https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-8100526939421437 SCHOOL OF GEOGRAPHY

Tuesday, August 18, 2026

LESSON 2 STRUCTURE AND PHYSIOGRAPHY INDIAN PHYSICAL ENVIRONMENT CLASS 11TH GEOGRAPHY

अध्याय 2 संरचना तथा  भू आकृति

कक्षा 11

भारत भौतिक पर्यावरण 

प्रश्न: भारत कों कितने भू आकृतिक खण्डों में बाँटा जा सकता है |

उत्तर:  मोटे तौर पर भारत कों निम्नलिखित भू आकृतिक खण्डों में बाँटा जा सकता है |

(i) उत्तर तथा उत्तरी –पूर्वी पर्वत माला

(ii) उत्तरी भारत का मैदान

(iii) प्रायद्वीपीय पठार

(iv) भारतीय मरुस्थल

(v) तटीय मैदान

(vi ) द्वीप समूह

 प्रश्न: उत्तर तथा उत्तरी –पूर्वी पर्वत माला का के मुख्य लक्षण क्या हैं ?

उत्तर: उत्तर तथा उत्तरी –पूर्वी पर्वत माला में हिमालय पर्वत और उत्तरी –पूर्वी पहाडियाँ शामिल हैं |

     (i)            हिमालय में कई समानांतर पर्वत श्रंखलाएँ हैं | इसमें बृहत हिमालय, पार हिमालय, मध्य हिमालय और शिवालिक प्रमुख श्रेणियाँ हैं |

   (ii)            भारत के उत्तरी –पश्चिमी भाग में हिमालय की ये श्रेणियाँ उत्तर –पश्चिम दिशा में फैली हैं |

 (iii)            दार्जिलिंग और सिक्किम क्षेत्रों में ये श्रेणियाँ पूर्व –पश्चिम दिशा में फैली हैं | जबकि अरुणाचल प्रदेश में ये दक्षिण –पश्चिम से उत्तर पश्चिम की ओर घूम जाती हैं |  मिजोरम, नागालैंड और मणिपुर में ये पहाड़ियाँ उत्तर –दक्षिण में फैली हैं |

  (iv)            बृहत हिमालय श्रंखला कों केन्द्रीय अक्षीय श्रेणी भी कहा जाता है |

    (v)            इस भाग की पूर्व –पश्चिम की लम्बाई लगभग 2500 किलोमीटर है |

  (vi)            उत्तर से दक्षिण में इसकी चौड़ाई 160 से 400 किलोमीटर है |

(vii)            हिमालय, भारतीय उपमहाद्वीप तथा मध्य एवं पूर्वी एशिया के देशों के बीच एक मजबूत लम्बी दीवार के रूप में खड़ा है |

(viii)            हिमालय एक प्राकृतिक अवरोधक ही नहीं अपितु जलवायु, अपवाह और सांस्कृतिक विभाजक भी है |

प्रश्न: उत्तरी भारत के मैदान की मुख्य विशेषताओं का उल्लेख कीजिए |

उत्तर: उत्तरी भारत के मैदान की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं |

(i)            उत्तरी भारत का मैदान सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों द्वारा बहाकर लाए गए जलोढ़ निक्षेप से बना है |

   (ii)            मूलत: यह एक भू –अभिनति गर्त है जिसका निर्माण मुख्य रूप से हिमालय पर्वतमाला निर्माण प्रक्रिया के तीसरे चरण में लगभग 6.4 करोड़ वर्ष पहले हुआ था |

 (iii)            इस मैदान की पूर्व से पश्चिम में लम्बाई लगभग 3200 किलोमीटर है |

  (iv)            इसकी औसत चौड़ाई 150 से 300 किलोमीटर है |

    (v)            जलोढ़ निक्षेप की अधिकतम गहराई 1000 से  2000 मीटर है |

  (vi)            उत्तर से दक्षिण दिशा में उत्तरी भारत के मैदान कों तीन भागों में बाँट सकते हैं | भाभर, तराई और जलोढ़ मैदान |

(vii)            जलोढ़ मैदान कों दो भागों में बाँटा जाता है | नए जलोढ़ से बने मैदान कों खादर और तथा पुराने जलोढ़ के मैदान कों बाँगर कहते हैं |

प्रश्न: उत्तरी भारत के मैदान कों उत्तर से दक्षिण में कितने भागों में विभाजित किया जाता है | प्रत्येक का संक्षिप्त वर्णन कीजिए |

उत्तर: उत्तर से दक्षिण दिशा में उत्तरी भारत के मैदान कों तीन भागों में बाँट सकते हैं | भाभर, तराई और जलोढ़ मैदान | इनका संक्षिप्त वर्णन निम्न लिखित है |

भाभर

भाभर  8 से  10 किलोमीटर चौड़ाई की पतली पट्टी है जो शिवालिक गिरिपद के समानांतरफैली हुई है | उसके परिणाम स्वरूप हिमालय पर्वत श्रेणियों से बाहर निकलती हुई नदियाँ यहाँ पर भारी –जल भार, जैसे बड़े शैल और गोलाश्म जमा कर देती हैं और कभी- कभी स्वयं इसी में लुप्त हो जाती है |

तराई

भाभर के दक्षिण में तराई क्षेत्र है जिसकी चौड़ाई 10 से 20 किलोमीटर है| भाभर क्षेत्र में लुप्त नदियाँ इस प्रदेश में धरातल पर निकल कर प्रकट होती हैं | क्योंकि इनकी निश्चित वाहिकाएँ नहीं होती, परिणाम स्वरूप ये क्षेत्र अनूप बन जाता है, जिसे तराई कहते हैं | यह क्षेत्र प्राकृतिक वनस्पति से ढका रहता है और विभिन्न प्रकार के वन्य प्राणियों का घर है |

जलोढ़ मैदान

तराई से दक्षिण में जलोढ़ मैदान स्थित हैं |

     (i)            ये मैदान पुराने और नए जलोढ़ से बने है | पुराने जलोढ़ से बने मैदान बाँगर कहलाता है जबकि नए जलोढ़ से बना मैदान खादर कहलाता है |

   (ii)            इस मैदान में नदी की प्रौढ़ अवस्था में बनने वाली अपरदनी और निक्षेपण स्थलाकृतियाँ, जैसे बालू रोधिका, विसर्प, गोखुर झीलें और गुंफित नदियाँ पाई जाती हैं |

 (iii)            उत्तर भारत के मैदान में बहने वाली विशाल नदियाँ अपने मुहाने पर विश्व के बड़े –बड़े डेल्टाओं का निर्माण करती हैं , जैसे –सुंदर वन डेल्टा |

  (iv)            सामान्य तौर पर यह एक सपाट मैदान है | जिसकी समुद्र तल से औसत ऊँचाई 50 से 100 मीटर है |

    (v)            ये मैदान उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी से बने हैं | जहाँ कई प्रकार की फसलें, जैसे –गेहूँ, चावल, गन्ना और जूट उगाई से जाती है | अत: यहाँ जनसंख्या का घनत्व ज्यादा है |

  (vi)        (vi)   ब्रह्मपुत्र घाटी का मैदान नदीय द्वीप और बालू –रोधिकाओं की उपस्थिति के लिए जाना जाता है | 

प्रश्न: भारत के प्रायद्वीपीय पठार की मुख्य विशेषताओं का उल्लेख कीजिए |

उत्तर: नदियों के मैदान से 150 मीटर ऊँचाई से ऊपर उठता हुआ प्रायद्वीपीय पठार तिकोने आकार वाला कटा-फटा भूखण्ड है, जिसकी ऊँचाई 600 से 900 मीटर है |

उत्तर पश्चिम में दिल्ली कटक (अरावली विस्तार)  पूर्व में राजमहल पहाडियाँ, पश्चिम में गिर पहाडियाँ और दक्षिण में इलायची (कार्डामम) पहाडियाँ प्रायद्वीपीय पठार की सीमाएँ निर्धारित करती है |

उत्तर - पूर्व में शिलांग तथा कार्बी एंगलॉन्ग का पठार भी इसी भूखंड का विस्तार है |

प्रायद्वीपीय भारत अनेक पठारों से मिलकर बना है, जैसे हजारीबाग पठार, पालायु पठार, राँची पठार, मालवा पठार , कोयम्बटूर पठार और कर्नाटक पठार |

यह पठार भारत के प्राचीनतम और स्थिर भूभागों में से एक है | सामान्य तौर पर प्रायद्वीप की ऊँचाई पश्चिम से पूर्व की ओर कम होती चली जाती है, जिसका प्रमाण यहाँ की नदियों के बहाव की दिशा से भी मिलता है |

पश्चिम बंगाल में मालदा भ्रंश उत्तरी –पूर्वी भाग में स्थित मेघालय व कर्बी ऐंगलॉन्ग पठार कों छोटा नागपुर पठार से अलग करता है | राजस्थान में यह प्रायद्वीपीय खंड मरुस्थल व मरुस्थल सदृश्य  स्थ्लाकृतियों से ढका हुआ है |

प्रायद्वीपीय पठार मुख्यत: ग्रेनाईट और नाइस से बना है |

कैम्ब्रियन कल्प से यह भूखंड एक कठोर खंड के रूप में खड़ा है |

इंडो –ऑस्ट्रेलियन प्लेट का हिस्सा होने के कारण यह उर्ध्वाधर हलचलों व खंड भ्रंश से प्रभावित है |

नर्मदा, तापी और महानदी की रिफ्ट घाटियाँ और सतपुड़ा ब्लॉक पर्वत इसके उदाहरण हैं |

प्रायद्वीप में मुख्यत: अवशिष्ट पहाडियाँ शामिल हैं | जैसे अरावली, नल्लामाला, जावादी, वेलीकोण्डा , पालकोण्डा श्रेणी और महेंद्रगिरी पहाडियाँ आदि |

यहाँ की नदी घाटियाँ उथली और उनकी प्रवणता कम होती है |

इस पठार के पश्चिमी और उत्तर –पश्चिमी भाग में मुख्य रूप से काली मिट्टी पाई जाती है |

इस पठार के उत्तरी-पश्चिमी भाग में नदी खड्ड और महाखड्ड इसके धरातल कों जटिल बनाते हैं | चम्बल, भिंड और मोरेना खड्ड इसके उदाहरण हैं |

पूर्व की ओर बहने वाली अधिकाँश नदियाँ बंगाल की खाड़ी में गिरने से पहले डेल्टा निर्माण करती हैं | महानदी, गोदावरी और कृष्णा इसके उदाहरण हैं |

 प्रश्न : प्रायद्वीपीय पठार के भागों के नाम बताओं |

उत्तर: मुख्य उच्चावच लक्षणों के अनुसार प्रायद्वीपीय पठार कों तीन भागों में बाँटा जा सकता है |

     (i)            दक्कन का पठार

   (ii)            मध्य उच्च भूभाग

 (iii)            उत्तरी –पूर्वी पठार

 प्रश्न: प्रायद्वीपीय पठार के मुख्य भाग के रूप में दक्कन का पठार के  मुख्य लक्षणों का उल्लेख कीजिए |

उत्तर: दक्कन के पठार के पश्चिम में पश्चिमी घाट, पूर्व  में पूर्वी घाट और उत्तर में सतपुड़ा, मैकाल और महादेव की पहाडियाँ हैं |

इस पठार के पश्चिम की ओर पश्चिमी घाट तथा पूर्व की ओर पूर्वी घाट है |

पश्चिमी घाट

पश्चिमी घाट कों स्थानीय तौर पर अनेक नाम दिए गए हैं, जैसे-महाराष्ट्र में सह्याद्री, कर्नाटक  और तमिलनाडु में नीलगिरी और केरल में अनामलाई और इलायची (कार्डामम) पहाडियाँ |  पूर्वी घाट की तुलना में पश्चिमी घाट ऊँचे और अविरत हैं |  इनकी औसत ऊँचाई लगभग 1500 मीटर है, जो कि उत्तर से दक्षिण की तरफ बढ़ती चली जाती है |  प्रायद्वीपीय पठार की सबसे ऊँची चोटी अनाईमुडी (2695 मीटर) है, जो पश्चिमी घाट की अनामलाई पहाड़ियों में स्थित है | दूसरी सबसे ऊँची चोटी डोडाबेटा है और यह नीलगिरी पहाड़ियों में है | ज्यादातर प्रायद्वीपीय नदियों की उत्पत्ति पश्चिमी घाट से है |

पूर्वी घाट

पूर्वी घाट अविरत नहीं है और महानदी, गोदावरी कृष्णा और कावेरी नदियों द्वारा अपरदित है |  यहाँ की कुछ मुख्य श्रेणियाँ जावादी  पहाडियाँ, पालकोण्डा श्रेणी, नल्लामाला पहाडियाँ और महेंद्रगिरी पहाडियाँ हैं |

पूर्वी और पश्चिमी घाट नीलगिरी पहाड़ियों में आपस में मिलते हैं |

 प्रश्न: प्रायद्वीपीय पठार के मुख्य  के रूप में भाग मध्य उच्च भू भाग की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए |

उत्तर: प्रायद्वीपीय पठार के मुख्य  भाग मध्य उच्च भू भाग की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं |

     (i)            पश्चिम में अरावली पर्वत इसकी सीमा बनाते है|

   (ii)            इसके दक्षिण में सतपुड़ा पर्वत उच्छिष्ट पठार की श्रेणियों से बना है जिनकी समुद्र तल से ऊँचाई 600 से 900 मीटर है | ये दक्कन के पठार की उत्तरी सीमा बनाते है | ये अवशिष्ट पर्वतों के उत्कृष्ट उदाहरण हैं , जो कि काफी हद तक अपरदित हैं और इनकी श्रंखला टूटी हुई है |

 (iii)            प्रायद्वीपीय पठार के इस भाग का विस्तार जैसलमेर तक है जहाँ यह अनुदैधर्य रेत के टिब्बों और चापाकार (बरखान) रेतीले टिब्बों से ढके हैं |

  (iv)            अपने भूगर्भीय इतिहास में यह क्षेत्र कायांतरित प्रक्रियाओं से गुजर चुका है और कायांतरित चट्टनों, जैसे –संगमरमर, स्लेट और नाइस की उपस्थिति इसका प्रमाण है |

    (v)            समुद्र तल से मध्य उच्च भूभाग की ऊँचाई  700 से 1000 मीटर के बीच है | उत्तर और उत्तर –पूर्व दिशा में इसकी ऊँचाई कम होती चली जाती है |

  (vi)            यमुना की अधिकतर सहायक नदियाँ विंध्याचल और कैमूर श्रेणियों से निकलती हैं |

(vii)            बनास, चम्बल की एकमात्र सहायक नदी है जो पश्चिम में अरावली से निकलती है |

(viii)            मध्य उच्च भूभाग का पूर्वी विस्तार राजमहल की पहाड़ियों तक है | जिसके दक्षिण में स्थित छोटा नागपुर पठार खनिज पदार्थों का भण्डार है |

उत्तरी –पूर्वी पठार

     (i)            वास्तव में यह पठार प्रायद्वीपीय पठार का ही विस्तारित भाग है |

   (ii)            यह माना जाता है कि हिमालय की उत्पत्ति के समय इंडियन प्लेट के उत्तर –पूर्व दिशा में खिसकने के कारण, राजमहल पहाड़ियों और मेघालय के पठार के बीच भ्रंश घाटी बनने से यह अलग हो गया था | बाद में यह नदी द्वारा जमा किए जलोढ़ द्वारा पाट दिया गया |

 (iii)            आज मेघालय और कार्बी ऐंगलोंग पठार इसी कारण से मुख्य प्रायद्वीपीय पठार से अलग –थलग है |

  (iv)            इसमें आवास करने वाली जनजातियों के नाम के आधार पर मेघालय के पठार कों तीन भागों में बाँटा गया है – (i) गारो पहाडियाँ, (ii) खासी पहाडियाँ और (iii) जयंतिया पहाडियाँ |  

    (v)            असम की कार्बी ऐंगलोंग की पहाडियाँ भी इसी का विस्तार है | 

  (vi)            छोटा नागपुर के पठार की तरह मेघालय के पठार भी कोयला, लोहा, सीलिमेनाईट, चूने के पत्थर और यूरेनियम जैसे खनिज पदार्थों का भण्डार है |

(vii)            इस क्षेत्र में अधिकतर वर्षा दक्षिणी –पश्चिमी मानसून से होती है | मेघालय का पठार एक अति अपरदित भूतल है |

(viii)            चेरापूँजी नग्न चट्टानों से ढका स्थल है और यहाँ वनस्पति लगभग नहीं के बराबर है |

प्रश्न: भारतीय मरुस्थल  की मुख्य विशेषताओं का उल्लेख कीजिए |

उत्तर : भारतीय मरुस्थल  की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं |

     (i)            विशाल  भारतीय मरुस्थल अरावली पहाड़ियों से उत्तर –पश्चिम में स्थित है |

   (ii)            यह एक ऊबड़ –खाबड़ भूतल है |

 (iii)            इस पर बहुत से अनुदैधर्य रेतीले टीले और बरखान पाए जाते हैं |

  (iv)            यहाँ पर वार्षिक वर्षा 150 मिलीमीटर से कम होती है | परिणाम स्वरूप यह एक शुष्क और वनस्पति रहित क्षेत्र है |

    (v)            इन्हीं स्थलाकृतिक गुणों के कारण इसे ‘मरुस्थली’ के नाम से जाना जाता है |

  (vi)            यह माना जाता है कि मेसोजोइक कल में यह क्षेत्र समुद्र का हिस्सा था | इसकी पुष्टि आकल में स्थित काष्ठ जीवाश्म पार्क में उपलब्ध प्रमाणों तथा जैसलमेर के निकट ब्रह्मसर के आस पास के समुद्री निक्षेपों से होती है | काष्ठ जीवाश्म की आयु लगभग 18 करोड़ वर्ष आँकी गई है |

(vii)            यद्यपि इस क्षेत्र की भूगार्भिक चट्टान संरचना प्रायद्वीपीय पठार का विस्तार है, तथापि अत्यंत शुष्क दशाओं के कारण इसकी धरातलीय आकृतियाँ भौतिक अपक्षय और पवन क्रिया द्वारा निर्मित है |

(viii)            यहाँ की प्रमुख स्थलाकृतियाँ स्थानांतरित  रेतीले टीले, छत्रक चट्टानें और मरुद्यान (दक्षिणी भाग में) हैं |

  (ix)            ढाल के आधार पर मरुस्थल कों भागों में बाँटा जा सकता है | सिंध की ओर ढाल वाला उत्तरी भाग और कच्छ के रन की ओर ढाल वाला दक्षिणी भाग |

    (x)            यहाँ की अधिकतर नदियाँ अल्पकालिक हैं | मरुस्थल के दक्षिणी भाग में बहने वाली लूनी नदी महत्वपूर्ण है |  अल्प वृष्टि और बहुत अधिक वाष्पीकरण की वजह से इस प्रदेश में हमेशा जल का घाटा रहता है |

  (xi)            कुछ नदियाँ तो थोड़ी दूरी तय करने के बाद ही मरुस्थल में लुप्त हो जाती है | जो अंत:स्थलीय अपवाह का उदाहरण है यहाँ की नदियाँ झील या प्लाया में मिल जाती हैं | इन प्लाया झीलों का जल खारा होता है जिससे नमक बनाया जाता है |

प्रश्न : भारत के तटीय मैदानों का वर्णन कीजिए ?

अथवा

प्रश्न : भारत के पश्चिमी तटीय मैदान तथा पूर्वी तटीय मैदानों में अन्तर स्पष्ट कीजिए |

उत्तर: भारत की तट रेखा बहुत लम्बी है | स्थिति और सक्रिय भू आकृतिक प्रक्रियाओं के आधार पर तटीय मैदान कों दो मुख्य भागों में बाँटा जा सकता है | पश्चिमी तटीय मैदान तथा पूर्वी तटीय मैदान |

पश्चिमी तटीय मैदान

     (i)            पश्चिमी तटीय मैदान जलमग्न तटीय मैदानों के उदाहरण हैं
 ऐसा विश्वास है कि पौराणिक शहर द्वारका, जो किसी समय पश्चिमी तट पर मुख्य भूमि पर स्थित था, अब यह पानी में डूबा हुआ है | जलमग्न होने के कारण पश्चिमी तटीय मैदान एक संकीर्ण पट्टी मात्र है और पत्तनों एवं बंदरगाह विकास के लिए प्राकृतिक परिस्थितियाँ प्रदान करता है |

   (ii)            यहाँ पर स्थित प्राकृतिक बंदरगाहों में कांडला, मजगाँव, जवाहर लाल नेहरु (न्हावा शेवा) पत्तन, मर्मागाओ पत्तन, मैंगलौर और  कोचीन पत्तन शामिल हैं |

 (iii)            उत्तर में गुजरात तट से, दक्षिण में केरल तट तक फैले पश्चिमी तटीय मैदान कों निम्नलिखित भागों में विभाजित किया जा सकता है |

  (iv)            गुजरात का कच्छ और काठियावाड़ तट, महाराष्ट्र का कोंकण तट  और गोवा तट, कर्नाटक तथा केरल का मालाबार तट |

    (v)            पश्चिमी  तटीय मैदान मध्य में संकीर्ण है परन्तु उत्तर और दक्षिण में चौड़े हो जाते हैं |

  (vi)            इस तटीय मैदान में बहने वाली नदियाँ डेल्टा नहीं बनाती हैं |

(vii)            मालाबार तट की विशेष स्थलाकृति ‘कयाल’ (Backwaters) जिसे मछली पकड़ने और अंत:स्थलीय नौकायन के लिए प्रयोग किया जाता है | ये ‘कयाल’ पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र हैं | केरल में हर वर्ष प्रसिद्ध ‘नेहरु ट्राफी वलामकाली’ (नौका दौड़) का आयोजन ‘पुन्नामदा कयाल’ में किया जाता है |  

पूर्वी तटीय मैदान

     (i)            पश्चिमी तटीय मैदान की तुलना में पूर्वी तटीय मैदान चौड़ा है और उभरे हुए तट का उदाहरण है |

   (ii)            इस मैदान के दो भाग है इसके उत्तरी भाग कों उत्तरी सरकार तथा दक्षिणी भाग कों कोरोमण्डल तट कहा जाता है |

 (iii)            पूर्व की ओर बहने वाली और बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियाँ यहाँ लंबे –चौड़े डेल्टा बनाती हैं | इसमें महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी के डेल्टा शामिल है |

  (iv)            उभरा तट होने के कारण यहाँ पत्तन और पोताश्रय कम हैं | यहाँ पर महाद्वीपीय शेल्फ की चौड़ाई 500किलोमीटर है जिसके कारण यहाँ पत्तनों और पोताश्रयों का विकास मुश्किल है |

    (v)            पूर्वी तट के कुछ महत्वपूर्ण पत्तन पारादीप, विशाखापट्टनम, तथा चेन्नई हैं | 

प्रश्न: भारत में बंगाल की खाड़ी में स्थित द्वीप समूहों का वर्णन कीजिए ?

उत्तर: बंगाल की खाड़ी के द्वीप समूह कों अंडमान और निकोबार द्वीप समूह कहा जाता है | इनके मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं |

     (i)            बंगाल की खाड़ी के द्वीप समूह में लगभग 572  द्वीप हैं |

   (ii)            ये द्वीप समूह 6o उत्तर से 14o उत्तर और  92o पूर्व से  94o पूर्व के बीच स्थित हैं |

 (iii)            रिची द्वीप समूह और लम्बरीन्थ द्वीप, यहाँ के दो प्रमुख द्वीप समूह हैं |

  (iv)            उत्तर से दक्षिण में बंगाल की खाड़ी के द्वीपों कों दो श्रेणियों में बाँटा जा सकता है | उत्तर में अंडमान और दक्षिण में निकोबार द्वीप समूह |

    (v)            ये द्वीप समूह, समुद्र में जलमग्न पर्वतों का हिस्सा है | कुछ छोटे द्वीपों की उत्पत्ति ज्वालामुखी से भी जुड़ी है |

  (vi)            बैरन आइलैंड नामक भारत का एकमात्र जीवंत ज्वालामुखी भी निकोबार द्वीप समूह में स्थित है |

(vii)            यह द्वीप असंगठित कंकड पत्थरों और गोलाश्मों से बना हुआ है |

प्रश्न : अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की प्रमुख चोटियों के नाम लिखों |

उत्तर : अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की मुख्य पर्वत चोटियों में निम्नलिखित चोटियाँ शामिल हैं |

(a)    उत्तरी अंडमान  में सैडल चोटी (738 मीटर)

(b)    मध्य अंडमान  में माउंट डियोवोली (515 मीटर)

(c)    दक्षिणी अंडमान में माउंट कोयोब (460 मीटर)

(d)    ग्रेट निकोबार में माउंट थुईल्लर (642 मीटर)  

प्रश्न: किस प्राकृतिक आपदा के कारण 26 दिसम्बर 2004 कों अंडमान और निकोबार द्वीप समूह प्रभावित हुआ था | इसी आपदा से कौन कौन से क्षेत्र प्रभावित हुए थे ?

उत्तर : 26 दिसम्बर 2004 कों अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर एक प्राकृतिक आपदा सुनामी ने कहर ढाया था | इस आपदा के कारण भारत के पूर्वी तट के बहुत से क्षेत्र, जापान का पूर्वी तट, इन्डोनेशिया आदि बहुत अधिक प्रभावित हुए थे | 

प्रश्न: भारत में अरब सागर में स्थित द्वीप समूहों का वर्णन कीजिए ?

उत्तर: अरब सागर में स्थित द्वीप समूह लक्षद्वीप समूह के नाम से जाने जाते हैं | इनके मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं |

     (i)            अरब सागर के द्वीपों में लक्षद्वीप और मिनिकॉय शामिल हैं |

   (ii)            ये द्वीप 8o उत्तर से  12o उत्तर और  71o पूर्व से 74o पूर्व के बीच बिखरे हुए हैं |

 (iii)            ये केरल के तट से 280 किलोमीटर से 480 किलोमीटर दूर स्थित है |

  (iv)            संपूर्ण लक्षद्वीप समूह प्रवाल निक्षेपों से बना है |

    (v)            यहाँ 36 द्वीप हैं | इनमें से 11 पर मानव आवास है |

  (vi)            मिनिकॉय सबसे बड़ा द्वीप है | जिसका क्षेत्रफल 453 किलोमीटर हैं |

(vii)            पूरा द्वीप समूह 10o चैनल द्वारा दो भागों में बाँटा गया है, उत्तर में अमीनी द्वीप समूह और दक्षिण में कनानोरे द्वीप |

(viii)            इस द्वीप समूह पर तूफ़ान निर्मित पुलिन हैं जिस पर अबद्ध गुटिकाएँ, शिंगिल, गोलाश्मकाएँ तथा गोलाश्म पूर्वी तट पर पाए जाते हैं | 

  (ix)            यहाँ स्थित द्वीपों पर संवहनीय वर्षा होती है |  यहाँ पर भूमध्य रेखीय प्रकार की वनस्पति उगती है |

 

NEW POST FOR STUDENTS

Lesson 4 Primary activities Class 12th Geography (Hindi medium)