्थर होम्स  (Arthur Homes) ने | 

प्रश्न : गहराई व उच्चावच के प्रकार के आधार पर महासागरीय तल कों कितने प्रमुख भागों में विभाजित किया जाता है ? उनके नाम बताओ |

उत्तर :  गहराई व उच्चावच के प्रकार के आधार पर महासागरीय तल कों तीन प्रमुख भागों में विभाजित किया जाता है |

1.       महाद्वीपीय सीमा

2.       गहरे समुद्री बेसिन

3.       मध्य- महासागरीय कटक

प्रश्न : महाद्वीपीय सीमा से आप क्या समझते है ? इसमें महासागरीय तल की कौन कौन से भाग शामिल है ?

उत्तर :   महासागरीय तल वह भाग जो महाद्वीपीय किनारों और गहरे समुद्री बेसिन के बीच होता है महाद्वीपीय सीमा कहलाता है | इसके अंतर्गत निम्नलिखित भाग शामिल किए जाते है |

1.       महाद्वीपीय मग्नतट

2.       महाद्वीपीय ढाल

3.       महाद्वीपीय उभार

4.       गहरी महासागरीय खाइयाँ

 प्रश्न : वितलीय मैदान से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर : महासागरीय तल के विस्तृत मैदान  भाग जो महाद्वीपीय  तटों और मध्य महासागरीय कटकों के बीच स्थित है उसे वितलीय मैदान कहते है |  इन्हें गहरे समुद्री बेसिन समुद्री बेसिन भी कहते है |  वितलीय मैदान वह क्षेत्र है जहाँ महाद्वीपों से बहाकर लाए गए अवसाद इनके तटों से दूर निक्षेपित होते है |

प्रश्न :  मध्य- महासागरीय कटक किसे कहते है ?

उत्तर:  मध्य- महासागरीय कटक  आपस में जुड़े हुए पर्वतों की एक श्रंखला है जो महासागरीय जल में डूबी हुई है |  ये मध्य- महासागरीय कटक  पृथ्वी के धरातल पर पाई जाने वाली सबसे बड़ी पर्वत श्रंखला है | ये ज्वालामुखी से निर्मित है और निरंतर इसमें  निर्माण प्रकिया चलती रहती है | क्योंकि ये सक्रिय ज्वालामुखी क्षेत्र है |

प्रश्न : किन क्षेत्रों पर भूकंप के उद्गम क्षेत्र कम गहराई पर होते है ?

उत्तर: मध्य- महासागरीय कटकों के क्षेत्र

प्रश्न : किन क्षेत्रों पर भूकंप के उद्गम क्षेत्र अधिक  गहराई पर होते है ?

 उत्तर: अल्पाइन हिमालय पट्टी तथा प्रशांत महासागरीय किनारे

प्रश्न : रिंग ऑफ फायर (अग्नि वलय ) किसे कहते है ?

उत्तर: प्रशांत महासागर के  किनारे सक्रिय ज्वालामुखी के क्षेत्र है इसी कारण से प्रशांत महासागर के चारों ओर के क्षेत्र कों  रिंग ऑफ फायर (अग्नि वलय ) कहते है |

प्रश्न : सागरीय अधस्थल विस्तार (Sea Floor Spreading) परिकल्पना किसने प्रतिपादित की ?

उत्तर: हैरी हैस ने  सन् 1961 में

प्रश्न : प्लेट विवर्तनिकी (प्लेट टक्टोनिक्स) की अवधारणा किन विद्वानों की देन है ?

उत्तर: प्लेट विवर्तनिकी की अवधारणा सन् 1968 में मैक्कैन्जी, पार्कर तथा मोर्गन इन तीन विद्वानों की सम्मलित विचारधारा कों कहा गया |

प्रश्न : दुर्बलता मंडल (एस्थेनोंस्फीयर ) (Asthenosphere) किसे कहते है ?

उत्तर:  पृथ्वी की ठोस ऊपरी प्लेटों के नीचे मैंटल परत में ऐसा मंडल है जिस पर प्लेटे तैरती रहती है उसे दुर्बलता मंडल कहते है |

प्रश्न : महाद्वीपीय प्लेट किसे कहते है ?

उत्तर: एक प्लेट कों महाद्वीपीय प्लेट कहते है यदि उसका अधिकतर भाग महाद्वीप से संबंधित  हो | जैसे अंटार्कटिक प्लेट, यूरेशियन प्लेट , अफ्रीकन प्लेट, उत्तरी अमेरिकन प्लेट , दक्षिणी अमेरिकन प्लेट तथा इंडो-ऑस्ट्रेलियन प्लेट आदि |

प्रश्न: महासागरीय प्लेट किसे कहते है ?

उत्तर: एक प्लेट कों महासागरीय प्लेट कहते है यदि उसका अधिकतर भाग महासागर से संबंधित हो | प्रशांत महासागरीय प्लेट,

प्रश्न: बड़ी प्लेटे कितनी है? उनके नाम बताओ |

उत्तर: कुल बड़ी प्लेटे सात है | यूरेशियन प्लेट , अफ्रीकन प्लेट, उत्तरी अमेरिकन प्लेट , दक्षिणी अमेरिकन प्लेट,  इंडो-ऑस्ट्रेलियन प्लेट प्रशांत महासागरीय प्लेट तथा अंटार्कटिक प्लेट |

प्रश्न: छोटी प्लेटें कितनी है? कुछ महत्वपूर्ण छोटी प्लेटों के नाम बताओ |

उत्तर: विद्वानों के अनुसार लगभग 20 छोटी प्लेटें है | जिनमें से कुछ महत्वपूर्ण निम्नलिखित है |

नजका प्लेट, कोकोस प्लेट , अरेबियन प्लेट, फिलिपिन प्लेट, कैरोलिन प्लेट तथा फ्यूजी प्लेट |

प्रश्न: किस प्लेट की प्रवाह दर सबसे कम है ?

उत्तर: आर्कटिक कटक  (प्रवाह दर 2.5 सेंटीमीटर प्रति वर्ष)

प्रश्न: किस प्लेट की प्रवाह दर सबसे अधिक  है ?

उत्तर: ईस्टर द्वीप के निकट प्रशांत महासागरीय उभार  जो चिली से पश्चिम की ओर 3400  किलोमीटर दूर  दक्षिणी प्रशांत महासागर में है | (प्रवाह दर 5 सेंटीमीटर प्रति वर्ष) |


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