जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन
कक्षा- 12 (भूगोल)
भारत
की जनसंख्या
भारत विश्व के अधिकतम
जनसंख्या वाले देशों में से एक है | भारत विश्व के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के 2.4 प्रतिशत
भाग पर विस्तृत है जबकि यहाँ पर विश्व की 17.5 प्रतिशत
जनसंख्या निवास करती है |
सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की
जनसंख्या 121.02 करोड़ है | जनसंख्या के हिसाब से भारत चीन के बाद दूसरा स्थान है | भारत
की कुल जनसंख्या उत्तर अमेरिका, दक्षिण अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की कुल जनसंख्या से
भी अधिक है |
भारत
की विशाल जनसंख्या का प्रभाव
विशाल
जनसंख्या के कारण बहुत अधिक समस्याएँ सामने आती है | जो निम्नलिखित हैं |
1)
प्राय: यह तर्क दिया जाता है कि इतनी बड़ी
जनसंख्या निश्चित तौर पर देश के सीमित संसाधनों पर दबाव डालती है |
2)
देश में अनेक सामाजिक आर्थिक समस्याओं के लिए
उत्तरदायी है |
3)
जनसंख्या के अधिक बोझ के कारण गरीबी एक विकराल
रूप धारण कर रही है |
4)
विशाल जनसंख्या ने पर्यावरण संबंधी कई
समस्याएँ उत्पन्न कर दी हैं |
भारत
में जनसंख्या की गणना (जनगणना) या
जनसंख्या के आँकड़ों के स्त्रोत
भारत
में जनसंख्या से संबंधित आँकडों कों प्रति दस वर्ष के बाद होने वाली जनगणना के
द्वारा एकत्रित किए जाते है | भारत में पहली जनगणना 1872 ई०
में हुई थी | लेकिन यह पूर्ण नहीं थी | भारत की पहली सम्पूर्ण जनगणना 1881 ई० में हुई थी | हमारे देश की अंतिम जनगणना सन् 2011 में हुई थी | अब तक कुल 14 संपूर्ण जनगणना हो चुकीं है | अगली (पंद्रहवी)
जनगणना सन् 2021 में होनी है |
भारत
में जनसंख्या वितरण
सन् 2011 की
जनगणना के अनुसार भारत की कुल जनसंख्या 121.02 करोड़ है | भारत की इतनी विशाल जनसंख्या समान रूप से देश में वितरित नहीं
है बल्कि असमान रूप से देश के विभिन्न भागों में वितरित है |
देश
के विशाल आकार वाले राज्यों की जनसंख्या कों देखते है तो पता चलता है कि उत्तरप्रदेश
भारत में सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है
यहाँ सन् 2011 की जनगणना के अनुसार
19.95 करोड़ लोग रहते हैं | 11.23 करोड़ जनसंख्या के साथ
महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर है | बिहार में 10.38 करोड़
जनसंख्या निवास करती है | इसके बाद पश्चिम बंगाल में 9.13 करोड़
तथा आंध्रप्रदेश की जनसंख्या 2011 की जनगणना के अनुसार 8.46 करोड़
थी | ये पाँच बड़े राज्यों में देश की लगभग 50 % (आधी)
जनसंख्या पाई जाती है | देश के दस राज्यों उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र , बिहार,बंगाल
पश्चिम बंगाल आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, मध्यप्रदेश, राजस्थान कर्नाटक तथा गुजरात
भारत की लगभग 76 प्रतिशत जनसंख्या रहती है |
जबकि विशाल आकार होते हुए भी कुछ
राज्य ऐसे है जिनमें बहुत ही कम जनसंख्या रहती है | जैसे सन् 2011 की जनगणना के
अनुसार ही जम्मूकश्मीर में देश की केवल 1.04 %, अरुणाचलप्रदेश में देश की 0.84% तथा उत्तराखंड में केवल 0.83 % जनसंख्या ही
निवास करती है | क्षेत्रफल की हिसाब से देश के सबसे बड़े राज्य राजस्थान में कुल
जनसंख्या का केवल 5.67% हिस्सा ही रहता है |
सिक्किम सबसे कम जनसंख्या वाला राज्य
है जहाँ लगभग
6 लाख लोग ही रहते है | जो देश की जनसंख्या का केवल 0.05% जनसंख्या ही है | इसके अलावा अधिकाशं उत्तरी पूर्वी राज्यों जैसे नागालैंड,
मणिपुर, मिजोरम, मेघालय, त्रिपुरा तथा अरुणाचल प्रदेश राज्यों में देश की बहुत ही
कम जनसंख्या निवास करती है |
केन्द्र शासित
प्रदेशों में दिल्ली में सबसे अधिक जनसंख्या मिलती है | जबकि अंडमान और निकोबार
द्वीप समूह तथा लक्षद्वीप समूह में बहुत ही कम संख्या में लोग रहते हैं |
जनसंख्या
का विषम स्थानिक वितरण जनसंख्या और देश के भौतिक, समाजिक, आर्थिक और ऐतिहासिक
कारकों के बीच घनिष्ठ संबंध
या
भारत
में जनसंख्या के असमान वितरण के कारण
भारत में
जनसंख्या का वितरण असमान है | जनसंख्या का यह विषम स्थानिक वितरण देश की जनसंख्या
और देश के भौतिक (भौगोलिक ), समाजिक, आर्थिक और ऐतिहासिक कारकों के बीच घनिष्ठ
संबंध प्रकट करता है | ये कारक जनसंख्या
के वितरण कों अत्यधिक प्रभावित करते है | इनका वर्णन निम्न प्रकार से है |
जनसंख्या के
वितरण कों प्रभावित करने वाले भौतिक कारक
भौतिक
कारकों में धरातल, जलवायु तथा जल की उपलब्धता आदि प्रमुख है | ये कारक जनसंख्या के
वितरण कों काफी प्रभावित करते हैं | जैसे भारत के उत्तरी मैदान, डेल्टाओं और तटीय
मैदानों में जनसंख्या का अनुपात दक्षिणी तथा मध्य भारत के राज्यों के आंतरिक जिलों
में अधिक है क्योंकि मैदानी भाग पर लोग अधिक रहना पसंद करते है |
हिमालय, उत्तरी-पूर्वी राज्यों में
विरल जनसंख्या पाई जाती है | जो की पर्वतीय क्षेत्रों में शामिल है | इसी तरह
राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्रों में भी विरल जनसंख्या मिलती है |
हिमालय
पर्वतीय राज्यों में खास तौर पर हिमाचल तथा जम्मू कश्मीर में विषम जलवायु के कारण
बहुत ही कम लोग रहते है | इसी तरह राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्रों में भी जलवायु
की विषमता तथा जल की कमी लोगों के रहने के
उपयुक्त स्थान नहीं उपलब्ध होने देती है अत: वहाँ भी जनसंख्या विरल है |
कुछ पठारी
क्षेत्रों में भी भौतिक कारकों के करण जैसे जल की की कमी से जनसंख्या अपेक्षाकृत
कम मिलती है |
इन क्षेत्रों में नहरों के विकास तथा आर्थिक
विकास संबंधी कर उपलब्ध कराने के बाद जनसंख्या का अनुपात उच्च होता जा रहा है |
जैसे राजस्थान में इंदिरा गाँधी नहर से
सिंचाई की व्यवस्था के बढ़ने और झारखण्ड के छोटा नागपुर के पठार में खनिजों एवं
ऊर्जा के अपार भण्डारों के कारण इन राज्यों में मध्यम से उच्च जनसंख्या अनुपात
मिलता है |
जनसंख्या के
वितरण कों प्रभावित करने वाले समाजिक, आर्थिक और ऐतिहासिक कारक
इन कारकों में स्थाई कृषि उद्भव और विकास, मानव
बस्ती के प्रतिरूप, परिवहन जाल तंत्र का विकास, औद्योगिकरण और नगरी करण महत्वपूर्ण
हैं |
समान्यत: नदी
घाटियों के मैदानों, तथा तटीय क्षेत्रों में अधिक जनसंख्या पाई जाती है | क्योंकि
इन इलाकों में मानव बस्तियों के आरम्भिक इतिहास और परिवहन जाल तंत्र के विकास के
कारण जनसंख्या का सांद्रण उच्च बना हुआ है
|
दिल्ली,
कोलकाता, मुंबई, बंगलौर, पुणे, अहमदाबाद, चेन्नई और जयपुर के नगरीय क्षेत्र औद्योगि
विकास तथा नगरीकरण के कारण बड़ी संख्या में ग्रामीण लोगों कों अपनी और आकृषित कर
रहे है | इसलिए इन क्षेत्रों में जनसंख्या का सांद्रण उच्च बना हुआ है |