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Friday, December 3, 2021

Lesson 4 Climate class 9th

  

कक्षा 9वीं

समकालीन भारत (भूगोल)

अध्याय : 4  (जलवायु)

प्रश्न: नीचे दिए गए स्थानों में से किस स्थान पर विश्व की सबसे अधिक वर्षा होती है ?                                   

   क).            सिलचर

  ख).            चेरापूंजी

    ग).            मासिनराम

   घ).            गुवाहाटी

उत्तर: मासिनराम

प्रश्न: ग्रीष्म ऋतु में उत्तरी मैदानों में बहने वाली पवन कों निम्नलिखित में से क्या कहा जाता है ?

   क).            काल बैसाखी  

  ख).            व्यापारिक पवने

    ग).            लू

   घ).            इनमें से कोई नहीं  

उत्तर: लू

प्रश्न: : निम्नलिखित में सेकौन-सा कारण भारत के उत्तर-पश्चिम भाग में शीत ऋतु में होने वाली वर्षा के लिए उत्तरदायी है ?

   क).            चक्रवातीय अवदाब   

  ख).            पश्चिमी विक्षोभ  

    ग).            मानसून की वापसी

   घ).            दक्षिणी पश्चिमी मानसून   

उत्तर: पश्चिमी विक्षोभ 

प्रश्न: भारत में मानसून का आगमन निम्नलिखित में से कब होता है ?

   क).            मई के प्रारम्भ में    

  ख).            जून के प्रारम्भ में    

    ग).            जुलाई  के प्रारम्भ में    

   घ).            अगस्त के प्रारम्भ में    

उत्तर: जून के प्रारम्भ में   

प्रश्न: निम्नलिखित में से कौन-सी भारत में शीत ऋतु की विशेषता है ?

   क).            गर्म दिन व गर्म रातें     

  ख).            गर्म दिन व ठण्डी रातें     

    ग).            ठंडा दिन व ठण्डी रातें   

   घ).            ठंडा दिन व गर्म रातें     

उत्तर: गर्म दिन व ठण्डी रातें

प्रश्न: भारत की जलवायु कों प्रभावित करने वाले कारक कौन-कौन से है ?

उतर: भारत की जलवायु कों प्रभावित करने वाले मुख्य कारक निम्नलिखित है |

1.       अक्षांश (भूमध्य रेखा से दूरी)

2.       ऊँचाई (समुद्र तल से ऊँचाई)

3.       वायुदाब एवं पवन तंत्र

4.       समुद्र से दूरी

5.       उच्चावच लक्षण (भौतिक संरचना)

 

प्रश्न: भारत में मानसूनी प्रकार की जलवायु क्यों है ?

उतर: मानसून का अर्थ है एक वर्ष के दौरान ऋतु के अनुसार पवनों की दिशा में परिवर्तन होना | भारत में भी ऋतु के अनुसार पवनों की दिशा बदल जाती है | ग्रीष्म ऋतु में यहाँ पर पवने दक्षिण-पश्चिम दिशा से उत्तर पूर्व दिशा की ओर चलती है जबकि शीत ऋतु में पवनों की दिशा ठीक इसके विपरीत हो जाती है | शीत ऋतु में भारत में पवनों की दिशा उत्तर पश्चिम से दक्षिण पूर्व की ओर हो जाती है |  इसलिए ही भारत की जलवायु मानसूनी प्रकार की है |

प्रश्न: भारत में किस भाग में दैनिक तापमान अधिक होता है और क्यों ?

उतर: भारत के थार के मरुस्थल में दैनिक तापमान अधिक होता है | इसका कारण यह है कि यहाँ के विशाल क्षेत्र में रेत फैली हुई है | रेत जल्दी गर्म   होती है इसलिए इस क्षेत्र में तापमान जल्दी बढने लगता है |  

 

प्रश्न: किन पवनों के कारण मालाबार तट पर वर्षा होती है ?

उत्तर: मालाबार तट पर वर्षा दक्षिणी –पश्चिमी मानसूनी पवनों के द्वारा होती है |

प्रश्न: जेट धाराएँ क्या है ? तथा वे किस प्रकार भारत की जलवायु कों प्रभावित करती है ?

उत्तर: जेट धारा का अर्थ

            जेट धाराएँ क्षोभमंडल में अत्यधिक ऊँचाई पर एक संकरी पट्टी में स्थित पश्चिमी हवाएं होती है | ये वायु धाराएँ  क्षोभमंडल में 12000 मीटर (12 किलोमीटर) की ऊँचाई पर चलती है | इनकी गति गर्मियों में 110 किलोमीटर प्रति घंटा तथा सर्दियों में 184किलोमीटर प्रति घंटा होती है |

जेट धाराओं का भारत की जलवायु पर प्रभाव  

जेट धाराएँ 270 उत्तरी अक्षांश से 300 उत्तरी अक्षांश के बीच पश्चिम से पूर्व की ओर प्रवाहित होती है | इसलिए इन्हें उपोष्ण कटिबन्धीय पश्चिमी जेट धारा कहते है |  ये भारतीय क्षेत्र के ऊपर प्रवाहित होती है | ये धाराएँ ग्रीष्म ऋतु कों छोडकर पूरे वर्ष हिमालय के दक्षिण में प्रवाहित होती है | जबकि ग्रीष्म ऋतु में विशेषकर जून के महीने में ये धाराएँ हिमालय कों पार करके हिमालय के उत्तर में प्रवाहित होने लगती है | परिणाम स्वरूप एक और जेट धारा इसका स्थान ले लेती है | जो पूर्व से पश्चिम की ओर प्रवाहित होती है | इस जेट धारा कों उष्ण कटिबन्धीय पूर्वी जेट धारा कहते है | यह  धारा गर्मियों के महीने में 140 उत्तरी अक्षांश के आस-पास प्रायद्वीपीय भारत के ऊपर बहने लगती है | इसी के कारण पूरे देश में मानसून का आगमन और प्रसार होता है |  

प्रश्न: मानसून कों परिभाषित करें ? मानसून में विराम से आप क्या समझते है ?

उत्तर:   मानसून

‘मानसून’ शब्द की उत्पत्ति अरबी भाषा के ‘मौसिम’ शब्द से हुई है | जिसका अर्थ है वर्ष के दौरान ऋतु के बदलने पर पवनों की दिशा का उलट जाना | अर्थात मानसून का अर्थ एक ऐसी ऋतु से है जिसमें पवनों की दिशा बिल्कुल उलट जाती है |

मानसून  में विराम

मानसूनी वर्षा लगातार नहीं होती | यह एक समय में कुछ दिनों तक होती है और फिर रुक जाती है| इस तरह बिना वर्षा का समय आता है जिसे शुष्क अंतराल कहा जाता है | मानसूनी वर्षा के समय इस शुष्क अंतराल कों ही मानसून में  विराम कहते है |

        मानसून में विराम का कारण मानसूनी गर्त की स्थिति में परिवर्तन होना है | यह मानसूनी गर्त कभी उत्तर तो कभी दक्षिण भारत की ओर खिसकता है | जब यह मानसूनी गर्त उत्तर की ओर खिसक जाता है तो उत्तरी भारत में वर्षा होती है और दक्षिण में मानसून विराम की स्थिति होती है |  जब यह गर्त दक्षिण की ओर खिसकता है तो वर्षा दक्षिण भारत के राज्यों में होती है और उत्तर भारत के मैदानों में मानसून में विराम की स्थिति होती है |

प्रश्न: मानसून कों एक सूत्र में बांधने वाला क्यों समझा जाता है ?

उत्तर: भारत एक विशाल देश है | इस विशालता के परिणाम स्वरूप  भारत के धरातल, जलवायु , वनस्पति तथा लोगों के जीवन में भी विविधताएँ पाया जाना स्वभाविक है | लेकिन मानसून एक ऐसा कारक है जो इन विविधताओं कों एकता के सूत्र में बाँधने का कार्य करता है |  जैसे

1)      पवन की दिशाओं का ऋतु के अनुसार परिवर्तन होता है | इसी के कारण वर्षा के आगमन की ऋतु में पूरे भारत में वर्षा प्राप्त होती है | इसी प्रकार अन्य ऋतुओं की दशाएँ भी इसी के कारण बनती है और ऋतु चक्र कों गति मिलती है |

2)      मानसूनी वर्षा की अनिश्चितताएँ और उसका असमान वितरण पूरे भारत में अपनी एक ही विशेषता लिए हुए है |

3)      संपूर्ण भारत के भूदृश्य , इसके जीव –जंतु , वनस्पति का विकास , कृषि चक्र,  मानव का जीवन तथा उनके त्योंहार उत्सव सभी मानसून से प्रभावित होते है |

4)      उत्तर से दक्षिण तथा पूर्व से पश्चिम तक सभी भारतीय प्रतिवर्ष मानसून के आगमन की प्रतीक्षा करते है |

5)      मानसूनी वर्षा के द्वारा हमें जल प्राप्त होता है | जिससे कृषि कार्य में तेजी आती है |

6)      भारतीय नदियाँ भी मानसून के समय अपने वेग से बहती है |

इसलिए मानसून कों एकता के सूत्र में बाँधने वाला कहा जाता है | 

प्रश्न : उत्तर भारत में पूर्व से पश्चिम की ओर वर्षा की मात्रा क्यों घटती जाती है ?

उत्तर : भारत में मानसूनी पवनें बंगाल की खाड़ी और अरब सागर  से  चलती है | बंगाल की खाड़ी से आने वाली मानसून पवनें सबसे पहले ब्रह्मपुत्र तथा असम की घाटी में पहुँचती है और भारी वर्षा करती है | हिमालय से टकरा कर ये पवनें पूर्व से पश्चिम की ओर चलने लगती है | पश्चिम की ओर जाते - जाते  इन पवनों में जलवाष्प की मात्रा कम होती जाती है | परिणाम स्वरूप उत्तर भारत में पूर्व से पश्चिम की ओर वर्षा की मात्रा घटती जाती है |

प्रश्न : कारण बताएँ कि भारतीय उपमहाद्वीप में वायु की दिशा में मौसमी परिवर्तन क्यों होता है ?

उत्तर :  जल और स्थल पर तापमान की भिन्नता के कारण वायुदाब में भी भिन्नता आती है | इसी के परिणाम स्वरूप वायु की दिशा में मौसमी परिवर्तन होता है |हम जानते है कि जल स्थल कि अपेक्षा देरी से गर्म होता है और देरी से ठंडा होता है | भारत का मैदानी क्षेत्र ग्रीष्म ऋतु में अधिक गर्म हो जाता है | जबकि अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी कि वायु का तापमान अपेक्षाकृत कम है | इसी कारण से मैदानी क्षेत्रों में निम्न वायुदाब का क्षेत्र का बन जाता है और सागरीय क्षेत्र में अधिक वायुदाब के कारण पवनें समुद्र से भारत के आंतरिक भाग कि ओर चलने लगती है | सर्दियों में स्थिति बिल्कुल उल्ट जाती है |  मैदानी क्षेत्र शीत ऋतु में अधिक ठंडा  हो जाता है | जबकि अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी कि वायु का तापमान अपेक्षाकृत अधिक होता है | इसी कारण से मैदानी क्षेत्रों में उच्च वायुदाब का क्षेत्र का बन जाता है और सागरीय क्षेत्र में निम्न  वायुदाब के कारण पवनें भारत के आंतरिक भाग से  समुद्र कि ओर चलने लगती है | यही कारण है कि भारतीय उपमहाद्वीप में वायु की दिशा में मौसमी परिवर्तन होता है |

प्रश्न : कारण बताएँ  कि भारत की अधिकतर वर्षा कुछ ही महीनों में  होती है |

उत्तर : भारत में अधिकांश वर्षा जून से सितम्बर के बीच होती है | जिसका प्रमुख कारण यह है कि ग्रीष्म ऋतु के दौरान मैदानी क्षेत्रों में निम्न वायुदाब का क्षेत्र का बन जाता है और सागरीय क्षेत्र में अधिक वायुदाब के कारण पवनें समुद्र से भारत के आंतरिक भाग कि ओर चलने लगती है | ये मानसूनी पवनों के रूप में भारत में आती है | ये पवनें जलवाष्प से भरी होती है और भारत के अधिकाँश स्थानों पर वर्षा करती है | ये मानसून पवनें जून से सितम्बर तक चलती है | इसके बाद तापमान तथा वायुदाब  संबंधी परिस्थितियाँ बिल्कुल उल्ट जाती है ओर पवनें स्थल से समुद्र कि ओर चलने लगती है | इस पवनों में जलवाष्प नहीं होती जिससे ये वर्षा भी नहीं करती है | यही कारण है कि भारत की अधिकतर वर्षा कुछ ही महीनों में  होती है |

प्रश्न: कारण बताएँ कि तमिलनाडु के तट पर शीत ऋतु में वर्षा होती है |

उत्तर : ग्रीष्म ऋतु में तमिलनाडु के तट पर आगे बढते हुए मानसून की ऋतु में वर्षा नहीं होती यह क्षेत्र शुष्क रह जाता है | लेकिन शीत ऋतु में पीछे हटते हुए मानसून की ऋतु के समय बंगाल की खाड़ी में उच्च वायुदाब की स्थिति होती है और तमिलनाडु के तट पर निम्न वायुदाब की स्थिति होती है | परिणाम स्वरुप पवनें बंगाल की खाड़ी से तमिलनाडु के तट की ओर चलने लगती है ये पवनें अपने साथ पर्याप्त मात्रा में जलवाष्प लेकर आती है और तमिलनाडु के तट से टकरा कर यहाँ वर्षा करती है |यही कारण है की  तमिलनाडु के तट पर शीत ऋतु में वर्षा होती है |

प्रश्न: कारण बताएँ कि पूर्वी तट के डेल्टा वाले क्षेत्र में प्राय: चक्रवात आते है |

उत्तर : पीछे हटते  हुए मानसून की ऋतु में नवम्बर के महीने में उत्तरी भारत में उच्च वायुदाब बन जाता है जो ग्रीष्म ऋतु में निम्न वायुदाब का क्षेत्र होता है | यह निम्न वायुदाब का क्षेत्र यहाँ से खिसक कर बंगाल की खाड़ी में चला जाता है |  निम्न वायुदाब होने के कारण इस क्षेत्र में पवनें चारों ओंर से आने लगती है और बंगाल की खाड़ी में चक्रवात बन जाता है |  पूर्वी तट पर गोदवरी, कावेरी तथा कृष्ण नदी के डेल्टाई भागों में निम्न वायुदाब का क्षेत्र होता है जिससे ये चक्रवात पूर्वी तट पर टकराते है और अत्यधिक हानि पहुँचातें है |  

प्रश्न: कारण बताएँ कि राजस्थान, गुजरात के कुछ भाग तथा पश्चिमी घाट का वृष्टि –छाया क्षेत्र सूखा प्रभावित क्षेत्र है |

उत्तर :  राजस्थान में अरावली प्रमुख पर्वत श्रृंखला है | यह  पर्वत श्रृंखला मानसूनी पवनों  की दिशा के समानांतर रहती है | परिणाम स्वरुप यह पर्वत श्रृंखला मानसूनी पवनों कों नहीं रोक पाती और ये पवनें बिना वर्षा के ही आघे निकल जाती है | जिससे राजस्थान में बहुत कम वर्षा होती है | यही कारण है कि यह क्षेत्र सूखा प्रभावित क्षेत्र है |  

            गुजरात कुछ भाग तथा पश्चिमी घाट का वृष्टि –छाया क्षेत्र है अर्थात यहाँ पर मानसूनी पवनों का पवनविमुखी ढलान होता है जिससे मानसूनी पवनों के द्वारा यहाँ पर वर्षा बहुत कम होती है | पर्याप्त वर्षा नहीं मिलने के कारण ये क्षेत्र भी  सूखा प्रभावित क्षेत्र है |  

 

 

Tuesday, November 23, 2021

Meaning,Types and Causes and Consequences of Migration

 

प्रवास का अर्थ

किसी विशेष उद्देश्य से लोगों का एक स्थान कों छोकर दूसरे स्थान पर जाकर रहना प्रवास कहलाता है |

प्रवास की प्रक्रिया

प्रवास की प्रक्रिया के अंतर्गत व्यक्ति का अपने स्थान कों छोड़कर जाने और दूसरे स्थान पर आकर रहना दोनों ही प्रकार की प्रक्रिया कों शामिल किया जाता है | ये निम्नलिखित दो प्रकार की होती है |

A.     आप्रवास (In-Migration)

 

जब लोग किसी नए स्थान पर आकर रहने लगते है | तो इस प्रक्रिया कों आप्रवास कहते है |

B.     उत्प्रवास  आप्रवास (Out- Migration)

 

जब लोग एक स्थान कों छोडकर चले जाते हैं | तो इस प्रक्रिया कों उत्प्रवास कहते है |

समय के  अवधि अनुसार प्रवास के प्रकार

प्रवास के समय के अवधि अनुसार प्रवास तीन प्रकार का होता है |  स्थाई, अस्थाई तथा मौसमी प्रवास | इनका संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित है |

A.     स्थाई प्रवास

जब व्यक्ति किसी स्थान कों छोड़कर चला जाए और दूसरे स्थान पर स्थाई रूप से रहने लगे तो इस प्रकार के प्रवास कों स्थाई प्रवास कहते है | महिलाओं अधिकतर विवाह के बाद इसी तरह का प्रवास करती हैं |

B.     अस्थाई प्रवास

जब व्यक्ति कुछ समय के लिए अपने स्थान कों छोड़कर रहने लगता है | तो इस तरह के प्रवास कों अस्थाई प्रवास कहते है | जैसे विद्यार्थी द्वारा शिक्षा प्राप्त करने के लिए अपने जन्म स्थान कों छोड़कर जाना और शिक्षा ग्रहण करने पर वापस लौट आना |

C.     मौसमी प्रवास

जब प्रवास एक विशेष समय (मौसम) में किया जाता है तो यह मौसमी प्रवास कहलाता है | इस प्रवास का मुख्य रूप से कृषि क्रिया में होता है | लोग कृषि कार्य करने के लिए जैसे कटाई या बुआई के मौसम में प्रवास करते हैं और काम समाप्त हो जाने पर अपने घर लौट आते है |  इसी तरह जम्मू कश्मीर से चरवाहे सर्दी के समय मैदानी क्षेत्रों में आ जाते है और गर्मियों की शुरुआत में वापस  पहाड़ी क्षेत्रों में जाने लगते है | 

गंतव्य स्थान के आधार पर प्रवास के प्रकार

गंतव्य स्थान के आधार पर प्रवास दो प्रकार का होता है | आंतरिक प्रवास तथा अंतर्राष्ट्रीय प्रवास |

आंतरिक प्रवास (Inland Migration)

प्रवास देश की सीमा में हो तो आंतरिक प्रवास कहलाता है |

अंतर्राष्ट्रीय प्रवास (International Migration)

प्रवास जब देश की सीमा के बाहर  (एक देश से दूसरे देश में ) हो तो अंतर्राष्ट्रीय होता है |

प्रवास की धाराएँ

प्रवास की चार मुख्य धाराएँ हैं |

(a)    गांव से गांव    (b)   गांव से नगर      (c)   नगर से नगर      (d)  नगर से गांव

आप्रवासी और उत्प्रवासी में अन्तर

आप्रवासी (in-migrant )

वे लोग जो किसी नए स्थान पर आकर बस जाते हैं, आप्रवासी कहलाते हैं |

उत्प्रवासी (out- migrant)

वे लोग जो अपने स्थान कों छोड़कर  बाहर चले जाते है, उत्प्रवासी कहलाते हैं |

उद्गम स्थान और गंतव्य स्थान में अन्तर

उद्गम स्थान

वह स्थान जहाँ से लोग चले जाते हैं या गमन कर जाते है | उस स्थान कों उद्गम  स्थान कहते है | उत्प्रवास के प्रवास के कारण  यहाँ उद्गम स्थान की जनसंख्या में कमी होती है |

गंतव्य स्थान

वह स्थान जहाँ पर लोग आकार बीएस जाते हैं | उस स्थान कों गंतव्य स्थान कहते है | आप्रवास के कारण गंतव्य स्थान की जनसंख्या में वृद्धि होती है |

प्रवास कों प्रभावित करने वाले कारक

लोग अपने जन्म स्थान से भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं | लेकिन बेहतर आर्थिक और सामाजिक जीवन जीने के लिए या सामाजिक और राजनैतिक कारणों से अपने जन्म स्थान कों छोड़कर प्रवास करते है |  इसी तरह बहुत से ऐसे कारक होते है जो लोगों कों प्रवास करने लिए प्रोत्साहित करते हैं या उन्हें बाध्य करते है | प्रवास कों प्रभावित करने वाले कारकों कों हम दो भागों में बाँट सकते हैं |  ये प्रतिकर्ष कारक तथा अपकर्ष कारक  कहलाते है |  इनका संक्षिप्त वर्णन निम्न प्रकार से है |

प्रतिकर्ष कारक (Push Factors of Migration)

वे कारक जो लोगों कों उनके निवास स्थान या उद्गम स्थान कों छोड़कर जाने का कारण बनते है उन्हें प्रवास के प्रतिकर्ष कारक कहते हैं | इन कारकों के अंतर्गत बेरोजगारी, रहन-सहन की निम्न दशाएँ, राजनैतिक उपद्रव, प्रतिकूल जलवायु, बाढ़ और सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाओं का बार बार आना, महामारियाँ तथा सामाजिक और आर्थिक पिछड़ापन आदि शामिल हैं | जिनके कारण लोग अपना स्थान छोड़कर चले जाते है |

अपकर्ष कारक  (Pull Factors of Migration)

वे कारक जो लोगों कों विभिन्न स्थानों से आकार रहने के लिए आकर्षित करते हैं उन्हें प्रवास के अपकर्ष कारक कहते है | इन कारकों में रोजगार के अच्छे अवसर, रहन-सहन की उच्च दशाएँ, राजनैतिक शांति और स्थायित्व, जीवन और सम्पति की सुरक्षा, अनुकूल जलवायु, तथा सामाजिक और आर्थिक रूप से उन्नत समाज आदि शामिल हैं | ये ऐसे कारक है जो किसी स्थान (गंतव्य स्थान ) कों उद्गम स्थान की अपेक्षा अपनी ओर आकर्षित करते हैं | 

प्रश्न : भारत में पुरुष प्रवास के मुख्य कारण क्या है ?

उत्तर :  काम और रोजगार |

प्रश्न :  भारत के किस शहर में सर्वाधिक संख्या में आप्रवासी आते हैं ?

उत्तर : महाराष्ट्र

प्रश्न :  भारत में प्रवास की निम्न धाराओं में से कौन सी धारा एक धारा पुरुष प्रधान है ?

क.     ग्रामीण से नगरीय

ख.     नगर से नगरीय

ग.      ग्राम से ग्राम

घ.      नगर से ग्राम

उत्तर : ग्राम से नगरीय

प्रश्न :  किस नगरीय समूहन में प्रवासी जनसंख्या का अंश सर्वाधिक है ?

उत्तर : मुंबई नगरीय समूहन में |

जनगणना में प्रवास पर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय जनगणना में प्रवास पर निम्नलिखित प्रश्न पूछे जाते है |

1.       क्या व्यक्ति इसी गांव अथवा शहर में पैदा हुआ है ?  यदि नहीं, तब जन्म के स्थान (ग्रामीण या नगरीय) की स्थिति , जिले, और राज्य का नाम और यदि भारत के बहार का है तो जन्म के देश के नाम की सूचना प्राप्त की जाती है |

2.       क्या व्यक्ति इस गांव या शहर में कहीं और से आया है ? यदि हाँ, तब निवास के पूर्व (पिछले) स्थान के स्तर (ग्रामीण या नगरीय) , जिले और राज्य का नाम और यदि भारत के बहार का है तो जन्म के देश के नाम के बारे में आगे प्रश्न पूछे जाते है |

भारत की जनगणना में प्रवास की गणना के आधार

भारतीय जनगणना में प्रवास की गणना दो आधारों पर की जाती है |  जीवन पर्यंत प्रवासी  तथा  पिछले निवास स्थान से प्रवासी |

1.       जीवन पर्यन्त प्रवासी (जन्म स्थान से प्रवासी ) : यदि प्रवास करने वाले व्यक्ति के जन्म का स्थान गणना के स्थान से भिन्न है तो उसे जीवन पर्यन्त प्रवासी या जन्म स्थान से प्रवासी के नाम से जाना जाता है |

2.       पिछले निवास स्थान से प्रवासी  : यदि  प्रवास करने वाले व्यक्ति के निवास का पिछला स्थान गणना के स्थान से भिन्न है तो उसे निवास के पिछले स्थान से प्रवासी के रूप जाना जाता है |

पुरुष वरणात्मक (चयनात्मक) प्रवास के मुख्य कारण

पुरुष बड़ी संख्या में  ग्रामीण क्षेत्रों से नगरीय क्षेत्रों की ओर रोजगार की तलाश में प्रवास करते हैं | 

स्त्री वरणात्मक (चयनात्मक) प्रवास के मुख्य कारण

स्त्रियाँ विवाह के कारण प्रवास करती हैं | क्योंकि भारत में लड़की कों विवाह के बाद अपने मायके  के घर से सुसराल के घर तक प्रवास करना होता है | जो अधिकाँश ग्रामीण क्षेत्र से ग्रामीण क्षेत्र में ही होता है |

उद्गम और गंतव्य स्थान की आयु व लिंग संरचना पर ग्रामीण नगरीय प्रवास का प्रभाव

बड़ी संख्या में युवक रोजगार की तलाश में ग्रामीण इलाकों कों से नगरों की ओर प्रवास करते हैं | इससे ग्रामीण क्षेत्रों में युवकों की संख्या में कमी हो जाती है | इसके विपरीत नगरों में इनके जाने से नगरों में इनकी संख्या बढ़ जाती है | गाँवों में बूढ़े, बच्चें तथा स्त्रियाँ रह जाती हैं | अत: ग्रामीण नगरीय प्रवास से उद्गम तथा गंतव्य दोनों ही स्थानों की आयु एवं लिंग संरचना पर प्रभाव पड़ता है |

भारत में  लोगों के  ग्रामीण  से नगरीय क्षेत्रों में प्रवास के कारण 

किसी भी क्षेत्र में प्रवास के लिए दो प्रकार के कारक उत्तरदायी होते है | प्रतिकर्ष कारक तथा अपकर्ष कारक |

प्रतिकर्ष कारक (Push Factors of Migration)

वे कारक जो लोगों कों उनके निवास स्थान या उद्गम स्थान कों छोड़कर जाने का कारण बनते है उन्हें प्रवास के प्रतिकर्ष कारक कहते हैं |  भारत में प्रवास के लिए उत्तरदायी प्रतिकर्ष कारक निम्नलिखित है |

गरीबी, कृषि भूमि पर जनसंख्या के अधिक दबाव, स्वास्थ्य सुविधाओं के आभाव आदि के कारण भारत में लोग  ग्रामीण  से नगरीय क्षेत्रों में प्रवास करते हैं |

प्राकृतिक कारक जैसे बाढ़, सूखा, चक्रवातीय तूफान, भूकंप तथा सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाएँ  लोगों कों प्रवास के लिए प्रेरित करती है |

युद्ध, स्थानीय संघर्ष भी प्रवास के लिए प्रतिकर्ष कारक पैदा करते है |

 

अपकर्ष कारक  (Pull Factors of Migration)

वे कारक जो लोगों कों विभिन्न स्थानों से आकार रहने के लिए आकर्षित करते हैं उन्हें प्रवास के अपकर्ष कारक कहते है | भारत में प्रवास के निम्न लिखित कारण हैं |

गरीबी , कृषि भूमि पर जनसंख्या के अधिक दबाव, स्वास्थ्य सुविधाओं के आभाव आदि के कारण भारत में लोग  ग्रामीण  से नगरीय क्षेत्रों में प्रवास करते हैं |

प्राकृतिक कारक जैसे बाढ़, सूखा, चक्रवातीय तूफान, भूकंप तथा सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाएँ  लोगों कों प्रवास के लिए प्रेरित करती है |

युद्ध, स्थानीय संघर्ष भी प्रवास के लिए प्रतिकर्ष कारक पैदा करते है |

प्रवास की तरंगें (भारतीय लोगों के अंतर्राष्ट्रीय प्रवास तथा उनके कारण )

भारतीय इतिहास में भरतीय लोगों के प्रवास या भरतीय प्रसार की तीन मुख्य तरंगें देखने कों मिलती है |

पहली तरंग

भारतीय लोंगों के द्वारा उत्प्रवास की पहली तरंग ब्रिटिश काल के दौरान पैदा हुई | जब अंग्रेजों ने उत्तर प्रदेश और बिहार से मॉरीशस,कैरिबियन द्वीप समूह (ट्रिनिडाड, टोबैगो और गुयाना ), फिजी और दक्षिणी अफ्रीका में , फ्रांसीसियों और जर्मनी ने रियूनियन द्वीप, गुआडेलोप, मार्टीनीक और सूरीनाम में ; फ्रांसीसी और डच लोगों तथा पुर्तगालियों ने गोवा, दमन और दीव से अंगोला, मोजाम्बिक व अन्य देशों में करारबद्ध लाखों लोगों श्रमिकों कों रोपण कृषि में काम करने के लिए भेजा था | इस तरह के सभी प्रवास भारतीय उत्प्रवास अधिनियम या गिरमिटिया एक्ट नामक समयबद्ध अनुबंध के तहत किए गए थे | इस अधिनियम के  द्वारा गए मजदूरों कों अमानवीय परिस्थितियों में रखा जाता था और उनकी दशा दासों जैसी ही होती थी |

दूसरी तरंग

यह तरंग 1970 के दशक में आई | इस तरंग ने  प्रवासियों की नूतन समय में व्यवसायियों, शिल्पियों व्यापारियों तथा फैक्ट्री मजदूरों कों निकटवर्ती देशों में भेजा | इस तरंग में जाने वाले लोग बेहतर आर्थिक अवसरों की तलाश में थाईलैंड,मलेशिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, ब्रूनेई आदि देशों में जाकर बस गए | यह प्रवृति अब भी जारी है | 1970 के दशक में पश्चिमी एशिया के देशों में अचानक ही तेल के उत्पादन में वृद्धि हुई जिसके परिणाम स्वरूप भारत से बहुत बड़ी संख्या में कुशल तथा अर्धकुशल श्रमिकों कों आकृषित किया | कुछ बाह्य प्रवास उधमियों, भंडार मालिकों, व्यवसायिकों का भी पश्चिमी देशों में प्रवास हुआ है |

तीसरी तरंग

इस तरंग में उच्च शिक्षा प्राप्त कुशल व्यक्तियों ने प्रवास किया | वर्ष 1969 के बाद डॉक्टरों और अभियंताओं ने तथा 1980 के बाद सॉफ्टवेयर अभियंताओं, प्रबंध परामर्शदाताओं, वित्तीय विशेषज्ञ संचार माध्यम से संबंधित आदि  व्यक्तियों ने प्रवास किया | ये लोग उच्च स्तरीय व्यतीत करने तथा अधिक धन कमाने के लिए भारत कों छोड़कर संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाड़ा, यू०  के० (यूनाइटेड किंग), ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड न्यूजीलैंड, जर्मनी देशों में आ आकर बस गए | 1991 में उदारीकरण के बाद शिक्षा और ज्ञान आधारित भारतीय उत्प्रवासियों नें  भारतीय प्रसार  कों “विश्व के सर्वाधिक शक्तिशाली प्रसार में से एक बना दिया है |

भारत में अंतर्राष्ट्रीय प्रवास

आंतिरक प्रवास की प्रक्रिया के साथ - साथ भारत के में अंतर्राष्ट्रीय प्रवास भी देखने कों मिलता है | अंतर्राष्ट्रीय प्रवास के अंतर्गत पड़ोसी देशों से आप्रवास और उन देशों में भारत के लोग उत्प्रवास करते है | सन् 2011 की जनगणना के अनुसार  50 लाख लोगों का भारत में अन्य देशों से आप्रवास हुआ है | इनमें से अधिकाँश आप्रवासी भारत के पड़ोसी देशों से आए है | सन् 2001 की जनगणना के अनुसार  96 प्रतिशत आप्रवासी भारत के पड़ोसी देशों से आए थे जो सन् 2011 में घटकर 88.9 प्रतिशत रह गए |  अकेले बंगलादेश से 27.47 लाख से अधिक प्रवासी भारत में है | जो कुल आप्रवासियों का 51.2  प्रतिशत है | उसके बाद नेपाल से 8.10 लाख लोग भारत में आप्रवासी है जो कुल आप्रवासियों का 15.1 प्रतिशत है | पाकिस्तान से 9.18 लाख लोग आप्रवासी के रूप में रह रहे है जो कुल आप्रवासियों का 17.1 प्रतिशत है | इसके अलावा तिब्बत, भूटान, श्रीलंका, अफगानिस्तान, ईरान और म्यांमार के आप्रवासी भी शामिल है |

जहाँ भारत से उत्प्रवास का प्रश्न है ऐसा अनुमान है कि भारतीय डायस्पोरा के लगभग 1.25 करोड़ लोग है जो विश्व के लगभग 110 देशों में फैले हुए है | जिनमें मुख्य रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका, दक्षिणी अफ्रीका, कनाडा, इंग्लैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड, ऑस्ट्रेलिया, कैरिबियन द्वीप समूह तथा पश्चिमी एशिया के देशों  (संयुक्त अरब अमीरात, ईरान, कुवैत, साउदी अरब) आदि देशों में भारतीय लोग उत्प्रवास करते है |

 

प्रवास के परिणाम

प्रवास के अच्छे तथा बुरे दोनों ही प्रकार के परिणाम होते है | प्रवास के कारण किसी क्षेत्र में जीवन पर आर्थिक, जनांकिकीय, सामाजिक तथा पर्यावरणीय परिणाम होते है | जिनका संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित है |

आर्थिक परिणाम

बहुत से लोग आर्थिक लाभ के लिए प्रवास करते हैं | प्रवास का सबसे बड़ा परिणाम भी आर्थिक लाभ ही है | देश के बाहर जाने वाले प्रवासी अधिक धन कमाते हैं  और उससे अपने परिवार की आर्थिक सहायता करते हैं | अंतर्राष्ट्रीय प्रवासियों द्वारा भेजी जाने वाली हुंडियाँ विदेशी विनिमय के प्रमुख स्त्रोतों में से एक है | विश्व बैंक की प्रवास और हुंडी तथ्य- पुस्तिका 2008 के अनुसार विदेशों से हुंडी प्राप्त करने वाले देशों में भारत का प्रथम स्थान है | 2007 में भारत ने हुंडियों के रूप में 27 बिलियन अमेरिकी डॉलर प्राप्त किए थे | भारत के बाद चीन, मैक्सिकों, फिलीपीन्स, फ्रांस तथा स्पेन  आदि देश है जो प्रवास के कारण अच्छी विदेशी हुंडियाँ प्राप्त करते है | प्रवास के कारण निम्नलिखित आर्थिक परिणाम देखने कों मिलते हैं |

1)      पंजाब, केरल तथा तमिलनाडु अपने अपने राज्यों से विदेशों में गए प्रवासियों से महत्वपूर्ण राशि हुंडी के रूप में प्राप्त करते हैं | इन हुंडियों  से प्राप्त धन का प्रयोग भोजन, ऋणों की अदायगी, रोगों के इलाज, विवाह , बच्चों की शिक्षा, कृषीय निवेश, गृह निर्माण आदि कार्यों में किया जाता है |

2)      बिहार, उत्तरप्रदेश, ओडिसा, आन्ध्रप्रदेश तथा हिमाचलप्रदेश आदि राज्यों के हजारों निर्धन गाँवों की अर्थव्यवस्था के लिए ये हुंडियाँ जीवन दायक रक्त का काम करती हैं |

3)      पंजाब, हरियाणा तथा पश्चिमी उत्तरप्रदेश में हरित क्रान्ति के कारण पूर्वी उत्तरप्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश तथा ओडिसा से बड़ी संख्या में कृषि मजदूरों ने प्रवास किया है | जिससे इन प्रदेशों में भी रोजगार की समस्या उत्पन्न होने लगी है |

4)      रोजगार की तलाश में महानगरों में बड़ी संख्या में अनियमित रूप से पलायन हो रहा है जिससे रोजगार के साथ- साथ भीड़ – भाड़ की समस्या और मलिन बस्तियों की समस्या भी पैदा हो गई है |

जनांकिकीय परिणाम

प्रवास से देश के अंदर जनसंख्या के वितरण में जनांकिकीय असंतुलन पैदा हो जाता है | ग्रामीण इलाकों से युवा आयु वर्ग वाले दक्ष और कुशल लोगों का नगरों की ओर प्रवास करने से ग्रामीण जनांकिकीय संघटन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है | उदाहरण के लिए उत्तराखंड, राजस्थान, मध्यप्रदेश और पूर्वी महाराष्ट्र से होने वाले बाह्य प्रवास ने इन राज्यों की आयु लिंग संरचना में गंभीर असंतुलन पैदा कर दिया है | इसी तरह के असंतुअलं उन राज्यों में भी उत्पन्न हो गए है जिनमें ये प्रवासी लोग जाकर बस जाते है |

सामाजिक परिणाम

1)      प्रवासी लोग सामाजिक परिवर्तन के अच्छे माध्यम होते है | क्योंकि ये नवीन प्रौद्योगिकी, परिवार , भोजन , बालिका शिक्षा, रीति रिवाज, आदि के संबंध में नए विचारों का प्रसार करते है |

2)      प्रवास से विविध संस्कृतियों का अंतमिश्रण होता है | जिससे संकीर्ण विचारों के भेदन तथा लोगों के मानसिक क्षितिज कों  विस्तृत करने में सहायता मिलती है |

3)      प्रवास के कुछ नकारात्मक परिणाम भी समाज में देखने कों मिलते है | प्रवास के कारण गुमनामी होती है |  जो व्यक्तियों में सामाजिक निर्वात और खिन्नता की भावना भर देती है | खिन्नता की सतत भावना लोगों कों अपराध और औषध दुरूपयोग (ड्रग्स लेना या दवाओं के द्वारा नशा करना ) जैसी असामाजिक क्रियाओं के जाल में फँसने के लिए अभिप्रेरित करती है |

4)      प्रवास में अलग –अलग  क्षेत्रों से लोग आते है उनकी भाषा, रीति रिवाज, धर्म आदि अलग होने से भाईचारे की भावना भी कम होती जा रही है |

पर्यावरणीय परिणाम

1)      बड़ी संख्या में लोग ग्रामीण क्षेत्रों से नगरीय क्षेत्रों की ओर प्रवास करते हैं | जिसके कारण लोगों का अति संकुलन नगरीय क्षेत्रों में  भीड़ भाड़  बढ़ जाती है | जो नगरों के सामाजिक और भौतिक अवसंरचना (आधारभूत ढाँचे) पर दबाव डालता है |

2)      प्रवास के कारण बढ़ी हुई जनसंख्या से मलिन बस्तियों तथा क्षुद्र कॉलोनियों का विस्तार होता है |  जिससे नगरीय पर्यावरण प्रदूषित होता है |

3)      भीड़ भाड़ से प्राकृतिक संसाधनों का अति शोषण होता है | भौम जल का अधिक उपयोग होने से भौम जल का स्तर तेजी से नीचे गिर रहा है | जल की कमी होती है |

4)      इनके अतिरिक्त जल प्रदूषण, भूमि प्रदूषण, वायु प्रदूषण, वाहित मल के निपटान तथा ठोस कचरे के प्रबंधन जैसी अनेकों गम्भीर समस्याएँ पैदा हो जाती है |

प्रवास के अन्य परिणाम

प्रवास महिलाओं के जीवन पर बहुत गहरा प्रभाव डालता है | ग्रामीण इलाकों में पुरुष रोजगार की तलाश में अपनी पत्नियों कों छोड़कर नगरों की ओर प्रवास करते है | जिससे महिलाओं पर अत्यधिक शारीरिक दबाव पड़ता है | शिक्षा एवं रोजगार के लिए स्त्रियों द्वारा प्रवास उनकी स्वायत्तता और अर्थव्यवस्था में उनकी भूमिका कों बढता है | परन्तु उन्हें सुभेद्य भी बना देता है |

            प्रवास की प्रक्रिया के कारण स्त्रोत प्रदेश (उद्गम क्षेत्र ) कों सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि प्रवासियों के परिवार कों हुंडियों के रूप में धन मिलता है | परन्तु इसका सबसे बड़ा दोष यह है कि स्त्रोत प्रदेश (उद्गम क्षेत्र ) से कुशल व्यक्तियों का अभाव हो जाता है |

विश्व स्तर पर कुशलता का महत्व बढ़ गया है और वैश्विक बाजार वास्तव में कुशलता का बाजार बन गया है | गत्यात्मक औद्योगिक अर्थव्यवस्थाएँ गरीब प्रदेशों से उच्च प्रशिक्षित व्यवसायिकों कों सार्थक अनुपात में प्रवेश दे रही है  और भर्ती कर रही हैं | परिणाम स्वरूप स्त्रोत प्रदेश (उद्गम क्षेत्र ) के  वर्तमान में चल रहे अल्पविकस को बल मिलता है |

 


Friday, October 29, 2021

Population of India : Distribution

 

जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

कक्षा- 12 (भूगोल)

भारत की जनसंख्या

            भारत विश्व के अधिकतम जनसंख्या वाले देशों में से एक है | भारत विश्व के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के 2.4 प्रतिशत भाग पर विस्तृत है जबकि यहाँ पर विश्व की 17.5 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है |

            सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या 121.02 करोड़ है | जनसंख्या के हिसाब से भारत चीन के बाद दूसरा स्थान है | भारत की कुल जनसंख्या उत्तर अमेरिका, दक्षिण अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की कुल जनसंख्या से भी अधिक है |

 

भारत की विशाल जनसंख्या का प्रभाव

विशाल जनसंख्या के कारण बहुत अधिक समस्याएँ सामने आती है | जो निम्नलिखित हैं |

1)      प्राय: यह तर्क दिया जाता है कि इतनी बड़ी जनसंख्या निश्चित तौर पर देश के सीमित संसाधनों पर दबाव डालती है |

2)      देश में अनेक सामाजिक आर्थिक समस्याओं के लिए उत्तरदायी है |

3)      जनसंख्या के अधिक बोझ के कारण गरीबी एक विकराल रूप धारण कर रही है |

4)      विशाल जनसंख्या ने पर्यावरण संबंधी कई समस्याएँ उत्पन्न कर दी हैं |

 

भारत में जनसंख्या की गणना (जनगणना)  या जनसंख्या के आँकड़ों के स्त्रोत

भारत में जनसंख्या से संबंधित आँकडों कों प्रति दस वर्ष के बाद होने वाली जनगणना के द्वारा एकत्रित किए जाते है | भारत में पहली जनगणना 1872 ई० में हुई थी | लेकिन यह पूर्ण नहीं थी | भारत की पहली सम्पूर्ण जनगणना  1881 ई० में हुई थी |  हमारे देश की अंतिम जनगणना सन् 2011 में हुई थी | अब तक कुल 14 संपूर्ण जनगणना हो चुकीं है | अगली (पंद्रहवी) जनगणना सन् 2021 में होनी है |  

 

भारत में जनसंख्या वितरण

सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल  जनसंख्या 121.02 करोड़ है | भारत की इतनी विशाल जनसंख्या समान रूप से देश में वितरित नहीं है बल्कि असमान रूप से देश के विभिन्न भागों में वितरित है |

देश के विशाल आकार वाले राज्यों की जनसंख्या कों देखते है तो पता चलता है कि उत्तरप्रदेश भारत में सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है  यहाँ  सन् 2011 की जनगणना के अनुसार 19.95 करोड़ लोग रहते हैं | 11.23 करोड़ जनसंख्या के साथ महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर है | बिहार में 10.38 करोड़ जनसंख्या निवास करती है | इसके बाद पश्चिम बंगाल में 9.13 करोड़ तथा आंध्रप्रदेश की जनसंख्या 2011 की जनगणना के अनुसार 8.46 करोड़ थी | ये पाँच बड़े राज्यों में देश की लगभग 50 % (आधी) जनसंख्या पाई जाती है | देश के दस राज्यों उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र , बिहार,बंगाल पश्चिम बंगाल आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, मध्यप्रदेश, राजस्थान कर्नाटक तथा गुजरात भारत की लगभग 76 प्रतिशत जनसंख्या रहती है |  

            जबकि विशाल आकार होते हुए भी कुछ राज्य ऐसे है जिनमें बहुत ही कम जनसंख्या रहती है | जैसे सन् 2011 की जनगणना के अनुसार ही जम्मूकश्मीर में देश की केवल 1.04 %, अरुणाचलप्रदेश  में देश की  0.84% तथा उत्तराखंड में  केवल 0.83 % जनसंख्या ही निवास करती है | क्षेत्रफल की हिसाब से देश के सबसे बड़े राज्य राजस्थान में कुल जनसंख्या का केवल 5.67% हिस्सा ही रहता है |

            सिक्किम सबसे कम जनसंख्या वाला राज्य है जहाँ लगभग 6 लाख लोग ही रहते है | जो देश की जनसंख्या का केवल 0.05% जनसंख्या ही है | इसके अलावा अधिकाशं उत्तरी पूर्वी राज्यों जैसे नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, मेघालय, त्रिपुरा तथा अरुणाचल प्रदेश राज्यों में देश की बहुत ही कम जनसंख्या निवास करती है |

  

केन्द्र शासित प्रदेशों में दिल्ली में सबसे अधिक जनसंख्या मिलती है | जबकि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा लक्षद्वीप समूह में बहुत ही कम संख्या में लोग रहते हैं |

 

 

जनसंख्या का विषम स्थानिक वितरण जनसंख्या और देश के भौतिक, समाजिक, आर्थिक और ऐतिहासिक कारकों के बीच घनिष्ठ संबंध  

या

भारत में जनसंख्या के असमान वितरण के कारण

भारत में जनसंख्या का वितरण असमान है | जनसंख्या का यह विषम स्थानिक वितरण देश की जनसंख्या और देश के भौतिक (भौगोलिक ), समाजिक, आर्थिक और ऐतिहासिक कारकों के बीच घनिष्ठ संबंध प्रकट करता है |  ये कारक जनसंख्या के वितरण कों अत्यधिक प्रभावित करते है | इनका वर्णन निम्न प्रकार से है |

 

जनसंख्या के वितरण कों प्रभावित करने वाले भौतिक कारक

भौतिक कारकों में धरातल, जलवायु तथा जल की उपलब्धता आदि प्रमुख है | ये कारक जनसंख्या के वितरण कों काफी प्रभावित करते हैं | जैसे भारत के उत्तरी मैदान, डेल्टाओं और तटीय मैदानों में जनसंख्या का अनुपात दक्षिणी तथा मध्य भारत के राज्यों के आंतरिक जिलों में अधिक है क्योंकि मैदानी भाग पर लोग अधिक रहना पसंद करते है |

            हिमालय, उत्तरी-पूर्वी राज्यों में विरल जनसंख्या पाई जाती है | जो की पर्वतीय क्षेत्रों में शामिल है | इसी तरह राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्रों में भी विरल जनसंख्या मिलती है |

हिमालय पर्वतीय राज्यों में खास तौर पर हिमाचल तथा जम्मू कश्मीर में विषम जलवायु के कारण बहुत ही कम लोग रहते है | इसी तरह राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्रों में भी जलवायु की विषमता  तथा जल की कमी लोगों के रहने के उपयुक्त स्थान नहीं उपलब्ध होने देती है अत: वहाँ भी जनसंख्या विरल है |

कुछ पठारी क्षेत्रों में भी भौतिक कारकों के करण जैसे जल की की कमी से जनसंख्या अपेक्षाकृत कम मिलती है |

            इन क्षेत्रों में नहरों के विकास तथा आर्थिक विकास संबंधी कर उपलब्ध कराने के बाद जनसंख्या का अनुपात उच्च होता जा रहा है | जैसे राजस्थान में  इंदिरा गाँधी नहर से सिंचाई की व्यवस्था के बढ़ने और झारखण्ड के छोटा नागपुर के पठार में खनिजों एवं ऊर्जा के अपार भण्डारों के कारण इन राज्यों में मध्यम से उच्च जनसंख्या अनुपात मिलता है |

 

जनसंख्या के वितरण कों प्रभावित करने वाले समाजिक, आर्थिक और ऐतिहासिक कारक

इन कारकों में स्थाई कृषि उद्भव और विकास, मानव बस्ती के प्रतिरूप, परिवहन जाल तंत्र का विकास, औद्योगिकरण और नगरी करण महत्वपूर्ण हैं |

समान्यत: नदी घाटियों के मैदानों, तथा तटीय क्षेत्रों में अधिक जनसंख्या पाई जाती है | क्योंकि इन इलाकों में मानव बस्तियों के आरम्भिक इतिहास और परिवहन जाल तंत्र के विकास के कारण जनसंख्या का सांद्रण  उच्च बना हुआ है |

दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, बंगलौर, पुणे, अहमदाबाद, चेन्नई और जयपुर के नगरीय क्षेत्र औद्योगि विकास तथा नगरीकरण के कारण बड़ी संख्या में ग्रामीण लोगों कों अपनी और आकृषित कर रहे है | इसलिए इन क्षेत्रों में जनसंख्या का सांद्रण उच्च बना हुआ है |  

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