https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-8100526939421437 SCHOOL OF GEOGRAPHY : LESSON 7 COMPOSITION AND STRUCTURE OF ATMOSPHERE (HINDI MEDIUM)

Saturday, September 7, 2024

LESSON 7 COMPOSITION AND STRUCTURE OF ATMOSPHERE (HINDI MEDIUM)


 

अध्याय 7

वायुमंडल का संघटन तथा संरचना

Composition and Structure of Atmosphere 

प्रश्न  1                    वायुमंडल किसे कहते हैं ?

उत्तर :           वायुमंडल विभिन्न गैसों का मिश्रण है जो पृथ्वी को चारों ओर से ढके हुए है |

प्रश्न  2                    वायुमंडल के द्रव्यमान का 99 प्रतिशत भाग कितने किलोमीटर की ऊँचाई तक पाया जाता है ?

उत्तर :           32 किलोमीटर

प्रश्न  3                    ऑक्सीजन गैस वायुमंडल में कितनी ऊँचाई तक पाई जाती है ?

उत्तर :           120 किलोमीटर

प्रश्न  4                    जलवाष्प वायुमंडल में कितनी ऊँचाई तक पाई जाती है ?

उत्तर :           90 किलोमीटर

प्रश्न  5                    कार्बन  डाई ऑक्साइड गैस वायुमंडल में कितनी ऊँचाई तक पाई जाती है ?

उत्तर :           90 किलोमीटर

प्रश्न  6                    ओज़ोन गैस वायुमंडल में कहाँ पाई जाती है ?

उत्तर :           ओज़ोन गैस वायुमंडल में समतापम मंडल में पृथ्वी की सतह से 10 से 50 किलोमीटर के बीच पाई जाती है |

प्रश्न  7                    ओज़ोन गैस पर संक्षिप्त नोट लिखों |

उत्तर :           ओज़ोन गैस वायुमंडल में समतापम मंडल में पृथ्वी की सतह से 10 से 50 किलोमीटर के बीच पाई जाती है | यह वायुमंडल का महत्वपूर्ण घटक है | इस गैस कि परत एक फिल्टर की तरह कार्य करती है | यह सूर्य से निकलने वाली पैराबैंगनी किरणों को अवशोषित कर लेती है और उनको पृथ्वी तक नहीं पहुँचने देती | जिससे पृथ्वी का तापमान अधिक नहीं हो पाता | ये पैराबैंगनी किरणों के हानिकारक प्रभावों से मानव तथा जीवों को बचाती है |

प्रश्न  8                    वायुमंडल के संघटन की व्याख्या करें |

अथवा

वायुमंडल में पाई जाने वाली विभिन्न गैसों, जलवाष्प तथा धूलकणों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए |

उत्तर :            वायुमंडल विभिन्न गैसों का मिश्रण है जो पृथ्वी को चारों ओर से ढके हुए है | इसके संघटन में विभिन्न प्रकार की गैसें, जैसे नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, आर्गन, कार्बन डाई ऑक्साइड, ओजोन, हीलियम, हाइड्रोजन, निओन, फ़्रीओन,  क्रेप्टो, जेनन आदि शमिल हैं |  इनके अलावा वायुमंडल में जलवाष्प तथा धूलकण भी पायें जाते हैं |  जिनकी संक्षिप्त व्याख्या निम्नलिखित है |

i)        नाइट्रोजन गैस  : इस गैस की मात्रा वायुमंडल में सबसे अधिक पाई जाती है | जो कि वायुमंडल के कुल द्रव्यमान का 78.8 प्रतिशत है | यह गैसे आसानी से अन्य तत्वों के साथ रासायनिक अभिक्रिया नहीं करती | यह मृदा में स्थिर हो जाती है | इस गैस का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह वस्तुओं को तेजी से जलने से बचाती है | नाइट्रोजन पेड़ –पौधों में प्रोटीन का निर्माण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है | नाइट्रोजन गैस के कारण ही वायुदाब, पवनों की शक्ति तथा प्रकाश के परावर्तन का पता चलता है |

ii)      ऑक्सीजन गैस : यह गैस जीवन दायनी गैस है | क्योंकि इसके बिना हम साँस नहीं ले सकते | ऑक्सीजन वायुमंडल के कुल द्रव्यमान का 20.95 भाग है | यह गैस वायुमंडल की निचली परतों में पाई जाती है | वायुमंडल में 120 किलोमीटर की ऊँचाई के बाद ऑक्सीजन गैस की मात्रा नगण्य हो जाती है | यह गैस ईंधन को जलाने के लिए आवश्यक है |  

iii)    आर्गन गैस  :       यह वायुमंडल में तीसरी सबसे अधिक मात्रा में पाई जाने वाली गैस है | जो वायुमंडल के कुल द्रव्यमान का 0.93 प्रतिशत है |

iv)    कार्बन डाई ऑक्साइड गैस:  यह गैस वायुमंडल में केवल यह गैस वायुमंडल वायुमंडल के कुल आयतन का केवल 0.036 भाग ही है | जो वायुमंडल में 90 किलोमीटर की ऊँचाई तक पाई जाती है | यह एक भारी गैस है और वायुमंडल की निचली परतों में पाई जाती है | इसका अधिकांश भाग पृथ्वी कि सतह के निकट ही होता है | कम मात्रा के होने के बावजूद भी यह एक महत्वपूर्ण गैस है | क्योंकि पेड़-पौधों के लिए प्रकाश संश्लेषण की क्रिया के लिए अनिवार्य गैस है | इसके अलावा यह लघु तरंगदैधर्य वाली सौर विकिरण के लिए पारगम्य है लेकिन दीर्घ तरंगदैधर्य वाली पार्थिव विकिरण के लिए अपारगम्य है | अत: यह गैस ग्रीन हाउस प्रभाव (हरित गृह प्रभाव) के लिए उत्तरदायी है | और वायुमंडल की निचली परतों को गर्म रखती है | जैव ईंधन के अधिक जलाए जाने के कारण इस गैस की मात्रा तेजी से बढ़ रही है |

v)      ओजोन गैस : ओज़ोन गैस वायुमंडल में समतापम मंडल में पृथ्वी की सतह से 10 से 50 किलोमीटर के बीच पाई जाती है | यह वायुमंडल का महत्वपूर्ण घटक है | इस गैस कि परत एक फिल्टर की तरह कार्य करती है | यह सूर्य से निकलने वाली पैराबैंगनी किरणों को अवशोषित कर लेती है और उनको पृथ्वी तक नहीं पहुँचने देती | जिससे पृथ्वी का तापमान अधिक नहीं हो पाता | ये पैराबैंगनी किरणों के हानिकारक प्रभावों से मानव तथा जीवों को बचाती है |

vi)    हाइड्रोजन  गैस : यह वायुमंडल में पाई जाने वाली सबसे हल्की गैसों में से एक है | जो वायुमंडल की ऊपरी परतों में पाई जाती है | यह वायुमंडल में बहुत ही कम मात्रा में विद्यमान है | यह बहुत ही ज्वलनशील गैस है |

 

vii)  हीलियम गैस : यह वायुमंडल में पाई जाने वाली सबसे हल्की गैसों में से एक है | जो वायुमंडल की ऊपरी परतों में पाई जाती है |

viii)अन्य गैसें : उपरोक्त गैसों के अलावा निओन, फ़्रीओन,  क्रेप्टो, तथा जेनन जैसी अन्य गैसें भी वायुमंडल में उपस्थित है |

ix)    जलवाष्प : जलवाष्प वायुमंडल में उपस्थित एक परिवर्तनीय तत्व है | जो ऊँचाई के साथ –साथ घटती है | वायुमंडल में अधिकतम वायुमंडल में अधिकतम यह वायु के द्रव्यमान का 4 प्रतिशत तक होती है | ठंडे ध्रुवीय क्षेत्रो में तथा गर्म रेगिस्तानों जैसे शुष्क प्रदेशों में यह बहुत कम होती है जबकि आर्द्र और उष्ण प्रदेशों में यह अधिक होती है | विषुवत वृत्त से ध्रुवों की ओर जाने पर जलवाष्प की मात्रा में कमी आने लगती है |

यह सूर्य से आने वाले ताप के कुछ भाग को अवशोषित करती है तथा पृथ्वी से उत्पन्न ताप को संग्रहित करती है | यह पृथ्वी के वायुमंडल को न टो अधिक गर्म होने देती और न ही अधिक ठंडा इस प्रकार यह पृथ्वी के लिए कम्बल का काम करती है |

 

x)      धूलकण : विभिन्न स्त्रोतों से प्राप्त वायुमंडल में उपस्थित छोटे –छोटे कण जैसे समुद्री नमक, महीन मिट्टी, धुएँ की कालिमा, राख, पराग, उल्काओं के टूटे हुए कण आदि को सम्मलित रूप से धूलकण कहा जाता है | धूलकण  प्राय: वायुमंडल के निचले भाग में ही मौजूद होते है | लेकिन कभी कभार संवहनीय धाराओं के द्वारा ये वायुमंडल में काफी ऊँचाई तक पहुँच जाते है | धूलकण आर्द्र्ताग्राही केन्द्र की तरह काम करते हैं इनके चारों ओर जलवाष्प की बूंदे संघनित हो जाती है और मेघों (बादलों) का निर्माण करती है | आकाश का नीला रंग भी धूलकणों के कारण ही दिखाई देता है | सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय आकाश का नारंगी तथा लाल रंग का दिखना इन्हीं के कारण होता है |

प्रश्न : वायुमंडल की संरचना का चित्र सहित वर्णन कीजिए |

अथवा

प्रश्न : वायुमंडल की विभिन्न परतों का चित्र सहित वर्णन करें |

 

उत्तर: वायुमण्डल अलग –अलग घनत्व तथा तापमान वाली विभिन्न परतों का बना होता है | पृथ्वी की सतह के पास घनत्व अधिक होता है | जबकि ऊँचाई बढ़ने के साथ –साथ यह घनत्व कम होता जाता है | इसी प्रकार विभिन्न परतों के तापमान में भी विभिन्नता पाई जाती है |

तापमान की स्थिति के अनुसार वायुमंडल को पाँच विभिन्न संस्तरों (परतों) में बाँटा गया है | ये परतें निम्नलिखित हैं | क्षोभ मण्डल, समताप मण्डल, मध्य मण्डल, बाह्यमण्डल तथा बहिर्मंडल |  इनका वर्णन निम्नलिखित है |

1. क्षोभ मण्डल Troposphere

यह वायुमंडल की सबसे नीचे की परत है | इसकी औसत ऊँचाई सतह से लगभग 13 किलोमीटर है | धुर्वों के निकट इसकी ऊँचाई 8 किलोमीटर तथा विषुवत वृत्त (भू मध्य रेखा ) के निकट  इस परत की ऊँचाईसबसे अधिक है जो 18 किलोमीटर है | भूमध्य रेखा के पास तेज वायु प्रवाह के कारण ताप का अधिक संवहन किया जाता है | सी संस्तर में धूलकण तथा जलवाष्प मौजूद होते हैं | मौसम संबंधी परिवर्तन भी इसी परत में होते हैं | इस संस्तर (परत) में प्रत्येक 165 मीटर की ऊँचाई पर  तापमान 1°  सेल्सियस घटता जाता है | जैविक क्रिया कलापों के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण परत है |

क्षोभ सीमा Tropopause  

क्षोभ मण्डल और समताप मण्डल को अलग करने वाली सीमा को क्षोभ सीमा कहते हैं | विषुवत वृत्त (भू मध्य रेखा ) के ऊपर  क्षोभ मण्डल वायु का तापमान -80° सेल्सियस और धुर्वों के ऊपर तापमान -45° सेल्सियस  होता है |  क्षोभ सीमा पर  तामपान स्थिर  रहता है |

2. समताप मण्डल  Stratosphere

क्षोभ सीमा के ऊपर 50 किलोमीटर की ऊँचाई तक समताप मण्डल पाया जाता है | इस परत का महत्वपूर्ण लक्षण यह है कि इस परत में ओजोन गैस की परत पाई जाती है | ओजोन गैस की यह परत  सूर्य से आने वाली हानिकारक पैराबैंगनी (Ultraviolet) किरणों को अवशोषित कर लेती है और पृथ्वी को ऊर्जा के तीव्र तथा हानिकारक तत्वों से बचाती है |

3. मध्य्मंडल Mesosphere

 समताप मण्डल के ठीक ऊपर 80  किलोमीटर की ऊँचाई तक मध्य मण्डल स्थित है | इस संस्तर (परत) में भी ऊँचाई के साथ –साथ तापमान में कमी आने लगती है | 80 किलोमीटर की ऊँचाई तक पहुँचकर तापमान -100° सेल्सियस हो जाता है | मध्य मण्डल की ऊपरी परत को मध्य सीमा कहते हैं |

4. बाह्य वायुमंडल  Thermosphere  (आयन मण्डल  Ionosphere )

यह मंडल मध्य मण्डल के ऊपर  80 से 400 किलोमीटर की ऊँचाई के बीच स्थित है | इसमें विद्युत आवेशित कण पाए जाते हैं, जिन्हें आयन कहा जाता है | इसलिए इस परत को आयन मण्डल भी कहते हैं | पृथ्वी के द्वारा भेजी गई रेडियो तरंगें इस संस्तर (परत) के द्वारा वापस पृथ्वी पर लौट आती हैं | यहाँ पर ऊँचाई बढ़ने के साथ ही तापमान में भी वृद्धि शुरू हो जाती है |

5. बाह्य मण्डल  Exosphere

वायुमंडल की सबसे ऊपरी परत (संस्तर) जो बाह्य मण्डल के ऊपर स्थित है उसे बहिर्मंडल कहते हैं | यह सबसे ऊँची परत है | इसके बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है | इस संस्तर में मौजूद सभी घटक विरल हैं जो धीरे-धीरे बाहरी बाहरी अंतरिक्ष में मिल जाते हैं |  

 प्रश्न : मौसम और जलवायु के तत्व कौन –कौन से हैं| 

तापमान, वायुदाब, हवा (पवन) आर्द्रता, बादल और वर्षण आदि वायुमंडल के महत्वपूर्ण तत्व हैं | जो पृथ्वी पर मनुष्य के जीवन को प्रभावित करते हैं | इन्हीं तत्वों को मौसम तथा जलवायु के तत्व कहा जाता है |  

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