कक्षा 12वीं
मानव भूगोल के मूल सिद्धांत
अध्याय 6 तृतीयक और चतुर्थक क्रियाकलाप
तृतीयक क्रियाकलाप
वे क्रियाकलाप जिनमे समुदाय या समाज कों व्यक्तिगत या व्यवसायिक सेवाएं प्रदान की जाती है उन्हें तृतीयक क्रियाकलाप कहते है | इस प्रकार की क्रियाओं में लगे लोग प्रत्यक्ष रूप से किसी वस्तु का उत्पादन नहीं करते बल्कि अपनी कार्य कुशलता तथा तकनीकी क्षमता से समाज की सेवा करते है | इसलिए इन क्रियाओं कों सेवा क्षेत्रक में शामिल किया जाता है| इन क्रियाकलापों का संबंध अमूर्त सेवाओं से है | इस प्रकार के क्रियाकलाप में यातायात, चिकित्सा, स्वास्थ्य, व्यापार, संचार, परिवहन तथा प्रशासनिक सेवाएं शामिल की जाती है |
आर्थिक विकास की आरम्भिक अवस्था और विकसित अर्थव्यवस्था में रोजगार की स्थिति
आर्थिक विकास की आरम्भिक अवस्था में लोगों का बड़ा अनुपात प्राथमिक सेक्टर में लगा होता है जिसके अंतर्गत लोग कृषि तथा उससे सम्बन्धित क्रियाकलापों के रूप में अपना रोजगार प्राप्त करते है |
एक विकसित अर्थव्यवस्था में अधिकाँश श्रमिक तृतीयक क्रियाकलापों से रोजगार प्राप्त करते है और तृतीयक क्रियाकलापों में लगे लोगों से अपेक्षाकृत कम लोग द्वितीयक क्षेत्रक (सेक्टर) में कार्यरत होते है |
जनशक्ति या मानव पूँजी का तृतीयक क्रियाकलाप में महत्व
जनशक्ति या मानव पूँजी का तृतीयक क्रियाकलाप या सेवा सेक्टर का महत्वपूर्ण कारक है क्योंकि अधिकांश तृतीयक क्रियाकलापों कों सही ढंग से पूरा करने का कार्य उन लोगों द्वारा होता है जो कुशल श्रमिक, व्यवसायिक दृष्टि से प्रशिक्षित विशेषज्ञ है या परामर्शदाता देने वाले है | अत: तृतीयक क्रियाकलापों का विकास तभी संभव है जब जनशक्ति या मानव पूँजी का निर्माण होता रहे | जन शक्ति या मानव पूँजी तभी एक महत्वपूर्ण कारक है जब उनमें निम्नलिखित विशेताएँ हो |
1) कुशल श्रमिक लोग हो |
2) व्यवसायिक दृष्टि से कुशल लोग हो |
3) विशेषज्ञ प्रशिक्षित लोग हो |
4) परामर्शदाता शिक्षित लोग हो |
द्वितीयक और तृतीयक क्रियाकलाप में अन्तर
द्वितीयक और तृतीयक क्रियाकलाप में मुख्य अन्तर यह है कि तृतीयक क्षेत्रक में सेवाओं से मिलने वाली विशेज्ञता कर्मचारियों के विशिष्टीकृत कौशल, उनके अनुभव और ज्ञान पा आधारित होती है जबकि द्वितीयक क्रियाकलापों में विनिर्माण का आधार उत्पादन तकनीकों, प्रयोग में लायी जाने वाली मशीनरी तथा फैक्ट्री की विभिन्न प्रक्रियायें होती है | तृतीयक क्रियाकलाप का संबंध अमूर्त क्रियाओं से है जबकि द्वितीयक क्रियाकलापों का संबंध मूर्त वस्तुओं के उत्पादन से है |
तृतीयक क्रियाकलापों के प्रकार
तृतीयक क्रियाकलापों कों मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है |
क). व्यापार और वाणिज्य
ख). परिवहन
ग). संचार
घ). सेवाएँ
व्यापार और वाणिज्य
व्यापार का अर्थ और उद्देश्य
वस्तुओं के क्रय तथा विक्रय कों व्यापार कहते है | व्यापार का मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना होता है |
व्यापार के प्रकार
व्यापार दो प्रकार का होता है | फुटकर व्यापार और थोक व्यापार | इनका संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित है |
फुटकर व्यापार
वह व्यापारिक क्रियाकलाप जो उपभोक्ताओं कों वस्तुओं के प्रत्यक्ष विक्रय से सम्बन्धित है उसे फुटकर व्यापार कहते है | अधिकाँश फुटकर व्यापार केवल विक्रय से सम्बन्धित प्रतिष्ठानों (दुकानों) और भंडारों में संपन्न होता है | इनके अलावा कुछ ऐसे भी फुटकर व्यापार के कार्य है जो बिना प्रतिष्ठानों (दुकानों) और भंडारों के ही होते है जैसे फेरी, रेहडी, ट्रक, द्वार से द्वार, डाक आदेश, दूरभाष, स्वचालित बिक्री मशीनें (वे मशीनें जो पैसा डालने पर सामान बहार निकालती है ) तथा इन्टरनेट के द्वारा बिक्री आदि |
थोक व्यापार
बिचौलियों, सौदागरों तथा पूर्तिकारों द्वारा बड़े पैमाने पर किए गए व्यापार कों थोक व्यापार कहते है | यह फुटकर व्यापार के भंडारों द्वरा नहीं | इस प्रकार के व्यापार में सामान कों सीधे ही श्रंखला भंडारों सहित कुछ बड़े भंडार विनिर्माताओं से ख़रीदा जाता है | जो लोग इस तरह सामान कों खरीदतें और बेचते है वे थोक व्यापारी कहलाते है | फुटकर व्यापारी इन बिचौलियों, सौदागरों तथा पूर्तिकारों से ही अपने सामान की पूर्ति करते है | थोक व्यापारी फुटकर विक्रेता (फुटकर भंडारों) कों उधार देते है | थोक व्यापार में पूँजी थोक व्यापारी की होती है और फुटकर व्यापारी अधिकतर थोक विक्रेता की पूँजी पर ही अपने व्यापार कों चलाते है |
व्यापारिक केन्द्र अथवा संग्रहण और वितरण बिंदु
व्यापार का कार्य कस्बों और नगरों में होता है जहाँ पर स्थानीय स्तर पर वस्तु विनिमय से लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मुद्रा विनिमय तक व्यापार संबंधी कार्य होते है | ये कस्बे और नगर व्यापार के लिए संग्रहण और वितरण बिंदु के रूप में विकसित हो जाते है | इन केन्द्रों कों ही व्यापारिक केन्द्र अथवा संग्रहण और वितरण बिंदु कहते है |
व्यापारिक केन्द्रों के प्रकार
व्यापारिक केन्द्रों कों उनकी स्थिति के आधार पर दो प्रकार के विपणन केन्द्रों में बाँटा जाता है |
क). ग्रामीण विपणन केन्द्र
ख). नगरीय विपणन केन्द्र
इन दो प्रकारों के अतिरिक्त ग्रामीण क्षेत्रों में समय अंतराल पर स्थानीय बाजार लगते है | जिन्हें ग्रामीण आवधिक बाजार कहते है | जो व्यापारिक केन्द्रों का तीसरा प्रकार है |
इनका संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित है |
क). ग्रामीण विपणन केन्द्र
वे विपणन केन्द्र जो निकटवर्ती ग्रामीण बस्तियों की आवश्यकताओं की पूर्ति या उनका पोषण करते है उन्हें ग्रामीण विपणन केन्द्र कहा जाता है | ये अर्ध-नगरीय केन्द्र होते है | ये केन्द्र अत्यंत अल्पवर्धित प्रकार के व्यापारिक केन्द्रों के रूप में ग्रामीण क्षेत्रों की सेवा करते है | ये स्थानीय संग्रहण और वितरण के केन्द्र होते है | इन केन्द्रों पर व्यक्तिगत और व्यावसायिक सेवाएँ सुविकसित नहीं होती | इन विपणन केन्द्रों में से अधिकाँश केन्द्रों में मंडियाँ (थोक बाजार) और फुटकर व्यापार के क्षेत्र भी होते है | ये स्वयं में नगरीय केन्द्र नहीं है फिर भीं ग्रामीण लोगों की अधिक माँग वाली वस्तुओं और सेवाओं कों उपलब्ध कराने वाले महत्वपूर्ण केन्द्र के रूप में कार्य करते है |
क). ग्रामीण आवधिक बाजार (कालिक मंडियाँ)
ग्रामीण क्षेत्रों में जहाँ नियमित बाजार नहीं होते वहाँ पर विभिन्न समय अंतरालों पर जैसे एक सप्ताह में एक बार (सप्ताहिक) या पन्द्रह दिनों में एक बार (पाक्षिक) बाजार लगते है | ग्रामीण आवधिक बाजार (कालिक मंडियाँ) कहते है |इन क्षेत्रों में आसपास के सभी गाँवों के लोग आकर समय-समय पर अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करते है | इस प्रकार के बाजार एक निश्चित तिथि अथवा दिन पर आयोजित होते है और एक निश्चित समयावधि पर एक स्थान से दूसरे स्थान पर लगते रहते है | इस प्रकार इन बाजारों के दुकानदार एक विस्तृत क्षेत्र की सेवा करते है और सभी दिन व्यस्त रहते है |
ख). नगरीय विपणन केन्द्र
ये नगरीय क्षेत्रों में स्थित होते है और नगरवासियों की सेवा करते है | इन केन्द्रों में अधिक विशिष्टीकृत नगरीय सेवाएँ मिलती है | इन केन्द्रों में साधारण वस्तुओं के अतिरिक्त विशिष्ट वस्तुएँ और सेवाएँ भी उपलब्ध होती है | नगरीय केन्द्र विनिर्मित पदार्थों के साथ-साथ विशिष्टिकृत बाजार भी उपलब्ध कराते है | जैसे श्रम बाजार, आवासन (आवास सुविधाएँ), अर्ध-निर्मित और निर्मित उत्पादों का बाजार आदि | इनके अतिरिक्त इन केन्द्रों में शैक्षिक संस्थाओं और व्यवसायिकों की सेवाएँ - जैसे अध्यापक, वकील, परामर्शदाता, चिकित्सक, दाँतों का डॉक्टर और पशु चिकित्सक आदि उपलब्ध होते है |
उपभोक्ता सहकारी
ये उपभोक्ता वस्तुओं से सम्बन्धित है | उपभोक्ता सहकारी फुटकर व्यापार में वृहत स्तर पर सबसे पहले नवाचार लाने वाले समुदाय थे |
विभागीय भंडार
ये बड़े आकार के भंडार होते है | ये वस्तुओं और सेवाओं की खरीद और भंडारों के विभिन्न अनुभागों (भंडारों के छोटे हिस्से) में बिक्री के सर्वेक्षण के लिए विभागीय प्रमुखों की नियुक्ति करते है और उन भंडारों के उत्तरदायित्व और प्राधिकार उन्हीं कों सौंप देते है |
श्रंखला भंडार
इनके नाम से ही स्पष्ट होता है कि ये भंडारों की श्रंखला होती है | इनमें मितव्ययता (कम खर्च) से व्यापारिक माल ख़रीदा जाता है | कई बार ये भंडार अपने निर्देशों पर सीधे ही वस्तुओं का निर्माण करा लेते है | इन भंडारों की यह विशेषता होती है कि ये विभिन्न कार्यों में कुशल विशेषज्ञ नियुक्त कर लेते है | ये विशेषज्ञ इतने कुशल होते है कि एक भंडार के अनुभव के परिणामों कों अनेक भंडारों में लागू करने की योग्यता रखते है |
परिवहन का अर्थ
परिवहन वह व्यवस्था है जिसमें वस्तुओं तथा व्यक्तियों कों एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जाता है | दूसरे शब्दों में हम कह सकते है कि परिवहन एक ऐसी सेवा या सुविधा है जिसमें व्यक्तियों, विनिर्मित माल तथा सम्पतियों कों भौतिक रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जाता है |
परिवहन का महत्व
परिवहन मनुष्य की गतिशीलता की मूलभूत आवश्यकता कों पूरा करने के लिए निर्मित एक संगठित उद्योग है | परिवहन किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी है | देश का आर्थिक विकास काफी हद तक परिवहन पर ही आश्रित होता है |इसे देश के औद्योगिक विकास की रीढ़ परिवहन कहा जाता है | क्योंकि उद्योगों के लिए कच्चा माल और उनका विनिर्मित माल उपभोक्ता तक पहुँचाने का कार्य परिवहन तंत्र पर ही निर्भर होता है | अत: स्पष्ट है कि एक सक्षम परिवहन तंत्र किसी भी देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है |
आधुनिक समाज में तीव्र और सक्षम परिवहन तन्त्र की आवश्यकता (परिवहन के कार्य )
परिवहन का मुख्य कार्य तथा व्यक्तियों कों एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना है | उद्योगों के लिए कच्चा माल पहुँचाने और उनका विनिर्मित माल उपभोक्ता तक पहुँचाने का कार्य परिवहन द्वारा ही होता है | अत: आधुनिक समाज में उत्पादन, वितरण और उपभोग में सहायता देने के लिए तीव्र और सक्षम परिवहन तन्त्र की आवश्यकता है | परिवहन एक जटिल व्यवस्था है इसकी प्रत्येक अवस्था में परिवहन के द्वारा पदार्थ का मूल्य बढता चला जाता है |
परिवहन दूरी
परिवहन दूरी कों मापने के तीन तरीके है |
1. किलोमीटर दूरी अथवा मार्ग लम्बाई
मार्ग की लम्बाई की वास्तविक दूरी कों मार्ग लम्बाई या किलोमीटर दूरी कहते है | इसे किलोमीटर में मापते हैं |
2. समय दूरी
मार्ग में लगने वाले समय कों समय दूरी कहते है |
3. लागत दूरी
यात्रा मेंहोने वाले खर्च (यात्रा की लागत) कों लागत दूरी कहते है |
परिवहन के चयन के आधार
परिवहन का चयन करते समय निम्नलिखित कों आधार माना जाता है |
क). परिवहन में लगने वाले समय (समय दूरी) कों
ख). परिवहन में लगने वाली लागत (लागत दूरी) कों
समकाल रेखाएँ
मानचित्र पर समान समय पर पहुँचने वाले स्थानों कों मिलाने वाली रेखा कों समकाल रेखाएँ कहते है |
परिवहन सेवाओं कों प्रभावित करने वाले कारक
परिवहन सेवाओं कों दो मुख्य कारक प्रभावित करते है |
1. परिवहन की माँग
2. परिवहन के मार्ग
इनका संक्षिप्त वर्णन निन्मलिखित है |
1. परिवहन की माँग
परिवहन की माँग जितनी अधिक होगी परिवहन सेवाएँ उतनी ही अधिक विकसित होगी | परिवहन की माँग जनसंख्या के आकार पर निर्भर करती है | जनसंख्या का आकार जितना बड़ा होगा परिवहन की माँग उतनी ही अधिक होगी और परिवहन सेवाएँ उतनी ही विकसित होगी |
2. परिवहन के मार्ग
परिवहन हमेशा सुनिश्चित मार्गों पर ही होता है | ये मार्ग जितने अधिक सुनुश्चित और विकसित होंगे परिवहन भी उतना ही अधिक विकसित होगा | परिवहन के मार्गों का विकास निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता है |
क). नगरों, कस्बों और गाँवों के बीच संबंध
ख). औद्योगिक केन्द्रों और कच्चे माल के स्त्रोतों के बीच संबंध
ग). विभिन्न क्षेत्रों के बीच व्यापार का प्रारूप
घ). विभिन्न क्षेत्रों के बीच भू-दृश्य (धरातल) की प्रकृति
ङ). जलवायु का प्रकार
च). मार्ग की लम्बाई पर आने वाली रुकावटों कों दूर करने के लिए उबलब्ध तकनीक और उनपर खर्च होने वाली मुद्रा
जाल तंत्र
विभिन्न स्थानों के बीच जब विभिन्न प्रकार की परिवहन व्यवस्थाएँ विकसित होती है तो वे स्थान इनसे से जुड़कर परिवहन व्यवस्थाओं का जाल बना देते है | जिसे परिवहन जाल या जाल तंत्र कहते है | जाल-तंत्र का निर्माण नोड और योजक के द्वारा होता है | जब अनेक योजक तथा नोड मिलते है तो एक जाल तन्त्र बनता है | एक विकसित जाल तंत्र में जितने अधिक योजक होंगे वह जाल तंत्र उतना ही विकसित है और जाल तन्त्र के स्थान अधिक सुसंबंद्ध (अच्छी तरह से जुड़ें हुए) होंगे |
नोड (शीर्ष)
नोड वे स्थान या बिन्दु है जो या तो गंतव्य स्थल हो या उद्गम स्थल या दो अथवा दो से अधिक मार्गों का संधि स्थल (जोड़ने वाला स्थान) हो या किसी मार्ग के सहारे बड़ा कस्बा हो |
योजक (किनारा)
दो या अधिक नोडों या शीर्षों कों जोड़ने वाली सड़क कों योजक या किनारा कहते है | एक विकसित जाल तंत्र में जितने अधिक योजक होंगे वह जाल तंत्र उतना ही विकसित है और जाल तन्त्र के स्थान अधिक सुसंबंद्ध (अच्छी तरह से जुड़ें हुए) होंगे |
संचार का अर्थ
शब्दों, संदेशों तथ्यों और विचारों का आदान-प्रदान ही संचार कहलाता है |
संचार सेवाएँ
शब्दों, संदेशों तथ्यों और विचारों का प्रेषण (आदान-प्रदान )करने वाली सेवाएँ संचार सेवाएँ कहलाती है |
संचार पथ
वे माध्यम जिनके द्वारा संचार का आदान प्रदान किया जाता है संचार पथ कहलाते है |
लेखन के आविष्कार के बाद संदेशो कों संरक्षित रखा जाने लगा और परिवहन के साधनों का प्रयोग संचार पथ के रूप में प्रयोग किया जाने लगा | वास्तव में हाथ, पशुओं, पक्षियों, नाव सड़क मार्ग, रेल मार्ग तथा वायु मार्ग द्वारा ही संचार का परिवहन होता है | यही कारण है कि परिवहन के सभी साधनों कों संचार के पथ भी कहा जाता है | जहाँ पर परिवहन जाल –तंत्र अधिक विकसित है वहाँ पर संचार का फैलाव भी सरल हो जाता है |
मोबाइल दूरभाष, इन्टरनेट और उपग्रहों के विकास के कारण संचार परिवहन मुक्त हो रहा है | लेकिन पराने संचार माध्यम सस्ते है और सभी लोगों कि पहुँच में है इसी कारण अभी इनका महत्व कम नहीं हुआ है | उदाहरण के लिए वर्तमान समय में भी पुरे विश्व की डाक का विशाल मात्रा में निपटारा डाकघरों द्वारा ही होता है |
संचार के साधनों के प्रकार
संचार के साधनों दो प्रकार के होते है |
क). व्यक्तिगत संचार के साधन
संचार के वे साधन जिनके द्वारा एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति या समूह से अपने विचारों का आदान प्रदान करता है उन्हें व्यक्तिगत संचार के साधन कहते है |
ख). जनसंचार
संचार के वे साधन जिनके द्वारा एक विशाल जन समूह कों एक साथ कोई समाचार या सन्देश दिया जाता है उन्हें जनसंचार के साधन कहते है |
दूरसंचार सेवाओं द्वारा संचार सेवाओं में क्रान्ति
दूरसंचार का विकास विद्युतीय प्रौद्योगिकी के विकास पर आधारित है | इस प्रौद्योगिकी की सहायता से संदेशों कों शीघ्रता से भेजा जा सकता है | जिससे संचार व्यवस्था में क्रान्ति आ गयी है | इस क्रान्ति के परिणाम स्वरूप जो संदेश या समाचार पहले सप्ताह में पहुँचते थे वे अब कुछ ही मिनटों में पहुँच जाते है | मोबाइल दूरभाष जैसी नयी प्रौद्योगिकी ने तो किसी भी समय कहीं पर भी संचार कों तत्काल और प्रत्यक्ष बना दिया है | इस तकनीक के आने के बाद तार प्रेषण, मोर्स कूट और टैलेक्स जैसी तकनीके अब लगभग भूतकाल की वस्तुएँ बन गयी है |
जनसंचार के प्रमुख साधन
1. रेडियो और दूरदर्शन (टेलीविजन)
रेडियो और दूरदर्शन समाचारों, चित्रों दूरभाष कालों का पूरे विश्व के श्रोताओं कों प्रसारण करते है | संपूर्ण विश्व के लोगों कों सूचनाएं देने के कारण इन्हें जनसंचार के माध्यम कहा जाता है | ये विज्ञापन और मनोरंजन के लिए महत्वपूर्ण साधन है |
2. समाचार पत्र तथा पत्रिकाएँ
समाचार पत्र तथा पत्रिकाएँ विश्व के कोने-कोने से विभिन्न घटनाओ का प्रसारण करने में सक्षम होते है | ये प्रिंट मिडिया के रूप में लोगों तक विभिन्न प्रकार की सूचनाएँ पहुंचाते है |
3. उपग्रह संचार
उपग्रह संचार पृथ्वी और अंतरिक्ष से सूचना का प्रसारण करता है | इसके द्वारा अनेक प्रकार की जानकारी प्राप्त होती है जिसमें मौसम संबंधी जानकारी सबसे महत्वपूर्ण है |
4. इन्टरनेट
इन्टरनेट ने वैश्विक संचार तंत्र में क्रांति ला दी है क्योंकि इसके द्वरा हम विभिन्न प्रकार की सूचनाएं तुरंत प्राप्त कर लेते है |आधुनिक समय में यह सूचनाओं के सागर के रूप में मानव के लिए कार्यरत है |
सेवाएँ
सेवाओं से अभिप्राय उन कार्यों से है जो लोगों कों उनका मूल्य देने पर उपलब्ध होते है | दूसरे शब्दों में सेवाएँ वे कार्य है जिनका अपना मूल्य होता है और उन्हीं लोगों कों उपलब्ध होती है जो उनकी कीमत अदा करते है | अर्थात सेवाएँ भुगतान कर सकने वाले व्यक्तिगत उपभोक्ताओं कों उपलब्ध होती है |
स्तर के आधार पर सेवाओं के प्रकार
क). निम्नस्तरीय सेवाएँ
पंसारी की दूकान, धोबी घाट, मोची का कार्य, नाई का कार्य, माली का कार्य , सब्जी बेचने की दुकाने आदि निम्नस्तरीय सेवाएँ है | ये सेवाए समान्य सेवाएँ होती है और इनमें अधिक लोग लगे होते है |
ख). उच्चस्तरीय सेवाएँ
लेखाकार (एकाउंटेंट), परामर्श दाता और काय चिकित्सक (सर्जन) जैसी सेवाएँ उच्चस्तरीय सेवाएँ कहलाती है | इनमें कम लोग लगे होते है | ये विशिष्ट सेवाएँ होती है |
श्रम के तरीके के आधार पर सेवाओं के प्रकार
क). शारीरिक श्रम वाली सेवाएँ
वे सेवाएँ जिनमें शारीरिक श्रम अधिक किया जाता है वे शारीरिक श्रम वाली सेवाएँ कहलाती है | जैसे धोबी, माली, नाई आदि |
ख). मानसिक श्रम वाली सेवाएँ
वे सेवाएँ जिनमें मानसिक श्रम किया जाता है वे मानसिक श्रम वाली सेवाएँ कहलाती है | जैसे अध्यापक , वकील, संगीतकार, परामर्शदाता आदि |
सेवाओं से सम्बन्धित अन्य विशेताएँ
1) ऐसी सेवाएँ जिनका पर्यवेक्षण और निष्पादन प्राय: सरकारें या कंपनियाँ करती है | ये सेवाएँ महत्वपूर्ण सेवाओं होती है और अब नियमित हो रही है | जैसे महामार्गों और पुलों का निर्माण और उनका अनुरक्षण (देखभाल) संबंधी सेवाएँ, शिक्षा की पूर्ति अथवा पर्यवेक्षण की सेवाएँ तथा ग्राहक सेवा केन्द्र आदि इसी प्रकार की सेवाएँ है |
2) कुछ ऐसी सेवाएँ भी है जिनके लिए केन्द्र और राज्य सरकारें निगमों का गठन करती है | जैसे परिवहन, दूरसंचार, ऊर्जा (विद्युत आपूर्ति) तथा जलापूर्ति की सेवाएँ |
3) कुछ सेवाओं कों व्यावसायिक सेवाओं के रूप में जाना जाता है | क्योंकि ये व्यवसाय के रूप में की जाती है | जैसे स्वास्थ्य सेवा, विधि (कानून ) संबंधी सेवा, प्रबंधन की सेवाएँ आदि |
4) सेवाओं कों प्रदान करने वाले स्थान के आधार पर भी सेवाएँ बाजार के अंदर या दूर स्थित हो होती है | जैसे शॉपिंग मॉल, मल्टीप्लेक्स, रेस्तरां और होटल आदि की सेवाएँ शहर के केन्द्रीय व्यापार क्षेत्र (CBD) के अंदर या उसके आस-पास ही स्थापित हो जाती है जबकि गोल्फ कोर्स के लिए अधिक जगह चाहिए जो शहर के बीच की भूमि (CBD) से कम दाम मिल सके | इसलिए वे शहर से दूर होते है |
अनौपचारिक या गैर औपचारिक क्षेत्र की सेवाओं में लगे श्रमिक (असंगठित श्रमिक वर्ग)
दैनिक जीवन में काम कों सुविधाजनक बनाने के लिए बहुत से अकुशल लोगों के द्वारा व्यक्तिगत सेवाएँ उपलब्ध करवाई जाती है | ये लोग काम की तलाश में ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों में आते है | ये अकुशल होते है और जैसे मोची, गृहपाल (चौकीदार), खानसामा (खाना बनाने वाला ) तथा माली आदि घरेलू सेवाओं के लिए कुछ लोग इन्हें नौकरी पर रख लेते है | इस तरह के कार्यों में लगे लोग असंगठित होते है | इसलिए इन्हें अनौपचारिक या गैर औपचारिक क्षेत्र की सेवाओं में लगे श्रमिक कहा जाता है | इन लोगों कों कम वेतन पर रखा जाता है |
असंगठित वर्ग की सेवाओं में ही मुम्बई में डब्बावाला की सेवाएँ बहुत प्रसिद्ध है | क्योंकि ये लोग खाने के टिफिन घर से लोगों के ऑफिस तक पहुँचाने का कार्य बहुत ही अच्छे तरीके से करते है | इस सेवा में लगे लोग रोजाना 1,75,000(एक लाख पचहेतर हजार) उपभोक्ताओं कों अपनी सेवा देते है |
तृतीयक क्रियाकलापों में लगे लोग (आर्थिक विकास के साथ साथ तृतीयक क्रियाकलापों का बढ़ता महत्व )
आज अधिकाँश लोग तृतीयक क्रियाकलापों या सेवा कार्यों में संलग्न है | जिससे सभी समाजों में सेवाएँ उपलब्ध होती है | लेकिन विश्व में सेवा क्रियाकलापों में लगे लोगों का वितरण समान नहीं है | आर्थिक विकास के साथ-साथ सेवा क्षेत्रक का महत्व भी बढ़ता जाता है | जबकि प्राथमिक और द्वितीयक क्रियाकलापों का महत्व कम होता जाता है | इसी कारण अधिक विकसित देशों में कार्यशील जनसँख्या का अधिकाँश प्रतिशत सेवा कार्यों में संलग्न है जबकि अल्पविकसित देशों में 10 प्रतिशत से भी कम लोग सेवा कार्यों में लगे है | उदाहरण के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे विकसित देशों में 75 प्रतिशत से भी अधिक कर्मी (काम करने वाले लोग) सेवा कार्यों में लगे है | इससे हमें पता चलता है कि आर्थिक विकास के साथ-साथ सेवा क्षेत्रक में रोजगार के अवसर बढ़ने लगता है | जबकि प्राथमिक और द्वितीयक क्रियाकलापों में रोजगार के अवसर या तो कम होते जाते है या अपरिवर्तित रहते है |
पर्यटन का अर्थ
पर्यटन एक यात्रा है जो व्यापार के लिए नहीं बल्कि मनोरंजन अथवा प्रमोद के उद्देश्य के लिए की जाती है |
पर्यटन का आर्थिक महत्व
पर्यटन का क्षेत्र बड़ी तेजी से उन्नति कर रहा है | कुल पंजीकृत रोजगारों तथा कुल राजस्व (सकल घरेलू उत्पाद) की दृष्टि से यह विश्व का सबसे बड़ा तृतीयक क्रियाकलाप बन गया है | क्योंकि यह 25 करोड लोगों कों रोजगार प्रदान करता है और सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 40 प्रतिशत भाग इसी से प्राप्त होता है | इसके अतिरिक्त पर्यटकों के आवास, भोजन, परिवहन मनोरंजन तथा विशेष दुकानों जैसी सेवाओं कों उपलब्ध कराने के लिए अनेक व्यक्तियों कों रोजगार मिलता है |
इतना ही नहीं पर्यटन के विकसित होने पर देश की आधारभूत संरचना (आधारभूत ढाँचा) भी मजबूत होता है | इसके अलावा यह विभिन्न उद्योगों, फुटकर व्यापार तथा स्थानीय शिल्प उद्योगों कों भी पोषित करता है |
कुछ प्रदेशों में पर्यटन ऋतुनिष्ठ (मौसमी) होता है क्योंकि अवकाश की अवधि अनुकूल मौसमी दशाओं पर निर्भर करती है | जबकि कुछ प्रदेशों पूरे वर्ष पर्यटकों कों आकृषित करते है | ऐसे प्रदेशों में पर्यटन वर्षपर्यंत (सारा साल) होता है |
प्रमुख पर्यटक प्रदेश
विश्व में विभिन्न प्रकार के पर्यटक स्थल पाए जाते है जो पर्यटकों कों आकर्षित करते है उनमें से प्रमुख प्रदेश निम्नलिखित है |
A. यूरोप के वे क्षेत्र जो भूमध्य सागर के चारों ओर स्थित है |
B. भारत का पश्चिमी तटीय प्रदेश
C. विभिन्न देशो के पर्वतीय क्षेत्रों में पाए जाने वाले शीत कालीन खेल प्रदेश
D. विभिन्न मनोहर दृश्यभूमियाँ, राष्ट्रीय उद्यान आदि |
E. विभिन्न स्मारक स्थल, विरासत स्थल और सांस्कृतिक गतिविधियों के केन्द्र , ऐतिहासिक नगर आदि |
पर्यटन कों प्रभावित करने वाले कारक
माँग तथा परिवहन दो ऐसे महत्वपूर्ण कारक है जो पर्यटन कों प्रभावित करते है |
माँग
अन्य आर्थिक क्रियाओं की तरह ही पर्यटन के विकास के लिए माँग की आवश्यकता होती है | पिछली शताब्दी से जीवन में सुधार तथा फुरसत के समय में बढोतरी होने से लोग विश्राम करने के लिए अवकाश (पर्यटन) पर जाते है | जिससे पर्यटन के लिए माँग बढ़ी है \
परिवहन
परिवहन पर्यटन के विकास के लिए आधार प्रदान करता है |परिवहन सुविधाओं में सुधार के साथ नए पर्यटन क्षेत्रों का आरम्भ हुआ और पुराने पर्यटन स्थल अधिक महत्वपूर्ण होते जाते है | उदाहरण के लिए अच्छी सड़क प्रणाली द्वारा कार के द्वारा यात्रा आसान हो जाती है |हाल ही के वर्षों में वायु परिवहन अधिक लोकप्रिय हो रहा है | क्योंकि वायु परिवहन के द्वारा कुछ ही घंटों में हम विश्व के किसी भी कोने में पहुँच जाते है | इसके अंदर भी पैकज व्यवस्था ने लागत घटा दी है जिससे पर्यटन कों अत्यधिक प्रोत्साहन प्राप्त हुआ है |
पर्यटन के आकर्षण (लोग पर्यटन के लिए क्यों आकर्षित होते है?)
लोग पर्यटन इसलिए करते है क्योंकि विभिन्न क्षेत्रो में कुछ विशेष आकर्षण होते है | जहाँ पर लोगों कों मनोरंजन के साथ-साथ विश्राम का अवसर प्राप्त होता है | कुछ प्रमुख आकर्षण निम्नलिखित है |
A. जलवायु
जलवायु का पर्यटन के लिए विशेष महत्व है | ठंडे प्रदेशों में अधिकाँश लोग पुलिन विश्राम के लिए ऊष्ण व धूपवाले मौसम की उपेक्षा रखते है इसलिए गर्म प्रदेशों में पर्यटन करते है | जबकि गर्म प्रदेशों के लोग ठंडे प्रदेशों में पर्यटन करना पसंद करते है | जैसे दक्षिणी यूरोप और भूमध्यसागरीय क्षेत्रों में पर्यटन का महत्व इसलिए है की अवकाश के मौसम में यूरोप के अन्य भागों की अपेक्षा भूमध्यसागरीय क्षेत्रों की जलवायु में लगभग निरंतर ऊँचा तापमान रहता है, धूप की अवधि अधिक होती है और निम्न वर्षा की दशाएँ होती है | शीतकालीन अवकाश का आनंद लेने वाल लोगों के लिए इसी तरह की जलवायु की आवश्यकता होती है | इसी प्रकार स्कींग करने वाले लोगों के लिए हिमावरण होना आवश्यक है जो ठंडी जलवायु वाले प्रदेशों में ही पाए जाते है |
B. भू दृश्य
कई पर्यटकों के लिए भू दृश्य का बड़ा महत्व है| क्योंकि कई लोग आकर्षित करने वाले पर्यावरण में अवकाश का समय बिताना पसंद करते है | कई पर्यटक प्रकृति के निकट रहना पसंद करते है |जिसका अर्थ है लोग पर्वत, झीलें, दर्शनीय समुद्री तट और ऐसा भू दृश्य जो मनुष्य द्वारा बिलकुल भी परिवर्तित नही किया है उन स्थानों पर रहना पसंद करते है |
C. इतिहास एवं कला
किसी भी क्षेत्र का इतिहास और वहाँ की कला पर्यटकों के लिए महत्वपूर्ण आकर्षण होते है | इतिहास और कला में रूचि रखने वाले पर्यटक प्राचीन और सुंदर नगरों, पुरातत्व के स्थानों पर जाते है किलों (फोर्ट), महलों, गिरजाघरों और अन्य ऐतिहासिक स्थलों कों देखकर आनंद उठाते है |
D. संस्कृति और अर्थव्यवस्था
संस्कृति और अर्थव्यवस्था उन पर्यटकों कों आकर्षित करती है जो मानवजातीय और स्थानीय रीतियों को पसंद करने वाले है | यदि कोई पर्यटन स्थल पर्यटकों की जरूरतों कों सस्ते दामों पर पूरा करता है तो वह प्रदेश बहुत लोकप्रिय हो जाता है | पर्यटकों का “घरों में रुकना” एक लाभदायक व्यापार बनकर उभरा है | जैसे गोवा में हेरिटेज होम्स तथा कर्नाटक में मैडीकेरे और कुर्ग आदि |
चिकित्सा पर्यटन
जब चिकित्सा व्यापार कों अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन गतिविधि से संबद्ध कर दिया जाता है तो इसे सामान्यत: चिकित्सा पर्यटन कहते है |
भारत में चिकित्सा पर्यटन (भारत में समुद्रपार के रोगियों के लिए स्वास्थ्य सेवाएँ)
भारत बड़ी तेजी से चिकित्सा पर्यटन की दृष्टि से अग्रणी देश बन कर उभरा है |इसका मुख्य कारण यह है कि भारत के महानगरों में अवस्थित उच्च कोटि के अस्पताल विश्वस्तरीय उपचार बहुत ही कम कीमत पर उपलब्ध कराते है | भारत में विभिन्न प्रकार की बीमारियों के उपचार के लिए पश्चिमी विकसित देशों की तुलना में एक-चौथाई खर्च भी नहीं होता है | इसी कारण पश्चिमी देशों से रोगी वायुयान द्वारा यात्रा करने के बाद भी सस्ता इलाज कराकर जाते है | भारत के अतिरिक्त सिंगापुर, थाईलैंड और मलेशिया जैसे विकासशील देशों कों चिकित्सा पर्यटन से अनेक लाभ प्राप्त हुए है |
समुद्रपार के रोगियों के लिए चिकित्सा पर्यटन के अतिरिक्त चिकित्सा परीक्षणों और आँकडों के निर्वचन के बाह्यस्त्रोत्न (ओउटसोर्सिंग) के प्रति भी झुकाव पाया जाता है | जैसे भारत, स्विट्ज़रलैंड और ऑस्ट्रेलिया के अस्पताल विकिरण बिम्बों के निर्वचन और प्राश्राव्य परीक्षणों तक की विशिष्ट चिकित्सा सुविधाओं कों उपलब्ध करा रहे है | बाह्यस्त्रोत्न (ओउटसोर्सिंग) के द्वारा यदि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवता में सुधार किया जाता है और विशिष्ट सेवाएँ उपलब्ध कराई जाए तो बाह्यस्त्रोत्न रोगियों के लिए अत्यधिक लाभ दायक होता है |
चतुर्थक क्रियाकलाप का अर्थ
वे क्रियाकलाप जो अनुसंधान और विकास पर केंद्रित होते है |और जो विशिष्टीकृत ज्ञान, प्रौद्योगिक कुशलता और प्रशासकीय सामर्थ्य से सम्बन्धित सेवाओं के उन्नत नमूने के रूप में देखे जाते है | चतुर्थक क्रियाकलाप कहलाते है | ये बहुत ही जटिल और विशिष्ट प्रकार के क्रिया कलाप है | इनका संबंध शिक्षा, सूचना, शोध तथा विकास से है | ये नए प्रकार के क्रियाकलाप है, इनका विकास पिछले कुछ वर्षों में अधिक हुआ है |
चतुर्थक क्रियाकलाप की विशेताएँ
क). इन क्रियाकलापों ने तृतीयक क्रियाकलापों की तरह ही प्राथमिक और द्वितीयक क्रियालापों से रोजगार कों प्रतिस्थापित कर दिया है | अर्थात लोग प्राथमिक और द्वितीयक क्रियालापों से लोग चतुर्थक क्रियाकलापों में आ रहे है |
ख). विकसित अर्थव्यवस्थाओं में आधे से अधिक श्रमिक विशिष्टीकृत ज्ञान से सम्बन्धित क्षेत्र में कार्यरत है |
ग). कार्यालय भवनों, प्रारंभिक विद्यालयों, विश्वविद्यालयी कक्षाओं, अस्पातालों व डॉक्टरों के कार्यालयों, रंगमंचों, लेखाकार्य और दलाली (कमीशन एजेंट) की फर्मों में काम करने वाले कर्मचारी इस वर्ग की सेवाओं से संलग्न है |
घ). पारस्परिक कोष (म्यूचुअल फंड) प्रबंधकों से लेकर टैक्स (कर) परामर्शदाताओं, सॉफ्टवेर सेवाओं की माँग में उच्च वृद्धि हुई है | जिससे इस क्रियाकलाप का आर्थिक महत्व बढ़ने लगा है |
ङ). इन क्रियाकलापों कों भी कुछ तृतीयक क्रियाकलापों की तरह बाह्य स्त्रोतन (आउटसोर्सिंग ) के माध्यम से किया जा सकता है |
च). ये क्रियाकलाप संसाधनों से बंधी हुई नहीं होती |
छ). ये क्रियाकलाप पर्यावरण से अधिक प्रभावित नहीं होती |
ज). ये क्रियाकलाप बाज़ार द्वारा स्थानीकृत नहीं होती |
पंचम क्रियाकलाप
वे क्रियाकलाप या सेवाएँ जिनका संबंध उन सेवाओं से होता है, जो नवीन तथा विचारों कों रचना उनके पुनर्गठन तथा व्याख्या, आंकड़ों की व्याख्या तथा प्रयोग एवं नई प्रौद्योगिकी का मूल्यांकन पर केंद्रित होती है उन्हें पंचम क्रियाकलाप कहते है | ये तृतीयक क्रियाकलापों का ही उप-विभाग है |
पंचम क्रियाकलापों की विशेषताएँ
क). ये उच्चतम स्तर के निर्णय लेने वाले तथा नीतियों का निर्माण करने वाले क्रियाकलाप होते है |
ख). ये क्रियाकलाप चतुर्थक क्रियाकलापों से थोड़ी ही अलग होती है |
ग). इन क्रियाकलापों कों स्वर्ण कॉलर व्यवसाय कहा जाता है |
घ). ये नवीन तथा विचारों कों रचना उनके पुनर्गठन तथा व्याख्या, आंकड़ों की व्याख्या तथा प्रयोग एवं नई प्रौद्योगिकी का मूल्यांकन पर केंद्रित होती है |
ङ). इस प्रकार के कार्य करने वाले लोग वरिष्ठ कार्यकारियों, सरकारी अधिकारियों, अनुसंधान वैज्ञानिकों, वित्त एवं विधि परामर्शदाताओं आदि विशेष और उच्च वेतन वाली कुशलताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं |
च). उन्नत अर्थव्यवस्थाओं की संरचना में इन क्रियाकलापों में काम करने वाले लोगों का महत्व इनकी संख्या से अधिक होता है |
बाह्य स्त्रोतन
दक्षता कों सुधराने और लागतों कों घटाने के लिए किसी बाहरी अभिकरण (संस्था) कों काम सौपना ही बाह्यस्त्रोतन या आउट सोर्सिंग (out sourcing) कहलाता है |
अपतरन या ऑफशोरिंग का अर्थ
यदि दक्षता कों सुधराने और लागतों कों घटाने के लिए बाह्यस्त्रोतन के द्वारा समुद्रपार के स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया जाता है तो इसे अपतरन या ऑफशोरिंग ( Off shoring) कहते है | बाह्यस्त्रोतन और अपतरन दोनों का प्रयोग एक साथ किया जाता है |
बाह्यस्त्रोतन के अंतर्गत किए जाने वाले कार्य
सूचना प्रौद्योगिकी, मानव संसाधन संबंधी क्रियाकलाप, ग्राहक सहायता सेवाएँ (कस्टमर केयर सेवाएँ ) तथा कॉल सेंटर सेवाएँ शामिल की जाती है | कई बार बाह्य स्त्रोतन के द्वारा विनिर्माण तथा आभियांत्रिकी (इंजिनयरिंग) से सम्बन्धित कियाकलाप भी किए जाते है |
बाह्यस्त्रोतन के अंतर्गत विकसित देशों कि अपेक्षा विकासशील देशों में की जाने वाली क्रियाएँ
कुछ क्रियाएँ बहायास्त्रोतन के द्वारा विकसित देशों कि अपेक्षा विकासशील देशों में की जाती है क्योंकि विकाशशील देशों में विकसित देशों की अपेक्षा कम पारिश्रमिक (लागत) पर अंग्रेजी भाषा में अच्छी निपुणता रखने वाले सूचना प्रौद्योगिकी में कुशल कर्मचारी उपलब्ध हो जाते है | आँकड़ा प्रक्रमण सूचना प्रौद्योगिकी से सम्बन्धित एक इसी प्रकार की सेवा है |जिसे आसानी से एशियाई, पूर्वी यूरोपीय और अफ़्रीकी देशों में क्रियान्वित किया जा सकता है | उदाहरण के लिए हैदराबाद अथवा मनीला में स्थापित एक कंपनी भौगोलिक सूचना तंत्र की तकनीक पर आधारित परियोजना पर संयुक्त राज्य अमेरिका अथवा जापान जैसे देशों के लिए काम करती है |
श्रम संबंधी कार्य कों समुद्रपार क्रियान्वित करने से, चाहे वह भारत, चीन और यहाँ तक कि अफ्रीका का कम सघन जनसँख्या वाला देश बोत्सवाना हो , इन सभी देशों में ऊपरी लागत बहुत कम लगती है | जिससे यह सेवा इन देशों में करवाने से लाभदायक हो जाती है |
बाह्यस्त्रोतन के लाभ
1) बाह्यस्त्रोतन के परिणाम स्वरूप भारत, चीन, पूर्वी यूरोप, इस्त्रायल, फिलीपिंस और कोस्टारिका में बड़ी संख्या में कॉल सेंटर खुले है | इससे इन देशों में नए काम उत्पन्न हुए है |
2) बाह्यस्त्रोतन उन देशों में आ रहा है जहाँ पर सस्ता और कुशल श्रम उपलब्ध हो | अत: यह सस्ता पड़ता है और कार्य की लागत कम होने से लाभकारी है |
3) ये देश उत्प्रवास वाले देश है | बाह्यस्त्रोतन द्वारा काम उपलब्ध होने पर यहाँ के लोगों का उत्प्रवास रुकेगा |
4) इसके अलावा जिन देशों के द्वारा बाह्यस्त्रोतन के माध्यम से होता है वे अपने यहाँ काम तलाश कर रहे लोगों का प्रतिरोध झेल रहे है उनका प्रतिरोध भी कम हो जायेगा |
बाह्यस्त्रोतन के विकल्प
पंचम सेवाओं की नवीन प्रवृत्तियों के अंतर्गत बाह्य स्त्रोतन एक मुख्य प्रक्रिया है | इस प्रक्रिया के विकल्प निम्नलिखित है |
a) ज्ञान प्रक्रमण बाह्य स्त्रोतन (Knowledge Processing Outsourcing)
b) होम सोरिंग (Home Shoring)
c) व्यवसाय प्रक्रमण बाह्यस्त्रोतन (Business Processing Outsourcing)
ज्ञान प्रक्रमण बाह्यस्त्रोतन की विशेषताएँ या
ज्ञान प्रक्रमण बाह्यस्त्रोतन (KPO) का व्यवसाय प्रक्रमण बाह्यस्त्रोतन (BPO) से अलग होने के कारण
a) ज्ञान प्रकरण बाह्यस्त्रोतन में उच्च कुशल कर्मी शामिल होते है |
b) ज्ञान प्रक्रमण बाह्यस्त्रोतन सूचना प्रेरित ज्ञान का बाह्यस्त्रोतन है |
c) ज्ञान प्रकरण बाह्यस्त्रोतन कंपनियों कों अतिरिक्त व्यावसायिक अवसरों कों उत्पन्न करने में सक्षम बनाता है |
d) ज्ञान प्रकरण बाह्यस्त्रोतन में विभिन्न क्रियाकलाप किए जाते है जिनमें अनुसंधान और विकास क्रियाएँ, ई लर्निग, व्यवसाय अनुसंधान, बौद्धिक संपदा अनुसंधान, कानूनी व्यवसाय तथा बैंकिंग सेक्टर के क्रियाकलाप आते है |
अंकीय विभाजक
सूचना और प्रौद्योगिकी पर आधारित विकास से मिलने वाले अवसरों के आधार पर हम देखते है कि विश्व के देशों का वितरण असमान है | इसके कारण विभिन्न देशों में आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक भिन्नताएँ स्पष्ट दिखाई देती हैं | कोई देश कितनी शीघ्रता से अपने लोगों को सूचना और प्रौद्योगिकी कों पहुँचा रहा है और उनका कितना लाभ उन्हें दे रहा है | इस आधार पर देखे तो हम देखते है कि इस प्रौद्योगिकी के कारण विकसित देश काफी आगे निकल गए हैं | जबकि विकासशील देश सामान्य रूप से इस दिशा में आगे बढ़ रहे है | जिसके कारण विकाशसील देश बहुत पीछे हो गए हैं | सूचना और प्रौद्योगिकी के आधार पर विकसित देशो के आगे निकलने और विकाशशील देशों के बहुत अधिक पिछड़ने कों ही अंकीय विभाजक कहते है |
यह अंकीय विभाजक विशाल देशों के आंतरिक भागों में भी पाया जाता है | उदाहरण के लिए भारत तथा रूस जैसे विशाल देशों में महानगरीय केन्द्रों में में सूचना और प्रौद्योगिकी अत्यधिक विकसित है | जबकि इन्ही महानगरीय केन्द्रों के परिधिस्थ (आस पास के क्षेत्रों ) के ग्रामीण क्षेत्र अभी बहुत पीछे है | जो यह बताता है कि महानगरीय केन्द्र अंकीय विश्व के साथ बेहतर संबंध और पहुँच बनाए हुए है |
कार्य की प्रकृति के आधार पर कॉलर के रंग
विभिन्न आर्थिक क्रियाएँ उनके कार्य की प्रकृति के आधार पर विभिन्न रंगों के कॉलर के रूप में जानी जाती है | जो निम्नलिखित है |
कार्य की प्रकृति | कॉलर का रंग |
प्राथमिक क्रियाकलाप करने वाले कर्मी | लाल कॉलर |
उद्योगों में वास्तविक उत्पादन से सम्बन्धित कर्मी | नीला कॉलर |
उच्च प्रौद्योगिकी उद्योगों में अति कुशल कर्मी | श्वेत कॉलर |
पंचम क्रियाकलाप करने वाले कर्मी | स्वर्ण कॉलर |
अभ्यास के प्रश्न उत्तर
प्रश्न: निम्न में से कौन सा एक तृतीयक क्रियाकलाप है ?
क). खेती | ख). बुनाई | ग). व्यापार | घ). आखेट |
उत्तर: व्यापार
प्रश्न: निम्नलिखित क्रियाकलापों में से कौन सा एक द्वितीयक सेक्टर का क्रियाकलाप नहीं है ?
क). इस्पात प्रगलन | ख). वस्त्र निर्माण | ग). मछली पकडना | घ). टोकरी बुनना |
उत्तर: मछली पकडना
प्रश्न: निम्नलिखित में से कौन- सा एक सेक्टर दिल्ली, मुम्बई, चेन्नई और कोलकता में सर्वाधिक रोजगार प्रदान करता है ?
क). प्राथमिक | ख). द्वितीयक | ग). पर्यटन | घ). सेवा (तृतीयक सेक्टर ) |
उत्तर: सेवा (तृतीयक सेक्टर)
प्रश्न: वे काम जिनमें उच्च परिमाण और स्तर वाले अन्वेषण सम्मलित होते है , कहलाते है ?
क). द्वितीयक क्रियाकलाप | ख). पंचम क्रियाकलाप | ग). चतुर्थ क्रियाकलाप | घ). प्राथमिक क्रियाकलाप |
उत्तर: चतुर्थ क्रियाकलाप
प्रश्न: निम्नलिखित में से कौन सा क्रियाकलापों चतुर्थ सेक्टर से सम्बन्धित है ?
क). संगणक विनिर्माण | ख). विश्वविद्यालयी अध्यापन | ग). कागज और कच्ची लुगदी निर्माण | घ). पुस्तकों का मुद्रण |
उत्तर: विश्वविद्यालयी अध्यापन
प्रश्न: निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा एक सत्य नहीं है ?
क). बाह्यस्त्रोतन दक्षता कों बढाता है और लागतों कों घटाता है |
ख). कभी-कभार आभियांत्रिकी (इंजिनयरिंग) तथा विनिर्माण कार्यों की भी बाह्यस्त्रोतन की जा सकती है |
ग). बी॰ पी॰ ओज (BPO’S) के पास के॰ पी॰ ओज (KPO’S) की तुलना में बेहतर व्यावसायिक अवसर होते है |
घ). कामों के बाह्यस्त्रोतन करने वाले देशों में काम की तलाश करने वालों में असंतोष पाया जाता है |
उत्तर: बी॰ पी॰ ओज (BPO’S) के पास के॰ पी॰ ओज (KPO’S) की तुलना में बेहतर व्यावसायिक अवसर होते है |
प्रश्न: फुटकर व्यापार सेवा कों स्पष्ट कीजिये |
उत्तर: वह व्यापारिक क्रियाकलाप जो उपभोक्ताओं कों वस्तुओं के प्रत्यक्ष विक्रय से सम्बन्धित है उसे फुटकर व्यापार कहते है | अधिकाँश फुटकर व्यापार केवल विक्रय से सम्बन्धित प्रतिष्ठानों (दुकानों) और भंडारों में संपन्न होता है | इनके अलावा कुछ ऐसे भी फुटकर व्यापार के कार्य है जो बिना प्रतिष्ठानों (दुकानों) और भंडारों के ही होते है जैसे फेरी, रेहडी, ट्रक, द्वार से द्वार, डाक आदेश, दूरभाष, स्वचालित बिक्री मशीनें (वे मशीनें जो पैसा डालने पर सामान बहार निकालती है ) तथा इन्टरनेट के द्वारा बिक्री आदि |
प्रश्न: चतुर्थक सेवाओं का वर्णन कीजिए |
उत्तर: वे क्रियाकलाप जो अनुसंधान और विकास पर केंद्रित होते है |और जो विशिष्टीकृत ज्ञान, प्रौद्योगिक कुशलता और प्रशासकीय सामर्थ्य से सम्बन्धित सेवाओं के उन्नत नमूने के रूप में देखे जाते है | चतुर्थक क्रियाकलाप कहलाते है | ये बहुत ही जटिल और विशिष्ट प्रकार के क्रिया कलाप है | इनका संबंध शिक्षा, सूचना, शोध तथा विकास से है | ये नए प्रकार के क्रियाकलाप है, इनका विकास पिछले कुछ वर्षों में अधिक हुआ है |
प्रश्न: विश्व में चिकित्सा पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से उभरते हुए देशों के नाम लिखिए |
उत्तर : जब चिकित्सा व्यापार कों अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन गतिविधि से संबद्ध कर दिया जाता है तो इसे सामान्यत: चिकित्सा पर्यटन कहते है | भारत बड़ी तेजी से चिकित्सा पर्यटन की दृष्टि से अग्रणी देश बन कर उभरा है | भारत के अतिरिक्त सिंगापुर, थाईलैंड और मलेशिया जैसे विकासशील देशों कों चिकित्सा पर्यटन से अनेक लाभ प्राप्त हुए है |
प्रश्न: अंकीय विभाजक क्या है ?
उत्तर : सूचना और प्रौद्योगिकी पर आधारित विकास से मिलने वाले अवसरों के आधार पर हम देखते है कि विश्व के देशों का वितरण असमान है | इसके कारण विभिन्न देशों में आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक भिन्नताएँ स्पष्ट दिखाई देती हैं | कोई देश कितनी शीघ्रता से अपने लोगों को सूचना और प्रौद्योगिकी कों पहुँचा रहा है और उनका कितना लाभ उन्हें दे रहा है | इस आधार पर देखे तो हम देखते है कि इस प्रौद्योगिकी के कारण विकसित देश काफी आगे निकल गए हैं | जबकि विकासशील देश सामान्य रूप से इस दिशा में आगे बढ़ रहे है | जिसके कारण विकाशसील देश बहुत पीछे हो गए हैं | सूचना और प्रौद्योगिकी के आधार पर विकसित देशो के आगे निकलने और विकाशशील देशों के बहुत अधिक पिछड़ने कों ही अंकीय विभाजक कहते है |
प्रश्न : आधुनिक आर्थिक विकास में सेवा सेक्टर की भूमिका और वृद्धि की चर्चा कीजिए |
आधुनिक आर्थिक विकास में सेवा सेक्टर की भूमिका
सेवाओं का अपना मूल्य होता है जो उन्ही लोगों कों उपलब्ध होती है जो इनका मूल्य चुकाते है | प्रत्येक देश की अर्थव्यवस्था में सेवा सेक्टर वर्तमान समय में बहुत तेजी से अपना प्रभुत्व बढा रहा है | किसी भी देश के आधुनिक आर्थिक विकास में सेवा सेक्टर का महत्वपूर्ण निभाता है | क्योंकि आधुनिक युग में सेवा सेक्टर के द्वारा अनेक प्रकार की सेवाएँ उपलब्ध कराई जाती है | जिनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, मनोरंजन, परिवहन तथा व्यापार आदि शामिल होती है | सेवा सेक्टर की बढती भूमिका कों निम्न तथ्यों से समझा जा सकता है |
a. रोजगार के अवसरों की उपलब्धता
रोजगार के अवसरों की उपलब्धता होने के कारण सेवा क्षेत्रक का महत्व भी बढ़ता जाता है | जबकि प्राथमिक और द्वितीयक क्रियाकलापों का महत्व कम होता जाता है | अधिक विकसित देशों में कार्यशील जनसँख्या का अधिकाँश प्रतिशत सेवा कार्यों में संलग्न है जबकि अल्पविकसित देशों में 10 प्रतिशत से भी कम लोग सेवा कार्यों में लगे है | उदाहरण के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे विकसित देशों में 75 प्रतिशत से भी अधिक कर्मी (काम करने वाले लोग) सेवा कार्यों में लगे है | इससे हमें पता चलता है कि आर्थिक विकास के साथ-साथ सेवा क्षेत्रक में रोजगार के अवसर बढ़ने लगता है |
b. देश की आय में बढ़ोतरी
सेवा सेक्टर के द्वारा विभिन्न आर्थिक गतिविधियाँ की जाती है जिससे जिससे देश की आय में बढ़ोतरी होती है | विभिन्न प्रकार के उच्च स्तरीय सेवा कार्यों, परिवहन , पर्यटन तथा बाह्य स्त्रोतन के द्वारा आर्थिक लाभ प्राप्त होता है |
c. अन्य सेवाओं की उत्पादन क्षमता में बढोतरी
सेवाओं के द्वारा लोगो की उत्पादन क्षमता ही नहीं बढती बल्कि दूसरे अन्य कार्यों में भी अधिक उत्पादन करने में ये सेवाएँ सहायक होती है | जो देश के आर्थिक विकास कों मजबूती प्रदान करती है | जैसे अच्छी परिवहन तथा संचार की सुविधा, चिकित्सा , शिक्षा , बैंकिंग और बीमा आदि लोगो की कार्य क्षमता कों बढाती है |
सेवा क्षेत्रक में वृद्धि
आधुनिक समय में तकनीक के साथ साथ सेवा सेक्टर में भी विभिन्न प्रकार की सेवाओं में वृद्धि हुई है | सेवा सेक्टर में हुई वृद्धि कों हम निम्न प्रकार से समझ सकते है |
1) ऐसी सेवाएँ जिनका पर्यवेक्षण और निष्पादन प्राय: सरकारें या कंपनियाँ करती है | ये सेवाएँ महत्वपूर्ण सेवाओं होती है और अब नियमित हो रही है | जैसे महामार्गों और पुलों का निर्माण और उनका अनुरक्षण (देखभाल) संबंधी सेवाएँ, शिक्षा की पूर्ति अथवा पर्यवेक्षण की सेवाएँ तथा ग्राहक सेवा केन्द्र आदि इसी प्रकार की सेवाएँ है |
2) कुछ ऐसी सेवाएँ भी बढ़ने लगी है जिनके लिए केन्द्र और राज्य सरकारें निगमों का गठन करती है | जैसे परिवहन, दूरसंचार, ऊर्जा (विद्युत आपूर्ति) तथा जलापूर्ति की सेवाएँ |
3) कुछ सेवाओं कों व्यावसायिक सेवाओं के रूप में विकास हो रहा है | जैसे स्वास्थ्य सेवा, विधि (कानून ) संबंधी सेवा, प्रबंधन की सेवाएँ आदि |
4) कुछ क्रियाएँ बहायास्त्रोतन के द्वारा विकसित देशों कि अपेक्षा विकासशील देशों में की जाती है इससे भी सेवा सेक्टर में वृद्धि हो रही है |
प्रश्न: परिवहन तथा संचार सेवाओं की सार्थकता कों विस्तार पूर्वक स्पष्ट कीजिए |
उत्तर : किसी भी देश के आर्थिक विकास में परिवहन तथा संचार सेवाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहता है | इन सेवाओं का जितना अधिक विकास होगा देश का विकास उतनी ही तेजी से होगा | इन दोनों ही सेवाओं के द्वारा देश के औद्योगिक क्षेत्र का विकास तेजी से होता है | वाणिज्य तथा व्यपार कों भी गतिशीलता इन्ही से मिलती है | परिवहन और संचार देश के विकास की रीढ़ होते है | इन दोनों की सार्थकता कों निम्न प्रकार से समझा जा सकता है |
परिवहन की सार्थकता
परिवहन वह व्यवस्था है जिसमें वस्तुओं तथा व्यक्तियों कों एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जाता है | दूसरे शब्दों में हम कह सकते है कि परिवहन एक ऐसी सेवा या सुविधा है जिसमें व्यक्तियों, विनिर्मित माल तथा सम्पतियों कों भौतिक रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जाता है |
परिवहन मनुष्य की गतिशीलता की मूलभूत आवश्यकता कों पूरा करने के लिए निर्मित एक संगठित उद्योग है | परिवहन किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी है | देश का आर्थिक विकास काफी हद तक परिवहन पर ही आश्रित होता है |इसे देश के औद्योगिक विकास की रीढ़ परिवहन कहा जाता है | क्योंकि उद्योगों के लिए कच्चा माल और उनका विनिर्मित माल उपभोक्ता तक पहुँचाने का कार्य परिवहन तंत्र पर ही निर्भर होता है | अत: स्पष्ट है कि एक सक्षम परिवहन तंत्र किसी भी देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है |
संचार की सार्थकता
शब्दों, संदेशों तथ्यों और विचारों का आदान-प्रदान ही संचार कहलाता है | शब्दों, संदेशों तथ्यों और विचारों का प्रेषण (आदान-प्रदान )करने वाली सेवाएँ संचार सेवाएँ कहलाती है |
वे माध्यम जिनके द्वारा संचार का आदान प्रदान किया जाता है संचार पथ कहलाते है | लेखन के आविष्कार के बाद संदेशो कों संरक्षित रखा जाने लगा और परिवहन के साधनों का प्रयोग संचार पथ के रूप में प्रयोग किया जाने लगा | वास्तव में हाथ, पशुओं, पक्षियों, नाव सड़क मार्ग, रेल मार्ग तथा वायु मार्ग द्वारा ही संचार का परिवहन होता है | यही कारण है कि परिवहन के सभी साधनों कों संचार के पथ भी कहा जाता है | जहाँ पर परिवहन जाल –तंत्र अधिक विकसित है वहाँ पर संचार का फैलाव भी सरल हो जाता है |
संचार की सार्थकता (महत्व)कों हम निम्नलिखित तथ्यों से समझ सकते है |
क). दूरसंचार प्रौद्योगिकी की सहायता से संदेशों कों शीघ्रता से भेजा जा सकता है | जिससे संचार व्यवस्था में क्रान्ति आ गयी है | इस क्रान्ति के परिणाम स्वरूप जो संदेश या समाचार पहले सप्ताह में पहुँचते थे वे अब कुछ ही मिनटों में पहुँच जाते है | मोबाइल दूरभाष जैसी नयी प्रौद्योगिकी ने तो किसी भी समय कहीं पर भी संचार कों तत्काल और प्रत्यक्ष बना दिया है |
ख). रेडियो और दूरदर्शन समाचारों, चित्रों दूरभाष कालों का पूरे विश्व के श्रोताओं कों प्रसारण करते है | संपूर्ण विश्व के लोगों कों सूचनाएं देने के कारण इन्हें जनसंचार के माध्यम कहा जाता है | ये विज्ञापन और मनोरंजन के लिए महत्वपूर्ण साधन है |
ग). समाचार पत्र तथा पत्रिकाएँ विश्व के कोने-कोने से विभिन्न घटनाओ का प्रसारण करने में सक्षम होते है | ये प्रिंट मिडिया के रूप में लोगों तक विभिन्न प्रकार की सूचनाएँ पहुंचाते है |
घ). उपग्रह संचार पृथ्वी और अंतरिक्ष से सूचना का प्रसारण करता है | इसके द्वारा अनेक प्रकार की जानकारी प्राप्त होती है जिसमें मौसम संबंधी जानकारी सबसे महत्वपूर्ण है |
ङ). इन्टरनेट ने वैश्विक संचार तंत्र में क्रांति ला दी है क्योंकि इसके द्वरा हम विभिन्न प्रकार की सूचनाएं तुरंत प्राप्त कर लेते है |आधुनिक समय में यह सूचनाओं के सागर के रूप में मानव के लिए कार्यरत है |
प्रश्न: परिवहन दूरी मापने के तरीकों कौन से है ?
उत्तर : परिवहन दूरी कों मापने के तीन तरीके है |
क). किलोमीटर दूरी अथवा मार्ग लम्बाई
मार्ग की लम्बाई की वास्तविक दूरी कों मार्ग लम्बाई या किलोमीटर दूरी कहते है | इसे किलोमीटर में मापते हैं |
ख). समय दूरी
मार्ग में लगने वाले समय कों समय दूरी कहते है |
ग). लागत दूरी
यात्रा मेंहोने वाले खर्च (यात्रा की लागत) कों लागत दूरी कहते है |
प्रश्न: परिवहन के चयन के आधार कौन से है ?
उत्तर : परिवहन का चयन करते समय निम्नलिखित कों आधार माना जाता है |
ग). परिवहन में लगने वाले समय (समय दूरी) कों
घ). परिवहन में लगने वाली लागत (लागत दूरी) कों
प्रश्न: समकाल रेखाएँ किसे कहते है ?
उत्तर : मानचित्र पर समान समय पर पहुँचने वाले स्थानों कों मिलाने वाली रेखा कों समकाल रेखाएँ कहते है |
प्रश्न: चिकित्सा पर्यटन किसे कहते है ?
उत्तर : जब चिकित्सा व्यापार कों अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन गतिविधि से संबद्ध कर दिया जाता है तो इसे सामान्यत: चिकित्सा पर्यटन कहते है |
प्रश्न: KPO से पूरा नाम क्या है?
उत्तर :ज्ञान प्रक्रमण बाह्यस्त्रोतन
प्रश्न: BPO से पूरा नाम क्या है?
उत्तर : व्यवसाय प्रक्रमण बाह्यस्त्रोतन
प्रश्न : बाह्य स्त्रोतन क्या अर्थ है ?
उत्तर : दक्षता कों सुधराने और लागतों कों घटाने के लिए किसी बाहरी अभिकरण (संस्था) कों काम सौपना ही बाह्यस्त्रोतन या आउट सोर्सिंग (out sourcing) कहलाता है |
प्रश्न : अपतरन या ऑफशोरिंग का क्या अर्थ है ?
उत्तर : यदि दक्षता कों सुधराने और लागतों कों घटाने के लिए बाह्यस्त्रोतन के द्वारा समुद्रपार के स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया जाता है तो इसे अपतरन या ऑफशोरिंग ( Off shoring) कहते है | बाह्यस्त्रोतन और अपतरन दोनों का प्रयोग एक साथ किया जाता है |
प्रश्न : बाह्यस्त्रोतन के अंतर्गत किए जाने वाले कार्य कौन से है ?
उत्तर : सूचना प्रौद्योगिकी, मानव संसाधन संबंधी क्रियाकलाप, ग्राहक सहायता सेवाएँ (कस्टमर केयर सेवाएँ ) तथा कॉल सेंटर सेवाएँ शामिल की जाती है | कई बार बाह्य स्त्रोतन के द्वारा विनिर्माण तथा आभियांत्रिकी (इंजिनयरिंग) से सम्बन्धित कियाकलाप भी किए जाते है |
प्रश्न : CBD का पूरा नाम लिखो ?
उत्तर : केन्द्रीय व्यापार क्षेत्र
प्रश्न : जनसंचार के प्रमुख साधन कौन से है ?
उत्तर : जनसंचार के प्रमुख साधन रेडियो और दूरदर्शन (टेलीविजन). समाचार पत्र तथा पत्रिकाएँ , उपग्रह संचार और इन्टरनेट है |
प्रश्न : जाल तंत्र से आप क्या समझते है ?
विभिन्न स्थानों के बीच जब विभिन्न प्रकार की परिवहन व्यवस्थाएँ विकसित होती है तो वे स्थान इनसे से जुड़कर परिवहन व्यवस्थाओं का जाल बना देते है | जिसे परिवहन जाल या जाल तंत्र कहते है | जाल-तंत्र का निर्माण नोड और योजक के द्वारा होता है | जब अनेक योजक तथा नोड मिलते है तो एक जाल तन्त्र बनता है | एक विकसित जाल तंत्र में जितने अधिक योजक होंगे वह जाल तंत्र उतना ही विकसित है और जाल तन्त्र के स्थान अधिक सुसंबंद्ध (अच्छी तरह से जुड़ें हुए) होंगे |
प्रश्न : नोड (शीर्ष) से आप क्या समझते है ?
नोड वे स्थान या बिन्दु है जो या तो गंतव्य स्थल हो या उद्गम स्थल या दो अथवा दो से अधिक मार्गों का संधि स्थल (जोड़ने वाला स्थान) हो या किसी मार्ग के सहारे बड़ा कस्बा हो |
प्रश्न : योजक (किनारा) से आप क्या समझते है ?
दो या अधिक नोडों या शीर्षों कों जोड़ने वाली सड़क कों योजक या किनारा कहते है | एक विकसित जाल तंत्र में जितने अधिक योजक होंगे वह जाल तंत्र उतना ही विकसित है और जाल तन्त्र के स्थान अधिक सुसंबंद्ध (अच्छी तरह से जुड़ें हुए) होंगे |