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Monday, August 9, 2021

POPULATION COMPOSITION LESSON 3 12TH FUNDAMENTAL IN HUMAN GEOGRAPHY

अध्याय -3

जनसंख्या संघटन

कक्षा 12 वीं (मानव भूगोल के मूल सिद्धांत)

जनसंख्या संघटन का अर्थ

किसी देश की जनांकिकीय विशेषताओं अथवा जनांकिकीय संरचना कों ही जनसंख्या संघटन कहते हैं | जनसंख्या संघटन के अंतर्गत लिंगानुपात, साक्षरता, ग्रामीण –नगरीय  जनसंख्या, जनसंख्या की व्यवसायिक संरचना, धार्मिक संरचना, भाषाई संरचना, आयु संरचना तथा जीवन प्रत्याशा आदि का अध्ययन किया जाता है | इन तत्वों के द्वारा ही लोगों की पहचान या जनसंख्या की विशेषताओं का पता चलता है |

जनसंख्या की विशेषताओं कों मापने के आधार (जनसंख्या के घटक)

किसी देश की जनसंख्या की विशेषताओं कों निम्नलिखित घटकों के द्वारा मापा जा सकता है |

लिंगानुपात, आयु संरचना, साक्षरता, जनसंख्या की व्यवसायिक संरचना, जीवनप्रत्याशा,धार्मिक संघटन,भाषाई संघटन तथा आवासीय संरचना  (ग्रामीण –नगरीय  जनसंख्या) आदि |

 जनसंख्या  का लिंग संघटन

जनसंख्या के लिंग संघटन का अध्ययन एक विशेष सूचकांक की सहायता से किया जाता है | यह सूचकांक लिंगानुपात (Sex Ratio)  है |

लिंग अनुपात का अर्थ

किसी देश के जनसंख्या में स्त्रियों और पुरुषों की संख्या के बीच के अनुपात कों लिंग अनुपात कहते हैं | 

कुछ देशों में लिंग अनुपात कों प्रति हजार स्त्रियों  की संख्या के अनुपात में  पुरुषों की संख्या ज्ञात की जाती है | इसे निम्न सूत्र द्वारा परिकलित किया ज सकता है |

 प्रति हजार स्त्रियों  की संख्या के अनुपात में  पुरुषों की संख्या = (कुल प्रुरुष /कुल स्त्रियाँ) x 1000

  भारत में लिंग अनुपात कों प्रति हजार पुरुषों की संख्या के अनुपात में स्त्रियों  की संख्या ज्ञात की जाती है | इसे निम्न सूत्र द्वारा परिकलित किया ज सकता है |

 प्रति हजार पुरुषों की संख्या के अनुपात में  स्त्रियों की संख्या = (कुल स्त्रियाँ /कुल प्रुरुष ) x 1000

 लिंग अनुपात स्त्रियों के प्रतिकूल होने के कारण

जिन प्रदेशों में स्त्रियों के प्रति भेदभाव होते हैं  वहाँ लिंगानुपात स्त्रियों के प्रतिकूल होता है | लिंगानुपात के स्त्रियों के प्रति प्रतिकूल होने के निम्नलिखित कारण हैं |

1)      स्त्री भ्रूण हत्या

2)      स्त्री शिशु हत्या

3)      स्त्रियों के प्रति घरेलू हिंसा

4)      स्त्रियों का सामाजिक –आर्थिक स्तर निम्न होना |

 विश्व में जनसंख्या का लिंग-संघटन

विश्व की जनसंख्या का औसत लिंगानुपात प्रति 100 स्त्रियों पर 102 पुरुष हैं | विश्व में उच्चतम लिंगानुपात लैटविया में दर्ज किया गया है | जहाँ पर प्रति 100 स्त्रियों पर 85 पुरुष हैं | इसके विपरीत विश्व में सबसे कम लिंगानुपात संयुक्त अरब अमीरात (U.A.E)  में है | जहाँ पर प्रति 100 स्त्रियों पर 311 पुरुष है | लिंग अनुपात के विश्व प्रतिरूप में विश्व के विकसित देशों में कोई अन्तर दिखाई नहीं देता | संयुक्त राष्ट्र संघ के कुल 211 देशों में से 139 देशों में लिंग अनुपात स्त्रियों के अनुकूल है | जबकि 72 देशों में स्थिति स्त्रियों के प्रतिकूल है |

सामान्यत: एशिया महाद्वीप में लिंगानुपात निम्न है | चीन, भारत, साऊदी  अरब, पकिस्तान व अफगानिस्तान जैसे देशों में लिंगानुपात और भी कम है | यहाँ स्थिति स्त्रियों के प्रतिकूल है |

     इसके विपरीत रूस सहित यूरोप के विभिन्न देशों में पुरुषों की संख्या स्त्रियों की संख्या की अपेक्षा कम है  अर्थात यहाँ स्थिति स्त्रियों के अनुकूल है | इन देशों में स्त्रियों की अपेक्षा पुरुषों की कमी  प्राकृतिक  रूप से नहीं है |

इन देशों में पुरुषों की कमी का मुख्य कारण भूतकाल (प्राचीन काल ) में यहाँ के पुरुषों द्वारा विश्व के विभिन्न भागों में उत्प्रवास करना है | जिससे यहाँ लिंगानुपात स्त्रियों के अनुकूल है | इसके अलावा यहाँ की स्त्रियों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति बेहतर है | आर्थिक – सामाजिक कारक भी स्त्रियों की संख्या कों अनुकूल बनाए हुए हैं |

 आयु संरचना का अर्थ

            विभिन्न आयु वर्गों में लोगों कि संख्या कों ही आयु संरचना कहते है | अर्थात आयु संरचना विभिन्न आयु वर्गों के लोगों की संख्या कों प्रदर्शित करता है | यह जनसंख्या संघटन का मुख्य घटक है |

आयु संरचना के अनुसार जनसंख्या के आयु वर्ग

सामान्यत : जनसंख्या कों आयु संरचना के आधार पर तीन प्रमुख वर्गों में  बाँटा जाता है |

1)      0-14 वर्ष का आयु वर्ग

इसे युवा या तरुण आयु वर्ग भी कहते है | यह आश्रित या अनुत्पादक वर्ग है | इस वर्ग की जनसंख्या में उच्च अनुपात में होने का अर्थ है कि उस क्षेत्र (देश) में जन्म दर ऊँची है तथा जनसंख्या युवा है | 

2)      15-59 वर्ष का आयु वर्ग

इस वर्ग कों प्रौढ़ या वयस्क जनसंख्या का वर्ग भी कहते है | क्योंकि इस वर्ग के लोग आर्थिक कार्यों (उत्पादन कार्यों ) में लगे होते हैं |  इसलिए इस आयु वर्ग कों कार्यशील जनसंख्या का आयु वर्ग भी कहते है | यदि किसी देश में इस वर्ग की जनसंख्या का आकार बड़ा है तो यह विशाल कार्यशील जनसंख्या की ओर इंगित करता है |

3)      60 वर्ष से अधिक का आयु वर्ग

इस आयु वर्ग की जनसंख्या कों वृद्ध जनसंख्या कहा जाता है | यदि इस आयु वर्ग के लोग की संख्या किसी देश में अधिक है तो यह उस वृद्ध जनसंख्या कों प्रदर्शित करता है जिसे स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं के लिए अधिक खर्च की आवश्यकता है |

आयु संरचना का महत्व

आयु संरचना जनसंख्या संघटन का महत्वपूर्ण घटक है | यह विभिन्न आयु वर्गों में लोगों की संख्या कों प्रदर्शित करती है | इसके अंतर्गत जनसंख्या कों तीन आयु वर्गों में बाँटा जाता है |  0-14 वर्ष का आयु वर्ग, 15-59 वर्ष का आयु वर्ग तथा 60 वर्ष से अधिक का आयु वर्ग |

            आयु संरचना की सहायता से ही किसी देश की जनसंख्या की जन्म दर, मृत्यु दर, उत्पादकता, मानव क्षमता, रोजगार की स्थिति, क्रियाशील जनसंख्या तथा आश्रित जनसंख्या आदि का पता चलता है | इसके द्वारा भविष्य में जनसंख्या संबंधी विभिन्न बदलाव और उनकी विशेषताओं का अनुमान लगाया जा सकता है |

 आयु लिंग पिरामिड

 आयु लिंग पिरामिड का अर्थ

जनसंख्या का आयु लिंग पिरामिड एक प्रकार का रेखा चित्र होता है  जिसकी सहायता से जनसंख्या की आयु तथा लिंग की संरचना का अध्ययन किया जाता है | इसकी आकृति पिरामिड से मिलती जुलती है | इसलिए इसे आयु लिंग पिरामिड कहते है |

आयु लिंग पिरामिड की समान्य विशेषताएँ

इस पिरामिड में समान्यता 5 से 10 वर्ष के अंतराल वाले आयु वर्ग लिए जाते हैं | प्रत्येक आयु वर्ग की जनसंख्या कों क्षैतिज दण्ड द्वारा दिखाया जाता है | दण्ड की लम्बाई उस आयु वर्ग में स्त्रियों तथा पुरुषों के प्रतिशत अनुपात में होती है | इस पिरामिड में पुरुषों कों दिखाने वाले दण्डों कों केन्द्रीय अक्ष के बायीं ओर तथा स्त्रियों कों दिखाने वाले दण्डों कों केन्द्रीय अक्ष के दायीं ओर ऊर्ध्वाधर रूप में व्यवस्थित किया जाता है | अक्ष कों एक वर्ष या बहु वर्ष के अंतराल पर विभक्त (विभाजित) करते हैं | पिरामिड की आकृति  प्रदर्शित जनसंख्या के इतिहास तथा उसकी विशेषताओं कों दर्शाती है | जनसंख्या की विशेषताओं के द्वारा पिरामिड की तीन प्रकार की आकृतियाँ मानी गई है | इन आकृतियों का संबंध जनसंख्या की तीन भिन्न स्थितियों से होता है |

 आयु लिंग पिरमिड के प्रकार

जनसंख्या के आयु लिंग पिरामिड की आकृति जनसंख्या की विशेषताओं कों दर्शाती है | इन विशेषताओं या स्थिति के आधार पर आयु लिंग पिरामिड तीन प्रकार के होते है |

   क).            विस्तारित होती जनसंख्या का पिरामिड |

  ख).            स्थिर जनसंख्या का पिरामिड |

    ग).            ह्रासमान (घटती हुई ) जनसंख्या का पिरामिड |

 इनका संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित है |

   क).            विस्तारित होती जनसंख्या का पिरामिड  

विस्तारित होती जनसंख्या  त्रिभुजाकार आकृति वाले आयु लिंग पिरामिड द्वारा दर्शायी जाती है | इसका आधार काफी चौड़ा तथा शीर्ष काफी संकरा होता है | चौड़ा आधार यह दर्शाता है कि जनसंख्या का अधिकतर भाग निम्न आयु वर्ग का है | जो उच्च जन्म दर का सूचक है | संकरे शीर्ष से उच्च आयु वर्ग की जनसंख्या में उच्च मृत्यु दर का भी बोध होता है | इस प्रकार के पिरामिड अफ्रीका महाद्वीप के नाइजीरिया जैसे कम विकसित देशों की जनसंख्या का होता है | मैक्सिको तथा बांग्लादेश जैसे अन्य कम विकसित देशों के आयु लिंग पिरामिड भी इसी तरह के होते है | इसे निम्न चित्र द्वारा समझा जा सकता है |

 

 

                            चित्र : - विस्तारित होती जनसंख्या का पिरामिड

  ख).            स्थिर जनसंख्या का पिरामिड

घंटी के आकार का पिरामिड, जो  शीर्ष की ओर शुंडाकार होता है | स्थिर जनसंख्या का पिरामिड  कहलाता है | यह पिरामिड जनसंख्या  की स्थिरता कों दर्शाता है क्योंकि यह इस बात कों सूचित करता कि जन्म दर और मृत्यु दर लगभग समान है | ऑस्ट्रेलिया का आयु लिंग पिरामिड इसी तरह का है | जिसमें स्त्री-पुरुष अनुपात लगभग बराबर है  और युवा जनसंख्या लगभग स्थिर है |अत: ऑस्ट्रेलिया की जनसंख्या लगभग स्थिर है |   इसे निम्न चित्र द्वारा समझा जा सकता है |


                                            चित्र : - स्थिर जनसंख्या का पिरामिड

    ग).            ह्रासमान (घटती हुई ) जनसंख्या का पिरामिड

संकीर्ण आधार तथा शुण्डाकार शीर्ष वाला पिरामिड ह्रासमान (घटती हुई ) जनसंख्या कों दर्शाता है | ये पिरामिड बताते ही कि जन्म दर तथा मृत्यु दर दोनों निम्न होते हैं |  इन देशों में जनसंख्या वृद्धि शून्य अथवा ऋणात्मक होती है | जनसंख्या पिरामिड का यह प्रकार विकसित देशों का सूचक है | जापान का आयु लिंग पिरामिड इसी प्रकार का है | इस पिरामिड कों निम्न चित्र से समझा जा सकता है |


                    चित्र – ह्रासमान जनसंख्या पिरामिड

 

जनसंख्या पिरामिड की आकृति के द्वारा परिलक्षित जनसंख्या की विशेषताएँ

या          

जनसंख्या की विशेषताएँ  जो जनसंख्या पिरामिड की आकृति दर्शाती  है

जनसंख्या पिरामिड  की आकृति जनसंख्या की निम्नलिखित विशेषताओं कों दर्शाती है |

1)      जनसंख्या पिरामिड जनसंख्या की आयु लिंग संरचना कों दर्शाती है |

2)      जनसंख्या पिरामिड के आयु वर्गों कों देखने से हमे किसी विशेष स्थान कि जन्म दर, मृत्यु दर  लिंगानुपात, आदि का पता चलता है |

3)      प्रत्येक पिरामिड में बायाँ भाग पुरुषों कों और दायाँ भाग स्त्रियों की संख्या कों प्रतिशत में कों दर्शाता है | जिससे सभी वर्गों में लिंग अनुपात का पता चल जाता है |

विश्व के विभिन्न भागों में आयु लिंग संरचना में असंतुलन के कारण

विश्व के विभिन्न भागों में आयु लिंग संरचना में असंतुलन के निम्नलिखित कारण हैं |

1.       लिंग भेदभाव के कारण लिंगानुपात में असंतुलन हो जाता है | जहाँ लिंग अनुपात प्रतिकूल होता है \ वहाँ पर स्त्री भ्रूण हत्या, स्त्री शिशु हत्या तथा स्त्रियों के प्रति घरेलू हिंसा होने से आयु लिंग संरचना असंतुलित हो जाती है |

2.       स्त्री –पुरुष की जन्म दर में अन्तर होने के कारण भी आयु लिंग संरचना बिगड़ती है | क्योंकि एक अनुमान के अनुसार प्रत्येक समाज में जन्म के समय लड़कियों की अपेक्षा लडके अधिक पैदा होते है | परिणाम स्वरूप लड़कियों की संख्या कम होने से असंतुलन हो जाता है |

3.       स्त्री-पुरुष की मृत्यु दर में अन्तर होने से भी आयु लिंग संरचना में असंतुलम उत्पन्न होता है | विकसित देशों में सभी आयु वर्गों में पुरषों की मृत्यु दर स्त्रियों की मृत्यु दर से अधिक होती है | जबकि विकासशील देशों में स्त्रियों की मृत्यु दर पुरुषों की मृत्यु दर से अधिक है | इससे भी आयु लिंग संरचना असंतुलित होती है |

4.       अधिकांश विकासशील देशों में पुरुष जनसंख्या प्रवास करके विकसित देशों में चली जाती है | इसी प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों में भी पुरुष लोग खासकर युवा पुरुष आजीविका की तलाश में नगरों में प्रवास कर जाते है | परिणाम स्वरूप ग्रामीण क्षेत्र में स्त्रियों, बच्चों तथा वृद्धों कि संख्या  बढ़ जाती है  और इसके विपरीत नगरों में युवा पुरुषों की संख्या बढ़ने लगती है | इस कारण प्रवास भी आयु लिंग संरचना में असंतुलन उत्पन्न होता है |

जनसंख्या के ग्रामीण - नगरीय संघटन का अर्थ

आवास के आधार पर ग्रामीण तथा नगरीय जनसंख्या में बाँटा जाता है | इसे ही जनसंख्या का ग्रामीण - नगरीय संघटन कहते है |

ग्रामीण – नगरीय जनसंख्या में भिन्नता के आधार (ग्रामीण और नगरीय जनसंख्या में अन्तर करने वाली दशाएँ  )

ग्रामीण तथा नगरीय जनसंख्या में भिन्नता (विभाजन) के निम्नलिखित आधार (दशाएँ ) है |

1)      जीवन शैली (जीवन जीने  के तरीके )

2)      सामाजिक पर्यावरण (सामाजिक ढाँचा)

3)      व्यावसायिक सरंचना

4)      आयु लिंग संघटन

5)      जनसंख्या का घनत्व

6)      विकास का स्तर

ग्रामीण क्षेत्र का अर्थ

वे क्षेत्र जहाँ अधिकतर लोग प्राथमिक क्रियाकलापों में संलग्न रहते है और जनसंख्या का घनत्व अपेक्षाकृत कम होता है , ग्रामीण क्षेत्र कहलातें हैं|

नगरीय क्षेत्र का अर्थ

वह क्षेत्र जहाँ अधिकतर लोग कार्यशील जनसंख्या गैर प्राथमिक क्रियाकलापों (द्वितीयक, तृतीयक और चतुर्थक क्रियाकलापों) में संलग्न रहते है |और जनसंख्या का घनत्व अपेक्षाकृत अधिक होता है , नगरीय क्षेत्र कहलाता हैं |

ग्रामीण और नगरीय जनसंख्या की विशेषताएँ     (ग्रामीण और नगरीय जनसंख्या में अन्तर)

ग्रामीण जनसंख्या की विशेषताएँ

        i.            इस जनसंख्या का अधिकतर भाग  प्राथमिक कार्यों में लगा रहता है |

      ii.            ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों का सामाजिक जीवन सरल तथा सामुदायिक भावना से ओत –प्रोत होता है |

    iii.            यहाँ जनसंख्या घनत्व अपेक्षाकृत कम होता है |

     iv.            ये क्षेत्र कम विकसित होते हैं | अर्थात यहाँ विभिन्न प्रकार की सुविधाओं का आभाव रहता है | जैसे चिकित्सा, शिक्षा, बैंकिंग तथा परिवहन आदि  की सुविधाएँ पर्याप्त नहीं होती | 

नगरीय जनसंख्या की विशेषताएँ

        i.            इस जनसंख्या का अधिकतर भाग  गैर प्राथमिक कार्यों  (द्वितीयक तृतीयक तथा चतुर्थक कार्यों ) में लगा रहता है |

      ii.            यहाँ की जीवन शैली कठोर तथा सामुदायिक भावना से रहित रहती है |

    iii.            यहाँ जनसंख्या घनत्व अधिक होता है |

     iv.            ये क्षेत्र विकसित होते हैं | अर्थात यहाँ आधारभूत संरचना विकसित होने से चिकित्सा, शिक्षा, बैंकिंग तथा परिवहन आदि  की सुविधाएँ पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होती है |

साक्षरता का अर्थ तथा महत्व

साक्षरता का अर्थ है किसी भी भाषा में पढ़ लिख सकना | यह आर्थिक और सामाजिक विकास का कारक भी है और प्रभाव भी है | साक्षरता जनसंख्या की वह गुणात्मक विशेषता है जो किसी क्षेत्र के सामजिक आर्थिक विकास की एक विश्वसनीय और वास्तविक स्थिति दर्शाती है | अर्थात इससे जनसंख्या के सामाजिक और आर्थिक गुणों का बोध होता है | क्योंकि इससे रहन-सहन के स्तर, महिलाओं की सामाजिक स्थिति, शैक्षणिक सुविधाओं की उपलब्धता तथा सरकार की नीतियों का पता चलता है |

साक्षरता कों प्रभावित करने वाले कारक (वे कारक जिन पर साक्षरता निर्भर करती है |)

  साक्षरता निम्न कारकों पर निर्भर करती है |

क.     आर्थिक विकास का स्तर

ख.     रहन-सहन का स्तर

ग.      महिलाओं की सामाजिक स्थिति,

घ.      शैक्षणिक सुविधाओं की उपलब्धता

ङ.      सरकार की नीतियाँ

साक्षर व्यक्ति

वह व्यक्ति जो एक सरल कथन कों समझकर पढ़ तथा लिख सकता है वह साक्षर है |

         भारत में 7 वर्ष से अधिक आयु वाला वह व्यक्ति जो किसी भी भाषा में समझ के साथ पढ़ –लिख सकता है तथा अंक गणितीय परिकलन करने की योग्यता रखता है | वह साक्षर कहलाता है |

साक्षरता दर

कुल जनसंख्या में साक्षर व्यक्तियों का प्रतिशत साक्षरता दर कहलाती है |

             भारत में साक्षरता दर 7 वर्ष से अधिक आयु वाले जनसंख्या के उस प्रतिशत कों सूचित करती है जो किसी भी भाषा में समझ के साथ पढ़ – लिख सकता है | तथा जिसमें समझ के साथ अंक गणितीय परिकलन करने की योग्यता है |

व्यवसायिक संरचना का अर्थ

किसी देश की क्रियाशील जनसंख्या जिसमें 15-59 वर्ष की आयु वर्ग के स्त्री पुरुष शामिल होते है | वे किसी निश्चित आर्थिक क्रिया  जैसे कृषि, वानिकी, आख्रेट, भोजन संग्रहण, मत्स्यन, विभिन्न प्रकार के विनिर्माण कार्यों , परिवहन संचार तथा अन्य अवर्गीकृत सेवाओं में लगें रहते हैं | विभिन्न प्रकार की आर्थिक क्रियाओं  (व्यवसायों)  में लगे जनसंख्या के अनुपात कों व्यवसायिक संरचना  कहा जाता है |

 व्यवसायिक संरचना के वर्ग (आर्थिक क्रियाओं के प्रकार)

 व्यवसायिक संरचना कों चार मुख्य वर्गों में बाँटा ज सकता है | प्राथमिक आर्थिक क्रियाएँ, द्वितीयक आर्थिक क्रियाएँ, तृतीयक आर्थिक क्रियाएँ तथा चतुर्थक आर्थिक क्रियाएँ | इनका संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित है |

प्राथमिक आर्थिक क्रियाएँ  (प्राथमिक व्यवसाय)

जिन क्रियाओं में मनुष्य प्रकृति द्वारा प्राप्त संसाधनों का सीधा प्रयोग करके अपनी आवश्यकताओं तथा इच्छाओं की पूर्ति करता है | उन्हे प्राथमिक क्रियाएँ कहते है | ये वे क्रियाएँ है जो प्रत्यक्ष रूप से पर्यावरण पर निर्भर है | इनका सीधा संबंध प्राकृतिक पर्यावरण की दशाओं से होता है |

इन आर्थिक क्रियाओं के अंतर्गत आखेट (शिकार करना), भोजन संग्रह, पशुचारण, मछ्ली पकड़ना (मत्स्य पालन), वनों से लकड़ी काटना , कृषि तथा खनन कार्य शामिल किए जाते है |

द्वितीयक आर्थिक क्रियाएँ  (द्वितीयक  व्यवसाय)

            वे क्रियाएँ जिनमें मनुष्य प्रकृति द्वारा प्राप्त संसाधनों का सीधा  प्रयोग न करके उन्हे साफ, परिष्कृत तथा परिवर्तित किया जाता है | इस प्रकार की क्रियाओं में प्रकृति से प्राप्त पदार्थों का उपयोग करके नयी वस्तुओं का निर्माण किया जाता है | इसलिए इन्हे विनिर्माण प्रक्रिया भी कहते है |

            इन आर्थिक क्रियाओं में सभीप्रकार के निर्माण उद्योग के कार्य जैसे लौह अयस्क से लौह इस्पात बनाना, कपास से सूती वस्त्र बनाना, गन्ने से चीनी तथा गुड़ बनाना आदि शामिल किए जाते है |

तृतीयक आर्थिक क्रियाएँ  (तृतीयक व्यवसाय)

            वे क्रियाएँ जिनमे समुदाय या समाज कों व्यक्तिगत या व्यवसायिक सेवाएं प्रदान की जाती है उन्हें तृतीयक सेवाएं कहते है | इस प्रकार की क्रियाओं में लगे लोग प्रत्यक्ष रूप से किसी वस्तु का उत्पादन नहीं करते बल्कि अपनी कार्य कुशलता तथा तकनीकी क्षमता से समाज की सेवा करते है | इसलिए इन क्रियाओं कों सेवा क्षेत्रक में शामिल किया जाता है|  

इस प्रकार की क्रियाओं में यातायात, चिकित्सा, स्वास्थ्य, व्यापार, संचार, परिवहन तथा प्रशासनिक सेवाएं शामिल की जाती है |

चतुर्थक आर्थिक क्रियाएँ  (चतुर्थक व्यवसाय)

            वे सेवाएं जो अप्रत्यक्ष रूप से समाज कों सेवाएं प्रदान करती है उन्हें चतुर्थक सेवाओं में शामिल किया जाता है | ये अनुसंधान और विकास पर केंद्रित होती है |

उच्च शिक्षण,प्रबंधन, लेखा कार्य, सूचना का संग्रहण आदि क्रियाएँ इस प्रकार की क्रियाओं में शामिल की जाती है |

व्यवसायिक संरचना किसी देश की आर्थिक विकास के स्तर की सूचक होती है |

विश्व के विभिन्न  देशों में विभिन्न व्यवसायों में संलग्न जनसंख्या के अनुपात में भिन्नता पाई जाती है | व्यवसायिक संरचना के वर्गों में कार्यशील जनसंख्या का अनुपात जिस वर्ग में अधिक संलग्न होता है उससे उस देश के आर्थिक विकास का स्तर पता चलता है | क्योंकि ये आर्थिक क्रियाएँ (व्यवसाय) आर्थिक विकास के स्तर पर निर्भर करती हैं |  

            अल्पविकसित अर्थव्यवस्था  वाले देशों में कार्यशील जनसंख्या का  अधिकांश अनुपात प्राथमिक कार्यों में संलग्न होता है | अगर जनसंख्या का अधिकतर भाग प्राथमिक कार्यों में लगा हुआ है तो इससे मात्र प्राकृतिक संसाधनों का  विदोहन होता है |  

            क्योंकि उद्योगों और अवसंरचना से युक्त विकसित अर्थव्यवस्था ही द्वितीयक ,तृतीयक  तथा चतुर्थक व्यवसायों में अधिकतर जनसंख्या कों समायोजित कर सकती है | अत: जैसे- जैसे अर्थव्यवस्था का विकास होता है वैसे-वैसे द्वितीयक तथा उसके साथ तृतीयक व्यवसायों में भी जनसंख्या का अनुपात बढ़ता जाता है |

भारत जैसे विकासशील देशों में महिलाओं के गांव से नगरीय प्रवास के कम होने के कारण

भारत जैसे विकासशील देशों में महिलाओं के गांव से नगरीय प्रवास के कम होने के निम्नलिखित कारण है |

   क).            ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि कार्यों में महिलाओं की सहभागिता दर काफी आधिक होना महिलाओं के प्रवास को कम करता है  |

  ख).            नगरों में आवास की कमी का होना भीमहिलाओं के प्रवास के रूकावट डालता है |

    ग).            रहन- सहन की उच्च लागत के कारण प्रवासी पुरुष अपने साथ अपने साथ महिलाओं कों नहीं लेकर जाते |

   घ).            विकासशील देशों में नगरीय क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों की कमी भी महिलाओं के प्रवास कों रोकती है |

   ङ).            नगरीय क्षेत्रों में सुरक्षा की कमी के कारण भी विकासशील देशों के महिलायें प्रवास कम करती हैं |

 विश्व के पश्चिमी देशों और एशिया तथा अफ्रीका के देशों में ग्रामीण नगरीय लिंग संघटन में भिन्नता तथा उसके कारण

विश्व के पश्चिमी देशों विशेषकर कनाडा और इंग्लैंड जैसे पश्चिमी यूरोपीय देशों तथा एशिया और अफ्रीका के देशों में ग्रामीण नगरीय लिंग अनुपात में मुख्य अन्तर यह  है कि पश्चिमी देशों में ग्रामीण क्षेत्रों में स्त्रियों की अपेक्षा पुरुषों की संख्या अधिक है |  जबकि नेपाल, पाकिस्तान तथा भारत जैसे देशों में ग्रामीण क्षेत्रों में  पुरुषों की संख्या स्त्रियों की अपेक्षा कम है |

विश्व के पश्चिमी देशों और एशिया तथा अफ्रीका के देशों में ग्रामीण नगरीय लिंग संघटन में भिन्नता के निम्न कारण है |

            पश्चिनी देशों में नगरों में रोजगार के अवसरों की अधिक संभावनायें होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों की महिलायें ग्रामीण क्षेत्रों से नगरों में काम करने आती हैं | इसके अलावा यहाँ कृषि मशीनीकृत है और यह पुरुष प्रधान व्यवसाय है | इसलिए पुरुष ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक है |

            इसके विपरीत एशिया और अफ्रीका के देशों में शहरों में रोजगार के अवसर कम होने व अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण महिलायें नगरों की ओर प्रवास नहीं करती | केवल पुरुष ही प्रवास करते है | इसके अलावा इस देशों में ग्रामीण क्षेत्रों में महिलायें कृषि कार्य में संलग्न रहती है | इससे भी महिलाओं का नगरों की ओर प्रवास कम हुआ है |

प्रश्न : निम्नलिखित में से किसने संयुक्त अरब अमीरात के लिंग अनुपात कों निम्न किया है ?

        i.            पुरुष कार्यशील जनसंख्या का चयनित प्रवास

      ii.            पुरुषों की उच्च जन्म दर

    iii.            स्त्रियों की निम्न जन्म दर

     iv.            स्त्रियों का उच्च उत्प्रवास

उत्तर: पुरुष कार्यशील जनसंख्या का चयनित प्रवास

प्रश्न : कौन सी संख्या जनसंख्या के कार्यशील आयु वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है ?

उत्तर : 15-59 वर्ष

प्रश्न : किस देश का लिंग अनुपात सबसे अधिक है ?

उत्तर : लैटविया

प्रश्न : वृद्ध होती जनसंख्या पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए |

उत्तर :  जनसंख्या का वृद्ध होना एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें बुजुर्ग जनसंख्या का हिस्सा अनुपात की दृष्टि से बड़ा हो जाता है | यह बीसवीं सदी की नयी परिघटना है | विश्व के अधिकांश विकसित देशों में उच्च आयु वर्गों में बढ़ी हुई जीवन प्रत्याशा के कारण वृद्ध जनसंख्या बढ़ रही है | जन्म दर में कमी के साथ जनसंख्या में बच्चों का अनुपात घट गया है |  

 

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