अध्याय 3
जल संसाधन
कक्षा -10वीं
प्रश्न: नीचे दी गई सूचना के आधार पर स्थितियों कों “जल की कमी से
प्रभावित” या “जल की कमी से अप्रभावित” में वर्गीकृत कीजिए |
क).
अधिक वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्र
ख).
अधिक वर्षा तथा अधिक जनसँख्या वाले
क्षेत्र
ग).
अधिक वर्षा वाले परन्तु अत्यधिक
प्रदूषित जल क्षेत्र
घ).
कम वर्षा और कम जनसँख्या वाले
क्षेत्र
उत्तर:
जल
की कमी से अप्रभावित
अधिक वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्र
जल
की कमी से प्रभावित
अधिक वर्षा तथा अधिक जनसँख्या वाले क्षेत्र
अधिक वर्षा वाले परन्तु अत्यधिक प्रदूषित जल
क्षेत्र
कम वर्षा और कम जनसँख्या वाले क्षेत्र
प्रश्न:
निम्नलिखित में से कौन-सा वक्तव्य
बहुउद्देशीय नदी परियोजनाओं के पक्ष में
दिया गया तर्क नहीं है ?
क).
बहुउद्देशीय परियोजनाएँ उन
क्षेत्रों में जल लाती है जहाँ जल की कमी होती है |
ख).
बहुउद्देशीय परियोजनाएँ जल बहाव कों
नियंत्रित करके बाढ़ पर काबू पाती है |
ग).
बहुउद्देशीय परियोजनाओं से बृहत
स्तर पर विस्थापन होता है और आजीविका खत्म होती है |
घ).
बहुउद्देशीय परियोजनाएँ हमारे
उद्योग और घरों के लिए विद्युत पैदा करती
है |
उत्तर: बहुउद्देशीय परियोजनाओं से बृहत स्तर पर
विस्थापन होता है और आजीविका खत्म होती है |
प्रश्न:
यहाँ कुछ गलत वक्तव्य दिए गए हैं |
इनमें गलती पहचानें और दोबारा लिखे |
क).
शहरों की बढती जनसँख्या, उनकी
विशालता और सघन जनसँख्या तथा शहरी जीवन शैली नें जल संसाधनों केसही उपयोग में मदद
की है |
उत्तर : शहरों
की बढती जनसँख्या, उनकी विशालता और सघन जनसँख्या तथा शहरी जीवन शैली नें जल
संसाधनों के दुरूपयोग कों बढ़ाया है और माँग भी बढ़ाई है |
ख).
नदियों पर बाँध बनाने और उनको
नियंत्रित करने से उनका प्राकृतिक बहाव और तलछट बहाव प्रभावित नहीं होता |
उत्तर : नदियों पर बाँध बनाने और उनको नियंत्रित करने
से उनका प्राकृतिक बहाव और तलछट बहाव प्रभावित होता है |
ग).
गुजरात में साबरमती बेसिन में सूखे
के दौरान शहरी क्षेत्रों में अधिक जल आपूर्ति करने पर किसान नहीं भडके |
उत्तर: गुजरात में साबरमती बेसिन में सूखे के दौरान
शहरी क्षेत्रों में अधिक जल आपूर्ति करने पर किसान भड़क उठे |
घ).
आज राजस्थान में इन्दरा गाँधी नहर
के उपलब्ध पेय जल के बावजूद छत वर्षा जल संग्रहण लोकप्रिय हो रहा है |
उत्तर: आज राजस्थान में इन्दरा गाँधी नहर के उपलब्ध
पेय जल के कारण छत वर्षा जल संग्रहण की रीति कम होती जा रही है |
प्रश्न: व्याख्या करें की जल किस प्रकार नवीकरण
योग्य संसाधन है ?
उत्तर : जल
मुख्यतः धरातल पर बहने वाले सतही जल के रूप में या भौम जल के रूप में हमें प्राप्त
होटन रहता है | जलीय चक्र के द्वारा जल हमें
पुन: उपलब्ध हो जाता है | क्योंकि जलीय चक्र से जल के स्त्रोतों का लगातार
पुन : भरण हो रहता है | इसलिए जल एक नवीकरण योग्य संसाधन है |
प्रश्न: जल दुर्लभता क्या है और इसके मुख्य कारण
क्या हैं ?
उत्तर : जल दुर्लभता का अर्थ है – स्वच्छ जल की मात्रा
में कमी अर्थात जल की माँग के अनुसार स्वच्छ जल की आपूर्ति न होना जल दुर्लभता कहा
जाता है |
जल
दुर्लभता के कारण
जल संसाधनों
का अति शोषण
औद्योगिकीकरण
और नगरीकरण
जल की
गुणवत्ता में कमी आने के कारण
जल संसाधनों
के असामान वितरण के कारण
प्रश्न: बहुउद्देशीय परियोजनाओं से होने वाले लाभ
और हानि की तुलना करें |
उत्तर : बहु उद्देश्य परियोजनाओं से होने वाले लाभ और
हानियाँ निम्नलिखित है |
बहु
उद्देश्य परियोजनाओं से होने वाले लाभ
i)
बाँध नदियों और वर्षा के जल को इकट्ठा करके
बाद में उसे सिंचाई के लिए उपलब्ध करवाते है |
ii)
नदियों पर बनी बहु उद्देश्य परियोजनाओं से जल
विद्युत उत्पादन किया जा रहा है जिसका उपयोग घरेलू और औद्योगिक कार्यों में किया जाता है |
iii)
घरेलू
और औद्योगिक कार्यों के लिए जल की
आपूर्ति की जा रही है |
iv)
बहु उद्देश्य परियोजनाओं के द्वारा बाढ़ पर
नियंत्रण किया जाता है |
v)
बहु उद्देश्य परियोजनाओं का प्रयोग मनोरंजन
तथा पर्यटन के लिए भी किया जाता है |
vi)
बहु उद्देश्य परियोजनाओं की सहायता से आंतरिक नौका चालन किया जाता है |
vii)
बहु उद्देश्य परियोजनाओं में मछली पालन किया
जाता है |
बहु
उद्देश्य परियोजनाओं से होने वाली हानियाँ
i)
नदियों पर बाँध बनाने और उनका बहाव नियंत्रित
करने से उनका प्राकृतिक बहाव अवरुद्ध हो जाता है | जिसके कारण तलछट बहाव कम हो
जाता है और अत्यधिक तलछट जलाशय की तली में जमा होता रहता है | जिससे नदी का तल
अधिक चट्टानी हो जाता है और नदी जलीय –आवासों में भोजन की कमी हो जाती है |
ii)
बाँध नदियों को टुकड़ों में बाँट देते हैं
जिससे विशेषकर अंडे देने की ऋतु में जलीय जीवों का नदियों में स्थानांतरण अवरुद्ध
हो जाता है |
iii)
बाढ़ के मैदान में बनाए जाने वाले जलाशयों
द्वारा वहाँ मौजूद वनस्पतियाँ और मिट्टियाँ जल में डूब जाती है | जो कालान्तर में
अपघटित हो जाती है |
iv)
बहु उद्देश्य परियोजनाओं का विरोध मुख्य रूप
से स्थानीय समुदायों द्वारा किया जाता है क्योंकि वृहद स्तर पर उनका विस्थापन होता
है | आमतौर पर स्थानीय लोगों को उनकी जमीन, आजीविका और संसाधनों से लगाव और
नियंत्रण को देश के विकास के लिए कुर्बान करना पड़ता है | नर्मदा नदी पर बने सरदार
सरोवर बाँध और भागीरथी नदी पर बने टिहरी बाँध के विरोध में नर्मदा बचाओ आंदोलन और टिहरी
बाँध आंदोलन इसी प्रकार के आंदोलन है |
प्रश्न: राजस्थान के अर्ध शुष्क क्षेत्रों में वर्षा जल संग्रहण
किस प्रकार किया जाता हैं ?
अथवा
राजस्थान
के अर्ध –शुष्क और शुष्क क्षेत्रों में छत वर्षाजल संग्रहण की टाँका विधि का वर्णन
कीजिए |
उत्तर : राजस्थान के
अर्ध –शुष्क और शुष्क क्षेत्रों विशेषकर बीकानेर, फलौदी और बाड़मेर में, लगभग हर घर
में पीने का पानी संग्रहित करने के लिए भूमिगत टैंक अथवा ‘टाँका’ हुआ करते थे | इसका आकार एक बड़े कमरे जितना हो
सकता है | फलौदी में एक घर में 6.1 मीटर
गहरा, 4.27 मीटर लंबा और 2.44 मीटर
चौड़ा टाँका पाया गया था |
टाँका यहाँ
सुविकसित छत वर्षाजल संग्रहण तंत्र का अभिन्न
हिस्सा होता है जिसे मुख्य घर या
आँगन में बनाया जाता था | वे घरों की ढलवाँ छतों से पाइप द्वारा जुड़े हुए थे | छत
से वर्षा का पानी इन नलों (पाइपों) से होकर भूमिगत टाँका तक पहुँचता था जहाँ इसे
एकत्रित किया जाता था | वर्षा का पहला जल
छत और पाइपों को साफ़ करने में प्रयोग होता था
और उसे संग्रहित नहीं किया जाता था | इसके बाद होने वाली वर्षा का जल
संग्रहण किया जाता था |
टाँका में वर्षा जल अगली वर्षा ऋतु तक संग्रहित किया जा
सकता है | यह इसे जल की कमी वाली ग्रीष्म ऋतु तक पीने का जल उपलब्ध करवाने वाला जल
स्त्रोत बनाता है | टाँका में एकत्रित वर्षा जल को इस क्षेत्रों में पालर पानी के
नाम से पुकारा जाता है | यह पालर पानी
प्राकृतिक जल का शुद्धतम रूप समझा जाता है |
कुछ घरों में तो टाँकों के साथ भूमिगत कमरे भी बनाए जाते हैं क्योंकि जल का
यह स्त्रोत इन कमरों को ठंडा रखता था जिससे ग्रीष्म ऋतु में गर्मी से राहत मिलती
है |
प्रश्न:
प्रश्न : प्राचीन भारत में जल संरक्षण के लिए प्रयुक्त होने वाली किन्हीं विभिन्न
विधियों का वर्णन कीजिए |
अथवा
प्रश्न
: परम्परागत वर्षा जल संग्रहण की पद्धतियों कों आधुनिक काल में अपनाकर जल संग्रहण
तथा भंडारण किस प्रकार किया जा रहा है ?
उत्तर : प्राचीन
भारत में उत्कृष्ट जलीय निर्माणों के साथ –साथ जल संग्रहण ढाँचे भी पाए जाते थे
| लोगों को वर्षा पद्धति और मृदा के गुणों
के बारे में गहरा ज्ञान था | उन्होंने स्थानीय पारिस्थितिकीय परिस्थितियों और उनकी
जल आवश्यकतानुसार वर्षाजल, भौम जल , नदी जल और बाढ़ जल संग्रहण के अनेक तरीके
विकसित कर लिए थे | जो निम्नलिखित
उदाहरणों से स्पष्ट है |
(i)
पहाड़ी और पर्वतीय क्षेत्रों में लोगों ने नदी
का रास्ता बदलकर खेतों में सिंचाई के लिए वाहिकाएँ बनाई हैं |
पश्चिमी हिमालय में लोगों द्वारा बनाई इसी तरह
वाहिकाएँ ‘गुल’ अथवा ‘कुल’ के नाम
से जानी जाती है |
(ii)
पश्चिमी भारत, विशेषकर राजस्थान में पीने के
पानी का जल एकत्रित करने के लिए ‘छत वर्षा जल संग्रहण’ का तरीका आम था |
(iii)
पश्चिमी बंगाल के बाढ़ के मैदान में लोग अपने
खेतों की सिंचाई के लिए बाढ़ जल वाहिकाएँ बनाते थे |
(iv)
शुष्क और अर्धशुष्क क्षेत्रों में खेतों में
वर्षा जल एकत्रित करने के लिए गड्डे बनाए जाते थे
ताकि मृदा को सिंचित किया जा सके
और संरक्षित जल को खेती के लिए उपयोग में लाया जा सके | रराजस्थान के लिए
जैसलमेर में ‘खादीन’ और अन्य क्षेत्रों में ‘जोहड़’ इसके उदाहरण हैं |
प्रश्न
: बाँध किसे कहते है ? बाँधों का विभिन्न आधारों पर वर्गीकरण कीजिए ?
उत्तर : बाँध
बहते जल को रोकने, दिशा देने या बहाव को कम करने के लिए खड़ी की गई बाधा है जो
आमतौर पर जलाशय, झील अथवा जलभरण बनाती है | बाँध का अर्थ जलाशय से लिया जाता है न
कि ढाँचे से |
बाँधों का
वर्गीकरण उनकी संरचना और उद्देश्य या ऊँचाई के आधार पर किया जाता है | जो
निम्नलिखित है |
बाँधों की
संरचना और प्रयुक्त पदार्थों के आधार पर बाँध लकड़ी के बाँध, तटबंध बाँध या पक्का
बाँध प्रकार के होते हैं |
ऊँचाई के
आधार पर बाँधों को बड़े बाँध और मुख्य बाँध
या नीचे बाँध, मध्यम बाँध और उच्च
बाँधों में वर्गीकृत किया जाता है |
प्रश्न
: भारत सरकार द्वारा शुष्क क्षेत्रों में
चलाई जा रही अटल भू जल योजना पर नोट लिखिए |
उत्तर : अटल
भू जल योजना (अटल जल ) को सात राज्यों
गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र राजस्थान और उत्तर
प्रदेश के 80
जिलों के 229 प्रशासनिक ब्लॉकों (तालुकाओं )
की 8220 ग्राम पंचायतों में कार्यान्वित किया जा रहा है | इन
ब्लॉक में जल की कमी है |
भारत
में चुने गए राज्यों में जल की कमी वाले ब्लॉक कुल ब्लॉकों की संख्या का लगभग 37
प्रतिशत है | ये ब्लॉक अति दोहित, गंभीर और अर्ध गंभीर जल की कमी की समस्या से
ग्रस्त है |
अटल
जल के प्रमुख पहलुओं में से एक पहलू जल
संरक्षण और विवेकपूर्ण प्रबंधन जल प्रबंधन में जल के उपयोग के मौजूदा रवैये के
प्रति जनता के व्यवहार में परिवर्तन लाना है |
प्रश्न
: भारत सरकार के जल जीवन मिशन (JJM) किन लोगों के लिए लाभदायक है ? इस योजना का क्या उद्देश्य है ?
अथवा
प्रश्न
: जल जीवन मिशन पर संक्षिप्त नोट लिखों
?
अथवा
प्रश्न
: जल जीवन मिशन के लक्ष्य बताओ |
उत्तर : भारत सरकार ने जल जीवन मिशन (JJM)
की घोषणा की है | इसके निम्नलिखित लक्ष्य
हैं |
(i)
इस मिशन के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन
की गुणवत्ता में सुधार लाने
(ii)
इस मिशन के द्वारा लोगों के जीवनयापन को आसान बनाने को सर्वोच्च प्राथमिकता
दी है |
(iii)
जल जीवन मिशन का लक्ष्य प्रत्येक परिवार को
लम्बी अवधि के आधार पर नियमित रूप जल की आपूर्ति करना है |
(iv)
इसके अंतर्गत प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 55 लीटर
की सेवा स्तर पर पीने योग्य पाइप के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करना है |
प्रश्न
: प्राचीन भारत में जल संरक्षण और
प्रबंधन के लिए विभिन्न कृतियों का निर्माण किया गया था उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए
|
प्राचीन भारत
में जल संरक्षण और प्रबंधन के लिए के लिए विभिन्न प्रकार की जलीय कृतियाँ का
निर्माण किया जाता था | उनमें से कुछ निम्नलिखित हैं |
(i)
ईसा से एक शताब्दी पहले इलाहाबाद के नजदीक
श्रिन्गवेरा में गंगा नदी के बाढ़ के जल को संरक्षित करने के लिए एक उत्कृष्ट जल
संग्रहन तंत्र बनाया गया था |
(ii)
चंद्रगुप्त मौर्य के समय बृहद स्तर पर बाँध,
झील और सिंचाई तंत्रों का निर्माण करवाया गया |
(iii)
कलिंग (ओडिशा), नागार्जुन कोंडा (आंध्र
प्रदेश), बेन्नूर (कर्नाटक) और कोल्हापुर (महाराष्ट्र) में उत्कृष्ट सिंचाई तंत्र
होने के सबूत मिले हैं |
(iv)
अपने समय की सबसे बड़ी कृत्रिम झीलों में से एक
भोपाल झील 11 वीं शताब्दी में बनाई गई |
(v)
14 वीं शताब्दी में इल्तुमिश ने दिल्ली में सिरी फोर्ट क्षेत्र में जल की
सप्लाई के लिए हौज खास (एक विशिष्ट तालाब) बनवाया |
प्रश्न
: हीराकुड परियोजना किन उद्देश्यों का समन्वय है ?
अथवा
अथवा
हीराकुड परियोजना किस नदी पर स्थित है इससे किन उद्देश्यों को पूरा किया जा रहा है
?
उत्तर :
हीराकुड परियोजना महानदी बेसिन पर स्थित है | यह परियोजन जल संरक्षण और बाढ़
नियंत्रण के उद्देश्यों को पूरा करने का समन्वय है |
प्रश्न
: भारत के प्रथम प्रधान मंत्री जवाहरलाल
नेहरु ने किसे “आधुनिक भारत के मंदिर” कहा था ? और क्यों ?
उत्तर : भारत के
प्रथम प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरु ने
बाँधों को “आधुनिक भारत के मंदिर” कहा था | क्योंकि उनका मानना था कि इन
परियोजनाओं के चलते कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था, औद्योगीकरण और नगरीय
अर्थव्यवस्था समन्वित रूप से विकास करेगी |
प्रश्न : बाँधों
को बहुउद्देशीय परियोजना क्यों कहा जाता है ?
परम्परागत बाँध
नदियों और वर्षा जल को इकट्ठा करके बाद में उसे खेतों की सिंचाई के लिए उपलब्ध
करवाते थे | आज कल बाँध केवल सिंचाई के लिए नहीं बनाए अपितु उनका उद्देश्य विद्युत उत्पादन, घरेलू और
औद्योगिक उपयोग के लिए जल की आपूर्ति, बाढ़ नियंत्रण, मनोरंजन, आंतरिक नौकाचालन और
मछली पालन भी है | इन बाँधों में एकत्रित जल के अनेक उपयोग समन्वित होते है |
इसलिए बाँधों को बहुउद्देशीय परियोजनाएँ
भी कहा जाता है |
उदारहण के
तौर पर सतलुज-व्यास नदी बेसिन में भाखड़ा नंगल परियोजना जल विद्युत उत्पादन और
सिंचाई दोनों उद्देश्यों को पूरा करती है | इसी प्रकार हीराकुड परियोजना महानदी बेसिन पर स्थित है |
यह परियोजन जल संरक्षण और बाढ़ नियंत्रण के उद्देश्यों को पूरा करती है |
प्रश्न : पिछले कुछ वर्षों में बहुउद्देश्यीय
परियोजनाओं और बड़े बाँध कई कारणों से परिनिरीक्षण और विरोध के विषय बन गए हैं | किन्हीं
तीन कारणों का उल्लेख कीजिए ?
अथवा
बड़े बाँधों का निर्माण किस प्रकार विवाद का विषय
हैं ?
अथवा
बहुउद्देश्यीय परियोजनाएँ और बाँध किस प्रकार
विरोध और विवाद का विषय बन गए हैं ? अपने उत्तर के पक्ष में तर्क दीजिए ?
उत्तर : पिछले कुछ वर्षों में बहुउद्देश्यीय परियोजनाओं और
बड़े बाँध कई कारणों से परिनिरीक्षण और विरोध के विषय बन गए हैं |
(i)
नदियों पर बाँध बनाने और उनका बहाव नियंत्रित
करने से उनका प्राकृतिक बहाव अवरुद्ध होता है जिसके कारण तलछट बहाव कम हो जाता है
और अत्यधिक तलछट जलाशय की तली पर जमा होता रहता है | जिससे नदी का तल अधिक चट्टानी हो जाता है और नदी जलीय जीव
–आवासों में भोजन की कमी हो जाती है |
(ii)
बाँध नदियों
को टुकड़ों में बाँट देते हैं जिससे विशेषकर अंडे देने की ऋतु में जलीय
जीवों का स्थानांतरण अवरुद्ध हो जाता है |
(iii)
बाढ़ के मैदान में बनाए जाने वाले जलाशयों
द्वारा वहाँ मौजूद वनस्पति और मिट्टियाँ जल में डूब जाती हैं जो कालान्तर में
अपघटित हो जाती है |
(iv)
सिंचाई ने कई क्षेत्रों में फसल प्रारूप
परिवर्तित कर दिया है जहाँ किसान जल गहन और वाणिज्य फसलों की ओर आकृषित हो रहे हैं
| इससे मृदाओं के लवणीकरण जैसे गंभीर पारिस्थितिकीय परिणाम हो सकते हैं |
(v)
नदी परियोजनाओं पर उठी अधिकतर आपत्तियाँ उनके
उद्देश्यों में विफल हो जाने पर हैं | यह एक विडम्बना ही है कि जो बाँध बाढ़
नियंत्रण के लिए बनाए जाते हैं उनके जलाशयों में तलछट जमा हो जाने से वे बाढ़ आने
का कारण बन जाते हैं | अत्यधिक वर्षा होने की दशा में में तो बड़े बाँध कई बार बाढ़
नियंत्रण में असफल रहते हैं | इन बाढ़ों से
न केवल जान और माल का नुकसान होता हुआ है अपितु बृहत स्तर पर मृदा अपरदन भी हुआ है
|
(vi)
बाँध के जलाशय पर तलछट जमा होने का अर्थ यह भी
है कि यह तलछट जो की एक प्राकृतिक उर्वरक
है बाढ़ के मैदानों तक नदी पहुँचती जिसके कारण भुमि निम्नीकरण की समस्याएँ बढ़ती हैं
|
(vii)
यह भी माना जाता है कि बहुउद्देशीय परियोजनाओं
के कारण भूकंप आने की सम्भावना भी बढ़ जाती है |
(viii)
अत्यधिक जल के उपयोग से जल – जनित बीमारियाँ,
फसलों में कीटाणु –जनित बीमारियाँ और प्रदूषण फैलते हैं |
प्रश्न : प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना पर
संक्षिप्त नोट लिखें |
अथवा
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के उद्देश्यों
का उल्लेख कीजिए |
उत्तर : प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना देश के सभी कृषि
खेतों के लिए सुरक्षात्मक सिंचाई के कुछ साधनों तक पहुँच सुनिश्चित करती है, जिससे
वांछित ग्रामीण समृधि आती है |
इस कार्यक्रम के कुछ व्यापक उद्देद्श्य हैं जैसे –
(i)
खेत में पानी की वास्तविक उपलब्धता को बढ़ाना
और सुनिश्चित सिंचाई (हर खेत को पानी ) के तहत बुवाई योग्य क्षेत्र का विस्तार
करना |
(ii)
जल के अपव्यय को कम करने और अवधि और सीमा
दोनों में उपलब्धता बढ़ाने के लिए खेत में पानी के उपयोग की दक्षता में सुधार करना
|
(iii)
सिंचाई और अन्य जल बचत प्रौद्योगिकीयाँ (प्रति
बूंद अधिक फसल) और सतत जल संरक्षण
प्रणालियों को अपनाना |
प्रश्न : सरदार सरोवर परियोजना किस नदी पर बनाया
गया है ? इससे विभिन्न राज्यों को मिलने वाले लाभों का उल्लेख कीजिए |
उत्तर : सरदार
सरोवर बाँध गुजरात में नर्मदा नदी पर बनाया गया है | यह भारत कि एक बड़ी जल संसाधन
परियोजना है | जिसमें चार राज्य महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, गुजरात तथा राजस्थान
सम्मलित हैं | इनको मिलने वाले लाभ निम्नलिखित हैं |
(i)
सरदार सरोवर परियोजना सूखा ग्रस्त तथा मरुस्थलीय
भागों की जल आवश्यकता को पूरा करेगी |
(ii)
सरदार सरोवर परियोजना 15 जि
18.45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई की सुविधा प्रदान करेगी |
(iii)
इससे राजस्थान के सामरिक महत्व के रेगिस्तानी
जिलों बाड़मेर और जालौर के 2,46,000
हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई होगी |
तथा महाराष्ट्र के आदिवासी पहाड़ी इलाके में लिफ्ट नहर तंत्र के माध्यम से 37,500
हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई होगी |
(iv)
गुजरात में लगभग 75
प्रतिशत कमांड क्षेत्र सूखा प्रवण है जबकि राजस्थान में सम्पूर्ण कमांड क्षेत्र
सूखा प्रवण है | सुनिश्चित जल की उपलब्धता से
जल्द ही इस क्षेत्र को सूखा की समस्या से राहत प्रदान करेगी |
प्रश्न : कृष्णा –गोदावरी विवाद क्या है ?
उत्तर : कृष्णा – गोदावरी विवाद की शुरुआत महाराष्ट्र
सरकार द्वारा कोयना नदी पर जल विद्युत परियोजना ले लिए बाँध बनाकर जल की दिशा
परिवर्तन करने से उत्पन्न हुई है | कर्नाटक
और आंध्रप्रदेश द्वारा इस परियोजना के निर्माण पर आपत्ति जताई गई है | इससे इन दोनों राज्यों में पड़ने वाले नदी के निचले
हिस्सों में जल प्रवाह कम हो जाएगा और कृषि और उद्योग पर विपरीत असर पड़ेगा |
प्रश्न : राजस्थान
के अर्ध –शुष्क और शुष्क क्षेत्रों में छत वर्षाजल संग्रहण की टाँका विधि का वर्णन
कीजिए |
उत्तर : राजस्थान के
अर्ध –शुष्क और शुष्क क्षेत्रों विशेषकर बीकानेर, फलौदी और बाड़मेर में, लगभग हर घर
में पीने का पानी संग्रहित करने के लिए भूमिगत टैंक अथवा ‘टाँका’ हुआ करते थे |
इसका आकार एक बड़े कमरे जितना हो सकता है |
फलौदी में एक घर में 6.1 मीटर गहरा, 4.27
मीटर लंबा और 2.44 मीटर चौड़ा टाँका था |
टाँका यहाँ सुविकसित छत वर्षाजल संग्रहण तंत्र
का अभिन्न हिस्सा होता है जिसे मुख्य घर या आँगन में बनाया जाता था | वे
घरों की ढलवाँ छतों से पाइप द्वारा जुड़े हुए थे | छत से वर्षा का पानी इन नलों (पाइपों)
से होकर भूमिगत टाँका तक पहुँचता था जहाँ इसे एकत्रित किया जाता था | वर्षा का पहला जल छत और पाइपों को
साफ़ करने में प्रयोग होता था और उसे
संग्रहित नहीं किया जाता था | इसके बाद होने वाली वर्षा का जल संग्रहण किया जाता
था |
टाँका में वर्षा जल अगली वर्षा ऋतु तक संग्रहित किया जा
सकता है | यह इसे जल की कमी वाली ग्रीष्म ऋतु तक पीने का जल उपलब्ध करवाने वाला जल
स्त्रोत बनाता है | टाँका में एकत्रित वर्षा जल को इस क्षेत्रों में पालर पानी के
नाम से पुकारा जाता है | यह पालर पानी
प्राकृतिक जल का शुद्धतम रूप समझा जाता है |
कुछ घरों में तो टाँकों के साथ भूमिगत कमरे भी बनाए जाते हैं क्योंकि जल का
यह स्त्रोत इन कमरों को ठंडा रखता था जिससे ग्रीष्म ऋतु में गर्मी से राहत मिलती
है |
परन्तु
यह दुःख की बात है कि आज राजस्थान में छत वर्षा जल संग्रहण की रीति इंदिरा गाँधी
नहर से उपलब्ध बारहमासी पेयजल के कारण कम होती जा रही है | हालाँकि कुछ घरों में
टाँकों की सुविधा अभी भी है | क्योंकि उन्हें नल के पानी का स्वाद पसंद नहीं है |
प्रश्न :
भारत के कई ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जल संरक्षण का यह तरीका प्रयोग में लाया
जा रहा है | एक उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए |
अथवा
कर्नाटक के
मैसूर जिलें में स्थित एक गाँव गंडाथूर में ग्रामीणों ने किस प्रकार वर्षा जल
संग्रहण में उपलब्धि प्राप्त की है |
उत्तर
: सौभाग्य से आज भी भारत के कई ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जल संरक्षण का छत
वर्षाजल संग्रहण का तरीका प्रयोग में लाया
जा रहा है | कर्नाटक के मैसूर जिलें में स्थित एक गाँव गंडाथूर में ग्रामीणों ने
अपने घर में जल आवश्यकता की पूर्ति के लिए
छत वर्षाजल संग्रहण की व्यवस्था की हुई है |
गाँव के लगभग 200 घरों में यह व्यवस्था है और इस गाँव ने वर्षा जल
सम्पन्न गाँव की ख्याति प्राप्त की है | इस गाँव में लगभग 1,000
मिलीमीटर वर्षा होती है और 10 भराई के साथ
यहाँ संग्रहण दक्षता 80 प्रतिशत है | यहाँ पर प्रत्येक वर्ष 50,000 मीटर जल का संग्रह और उपयोग कर सकता है | 200 घरों द्वारा हर वर्ष लगभग 1000,000 लीटर जल एकत्रित किया जाता है |
प्रश्न :
भारत के किस राज्य में हर घर में छत वर्षा जल संग्रहण ढाँचों का बनाना आवश्यक कर दिया है ?
उत्तर : तमिलनाडु एक
ऐसा राज्य है जहाँ पर छत वर्षा जल संग्रहण ढाँचों का बनाना आवश्यक कर दिया है |
प्रश्न :
मेघालय की राजधानी शिलांग में छत वर्षाजल संग्रहण प्रचलित है | यह रोचक रोचक क्यों
है ?
उत्तर : मेघालय की
राजधानी शिलांग में छत वर्षाजल संग्रहण प्रचलित है | यह रोचक इसलिए है क्योंकि
चेरापूँजी और मासिनराम जहाँ विश्व की सबसे अधिक वर्षा होती है, शिलांग से 55 किलोमीटर की दूरी पर ही स्थित है और यह शहर पीने के पानी
की कमी की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ता है | शहर के लगभग हर घर में छत वर्षा
जल संग्रहण की व्यवस्था है | घरेलू जल
आवश्यकता की कुल माँग के लगभग 15-25 प्रतिशत हिस्से की
पूर्ति छत जल संग्रहण व्यवस्था से ही होती हैं |
प्रश्न : कितने करोड़ लोग 2025 में जल की नितान्त कमी झेलेंगे ?
उत्तर : लगभग 25 करोड़ लोग |
प्रश्न : एक ओर इजराइल जैसे 25 सेंटीमीटर औसत वार्षिक वर्षा वाले देश में जल का कोई अभाव नहीं है तो
दूसरी ओर 114 सेंटीमीटर औसत वार्षिक वर्षा वाले हमारे देश
में प्रति वर्ष देश के किसी भाग में सूखा अवश्य पड़ता है इसका क्या कारण हैं ? इसे हम किस प्रकार
नियंत्रित कर सकते हैं ?
उत्तर : इजराइल जैसे 25 सेंटीमीटर औसत
वार्षिक वर्षा वाले देश में जल का कोई अभाव नहीं है तो दूसरी ओर 114 सेंटीमीटर औसत वार्षिक वर्षा वाले हमारे देश में प्रति वर्ष देश के किसी
भाग में सूखा अवश्य पड़ता है इसका कारण
इजराइल में वर्षा जल का उचित प्रबंधन किया जाता है | जबकि हमारे देश में जल की
उपलब्धता और उसके स्वरूप के अनुसार समुचित जल प्रबंधन न होने के कारण ही वर्षा का
जल नदी- नालों में तेजी से बहकर समुद्र में चला जाता है | जिससे वर्षा के बाद के
लगभग नौ महीनें देश के कई इलाकों में जल की कमी होती है | अर्थात उचित प्रबंध न
होना ही जल के अभाव के कारण हैं | जल के उचित प्रबंध के द्वारा हम जल के अभाव से
उत्पन्न सूखे को नियंत्रित कर सकते हैं |
प्रश्न : क्या यह सम्भव है कि किसी क्षेत्र में
प्रचुर मात्रा में जल संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद भी वहाँ जल की दुर्लभता हो ?
अथवा
प्रश्न :जल
दुर्लभता किसके परिणाम स्वरूप हो सकती है ?
अथवा
प्रश्न : जल
दुर्लभता के मुख्य कारण क्या हो सकते हैं ?
उत्तर : किसी क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में जल संसाधन
उपलब्ध होने के बावजूद भी वहाँ जल की दुर्लभता हो यह संभव हो सकता है | जैसे
हमारे शहर इसके
उदाहरण हैं |
जिन क्षेत्रों में
पर्याप्त मात्रा में जल संसाधन उपलब्ध हैं उन क्षेत्रों में जल दुर्लभता होने के निम्नलिखित कारण हैं |
जल संसाधनों के असमान
वितरण
(i)
बढ़ती हुई जनसँख्या के परिणाम स्वरूप जल की
बढ़ती माँग
जल, अधिक जनसँख्या के लिए घरेलू उपयोग के साथ साथ अधिक
अनाज उगाने के लिए लिए भी चाहिए | अनाज का उत्पादन बढानें के लिए जल संसाधनों का
अतिशोषण करके ही सिंचित क्षेत्र बढ़ाया जा सकता है
| शुष्क ऋतु में भी खेती की जाती है |
सिंचित कृषि भूमि में जल का सबसे ज्यादा उपयोग होता है |
(ii)
जल संसाधनों का अतिशोषण
किसानो के खेतों पर अपने निजी कुएँ और नलकूप हैं जिनसे सिंचाई करके वे
उत्पादन बढ़ा रहे हैं | परन्तु इसके कारण भौमजल का स्तर नीचे की ओर गिर सकता है और
लोगों के लिए जल की उपलब्धता में कमी हो सकती है | और भोजन सुरक्षा खतरे में पड़
सकती है |
शहरी आवास समितियों या कालोनियों के
अंदर जल पूर्ति के लिए नलकूप स्थापित किए गए हैं | इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि
शहरों में जल संसाधनों का अति शोषण हो रहा है | और इनकी कमी होती जा रही है |
(iii)
औद्योगीकरण और शहरीकरण
स्वतंत्रता
के बाद भारत में तेजी से औद्योगीकरण और शहरीकरण हुआ और विकास के अवसर प्राप्त हुए
| आजकल हर जगह बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ (बड़े औद्योगिक घरानों के रूप में फैली हुई
हैं | उद्योगों की बढ़ती हुई संख्या के
कारण अलवणीय जल संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है | उद्योगों को चलाने के लिए अत्यधिक जल
के अलावा उनको चलाने के लिए ऊर्जा की भी आवश्यकता होती है और इसकी काफी हद तक
पूर्ति जल विद्युत से होती है |
(iv)
जल की
खराब गुणवत्ता के कारण
कई बार ऐसी स्थिति होती है कि जल संसाधन उपलब्ध हैं परन्तु
फिर भी जल की दुर्लभता पाई जाती है | यह दुर्लभता जल उपलब्धता वाले क्षेत्रों में जल की खराब गुणवत्ता के कारण उत्पन्न होती है | पिछले कुछ वर्षों में यह
चिंता का विषय बनता जा रहा है कि लोगों की आवश्यकता के लिए प्रचूर मात्रा में जल
उपलब्ध होने के बावजूद यह घरेलू और औद्योगिक अपशिष्टों रसायनों, कीटनाशकों और कृषि
में प्रयुक्त उर्वरकों द्वारा प्रदूषित है और मानव उपयोग के लिए खतरनाक हैं |
प्रश्न : “जल
दुर्लभता बढ़ती जनसँख्या का परिणाम है |” तर्क सहित व्याख्या कीजिए |
उत्तर : बढ़ती
जनसंख्या निम्न प्रकार से जल दुर्लभता के लिए उत्तरदायी है |
(i)
जल, अधिक जनसँख्या के लिए घरेलू उपयोग के साथ
साथ अधिक अनाज उगाने के लिए लिए भी चाहिए
|
(ii)
बढ़ती हुई जनसँख्या के लिए अधिक जल की आवश्यकता
होती है | उनके उपयोग हेतु पर्याप्त जल नहीं मिल पाता है |
(iii)
इसके अलावा शहरी आवास समितियों या कालोनियों
के अंदर जल पूर्ति के लिए नलकूप स्थापित किए गए हैं | जिससे भूमिगत जल का स्तर
नीचे जा रहा है |
प्रश्न : कृषि
भारत में जल दुर्लभता को किस प्रकार बढ़ा रही है ? वर्णन करें |
उत्तर : किसानो के
खेतों पर अपने निजी कुएँ और नलकूप हैं जिनसे सिंचाई करके वे उत्पादन बढ़ा रहे हैं |
इसके कारण भौमजल का स्तर नीचे की ओर गिर रहा है
कृषि में प्रयुक्त
होने वाले कीटनाशकों और कृषि में प्रयुक्त उर्वरकों द्वारा भूमिगत जल प्रदूषित हो
रहा है |
प्रश्न : किस
प्रकार शहरीकरण और शहरी जीवन शैली जल संसाधनों का अतिदोहन कर रहे हैं ? वर्णन करें
|
उत्तर : शहरी आवास
समितियों या कालोनियों के अंदर जल पूर्ति के लिए नलकूप स्थापित किए गए हैं | इसमें
कोई आश्चर्य नहीं है कि शहरों में जल संसाधनों का अति शोषण हो रहा है | और इनकी
कमी होती जा रही है |
घरेलू अपशिष्टों के
झीलों और नदियों में प्रवाहित किए जाने के कारण जल प्रदूषित हो रहा है |
प्रश्न : तेजी
से फ़ैल रहे औद्योगीकरण से जल संसाधनों पर कैसे दबाव बढ़ रहा है ?
उत्तर : औद्योगीकरण
से निम्न प्रकार से जल संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है |
(i)
उद्योगों में जल का प्रयोग कच्चे माल के रूप
में होता है साथ ही मशीनों को ठंडा करने के लिए भी किया जाता है |
(ii)
उद्योगों को चलाने के लिए अत्यधिक जल के अलावा
उनको चलाने के लिए ऊर्जा की भी आवश्यकता होती है और इसकी काफी हद तक पूर्ति जल
विद्युत से होती है |
(iii)
नदियों और झीलों का जल औद्योगिक अपशिष्टों रसायनों
द्वारा प्रदूषित किया जाता है |
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