Monday, August 8, 2022

WATER TRANSPORT (Merits, Main Ocean Routes, Suez Canal and Panama Canal) Lesson 8 Transport and Communication, Class 12th Geography

    

     

जलमार्ग

जल परिवहन मानव द्वारा प्रयोग किए जाने वाले यातायात के साधनों में से सबसे प्राचीन साधनों में से एक है | प्राचीन समय से ही वस्तुओं और यात्रियों के परिवहन के लिए नदियों, झीलों तथा समुद्री मार्गों का प्रयोग करता अ रहा है | यह परिवहन का सबसे सस्ता साधन है |

जल मार्गों  के प्रकार

जल मार्गों कों दो मुख्य प्रकारों में विभक्त किया जा सकता है | (1) समुद्री जलमार्ग या महासागरीय जलमार्ग  (2) आंतरिक जलमार्ग

जलमार्गों के लाभ

    जलमार्गों के निम्नलिखित लाभ हैं | 

1)      जल परिवहन बहुत ही सस्ता साधन है | क्योंकि जल का घर्षण स्थल की अपेक्षा बहुत कम होता है | जिससे ईंधन की बचत होती है | अत: जल परिवहन में ऊर्जा लागत बहुत कम होती है |

2)      समुद्री जल परिवहन के लिए मार्गों का निर्माण नहीं करना पड़ता | महासागर एक दूसरे से जुड़ें हुए हैं | जिनमें विभिन्न आकारों के  समुद्री जहाज आसानी से चलाए जा सकते हैं |  केवल महासागरों के किनारों पर जहाजों के लिए पत्तनों की आवश्यकता होती है |

3)      महासागरों में जलयान किसी भी दिशा में स्वतंत्र रूप से जा सकते हैं |

4)      एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक अधिक मात्रा में तक स्थूल तथा शीघ्र खराब ना होने वाली वस्तुएँ  ले जाने के लिए अगर उपलब्ध हो तो यह सबसे उत्तम साधन है |  क्योंकि यह स्थल और वायु परिवहन कीअपेक्षा सस्ता पड़ता है |

 

1.       समुद्री जलमार्ग या महासागरीय जलमार्ग

महासागर सभी दिशाओं में मुड़ सकने वाले ऐसे महामार्ग होते हैं जिनके रख रखाव की कोई लागत नहीं होती | समुद्री जहाजों द्वारा महासागरों का मार्गों के रूप में प्रयोग करना मनुष्य की पर्यावरण के साथ अनुकूलन की महत्वपूर्ण घटना है | क्योंकि जिन महासागरों से उसे डर लगता था उसी का प्रयोग वह परिवहन के सबसे सस्ते साधन के रूप में कर रहा है |  

आधुनिक समय में समुद्री मार्गों का महत्व बढ़ने के कारण

आधुनिक समय में समुद्री मार्गों का महत्व बढ़ने के निम्नलिखित कारण हैं | 

1)      आधुनिक यात्री जहाज और माल वाहक पोत राडार, बेतार के तार (वायरलेस)  व अन्य नौ परिवहन संबंधी सुविधाओं से युक्त हैं | जिससे मौसम तथा दिशा संबंधी जानकारी उपलब्ध होती है | इसी प्रकार यात्रियों की सुविधाओं में भी बढोतरी हुई है |’ 

2)      शीघ्र खराब हो जाने वाली स्तुओं जैसे दुग्ध तथा दुग्ध से बने पदार्थों, माँस, सब्जियों तथा फल आदि के लिए प्रतिशीतित कमरों (प्रतिशीतन कोष्टक) का प्रयोग किया जाने लगा है | टैंकरों तथा विशेषीकृत जहाजों ने नौभार के परिवहन कों उन्नत बना दिया है |

3)      कंटेनरों के प्रयोग से न सिर्फ माल कों चढ़ाना- उतारना आसान हुआ है | इससे विश्व के प्रमुख पत्तनों पर इस नौभार के निपटान में भी सुविधा हुई है क्योंकि कंटेनरों के सामान कों सड़क तथा रेल परिवहन के द्वाराइनकी माँग स्थलों तक पहुँचाना आसान हुआ है |

   विश्व के प्रमुख समुद्री मार्ग

1.       उत्तरी अटलांटिक समुद्री मार्ग

                                यह समुद्री जलमार्ग पश्चिमी यूरोप के देशों को उत्तरी अमेरिका के पूर्वी तट  पर स्थित उत्तरी -पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका के क्षेत्रों से मिलाता है |  ये दोनों ही क्षेत्र औद्योगिक दृष्टि से विकसित है | विश्व का एक चौथाई (25 प्रतिशत) समुद्री व्यापार इसी मार्ग से होता है | अत: यह विश्व का सबसे व्यस्त व्यापारिक मार्ग है | इसलिए इसे  “बृहद ट्रंक मार्ग” भी कहा जाता है | इस मार्ग के दोनों तटों पर पत्तन और पोताश्रयों की उन्नत सुविधा उपलब्ध है | विश्व के 28 बड़े पत्तन इस मार्ग के दोनों तटों पर स्थित है | जिनमें न्यूयार्क, मॉन्ट्रियल, क्यूबेक, हैलीफैक्स, बोस्टन आदि पत्तन उत्तरी अमेरिका के तट पर स्थित प्रमुख पत्तन हैं | लन्दन, लिवरपूल, ग्लासगो, मानचेस्टर, साउथ हैम्पटन, हैम्बर्ग, लिस्बन, कोपेनहेगन तथा ओसलो पश्चिमी यूरोप के तट पर स्थित प्रमुख पत्तन हैं |

2.       भूमध्यसागर –हिंद महासागरीय समुद्री मार्ग

                                                            यह समुद्री मार्ग प्राचीन विश्व का हृदय स्थल कहे जाने वाले क्षेत्रों से गुजरता है | किसी अन्य समुद्री मार्ग की अपेक्षा अधिक देशों और लोगों कों सेवाएँ प्रदान करता है |

यह व्यापारिक मार्ग पश्चिमी यूरोप के औद्योगिक  रूप से उन्नत देशों कों पूर्वी अफ्रीका, दक्षिणी अफ्रीका, दक्षिणी –पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के वाणिज्यिक कृषि तथा पशुपालन आधारित अर्थव्यवस्थाओं से जोड़ता है | 

            पोर्ट सईद, अदन, मुंबई, कोलंबो और सिंगापुर इस मार्ग के महत्वपूर्ण पत्तनों में से है | उत्तमाशा अंतरीप से होकर जाने वाले आरम्भिक मार्ग की तुलना में स्वेज नहर निर्माण से इन देशों के बीच होने वाले व्यापार में समय और दूरी में अत्यधिक कमी हुई है |

 3.       उत्तमाशा अंतरीप समुद्री मार्ग

                            अटलांटिक महासागर और हिंद महासागर होते हुए यह एक महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग है | यह मार्ग पुरे अफ्रीका महाद्वीप का चक्कर लगाता है  और बहुत ही लम्बा है | स्वेज नहर मार्ग से 6400 किलोमीटर लम्बा है |  यह मार्ग लिवरपूल  कों कोलंबो से जोड़ता है | वर्तमान में अधिकाँश जलयान इस मार्ग का प्रयोग नहीं करते | बड़े-बड़े जहाज जो स्वेज नहर कों पार नहीं कर सकते अब भी इसी मार्ग से होकर जाते हैं | कुछ जहाज स्वेज नहर के भारी कर (टैक्स ) से बचने के लिए भी इस मार्ग का प्रयोग करते हैं | यह मार्ग पश्चिमी यूरोप के देशों कों पश्चिमी अफ्रीका के देशों से जोड़ता हुआ, दक्षिणी एशिया, दक्षिणी –पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया तथा न्यूजीलैंड से मिलाता है |

पिछले कुछ वर्षों में  स्वतंत्रता प्राप्त करने वाले अफ़्रीकी देशों में तेजी से आर्थिक विकास हुआ है | क्योंकि महत्वपूर्ण खनिज जैसे- सोना, हीरे, ताँबा, टिन, क्रोमियम तथा अभ्रक और कृषि उत्पादों जैसे - मूँगफली  गिरि का तेल, कहवा और फलों का  के व्यापार में वृद्धि हुई है | जिससे पूर्वी और पश्चिमी अफ्रीका तट पर स्थित पत्तनों के द्वारा उत्तमाशा अंतरीप होकर जाने वाले जहाजों से व्यापार और यातायात की मात्रा में वृद्धि हुई है 

4.      दक्षिणी अटलांटिक  समुद्री मार्ग

                                    यह जलमार्ग पश्चिम अफ्रीकी देशों का संबंध दक्षिण अमेरिका में स्थित ब्राजील, अर्जेंटाइना तथा उरुग्वे के साथ स्थापित करता है | इस मार्ग का व्यापारिक महत्व उत्तर अटलांटिक महासागर के मार्ग की अपेक्षा कम है | क्योंकि दक्षिणी अटलांटिक महासागर के दोनों तटों पर स्थित दक्षिणी अमेरिका और अफ्रीका के देशों में जनसंख्या विरल है | इन देशों का आर्थिक विकास भी अधिक नहीं हुआ है | केवल दक्षिणी-पूर्वी  ब्राजील, प्लाटा ज्वारनदमुख और दक्षिणी अफ्रीका के कुछ भाग ही औद्योगिक दृष्टि से विकसित है | दक्षिणी अमेरिका के देश ब्राजील के प्रमुख व्यापारिक केन्द्र रियो डी जेनेरो और दक्षिणी अफ्रीका के प्रमुख व्यापारिक केन्द्र केपटाउन के बीच भी व्यापार बहुत कम है क्योंकि इन दोनों ही क्षेत्रों के  उत्पाद तथा संसाधन एक जैसे हैं | 

5.       उत्तरी प्रशांत समुद्री मार्ग

विस्तृत उत्तरी प्रशांत महासागर के आर पार कई मार्गों के द्वारा व्यापार होता है | इनमें से अधिकाँश मार्ग होनोलूलू में आकार मिलते हैं | यहाँ पर जलयान मरम्मत तथा ईंधन और अन्य जरुरी वस्तुओं के लिए रुकते हैं | बृहत वृत्त पर स्थित सीधा मार्ग है जो संयुक्त राज्य  अमेरिका के वैंकूवर कों जापान के याकोहामा से जोड़ता है |  जो यात्रा की दूरी कों कम करके (2480 किलोमीटर) आधा कर देता है |

यह समुद्री मार्ग उत्तरी अमेरिका के पश्चिमी तट पर स्थित पत्तनों कों एशिया के पत्तनों से जोड़ता है | उत्तरी अमेरिका के तट पर वैंकूवर, सीएटल, पोर्टलैंड, सान-फ्रांसिस्को आदि प्रमुख पत्तन हैं |  इन पत्तनों से गेहूँ , लकड़ी, कागज के लिए लुगदी, मत्स्य उत्पाद तथा दुग्ध उत्पादों का निर्यात एशिया के देशों कों किया जाता है | एशिया के तट पर स्थित प्रमुख पत्तन याकोहामा, कोबे, शंघाई, हांगकांग, मनीला और सिंगापुर हैं | इन पत्तनों से वस्त्र, विद्युत उपकरण, के साथ –साथ दक्षिणी पूर्वी एशिया के उष्ण कटिबंधीय प्रदेशों से अमेरिका के उद्योगों के लिए कच्चामाल  जैसे- रबड़, नारियल गिरी, ताड़ का तेल, और टिन का निर्यात किया जाता है |

 6.       दक्षिणी प्रशांत समुद्री मार्ग

        यह समुद्री मार्ग पश्चिमी यूरोप और उत्तरी अमेरिका कों ऑस्ट्रलिया, न्यूजीलैंड और पनामा नहर से होते हुए प्रशांत महासागर में प्रकीर्णित ( बिखरे हुए )  द्वीपों से मिलाता है | इस मार्ग का प्रयोग हांगकांग, फिलीपींस और इंडोनेशिया पहुँचने के लिए किया जाता है | इस मार्ग पर चलने वाले जलयानों कों अत्यधिक दूरी तय करनी पड़ती है | जैसे सिडनी से पनामा के बीच की दूरी 12000 किलोमीटर से भी अधिक है | होनोलूलू इस मार्ग के बीच में पड़ने वाला महत्वपूर्ण पत्तन है |

तटीय नौ परिवहन

तटीय नौ परिवहन लंबी तट रेखा वाले देशों के लिए एक सुगम परिवहन का माध्यम है | यदि तटीय नौ परिवहन का विकास किया जाए तो इसके द्वारा स्थल परिवहन पर होने वाली  यातायात की भीड़ कों कम किया जा सकता है | संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन तथा भारत जैसे देशों के लिए यह बहुत लाभकारी है |  यूरोप के शेनेगन देशों की स्थिति तटीय नौ परिवहन की दृष्टि से उपयुक्त है , जो एक सदस्य देश के तट कों दूसरे सदस्य देश के तट से जोड़ता है |

नौ परिवहन नहरें

स्वेज और पनामा दो ऐसी महत्वपूर्ण नौ परिवहन नहरें अथवा जलमार्ग हैं जो मानव द्वारा निर्मित है | ये दोनों नहरें पूर्वी तथा पश्चिमी विश्व के देशों के लिए प्रवेश द्वार का काम करती हैं | इनसे समय तथा दूरी दोनों में अत्यधिक बचत हुई है | इन दोनों का संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित है | 

           स्वेज नहर

स्वेज नहर का निर्माण कार्य एक फ्रांसीसी इंजिनियर फर्दीनन्द- द- लेपेप्स को सन् 1854 को सौंपा गया था |  सन् 1869 में बनकर यह तैयार हुई |

स्वेज नहर  का निर्माण मिस्त्र देश के उत्तर में मध्य भूमध्यसागर पर स्थित पोर्ट सईद और दक्षिण में लाल सागर पर स्थित पोर्ट स्वेज कों जोड़ने के लिए किया गया | इसके लिए स्वेज जलडमरूमध्य कों काटा गया था | यह नहर ग्रेट बिटर झील, लिटिल झील तथा टीमसा झील से होकर गुजरती है | ये सभी झीलें खारे पानी की झीलें हैं | नील नदी से एक नौगम्य ताजा पानी की नहर इस्माइलिया से स्वेज नहर में मिलती है | इस नहर से पोर्ट सईद तथा पोर्ट स्वेज नगरों कों ताजे पानी की आपूर्ति की जाती है | एक रेलमार्ग इस नहर के सहारे स्वेज तक जाता है जिसकी एक शाखा इस्माइलिया से कैरो तक जाती है |  

यह नहर लगभग 160 किलोमीटर लंबी और  11 से 15 मीटर गहरी है | इस नहर की अधिकतम चौड़ाई 365 मीटर है | इस नहर में प्रतिदिन लगभग 100 जलयान आवागमन करते हैं | इस नहर कों पार करने में 10 से 12 घण्टे का समय लगता है |   

इस नहर के निर्माण के बाद यूरोप एवं  पूर्वी अफ्रीका के तथा देशों और  दक्षिणी एशिया और दक्षिणी पूर्वी एशिया के बीच दूरी  में 6400 किलोमीटर की कमी है | जिससे समय की बहुत अधिक बचत हुई है |  इस नहर के निर्माण से यूरोपीय देशों विशेषकर ब्रिटेन कों बहुत अधिक लाभ मिला है | इसी कारण से स्वेज नहर कों ‘ब्रिटेन की स्नायु-नाड़ी’ भी कहा जाता है |

माल तथा यात्री किराया अत्यधिक होने के कारण वे जहाज जिनके लिए समय की देरी महत्वपूर्ण नहीं है टैक्स (किराया) से बचने के लिए सस्ते परन्तु लम्बे उत्तमाशा मार्ग का प्रयोग करते हैं | बड़े आकार वाले जहाज भी स्वेज नहर के मार्ग का प्रयोग नहीं करते है |

पनामा नहर

                यह नहर में अटलांटिक महासागर कों पश्चिम में प्रशांत महासागर से जोड़ती है | इस नहर का निर्माण उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका के बीच पनामा गणराज्य के पनामा जलडमरूमध्य कों काटकर किया गया है | इसका निर्माण पनामा जलडमरूमध्य के आर-पार पनामा नगर एवं कोलोन के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका के द्वारा किया गया | अमेरिका ने इसके लिए दोनों ही ओर के 8  किलोमीटर क्षेत्र कों खरीद कर इसे नहर मंडल का नाम दिया है | इस नहर का निर्माण कार्य सन् 1906 में शुरू हुआ और यह सन् 1914 में बनकर तैयार हुई |

            पनमा नहर लगभग 72 किलोमीटर लंबी है जो लगभग 12 किलोमीटर लंबी कटान से युक्त है |  91 मीटर से 350 मीटर चौड़ी  है | इस नहर में कुल छ: जल प्रबंध तंत्र हैं | पनामा की खाड़ी में प्रवेश करने से पहले इन जल प्रबंधकों से होकर विभिन्न ऊँचाई की समुद्री सतह कों पार करते हैं |  जो 12.5 मीटर से 26 मीटर ऊँचाई के बीच है | इस नहर कों पार करने में 7 से 8 घण्टे का समय लगता है | इस नहर से रोजाना 48 जहाज गुजरते है |

            इस नहर के द्वारा समुद्री मार्ग से न्यूयार्क एवं सैनफ्रांसिस्को के मध्य लगभग 13000 किलोमीटर की दूरी कम हो गई है | इसी प्रकार पश्चिमी यूरोप और संयुक्त अमेरिका के पश्चिमी तट के बीच दूरी कम होने से व्यापार में बहुत अधिक वृद्धि हुई है | उत्तरी –पूर्वी और मध्य संयुक्त राज्य अमेरिका और पूर्वी तथा दक्षिणी पूर्वी एशिया के मध्य की दूरी भी कम हो गई है | इस नहर का आर्थिक महत्व स्वेज नहर की अपेक्षा कम है | फिर भी दक्षिणी अमेरिका की अर्थव्यवस्था में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है |


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