कक्षा 12वीं
मानव भूगोल के मूल सिद्धांत
अध्याय 3 मानव विकास
वृद्धि
वृद्धि का अर्थ मात्रात्म्क
परिवर्तन से है | यह मूल्य निरपेक्ष होता है | यह धनात्म्क या ऋणात्मक हो सकती है | इसका
अर्थ है कि परिवर्तन धनात्म्क है तो वृद्धि दर्शाएगा और परिवर्तन ऋणात्मक है तो
ह्रास दर्शाएगा | वृद्धि
विकासहीन भी हो सकती है और विकासयुक्त भी हो सकती है |
विकास
विकास का अर्थ गुणात्मक
परिवर्तन से है | यह
मूल्य सापेक्ष होता है | विकास ऋणात्मक
नहीं हो सकता | दूसरे शब्दों में कहे कि विकास तब
तक नहीं कहा जा सकता जब तक कि वर्तमान दशाओं में धनात्मक वृद्धि न हो | अर्थात विकास उस समय होता है जब सकारात्मक वृद्धि होती है | लेकिन केवल सकारात्मक वृद्धि से विकास नहीं होता | विकास उस समय होता है जब गुणवत्ता में
सकारात्मक परिवर्तन होता है |
विकासहीन वृद्धि
विकासहीन वृद्धि से
अभिप्राय ऐसी वृद्धि से है जिसमे वृद्धि तो हो लेकिन विकास ना हो | इसे निम्नलिखित उदाहरण द्वारा समझा जा सकता है | किसी निश्चित समय अवधि में किसी नगर की जनसंख्या एक लाख से दो लाख हो जाती
है तो हम कहते है की नगर की वृद्धि हुई है | लेकिन उस नगर मे मूलभूत सुविधाएं जैसे स्वास्थ्य, आवास, शिक्षा, चिकित्सा, पेय जल तथा सुरक्षा आदि की पर्याप्त मात्रा में बढ़ोतरी नहीं हुई है तो ऐसी
वृद्धि विकासहीन वृद्धि कहलाती है |
विकास की अवधारणा में
बदलाव
अनेक दशकों तक किसी देश के विकास के स्तर को केवल आर्थिक वृद्धि के
संदर्भ में मापा जाता था | इसका अर्थ यह है की जिस
देश की अर्थव्यवस्था जितनी बड़ी होगी वह देश उतना ही अधिक विकसित माना जाता था | इस अवधारणा के अंतर्गत वृद्धि का अधिकतर लोगो के जीवन के परिवर्तन से कोई
संबंध नहीं था |
1980 के दशक के अंत में और 1990 के दशक के प्रारम्भ में एक नयी विचारधारा
(अवधारणा) का जन्म हुआ | इस अवधारणा के अनुसार जिस
देश में लोग जीवन की गुणवत्ता का जो आनंद लेते है | उन्हे जितने अधिक अवसर उपलब्ध होते है | जितनी
अधिक स्वतंत्रताओं का वहाँ के लोग उपभोग करते है | वह देश उतना ही अधिक विकसित माना जाता है | इस विचारधारा के अनुसार जीवन की गुणवत्ता, अवसरों
की उपलब्धता, जीने की स्वतंत्रता विकास के महत्वपूर्ण
पक्ष है |
मानव विकास की अवधारणा
1980 के दशक के अंत में और 1990 के दशक के प्रारम्भ में विकास
की एक नयी विचारधारा (अवधारणा) का जन्म हुआ जिसे मानव विकास की अवधारणा कहते है| इस अवधारणा के अनुसार जिस देश में लोग जीवन की गुणवत्ता का जो आनंद लेते
है | उन्हे जितने अधिक अवसर उपलब्ध होते है | जितनी अधिक स्वतंत्रताओं का वहाँ के लोग उपभोग करते है | वह देश उतना ही अधिक विकसित माना जाता है | इस विचारधारा के अनुसार जीवन की गुणवत्ता, अवसरों
की उपलब्धता, जीने की स्वतंत्रता विकास के महत्वपूर्ण
पक्ष है |
मानव विकास की अवधारणा का प्रतिपादन डॉ० महबूब उल हक के द्वारा1990 ई० में किया गया था | ये एक
पाकिस्तानी अर्थशास्त्री थे | 1990 में इन्होने
मानव विकास प्रतिवेदन (मानव विकास रिपोर्ट) प्रस्तुत की थी और मानव विकास सूचकांक
निर्मित किया था |
डॉ० महबूब उल हक ने मानव विकास का वर्णन एक ऐसे विकास के रूप
में किया जो लोगो के विकल्पों में वृद्धि कर्ता हैऔर उनके जीवन में सुधार लाता है | उनकी अवधारणा में सभी प्रकार के विकास का केंद्र बिन्दु मनुष्य है | उनके अनुसार लोगो के विकल्प स्थिर नहीं है बल्कि परिवर्तनशील है | इस प्रकार विकास का मूल उद्देश्य ऐसी दशाओं को उत्पन्न करना है जिनमे लोग
सार्थक जीवन व्यतीत कर सकें |
मानव विकास की परिभाषा
डॉ० महबूब उल हक के
अनुसार,”विकास का संबंध लोगों के विकल्पों में बढ़ोतरी से है ताकि वे आत्मसम्मान के
साथ दीर्घ और स्वस्थ जीवन जी सकें |
डॉ० अमर्त्य सेन के
अनुसार, विकास का मुख्य ध्येय स्वतन्त्रता मे वृद्धि करना (परतंत्रता मे कमी )है | स्वतन्त्रताओं में वृद्धि भी विकास लाने वाला
सर्वाधिक प्रभावशाली माध्यम है | स्वतन्त्रता की
वृद्धि में सामाजिक और राजनैतिक संस्थाओं एवं प्रक्रियाओं का महत्वपूर्ण स्थान
होता है |
सार्थक जीवन
मानव विकास की अवधारणा के
अनुसार सार्थक जीवन केवल दीर्घ (लंबा जीवन) नहीं होता | सार्थक जीवन का अर्थ है लोग स्वस्थ हों, वे
अपनी बुद्धि का विकास कर सकते हों | वे सामाज में
प्रतिभागिता करें और अपने उद्देश्यों को पूरा करने में स्वतंत्र हो |
मानव विकास के सर्वाधिक
महत्वपूर्ण पक्ष (केंद्र बिन्दु)
मानव विकास के सर्वाधिक
महत्वपूर्ण पक्ष निम्नलिखित है |
1. दीर्घ व स्वस्थ जीवन जीना,
2. ज्ञान प्राप्त कर पाना
3. एक शिष्ट जीवन जीने के लिए पर्याप्त संसाधनों का होना
दूसरे शब्दों में मानव
विकास की अवधारणा के अनुसार मानव विकास के तीन केंद्र बिन्दु है |
1. स्वास्थ्य
2. शिक्षा
3. संसाधनों तक पहुँच
लोगों में विकल्पों को
तय करने की क्षमता और स्वतन्त्रता में कमी के कारण, प्रभाव और उपाय
प्राय: लोगों में विकल्पों को तय करने की क्षमता और स्वतन्त्रता में
कमी होती है | यह ज्ञान प्राप्त करने की अक्षमता, लोगों की भौतिक निर्धनता, सामाजिक भेदभाव, संस्थाओं की अक्षमता और अन्य कारणों के होती है |
लोगों में विकल्पों को तय करने की क्षमता और स्वतन्त्रता में कमी के
प्रतिकूल प्रभाव पड़ते है | जैसे लोगों को दीर्घ और
स्वस्थ जीवन जीने, शिक्षा प्राप्ति के योग्य होने और एक
शिष्ट जीवन जीने के साधनों को प्राप्त करने में बाधा उत्पन्न होती है |
लोगों में विकल्पों को तय करने की क्षमता और स्वतन्त्रता में कमी को
दूर करने के लिए या विकल्पों में वृद्धि करने के लिए महत्वपूर्ण उपाय है की लोगों
के स्वास्थ्य, शिक्षा और संसाधनों तक पहुँच में उनकी
क्षमताओं का निर्माण करना चाहिए | यदि इन
क्षेत्रों मे लोगों की क्षमता नहीं है तो उनके विकल्प भी सीमित हो जाते है |
उदाहरण के लिए एक
अशिक्षित बच्चा डॉक्टर बनने का विकल्प नहीं चुन सकता क्योंकि उसका विकल्प शिक्षा
के अभाव में सीमित हो गया है | इसी प्रकार निर्धन लोग बीमारी की लिए
अच्छा चिकित्सा उपचार नहीं चुन सकते क्योंकि संसाधनों के अभाव में उनका विकल्प सीमित
हो जाता है |
मानव
विकास के स्तंभ (मानव विकास की संकल्पनाएँ )
जिस प्रकार किसी इमारत को स्तंभो के सहारे की जरूरत होती हैं | उसी प्रकार मानव विकास का विचार भी समता, सतत
पोषणीयता, उत्पादकता और सशक्तिकरण की संकल्पनाओं पर
आश्रित है | मानव विकास की इन चारों
संकल्पनाओं या स्तंभों का संक्षिप्त वर्णन निम्न प्रकार से है |
1. समता
समता से आशय ऐसी व्यवस्था
करने से है जिससे प्रत्येक व्यक्ति की उपलब्ध संसाधनों तक पहुँच हो सके | लोगों को उपलब्ध अवसर या संसाधन लिंग, प्रजाति, धर्म, आय और भारत के संदर्भ में जाति के भेदभाव
के विचार के बिना समान रूप से प्राप्त होने चाहिए | यद्यपि ऐसा ज़्यादातर नहीं होता फिर भी यह प्रत्येक समाज में घटित होता है | अर्थात समाज में कभी –कभी जातिगत भेदभाव की घटनाएँ
होती रहती है |
उदाहरण के लिए भारत में स्त्रियाँ और सामाजिक तथा आर्थिक रूप से
पिछड़े हुए वर्गों के व्यक्ति बड़ी संख्या में विद्यालय नहीं जा पाते |इससे पता चलता है की शिक्षा तक समान पहुँच ना होना इन वर्गों के लोगों के
विकल्पों को सीमित करता है |
2. सतत
पोषणीयता
सतत पोषणीयता या निर्वहन का अर्थ है अवसरों की
उपलब्धता में निरंतरता | अर्थात अवसर लगातार उपलब्ध होते रहने
चाहिए | सतत पोषणीय मानव विकास के लिए आवश्यक है
की प्रत्येक पीढ़ी को समान अवसर मिले | इसलिए हमें
अपने पर्यावरणीय, वित्तीय तथा मानव संसाधनों का उपयोग
इस प्रकार करना चाहिए की हमारी आने वाली पीढ़ियाँ इससे वंचित न रह जाएँ |
उदाहरण के लिए यदि हम
प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग सही ढंग से ना करके उनको बर्बाद करेंगे तो आने वाली
पीढ़ियों के लिए ये प्राप्त नहीं होंगे | जिससे उनके विकल्पों
में कमी आ जाएगी और उनके विकास मे बाधा आएगी |
3. उत्पादकता
यहाँ उत्पादकता का अर्थ
मानव श्रम उत्पादकता अथवा मानव कार्य के संदर्भ में उत्पादकता है | लोगों में क्षमताओं का निर्माण करके ऐसी उत्पादकता में निरंतर वृद्धि की
जानी चाहिए | किसी देश के लोग ही वहाँ के वास्तविक
धन होते है | उनके ज्ञान को बढ़ाने का प्रयास करके
और उन्हे बेहतर चिकित्सा सुविधायें प्रदान करके उनकी उत्पादक क्षमता बेहतर की जा
सकती है |
4. सशक्तिकरण
सशक्तिकरण का अर्थ है
अपने विकल्प चुनने के लिए शक्ति प्राप्त करना | यह शक्ति बढ़ती हुई
स्वतन्त्रता, क्षमता और उत्पादकता से आती है | लोगों को सशक्त करने के लिए सुशासन और लोकोन्मुखी नीतियों की आवश्यकता
होती है | सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से पिछड़े हुए
समूहों के सशक्तिकरण का मानव विकास में बहुत महत्व है |
मानव विकास के उपागम
मानव विकास के उपागम के
चार उपागम है |
1. आय उपागम
2. कल्याण उपागम
3. आधारभूत आवश्यकता उपागम
4. क्षमता उपागम
इनका वर्णन इस प्रकार है
1
आय उपागम
यह मानव विकास के सबसे
पुराने उपगमों मे से एक है | इसमें मानव विकास को आय के साथ जोड़कर
देखा जाता है | इस उपागम में यह माना जाता है की
किसी व्यक्ति की आय का स्तर उसके द्वारा भोगी जा रही स्वतन्त्रता के स्तर को
परिलक्षित करता है | आय का स्तर ऊँचा होने पर मानव
विकास का स्तर ऊँचा होगा और आय का स्तर निम्न होने पर मानव विकास का स्तर भी नीचा
होगा |
2
कल्याण उपागम
यह उपागम मानव को
लाभार्थी अथवा सभी विकासात्मक गतिविधियों के लक्ष्य (केंद्र) के रूप में देखता है | यह उपागम शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और सुख साधनों पर उच्चतर सरकारी व्यय का तर्क देता है | इस उपागम के अनुसार लोग लोग विकास में प्रतिभागी नहीं है किन्तु वे केवल
निष्क्रिय प्राप्तकर्ता है | यह उपागम मानता है की
सरकार लोगो के कल्याण पर अधिकतम व्यय करके मानव विकास के स्तरों में वृद्धि करने
के लिए जिम्मेदार है
3
आधारभूत आवश्यकता उपागम
इस उपागम को मूल रूप से
अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने प्रस्तावित किया था | इसमें छ: न्यूनतम आवश्यकताओं जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, भोजन, जलापूर्ति, स्वच्छ्ता
और आवास की पहचान की गई थी | इसमें मानव विकल्पों
के प्रश्न की उपेक्षा की गई है और परिभाषित वर्गों की मूलभूत आवश्यकताओं की
व्यवस्था पर ज़ोर दिया गया है |
4
क्षमता उपागम
इस उपागम का संबंध डॉ० अमर्त्य
सेन से है | इस उपागम के अनुसार संसाधनों के पहुँच
के क्षेत्रों में मानव क्षमताओं का निर्माण बढ़ते मानव विकास की कुंजी है | दूसरे शब्दों में हम कह सकते है की क्षमताओं को विकसित किए बिना मनुष्य
संसाधनों तक नहीं पहुँच सकता | मानव क्षमताओं का
निर्माण ही मानव विकास का आधार है |
संयुक्त राष्ट्र विकास
कार्यक्रम (UNITED NATION DEVELOPMENT PROGRAMME)
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था है जो 1990 ई० से प्रतिवर्ष मानव विकास
प्रतिवेदन (मानव विकास रिपोर्ट) प्रकाशित करती है | यह संस्था मानव विकास मापने के लिए मानव विकास सूचकांक (HDI) तथा मानव गरीबी सूचकांक (HPI) का प्रयोग करती है | इन सूचकांकों की सहायता से यह संस्था विभिन्न देशों को मानव विकास के आधार
पर वर्गीकृत करती है |
मानव विकास प्रतिवेदन
(मानव विकास रिपोर्ट) (HUMAN DEVELOPMENT REPORT)
मानव विकास प्रतिवेदन (मानव विकास रिपोर्ट) संयुक्त राष्ट्र विकास
कार्यक्रम (UNDP) नामक संस्था 1990 ई० से
प्रतिवर्ष प्रकाशित करती है | इस रिपोर्ट में
मानव विकास को मापने के लिए मानव विकास सूचकांक (HDI) तथा मानव गरीबी सूचकांक (HPI) का प्रयोग करती है | इन सूचकांकों की सहायता से यह रिपोर्ट मानव विकास के स्तर के अनुसार सभी
सदस्य देशों की कोटि (रैंक), तथा क्रमानुसार उन देशों
की सूची उपलब्ध कराती है | यह रिपोर्ट विभिन्न
देशों को मानव विकास के सूचकांकों के आधार पर अति उच्च, उच्च, मध्यम तथा निम्न मानव विकास के स्तर के
रूप में वर्गीकृत करती है |
मानव विकास का मापन
संयुक्त राष्ट्र विकास
कार्यक्रम के द्वारा मानव विकास का मापन दो प्रकार के सूचकांकों द्वारा किया जाता हैं |
1. मानव विकास सूचकांक
2. मानव गरीबी सूचकांक
मानव विकास सूचकांक (HDI)
मानव विकास सूचकांक स्वास्थ्य
शिक्षा और संसाधनों तक पहुँच जैसे प्रमुख क्षेत्रों में निष्पादन के आधार पर देशों
का क्रम तैयार करता है | यह क्रम 0 से 1 के बीच के
स्कोर पर आधारित होता है | यह स्कोर एक देश मानव
विकास के महत्वपूर्ण सूचकों में अपने रिकॉर्ड के आधार पर प्राप्त करता है |
स्वास्थ्य, शिक्षा तथा संसाधनों तक पहुँच
ये तीन महत्वपूर्ण सूचक है जिनके आधार पर मानव विकास सूचकांक का मान (स्कोर)
प्राप्त किया जाता है | इनका संक्षिप्त वर्णन इस
प्रकार है |
1
स्वास्थ्य (दीर्घ एवं स्वस्थ जीवन)
किसी भी देश के लोगों के
स्वास्थ्य का मूल्यांकन करने के लिए जन्म के समय आयु (जीवन प्रत्याशा) के सूचक का
प्रयोग किया जाता है | जिसका अर्थ है की जिस समय कोई बच्चा जन्म
लेता है उस समय उस देश के लोगों की औसत आयु कितनी है | उच्चतर जीवन प्रत्याशा का अर्थ है कि लोगों के पास अधिक दीर्घ (लंबा) और
अधिक स्वस्थ जीवन जीने के ज्यादा अवसर है |
2
शिक्षा (शिक्षित एवं ज्ञानवान होना )
शिक्षा का मूल्याकंन करने
के लिए प्रौढ़ साक्षरता दर तथा सकल नामांकन अनुपात जैसे सूचकों का प्रयोग किया जाता
है | पढ़ और लिख सकने वाले व्यस्कों कि संख्या (प्रौढ़ लोगों कि संख्या जो पढ़ लिख
सकते है |) तथा विद्यालयों में नामांकित बच्चों कि
संख्या यह बताती है कि किसी देश में ज्ञान तक पहुँच (शिक्षा प्राप्त करना) कितना
आसान या कितना कठिन है | यदि लोगों और नामांकित
बच्चों कि संख्या अधिक है तो शिक्षा प्राप्त करना आसान है और यदि कम है तो शिक्षा
प्राप्त करना कठिन है |
3
संसाधनों तक पहुँच (संसाधनों की उपलब्धता )
संसाधनों तक पहुँच
(संसाधनों की उपलब्धता ) को लोगों की क्रय शक्ति के संदर्भ में मापा जाता है
अर्थात लोगों का अपनी आवश्यकताओं के लिए कितना धन खर्च करने की क्षमता है | इसे अमीरीकी डॉलर में मापा जाता है |
मानव विकास सूचकांक की गणना
स्वास्थ्य, शिक्षा तथा संसाधनों तक पहुँच
ये तीन महत्वपूर्ण सूचक है जिनके आधार पर मानव विकास सूचकांक का मान (स्कोर)
प्राप्त किया जाता है | इन तीनों सूचकों को समान
रूप से अधिकतम 1 में से 1/3 भरिता दी जाती है | तीनों
सूचक या आयाम जितना मान प्राप्त करतें है उनके जोड़ को मानव विकास सूचकांक कहते है |
तीनों सूचकों से कुल प्राप्त मान (स्कोर) 0 से 1 के बीच होता है | किसी देश मान जितना 1 के पास होता है उसका
मानव विकास भी उतना ही अधिक होता है और जितना कम होता
है मानव विकास भी उतना ही कम होता है | इस प्रकार 0.983 का स्कोर मानव विकास का अति उच्च स्तर तथा 0.268 का मान
मानव विकास का अत्यंत निम्न स्तर माना जाता है |
मानव विकास सूचकांक
सर्वाधिक विश्वसनीय माप नहीं
मानव विकास सूचकांक मानव
विकास में प्राप्तियों का मापन करता है | यह प्रदर्शित करता है
कि मानव विकास के प्रमुख क्षेत्रों में क्या उपलब्धि हुई है | फिर भी यह सर्वाधिक विश्वसनीय माप नहीं है क्योकि यह माप विकास के वितरण
के बारे में मौन है अर्थात यह माप यह स्पष्ट नहीं करता
कि विकास किन- किन क्षेत्रों में कितना-कितना हुआ है |
मानव गरीबी सूचकांक (HPI)
मानव गरीबी सूचकांक मानव
विकास सूचकांक से संबन्धित है | यह सूचकांक विकास में कमी का मापता है | यह एक बिना आय वाला माप है | यह मानव
विकास में कमी को दर्शाता है | इस कमी की गणना
करने के लिया निम्नलिखित कारकों को शामिल किया जाता है |
1. 40 वर्ष की
आयु तक जीवित न रह पाने की संभाव्यता
2. प्रौढ़ निरक्षरता दर
3. स्वच्छ जल तक पहुँच न
रखने वाले लोगो की संख्या
4. अल्प भार वाले छोटे
बच्चों की संख्या
भूटान की प्रगति का
आधिकारिक माप (सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता या GROSS NATIONAL
HAPPINESS )
भूटान विश्व का अकेला देश
है जिसने सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता को देश की प्रगति का आधिकारिक माप घोषित किया है | भूटान की सरकार ने भौतिक प्रगति और प्रौद्योगिक विकास से होने वाले
संभावित नुकसान को ध्यान में रखा और सतर्कता पूर्वक अपने पर्यावरण अथवा सांस्कृतिक
एवं आध्यात्मिक जीवन के अन्य पहलुओं को सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता को देश की प्रगति
का आधिकारिक माप घोषित किया है | इसका अर्थ है की
प्रसन्नता की कीमत पर भौतिक प्रगति नहीं की जा सकती |
भूटान द्वारा अपनाया गया सकल राष्ट्रीय
प्रसन्नता (GNH) का माप हमें विकास के आध्यात्मिक, भौतिकता और गुणात्मक पक्षों को सोचने के लिए प्रोत्साहित करती है |
मानव विकास के सूचकांक
(स्कोर) के आधार पर देशों का वर्गीकरण
अथवा
मानव विकास के सूचकांक
(स्कोर) के आधार पर देशों का वितरण
मानव विकास के आधार पर
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न देशों की तुलना करें तो हम डेकते है कि प्रदेश के
आकार और प्रति व्यक्ति आय का मानव विकास के साथ प्रत्यक्ष संबंध नहीं है | प्राय: मानव विकास में बड़े देशों की अपेक्षा छोटे देश अधिक अच्छा प्रदर्शन
कर रहे है | इसी प्रकार मानव विकास में अपेक्षाकृत
गरीब देशों का सूचकांक अधिक होने के कारण उनका कोटी क्रम (रैंक) अमीर देशों से
ऊँचा है |
उदाहरण के लिए श्रीलंका, ट्रिनिडाड
और टोबैगो जैसी छोटी अर्थवयवस्था वाले देश मानव विकास
सूचकांक के आधार पर भारत से उच्च स्थान रखते है | इसी
प्रकार केरल में प्रति व्यक्ति आय पंजाब और गुजरात से
कम है लेकिन अन्य कारकों में इसका स्थान ऊपर है इसलिए केरल का मानव विकास सूचकांक
इन राज्यों से अच्छा है |
मानव विकास के सूचकांक के
आधार पर द्देशों का कोटी क्रम निर्धारित होता है | इसी के आधार पर विश्व
के देशों को चार समूहो में वर्गीकृत किया जाता है | मानव विकास रिपोर्ट 2022 के अनुसार विभिन्न देशों को निम्न लिखित प्रकार
से वर्गीकृत किया गया है |
मानव विकास का स्तर |
मानव विकास सूचकांक का स्कोर |
देशों की संख्या |
अति उच्च |
0.800 से ऊपर |
66 |
उच्च |
0.700 से 0.799 के बीच |
49 |
मध्यम |
0.550 से 0.699 के बीच |
44 |
निम्न |
0.549 से नीचे |
32 |
देशों का इस आधार पर
वर्णन निम्न प्रकार से है |
1. अति उच्च मानव विकास वाले देश
इस वर्ग में वे सभी देश शामिल है जिनका मानव विकास सूचकांक का स्कोर 0.800 से ऊपर है | इनकी संख्या 2022 की मानव विकास रिपोर्ट के अनुसार 66 है | स्वीटजरलैंड सबसे उच्च मानव विकास सूचकांक वाला देश है | इसकी क्रम संख्या एक है | इसके अलावा नार्वे, आइसलैंड, हाँग काँग, ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, आयरलैंड, जर्मनी, स्वीडन तथा नीदरलैंड इस वर्ग के प्रमुख देश है |
इन देशों में अति उच्च
मानव विकास होने के निम्न कारण है |
a) शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध करवाना सरकार की महत्वपूर्ण प्राथमिकता
है |
b) इन देशो में सामाजिक खंड (सामाजिक विकास ) में बहुत अधिक करते है |
c) इन देशों की शासन वयवस्था में उच्च निवेश किया जाता है | या ये कहे की इन देशों में सुशासन है |
इस वर्ग में अधितकतर वे
देश है जो पहले साम्राज्यवादी शक्तियाँ रही है | इन देशों में सामाजिक
विविधता की डिग्री उच्च नहीं है | इनमें
यूरोप के अधिकांश देशशामिल है | ये
देश औद्योगीकृत है और पश्चिमी विश्व का प्रतिनिधित्व करते है |
2. उच्च मानव विकास वाले देश
इस वर्ग में वे सभी देश
शामिल है जिनका मानव विकास सूचकांक का स्कोर 0.700 से 0.799 के बीच है | इनकी संख्या 2022 की मानव विकास रिपोर्ट के अनुसार 49 है |
इन देशों में उच्च मानव
विकास होने के निम्न वे सभी कारण जो अति उच्च मानव विकास वाले देशों
में है |
a) शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध करवाना सरकार की महत्वपूर्ण प्राथमिकता
है |
b) इन देशो में सामाजिक खंड (सामाजिक विकास ) में बहुत अधिक करते है |
c) इन देशों की शासन वयवस्था में उच्च निवेश किया जाता है | या ये कहे की इन देशों में सुशासन है |
3. मध्यम मानव विकास वाले देश
इस वर्ग
में वे सभी देश शामिल है जिनका मानव विकास सूचकांक का स्कोर 0.550 से 0.699 के बीच
है | इनकी संख्या 2022 की मानव विकास
रिपोर्ट के अनुसार 44 है | इस वर्ग के अधिकांश देश
विकासशील देशों की श्रेणी में आते है | इनमे से
अधिकांश पूर्वकाल में उपनिवेश थे | इन देशो में से
अधिकांश का विकास द्वितीय विश्व युद्ध के बाद हुआ है | इस वर्ग में वे देश भी शामिल है जो रूस के विघटन के बाद 1990 में
विकसित हुए है |
इन देशों में मध्यम
मानव विकास होने के निम्न कारण है |
a) इन देशों में लोकोन्मुखी नीतियों को अपनाया है |
b) इन देशों ने सामाजिक भेदभाव को तेजी से दूर करके मानव विकास का स्कोर
सुधारा है |
4. निम्न मानव विकास वाले देश
इस वर्ग में वे सभी देश
शामिल है जिनका मानव विकास सूचकांक का स्कोर 0.549 से कम है | इनकी संख्या 2022 की मानव विकास रिपोर्ट के अनुसार 32 है |
इन देशों में निम्न मानव
विकास होने के निम्न कारण है |
a) इस वर्ग के अधिकांश देश छोटे है |
b) इन देशों में राजनीतिक उपद्रव, गृहयुद्ध, सामाजिक अस्थिरता, अकाल तथा बीमारियों की अधिक
घटनाएँ हुए है जिससे ये अल्प विकसित रहे है |
c) सुविचार करके नीतियों का निर्माण नहीं होना एक महत्वपूर्ण कारण है |
d) इन देशों की सरकार सामाजिक सेक्टरों की बजाय
प्रतिरक्षा पर अधिक खर्च करतीं है |
इन देशों को सही नीतियों
की तत्काल आवश्यकता है जिससे इनके मानव विकास की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके |
मानव विकास की अंतर्राष्ट्रीय तुलनाएं अत्यंत रुचिकर
परिणाम दर्शाती है
मानव विकास के आधार पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर
विभिन्न देशों की तुलना करें तो हम देखते है कि अंतर्राष्ट्रीय तुलनाएं अत्यंत रुचिकर परिणाम
दर्शाती है जो निम्न प्रकार से स्पष्ट होती है |
1. प्रदेश के आकार और प्रति व्यक्ति आय का मानव विकास के साथ प्रत्यक्ष संबंध
नहीं है | प्राय: मानव विकास में बड़े देशों की
अपेक्षा छोटे देश अधिक अच्छा प्रदर्शन कर रहे है | इसी प्रकार मानव विकास में अपेक्षाकृत गरीब देशों का सूचकांक अधिक होने के
कारण उनका कोटी क्रम (रैंक) अमीर देशों से ऊँचा है |उदाहरण
के लिए श्रीलंका, ट्रिनिडाड और टोबैगो जैसी छोटी
अर्थवयवस्था वाले देश मानव विकास सूचकांक के आधार पर
भारत से उच्च स्थान रखते है | इसी प्रकार केरल में
प्रति व्यक्ति आय पंजाब और गुजरात से कम है लेकिन अन्य
कारकों में इसका स्थान ऊपर है इसलिए केरल का मानव विकास सूचकांक इन राज्यों से
अच्छा है |
मानव विकास के सूचकांक के आधार पर देशों का कोटी क्रम निर्धारित
होता है | इसी के आधार पर विश्व के देशों को चार
समूहो में वर्गीकृत किया जाता है | मानव विकास
रिपोर्ट 2022 के अनुसार विभिन्न देशों को निम्न लिखित प्रकार से वर्गीकृत किया गया
है |
मानव विकास का स्तर |
मानव विकास सूचकांक का स्कोर |
देशों की संख्या |
अति उच्च |
0.800 से ऊपर |
66 |
उच्च |
0.700 से 0.799 के बीच |
49 |
मध्यम |
0.550 से 0.699 के बीच |
44 |
निम्न |
0.549 से नीचे |
32 |
2. प्राय: लोग मानव विकास के निम्न स्तरों के लिए लोगों की संस्कृति को भी
दोष देते हैं | उदाहरण के लिए किसी देश का विकास इसलिए
कम हुआ है क्योंकि उस देश के लोग किसी विशेष धर्म का अनुसरण करते है या किसी विशेष
समुदाय से संबंध रखते है |
3. तुलनाएं बताती है की सामाजिक क्षेत्रक में अगर सरकारी खर्च अधिक होता है
तो मानव विकास का स्तर उच्च होने लगता है |
4. देश का राजनीतिक परिवेश तथा लोगो को उपलब्ध स्वत्न्त्रताएं भी मानव विकास
को प्रोत्साहित करती है |
5. मानव विकास के उच्च स्तरों वाले देश सामाजिक सेक्टरों में अधिक निवेश करते
है | ये देश राजनीतिक उपद्रवों और अस्थिरता से
प्राय: स्वतंत्र होते है | इन देशों में संसाधनो
का वितरण भी लगभग समान होता है |
6. मानव विकास के निम्न स्तरों वाले देश सामाजिक सेक्टरों की बजाय प्रतिरक्षा
पर अधिक निवेश करते है | ये देश राजनीतिक उपद्रवों
और अस्थिरता में पड़े होते है | इन देशों में
संसाधनो का वितरण भी असमान होता है | परिणाम
स्वरूप इनका सामाजिक और आर्थिक विकास तीव्रता नहीं पकड़
पाता |
प्रश्न : 1 निम्नलिखित में से कौन सा विकास का
सर्वोतम वर्णन करता है |
(क) आकार
में वृद्धि (ख) गुण में धनात्मक परिवर्तन (ग) आकार में स्थिरता
(घ )गुण में साधारण परिवर्तन
उत्तर : गुण में धनात्मक परिवर्तन
प्रश्न : 2 मानव विकास की अवधारणा निम्नलिखित में
से किस विद्वान की दें है |
(क)प्रो० अमर्त्य सेन (ख) डॉ ० महबूब –उल-हक (ग) एलन सी० सेंपुल (घ) रेटजेल
उत्तर: डॉ ० महबूब –उल-हक
प्रश्न : 3 HDI का पूरा नाम क्या है |
उत्तर : मानव विकास सूचकांक (HUMAN DEVELOPMENT INDEX )
प्रश्न 4: UNDP का
पूरा नाम क्या है |
उत्तर : संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNITED NATION DEVELOPMENT PROGRAMME )
प्रश्न 5 :GNH का पूरा नाम क्या है |
उत्तर : सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता (GROSS NATIONAL HAPPINESS)
प्रश्न 6 : HPI का पूरा नाम क्या है |
उत्तर : मानव गरीबी सूचकांक (HUMAN POWERTY INDEX )
प्रश्न 7 : HDR का पूरा नाम क्या है |
उत्तर : मानव विकास रिपोर्ट (HUMAN DEVELOPMENT REPORT )
प्रश्न 8 : मानव विकास
रिपोर्ट कौन जारी करता है |
उत्तर : संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNITED NATION DEVELOPMENT PROGRAMME )
प्रश्न 9 : मानव विकास रिपोर्ट (HUMAN DEVELOPMENT REPORT )सबसे
पहले कब जारी की गयी |
उत्तर :1990 ई०
प्रश्न 10 : दो दक्षिणी एशियाई विद्वानों के नाम
बताओ जिसने मानव विकास की अवधारणा का विकास किया |
उत्तर : प्रो० अमर्त्य सेन और डॉ ० महबूब –उल-हक
प्रश्न 11 : मानव विकास रिपोर्ट 2022 के अनुसार
सबसे विकसित देश कौन सा है |
उत्तर : स्वीटजरलैंड (मानव विकास सूचकांक 0.962 )
प्रश्न 12 : मानव विकास रिपोर्ट 2022 के अनुसार
भारत का स्थान कौन सा है |
उत्तर :132 वां
प्रश्न 13 मानव विकास रिपोर्ट 2022 के अनुसार भारत
का मानव विकास सूचकांक कितना है |
उत्तर : 0.633
प्रश्न 14 : किन देशों का स्थान मानव विकास
रिपोर्ट 2022 के अनुसार भारत से ऊँचा है |
उत्तर : श्रीलंका, ट्रिनिडाड
और टोबैगो
प्रश्न 12 : मानव विकास रिपोर्ट 2006 के अनुसार
भारत का स्थान कौन सा था |
उत्तर :126 वां
उत्तर : (1) स्वास्थ्य (2)
शिक्षा (3)संसाधनों तक पहुँच
प्रश्न 13 : मानव विकास के सर्वाधिक महत्वपूर्ण पक्ष
कौन से है |
उत्तर : मानव विकास के सर्वाधिक महत्वपूर्ण
पक्ष निम्नलिखित है |
(1)दीर्घ व स्वस्थ जीवन जीना,
(2) ज्ञान प्राप्त कर पाना
(3) एक शिष्ट जीवन जीने के लिए पर्याप्त संसाधनों
का होना
प्रश्न 14 : मानव विकास के उपागम के नाम बताओ |
उत्तर : मानव विकास के उपागम के चार उपागम है |
1.
आय उपागम
2.
कल्याण उपागम
3.
आधारभूत आवश्यकता उपागम
4.
क्षमता उपागम
प्रश्न 15 : मानव विकास की संकल्पनाएँ कौनसी है ? या मानव विकास के चार स्तंभ कौनसे है ?
उत्तर : मानव विकास की चार संकल्पनाएँ निम्न लिखित
है |
1.
समता
2.
सतत पोषणीयता
3.
उत्पादकता
4.
सशक्तिकरण