Tuesday, August 29, 2023

Lesson 7 Transport and Communication Class 12th

 

 कक्षा- 12

विषय - भूगोल

अध्याय – परिवहन और संचार

मानव भूगोल के मूल सिद्धांत

परिवहन

वस्तुओं और सेवाओं कों एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने की प्रक्रिया कों परिवहन कहते हैं | किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के तीव्र विकास के लिए सक्षम परिवहन के साधनों की आवश्यकता होती है | परिवहन के लिए मनुष्यों, पशुओं तथा विभिन्न प्रकार के वाहनों का प्रयोग किया जाता है |

परिवहन का महत्व

परिवहन मनुष्य की गतिशीलता और  समाज की आधारभूत आवश्यकताओं कों पूरा करने के लिए निर्मित एक संगठित उद्योग है | इसके अंतर्गत परिवहन मार्गों, लोगों और वस्तुओं के वहन के लिए गाड़ियों के रख रखाव, मार्गों के रख रखाव, वस्तुओं के लदान, उतराव तथा वितरण का निपटान करने के लिए संस्थाओं का उपयोग किया जाता है |

परिवहन किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी है | देश का आर्थिक विकास काफी हद तक परिवहन पर ही आश्रित होता है |इसे देश के औद्योगिक  विकास की रीढ़ परिवहन कहा जाता है | क्योंकि उद्योगों के लिए कच्चा माल और उनका विनिर्मित माल उपभोक्ता तक पहुँचाने का कार्य परिवहन तंत्र पर ही निर्भर होता है | अत: स्पष्ट है कि एक सक्षम परिवहन तंत्र किसी भी देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है |

प्रत्येक देश ने प्रतिरक्षा के उद्देश्य के लिए विभिन्न प्रकार के परिवहन का विकास किया है | दक्ष संचार व्यवस्था से युक्त आश्वासित और तीव्र गामी परिवहन प्रकीर्ण लोगों के बीच सहयोग एवं एकता कों प्रोन्नत (प्रोत्साहित) करता है |  

परिवहन जाल या जाल तंत्र

विभिन्न स्थानों के बीच जब विभिन्न प्रकार की परिवहन व्यवस्थाएँ विकसित होती है तो वे स्थान इनसे से जुड़कर परिवहन व्यवस्थाओं का  जाल बना देते है | जिसे परिवहन जाल या जाल तंत्र कहते है | जाल-तंत्र का निर्माण नोड और योजक  के द्वारा होता है |  जब अनेक योजक तथा नोड मिलते है तो एक जाल तन्त्र बनता है | एक विकसित जाल तंत्र में जितने अधिक योजक होंगे वह जाल तंत्र उतना ही विकसित है और जाल तन्त्र के स्थान अधिक सुसंबंद्ध (अच्छी तरह से जुड़ें हुए) होंगे |

परिवहन के माध्यम

वस्तुओं और सेवाओं कों एक स्थान से दूसरे स्थान तक वहन करने के लिए परिवहन के विभिन्न माध्यमों का प्रयोग किया जाता है | जैसे स्थल, जल वायु तथा पाइप लाइन आदि | परिणाम स्वरूप परिवहन के तीन मुख्य माध्यम है | जिन्हें क्रमश: स्थल, जल तथा वायु परिवहन कहा जाता है |

सड़कें तथा रेलमार्ग स्थल परिवहन के साधन है | नौपरिवहन जल परिवहन तथा वायुमार्ग वायु परिवहन के दो अन्य प्रकार है | इन मुख्य माध्यमों के अतिरिक्त पाइपलाइनें भी परिवहन का मध्यम है | इनके द्वारा पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, तरल अवस्था में अयस्क तथा जल आदि का परिवहन किया जाता है |

परिवहन का चयन  (परिवहन की विधा की सार्थकता)

या

सुप्रबंधित परिवहन प्रणाली में विभिन्न विधाएं एक –दूसरे के संपूरक होती है

   वस्तुओं और सेवाओं कों एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने की प्रक्रिया कों परिवहन कहते हैं | वस्तुओं और सेवाओं कों एक स्थान से दूसरे स्थान तक वहन करने के लिए परिवहन के विभिन्न विधाओं का प्रयोग किया जाता है | जैसे स्थल, जल वायु तथा पाइप लाइन आदि | इनमें से किसी भी विधा (परिवहन के माध्यम) की सार्थकता ढोई (परिवहित की जाने वाली) वस्तुओं और सेवाओं के प्रकार, परिवहन की लागतों और परिवहन के लिए उपलब्ध विधा (साधनों) पर निर्भर करता है |  उदाहरण के लिए, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थूल तथा भारी-भरकम वस्तुओं का परिवहन जलमार्गों समुद्री मालवाहकों द्वारा किया जाता है | लेकिन ये देश के आंतरिक भागों में सीमित रह जाते है | कम दूरी के लिए सड़क परिवहन अपेक्षाकृत सस्ता पड़ता है | यह तेजी से वस्तुओं कों पहुँचाता है | एक स्थान से उठाकर सीधे उपभोक्ता तक सामान पहुँचाने का यह सबसे अच्छा साधन है | क्योंकि यह घर के दरवाजे तक सामान कों पहुँचाने में सक्षम है |  परन्तु लंबी दूरी में स्थूल तथा भारी सामान पहुंचाना हो तो रेलमार्ग सबसे अच्छा परिवहन का साधन है | किसी भी देश में लंबी दूरियों की यात्रा के लिए भी रेलमार्ग ही सबसे अच्छा है | इसके विपरीत उच्च मूल्य वाली, हल्की तथा शीघ्र खराब होने वाली वस्तुओं  के लिए वायु परिवहन सबसे उत्तम साधन है | अत: स्पष्ट है कि एक सुप्रबंधित परिवहन प्रणाली में परिवहन के विभिन्न साधन  एक दूसरे के पूरक और सहयोगी होते है | इससे यह भी स्पष्ट होता है कि  साधनों का चयन व उनकी सार्थकता परिवहन की उपलब्धता, लागत और वस्तुओं तथा सेवाओं के प्रकार पर निर्भर करतें है |

स्थल परिवहन का ऐतिहासिक विकास

अधिकाँश वस्तुओं एवं सेवाओं का संचलन स्थल मार्गों के माध्यम से होता है | प्राचीन काल से लेकर वर्तमान तक स्थल परिवहन में अनेक बदलाव देखने कों मिलते है | इन बदलावों कों हम स्थल परिवहन के समय के साथ –साथ आए बदलावों कों जानकार समझ सकते हैं |

            आरम्भिक दिनों में मानव स्वयं वाहक का कार्य करता था | जैसे किसी दुल्हन कों डोली या पालकी में बैठाकर चार व्यक्ति लेकर जाते थे | कुछ समय बाद पशुओं का उपयोग बोझा ढोने के लिए किया जाने लगा | घोडों  गधों, खच्चरों, ऊँटों तथा बैलों आदि पशुओं का प्रयोग किया जाता था |  पहिये के अविष्कार के बाद पशुओं द्वारा खींची जाने वाली गाड़ियों और माल डिब्बों का प्रयोग लगातार बढ़ता जा रहा है | आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में तथा छोटे कस्बों में इनका प्रयोग सामान ढोने के लिए किया जाता है |

अठारहवीं शताब्दी में भाप के इंजन के अविष्कार के बाद  परिवहन में क्रान्ति आई | रेलों का विकास हुआ | संभवत : पहला सार्वजनिक  रेलमार्ग सन् 1825 में उत्तरी इंग्लैंड के स्टॉकटन और डर्लिंगटन स्थानों के बीच प्रारम्भ किया गया | 19 वीं सदी तक आते आते रेलमार्ग परिवहन के अत्यधिक लोकप्रिय और तीव्रतम साधन हो गए |      

अन्तर्दहन इंजन के आविष्कार के बाद सड़कों परिवहन का तेजी से विकास हुआ | सड़कों की गुणवत्ता और उन पर चलने वाले वाहनों (कार, ट्रक, बस आदि ) के संदर्भ में सड़क परिवहन में क्रान्ति आ गई | वर्तमान में ये सबसे महत्वपूर्ण स्थल परिवहन के साधन है |

स्थल परिवहन में नवीनतम विकास के रूप में पाइपलाइनों, रजजुमार्गों या तारमार्गों  कों शामिल किया जाता है | पाइपलाइनों के द्वारा तरल पदार्थों जैसे खनिज तेल, नाली का मल तथा जल का परिवहन किया जाता है | जिन क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण उपयुक्त नहीं होता उन क्षेत्रों में में तारमार्ग (रज्जुमार्ग) का प्रयोग  परिवहन के साधनों के रूप में किया जाता है | पर्वतीय क्षेत्रों या तीव्र ढाल वाले क्षेत्रों में तथा खदानों में ये परिवहन के प्रमुख साधन है |

सड़क परिवहन

स्थलीय यातायात के साधनों में से सड़क मार्ग सबसे अधिक प्रयोग किया जाने वाला साधन है | पगडंडी से लेकर आधुनिक मोटर मार्ग तक सभी को सड़क मार्ग कहते है | ये छोटी दूरी के लिए तीव्र गति के परिवहन की सुविधा प्रदान करते है | खेत तथा खलिहानों से लेकर करखानों तक व करखानों  से निर्मित माल बाजारों तथा उपभोक्ता के द्वार तक सड़कों द्वारा ही पहुँचाया जाता है |

सड़कों के प्रकार

निर्माण की दृष्टि से समान्यतः सड़कें दो प्रकार की होती है | कच्ची सड़के तथा पक्की सड़कें |

a)      कच्ची सड़कें

कच्ची सड़के निर्माण की दृष्टि से आसान तथा सस्ता पड़ता है | लेकिन ये सभी ऋतुओं में प्रभावी और प्रयोग नहीं रहती | वर्षा ऋतु में इन पर वाहन चलाना कठिन होता है |

b)      पक्की सड़कें

पक्की सड़कों कों बनाना अधिक कठिन तथा महंगा पड़ता है | ये सभी ऋतुओं में प्रयोग की जाने वाली होती हैं | लेकिन भारी वर्षा और बाढ़ के दौरान ये भी टूट जाती है और अधिक उपयोगी नहीं रहती | |

 सड़क मार्गों के लाभ –

सड़कों से हमें निम्नलिखित लाभ होते है |

1         सड़कों द्वारा कृषि उत्पादों की बिक्री के स्थायी बाज़ार उपलब्ध होने लगे और वस्तुओं की कीमतें बड़े-बड़े क्षेत्रों में एक समान होने लगीं |

2         सड़कों के विकास से औद्योगिक विकास को बड़ी सहायता मिलती है | क्योंकि सड़कों द्वारा उद्योग के लिए कच्चे माल तथा निर्मित माल का परिवहन सुगम हो जाता है |

3         सामान तथा यात्रियों कों एक स्थान से दूसरे स्थान तक सडकों द्वारा आसानी से पहुँचाया जा सकता है |

4         कम दूरी के लिए सड़क परिवहन अत्यंत सुविधाजनक है |

5         कम दूरी के लिए सड़क परिवहन  रेल परिवहन की अपेक्षा आर्थिक दृष्टि से लाभदायक होता है |

6         सड़क परिवहन घर-घर सेवाएँ उपलब्ध करवाता है | जिससे सामान को उतारने  और चढाने की लागत भी अन्य परिवहन के साधनों की अपेक्षा कम होती है |

7         सड़क दुर्गम पहाड़ी तथा बीहड़ क्षेत्रों में भी बनाई जा सकती है |  ऐसे क्षेत्रों में रेलों और जलमार्गों का पहुँचना संभव लगभग असम्भव होता है |

8         शीघ्र खराब होने वाली वस्तुओं जैसे फल, सब्जियाँ, दूध तथा दूध से बने अन्य पदार्थ, माँस आदि कों इनकी माँग वाले क्षेत्रों में शीघ्र पहुँचाने के लिए यह सर्वोतम साधन है |

9         सड़कें गावों कों कस्बों तथा नगरों तथा बाजारों कों आपस में जोड़ने का कार्य करती है  |

10     सड़कें किसी भी देश के व्यापार और वाणिज्य कों विकसित करने तथा पर्यटन कों बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है |

11     सड़क परिवहन, अन्य परिवहन के साधनों के उपयोग में कड़ी का काम करता है | जैसे सड़कें, रेलवे स्टेशनों, वायु पत्तनों  तथा  समुद्री पत्तनों कों जोड़ती है |  

सड़क महामार्ग

इन सड़कों का निर्माण इस तरह से किया जाता है कि बिना रुकावट के यातायात का आवागमन हो सके | यातायात के अबाधित प्रवाह की सुविधा के लिए इन पर अलग-अलग यातायात लेन (लाइन) या पथ, पुल, फ्लाईओवर  होते हैं |  ये सड़के दोहरे वाहन मार्गों युक्त होती है | ये ‍80 मीटर चौड़ी सड़कें होती हैं | विकसित देशों में प्रत्येक नगर तथा पत्तन नगर महामार्गों द्वारा जुड़े हुए है |

सड़क महामार्गों का विश्व वितरण

महामार्ग उन पक्की सड़कों कों कहा जाता है जो दूरस्थ स्थानों कों जोड़ती है | विश्व के प्रत्येक देश ने अपने स्तर पर इन सडक मार्गों का निर्माण किया है | विकसित देशों में  सड़क  महामार्गों का जाल बिछा हुआ है लेकिन विकासशील देशों में इनकी कमी अब भी है | विश्व के विभिन्न भागों में सड़क महामार्गों का वितरण निम्न प्रकार से है |

1)      यूरोप के सड़क महामार्ग

इस महाद्वीप में औद्योगिक विकास के साथ साथ आर्थिक विकास हुआ है  जिसके कारण यहाँ जनसंख्या भी अधिक है | इस कारण इस महाद्वीप में सड़कों का जाल बिछा हुआ है | विश्व के  20 प्रतिशत महामार्ग तथा 25 प्रतिशत मोटरगाड़ियाँ इसी महाद्वीप में पाई जाती है | ब्रिटेन, जर्मनी तथा फ्रांस मुख्य देशों में है जहाँ महामार्गों का जाल बिछा है | इन महामार्गों कों रेलमार्गों तथा जलमार्गों के साथ कड़ी प्रतिद्वंदिता का सामना करना पड़ता है |

2)      रूस के सड़क महामार्ग

यूराल पर्वत के पश्चिम में स्थित यूरोपीय रूस के औद्योगिक प्रदेश में  एशियाई रूस की अपेक्षा सड़कों का जाल अधिक गहन है | लगभग सभी प्रमुख नगरों कों सड़कों द्वारा जोड़ा गया था | इसकी धुरी (मुख्य केन्द्र) मास्को है | एशियाई यूरोप में सड़के कम महत्वपूर्ण है | इस क्षेत्र की सेवा  मास्को – ब्लाडीवोस्टक महामार्ग करता है | अत्यधिक विस्तृत भौगोलिक क्षेत्रफल के कारण रूस में सडक महामार्ग इतने महत्वपूर्ण नहीं है जितने रेलमार्ग है | रूस के पूर्वी भाग का मुख्य केन्द्र इस्कुटस्क  है |

3)      उत्तरी अमेरिका के महामार्ग

यहाँ महामार्गों का घनत्व उच्च है | जो लगभग 0.65 किलोमीटर प्रतिवर्ग किलोमीटर है | प्रत्येक स्थान महामार्ग से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है | पश्चिमी प्रशांत महासागरीय तट पर स्थित नगर पूर्व में अटलांटिक महासागरीय तट पर स्थित नगरों से महामार्गों द्वारा भलीभाँति जुड़े हुए हैं | इसी प्रकार उत्तर में कनाड़ा के नगर दक्षिण में मैक्सिको के नगरों से जुड़े हुए है |

संयुक्त राज्य अमेरिका में साठ लाख किलोमीटर लम्बे महामार्ग है जो विश्व में सबसे अधिक है | यहाँ विश्व की एक-तिहाई सड़कें तथा विश्व की आधी मोटरगाडियाँ इसी देश में है | नगरीकरण तथा औद्योगीकरण के विकास के फलस्वरूप अधिकाँश महामार्गों का विकास इस देश के पूर्वी भाग में हुआ है |

कनाड़ा के उत्तरी भाग में अति शीत जलवायु के कारण इस क्षेत्र में सड़कों का विकास अपेक्षाकृत कम हुआ है | ट्रांस कनाडियन महामार्ग पश्चिमी तट स्थित न्युफाउन्लैंड प्रांत के सेंटजॉन नगर से जोड़ता है | तथा अलास्का राजमार्ग कनाड़ा के एडमंटन (एडण्मटन )कों अलास्का के ऐंकॉरेज (एंकरेज) से जोड़ता है |  

4)      पान (पैन) अमेरिकन महामार्ग

यह एक निर्माणधीन महामार्ग है जिसका अधिकाँश भाग बनकर तैयार हो चुका है | इस महामार्ग के द्वारा दक्षिणी अमेरिका तथा मध्य अमेरिका के देश उत्तरी अमेरिका तथा कनाड़ा से आपस में जुड जाएँगें |

5)      ऑस्ट्रेलिया के महामार्ग

इस क्षेत्र के मुख्य महामार्ग तटीय भागों में स्थित है | यहाँ का स्टुआर्ट (स्टुवर्ट) महामार्ग नार्दन टेरिटरी में स्थित डार्विन नगर कों एलिस स्प्रिंग तथा टेनेण्ट क्रीक होता हुआ दक्षिण में विक्टोरिया में स्थित मेलबोर्न शहर कों जोड़ता है |

6)      चीन के महामार्ग

चीन क्षेत्रफल की दृष्टि से विशाल देश है | यहाँ के महामार्ग प्रमुख नगरों कों जोड़ते हुए देश में क्रिस –क्रॉस करते है | उदाहरण के लिए वियतनाम की सीमा के समीप चीन का शहर  ये शांसो मध्य चीन के शंघाई मध्य चीन,  दक्षिण में ग्वांगजाओ और उत्तर में बीजिंग सभी आपस में महामार्गों द्वारा जोड़े गए है | एक नए महामार्ग का निर्माण तिब्बती क्षेत्र में किया गया है | जो चेगडू तथा ल्हासा कों जोड़ता है |

7)      भारत के महामार्ग

भारत में सड़कों की कुल लम्बाई लगभग 14 लाख किलोमीटर है | भारत में अनेक महामार्ग है | भरत में महामार्गों के निर्माण तथा देखरेख का कार्य केन्द्र सरकार के अधीन राष्ट्रीय  महामार्ग विकास प्राधिकरण करता है |  ये महामार्ग प्रमुख शहरों कों नगरों से जोड़ते हैं |

शेरशाह सूरी ने सबसे महत्वपूर्ण महामार्ग बनवाया था | जिसे ग्रांट ट्रंक रोड (जी० टी० रोड ) कहा जाता था | इसे अब शेरशाह सूरी के नाम से जाना जाता है | अमृतसर कों दिल्ली से जोड़ने वाले महामार्ग भी महत्वपूर्ण सडक महामार्ग है |  देश का सबसे बड़ा राष्ट्रीय महामार्ग संख्या 7  वाराणसी कों कन्या कुमारी से जोड़ता है | इसके बीच में आने वाले कई बड़े नगरों जैसे रीवा, जबलपुर, नागपुर,हैदराबाद, बैंगलुरू तथा मदुरई कों भी आपस में जोड़ता है | इसी तरह राष्ट्रीय महामार्ग संख्या 2 दिल्ली कों कोलकाता से जोड़ता है  और साथ ही कानपुर, वाराणसी, पटना आदि नगरों कों भी जोड़ता है

देश के सभी महानगर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई कों जोड़ने के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज बनाया गया है | उत्तरी दक्षिणी गलियारे के द्वारा उत्तर में कश्मीर कों कन्याकुमारी तक जोड़ा गया है | पूर्व पश्चिम गलियारे के द्वारा असम के सिलचर कों गुजरात के पोरबंदर से जोड़ा गया है | स्वर्णिम चतुर्भुज महामार्ग देश के तीव्रतम सडक महामार्ग है |  

 

8)      अफ्रीका का महामार्ग

 इस महाद्वीप की अधिकाँश महत्वपूर्ण सड़के तटीय मार्गों तक ही सीमित है | इस महाद्वीप का एक महामार्ग अल्जियर्स से शुरू होकर  एटलस पर्वत कों पार करके सहारा मरुस्थल होता हुआ गुयाना के क्रोनाकी नगर कों मिलाता है | इसी प्रकार कैरो केपटाउन से जुडा हुआ है |

सीमावर्ती सड़कें

अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं के साथ साथ बनी सड़कों को सीमावर्ती सड़कें कहा जाता है | ये सड़कें सुदूर (दूर दराज) के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को प्रमुख नगरों से जोड़ने और प्रतिरक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है | लगभग सभी देशों में सीमावर्ती गांवों और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में वस्तुओं के परिवहन के लिए और सैन्य शिविरों तक वस्तुओं कों पहुँचाने के लिए इस तरह की सड़कें बनाई जाती है |

रेल परिवहन

रेलमार्ग स्थल परिवहन की वह विधा जो लंबी दूरी तक अधिक संख्या में यात्रियों और अधिक मात्रा में स्थूल वस्तुओं कों एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुँचाती है |  

रेलमार्गों का विकास

अठारहवीं शताब्दी में भाप के इंजन के अविष्कार के बाद  परिवहन में क्रान्ति आई | रेलों का विकास हुआ | संभवत : पहला सार्वजनिक  रेलमार्ग सन् 1825 में उत्तरी इंग्लैंड के स्टॉकटन और डर्लिंगटन स्थानों के बीच प्रारम्भ किया गया | 19 वीं सदी तक आते आते रेलमार्ग परिवहन के अत्यधिक लोकप्रिय और तीव्रतम साधन हो गए |     

रेल परिवहन का महत्व या लाभ 

यह स्थल परिवहन में लम्बी दूरियों और स्थूल सामान ढोने का सस्ता साधन है |

रेलें कृषि उत्पादों कों उपभोक्ताओं तक  और कच्चे माल कों कारखानों तक पहुँचाने में सुविधाजनक है |

रेल परिवहन देश  के विकास में महत्वपूर्ण  योगदान देता है | यह उद्योगों तथा बाजार के बीच सामंजस्य स्थापित करता है |

रेल लाइनों की चौड़ाई (रेल गेज)

प्रत्येक देश में रेल लाइनों की चौड़ाई अलग –अलग होती है | गेज या चौड़ाई के अनुसार समान्यतया रेल लाइनों कों निम्नलिखित वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है |

1.       बड़ी लाइन :- यह 1.5 मीटर से अधिक चौड़ी होती है |

2.       मानक लाइन :- यह 1.44 मीटर चौड़ी होती है | मानक रेल गेज का प्रयोग ब्रिटेन में किया जाता है |

3.       मीटर लाइन :- यह एक मीटर चौड़ी होती है |

4.       छोटी लाइन :- ये एक मीटर से कम चौड़ी होती है |

दैनिक आवागमन की रेलें

ये रेलें सामान्यत: छोटी दूरी पर चलने वाली गाडियाँ होती है | जो लाखों की संख्या में  यात्रियों कों प्रात: आस-पास के इलाकों से नगरों की ओर लेकर और शाम के समय वापस लेकर जाती है |दैनिक आवागमन की रेलें, ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान और भारत में अत्यधिक लोकप्रिय है |

संसार में रेलों का वितरण प्रतिरूप

विश्व में लगभग 13 लाख किलोमीटर लम्बे रेल यातायात मार्ग है | जो विभिन्न क्षेत्रों में वस्तुओं और यात्रियों का परिवहन कर रहे है | विश्व के  विभिन्न क्षेत्रों में रेलों का वितरण वहाँ के धरातल, औद्योगिक विकास, बाजार, जनसंख्या आदि पर निर्भर करता है | अत : विश्व के विभिन्न भागों में रेलों का वितरण असमान है | विश्व के महाद्वीपों  में रेलों के वितरण कों निम्न प्रकार से समझा जा सकता है |

यूरोप में रेलों का वितरण

यूरोप में विश्व का सघनतम रेल तंत्र पाया जाता है | यहाँ रेल मार्ग लगभग 4 लाख  40 हजार लम्बे रेलमार्ग है | इनमें से अधिकतर रेलमार्ग दोहरे या बहुमार्गी हैं |  बेल्जियम में रेलमार्गों का घनत्व सर्वाधिक है | जो 6.5 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर  लगभग एक किलोमीटर पाया जाता है |

इस महाद्वीप के अधिकाँश देशों में रेल मार्गों का प्रयोग यात्री परिवहन की अपेक्षा लंबी दूरी के स्थूल पदार्थों  जैसे अभ्रक, अनाज, इमारती लकड़ी तथा मशीनरी आदि के परिवहन के कार्य में अधिक होता है |

यूरोप के औद्योगिक प्रदेश विश्व के सघन रेलमार्गों वाले क्षेत्रों में हैं | लन्दन,पेरिस, ब्रुसेल्स, मिलान, बर्लिन और वारसा महत्वपूर्ण रेल केन्द्र हैं |  इंग्लैंड में स्थित यूरो टनल ग्रुप द्वारा प्रचलित सुरंग मार्ग (भूमिगत रेलमार्ग) लन्दन कों पेरिस से जोड़ता है | इस महाद्वीप में पार (ट्राँस) महाद्वीपीय रेलमार्ग, वायुमार्गो और सड़क मार्गों के अपेक्षाकृत लोचदार तंत्रों की तुलना में अपना महत्व खोते जा रहे हैं |

 यूराल पर्वत के पश्चिम में रूस में रेलमार्गों का अत्यंत सघन जाल है | रूस के इस भाग में देश के कुल परिवहन का 90 प्रतिशत भाग रेलमार्गों द्वारा ही किया जाता है | मास्को रूस में रेलवे का एक महत्वपूर्ण मुख्यालय है | मास्को से देश के विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र के विभिन्न भागों में रेलमार्गों का विस्तार है | मास्को में भूमिगत रेलमार्ग और दैनिक आवागमन की गाडियाँ भी अधिक महत्वपूर्ण है |

उत्तरी अमेरिका में रेलों का वितरण

उत्तरी अमेरिका महाद्वीप में सर्वाधिक विस्तृत रेलमार्गों का तंत्र है | जो विश्व के कुल रेलमार्गों का लगभग 40 प्रतिशत है | सर्वाधिक सघन रेल तंत्र पूर्वी मध्य संयुक्त राज्य अमेरिका में है क्योंकि इस क्षेत्र में  उच्च स्तर के औद्योगिक प्रदेश तथा नगरीय प्रदेशों का विकास हुआ है | इस देश में रेलमार्गों का सबसे अधिक उपयोग स्थूल पदार्थों  जैसे खनिज, अनाज, इमारती लकड़ी तथा मशीनरी आदि वस्तुओं के लंबी दूरी के परिवहन के कार्य में होता है |

संयुक्त राज्य अमेरिका से साथ लगते कनाड़ा के उच्च औद्योगिक एवं नगरीय प्रदेश में पाया जाता है | कनाड़ा के रेलमार्ग सार्वजनिक सेक्टर (सार्वजनिक स्वामित्व ) में है | यहाँ पर रेलमार्ग पुरे विरल जनसंख्या वाले क्षेत्रों में वितरित है | यहाँ के महाद्वीप पारीय रेलमार्गों के द्वारा गेहूँ और कोयले के अधिकतर भाग परिवहन किया जाता है |

दक्षिणी अमेरिका में रेलों का वितरण

इस महाद्वीप के दो प्रदेशों में रेलमार्गों का सघन जाल बिछा हुआ है | ये अर्जेंटाइना के पम्पास तथा ब्राजील के कॉफी (कहवा ) उत्पादक प्रदेश हैं | इन दोनों प्रदेशों में दक्षिणी अमेरि़का महाद्वीप के कुल रेलमार्गों का 40 प्रतिशत भाग पाया जाता है |

अर्जेंटाइना तथा ब्राजील के अतिरिक्त  दक्षिणी अमेरिका के शेष देशों में केवल चिली ही एकमात्र ऐसा देश है जहाँ महत्वपूर्ण लम्बाई के रेलमार्ग है | यहाँ  के रेलमार्ग तटीय केन्द्रों कों आंतरिक क्षेत्रों में स्थित खनन स्थलों से जोड़ते हैं |

            पेरू, बोलीविया, इक्वाडोर, कोलंबिया और वेनेजुएला में छोटे एकल मार्ग वाली रेललाइनें पाई जाती है | जो पत्तनों कों आंतरिक क्षेत्रों के साथ जोड़ते हैं | ये रेलमार्ग आपस में जुड़े हुए नहीं हैं |   

दक्षिणी अमेरिका महाद्वीप में एक पार महाद्वीपीय रेलमार्ग है जो एंडीज पर्वतों के पार 3900 मीटर की ऊँचाई पर अवस्थित उसप्लाटा दर्रे से होता हुआ ब्यूनसआयर्स  (अर्जेंटाइना) कों वालपैराइजो से मिलाता है |

ओशिनिया में रेलों का वितरण

ऑस्ट्रेलिया में लगभग 40,000 किलोमीटर लम्बे रेलमार्ग है | इनमें से एक चौथाई  (25 प्रतिशत ) न्यू साउथ वेल्स में पाए जाते है | अधिकाँश रेलमार्ग ऑस्ट्रेलिया के तटीय भागों में ही विकसित हुए है | यहाँ एक अंतरमहाद्वीपीय जो पश्चिमी-पूर्वी ऑस्ट्रेलिया राष्ट्रीय रेलमार्ग के नाम से जाना जाता है | यह पश्चिम में पर्थ कों पूर्व में सिडनी से जोड़ता है |

            न्यूजीलैंड में रेलमार्ग मुख्यत: उत्तरी द्वीप में पाए जाते है | जो कृषि क्षेत्रों कों प्रमुख नगरों से जोड़ते है | दक्षिणी द्वीप में उबड़ खाबड़ भूमि होने के कारण रेलमार्गों का विकास कम हुआ है |

एशिया में रेलों का वितरण 

इस महाद्वीप में जापान, चीन और भारत सघन जनसंख्या वाले क्षेत्र है | इन क्षेत्रों में रेलमार्गों का घनत्व अत्यधिक सघन है |

भारत में लगभग 69,00  रेलवे स्टेशन है | यह  एशिया में सबसे विकसित रेलमार्गों वाला देश है | यहाँ लगभग 82,000 किलोमीटर लम्बे रेलमार्ग है |

चीन में लगभग 35000 किलोमीटर लम्बे रेलमार्ग है जो देश के विस्तार कों देखते हुए कम हैं |

जापान में लगभग 28000 किलोमीटर लम्बे रेलमार्ग है |

एशिया के अन्य देशों में अपेक्षाकृत कम रेलमार्ग विकसित हुए हैं | विकसित मरुस्थल और विरल जनसंख्या के प्रदेशों के कारण इस महाद्वीप के बहुत से देशों में रेल सुविधाओं का विकास न्यूनतम रहा है |

अफ्रीका में रेलों का वितरण 

विश्व का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप होते हुए भी अफ्रीका में केवल 40,000 किलोमीटर लम्बे रेलमार्ग ही है |

अफ्रीका महाद्वीप के कुल रेलमार्गों में से दक्षिणी अफ्रीका देश में ही लगभग 18,000 किलोमीटर लम्बे रेलमार्ग है | जो सोने, हीरे के सांद्रण तथा तांबे-खनन क्रियाकलापों के कारण यहाँ विकसित हुए है | 

अफ्रीका महाद्वीप के मुख्य रेलमार्ग इस प्रकार है |

1)      बेनगुएला रेलमार्ग जो अंगोला से कटंगा –जाम्बिया की ताँबा पट्टी से होकर जाता है |

2)      दूसरा रेलमार्ग तंजानिया रेलमार्ग है जो जाम्बिया की ताँबा पट्टी से होकर समुद्र तट पर स्थित दार- ए- सलाम कों जाता है |

3)      बोत्सवाना (बोसवाना) और जिम्बावे से होते हुए रेलमार्ग जो स्थलरूद्ध राज्यों कों दक्षिण अफ्रीका के रेलतंत्र से जोड़ता है |

4)      दक्षिणी अफ्रीका गणतंत्र में केपटाउन से प्रेटोरिया तक ब्लू ट्रेन रेलमार्ग  |

इस महाद्वीप के अन्य देशों; जैसे अल्जीरिया, सेनेगल, नाइजीरिया, कीनिया और इथोपिया में रेलमार्ग समुद्र तट के पत्तनों कों आंतरिक केन्द्रों से जोड़ते है | लेकिन ना तो यहाँ रेलमार्गों का अच्छा जाल बिछा है और ना ही अन्य देशों कों जोड़ने के अच्छे रेलतंत्र की रचना इस महाद्वीप में की गई है |

अंतरमहाद्वीपीय या पारमहाद्वीपीय रेलमार्ग

वे रेलमार्ग जो किसी महाद्वीप के एक छोर कों दूसरे छोर से जोड़ते हैं उन्हें पार महाद्वीपीयरेलमार्ग कहा जाता है | इन रेलमार्गों का निर्माण आर्थिक और राजनैतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किया जाता है | इनका निर्माण विभिन्न दिशाओं में लंबी यात्राओं की सुविधाएँ प्रदान करने के लिए लिए भी किया गया था | जैसे ट्राँस साइबेरियन  रेलमार्ग यूरोपीय रूस कों साइबेरिया से जोड़ने के लिए बनाया गया ताकि साइबेरिया का आर्थिक विकास किया जा सके | इसी प्रकार कैनेडियन –पैसेफिक रेलमार्ग इसलिए बनाया गया कि ब्रिटिश कोलंबिया की यह शर्त थी कि वह राष्ट्रमण्डल का सदस्य देश तभी बनेगा जब उसे पूर्वी भागों के साथ जोड़ दिया जाए |

विश्व के विभिन्न महाद्वीपों में पार महाद्वीपीय रेलमार्गों का निर्माण किया गया है | जैसे ट्राँस साइबेरियन (पार साइबेरियन) रेलमार्ग,  कैनेडियन –पैसेफिक रेलमार्ग (कनाड़ा –प्रशांत)  रेलमार्ग, ऑस्ट्रेलियाई पार महाद्वीपीय रेलमार्ग, संघ और प्रशांत रेलमार्ग तथा ओरिएंट एक्सप्रेस प्रमुख पार महाद्वीपीय रेलमार्ग हैं इनका संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित है |  

1         पार-साइबेरियन रेलमार्ग

      यह एशिया का सबसे महत्वपूर्ण और विश्व का सबसे लम्बा रेलमार्ग है | जो यूरोपीय रूस के पश्चिमी भाग में स्थित सेंट –पीट्सबर्ग (लेनिनग्राड) से एशियाई रूस के पूर्व में स्थित ब्लाडीवॉस्टक  कों जोड़ता है | यह 9332  किलोमीटर लम्बा है | इसका निर्माण कार्य सन् 1891 में शुरू हुआ |  14 वर्षों  बाद सन् 1905 में यह बनकर तैयार हुआ | यह दोहरे पथ से युक्त विद्युतीकृत पार महाद्वीपीय रेलमार्ग है |

      यह रेलमार्ग रूस के पश्चिम में सेंट पिट्सबर्ग से  शुरू होकर मास्को रूस की राजधानी मास्को होता हुआ कजान,,ओमस्क ट्यूमिन, नोवोसिबिर्स्क, चिता, इरकुस्टस्क और खबरोवस्क से गुजरता हुआ ब्लाडीवॉस्टक तक जाता है |  इस रेलमार्ग ने रूस के एशियाई प्रदेश कों पश्चिमी यूरोपीय बाजारों से जोड़ा है | यह रेलमार्ग यूराल पर्वतों, ओब और येनीसी नदियों से गुजरता है |  यह चिता जो रूस का प्रमुख कृषि केन्द्र है और , इरकुस्टस्क  जो फर केन्द्र है कों जोड़ता है  अर्थात कृषि और औद्योगिक प्रदेशों कों जोड़ने का कार्य करता है | इस रेलमार्ग के महत्व को देखते हुए इसकी कई शाखाओं का निर्माण किया गया है | जैसे दक्षिण में यूक्रेन में स्थित ओडेसा, कैस्पियन सागर तट पर बालू, उज्बेकिस्तान में ताशकंद, मंगोलिया में उलनबटोर, मंचुरिया में रोनयांग (मक्देन) तथा चीन में बीजिंग तक इसकी शाखाएँ  बनाई गई हैं |

पार-साइबेरियन रेलमार्ग का महत्व :-

(क).इस रेलमार्ग का निर्माण प्रशासनिक तथा सैनिक आवश्यकताओं कों पूरा करने के लिए किया गया था | बाद में इसका व्यापारिक और आर्थिक महत्व बढ़ गया |

(ख).            इस रेलमार्ग से संपूर्ण यूरोप का और विशेष रूप से साइबेरिया का आर्थिक विकास हुआ | क्योंकि इस रेलमार्ग के कारण साइबेरिया अपने वन, कृषि तथा पशु संसाधनों के कारण रूस का खजाना (स्टोरहाऊस) कहलाने लगा  है |

(ग). इस रेलमार्ग द्वारा साइबेरिया से कोयला, धातुएँ, लकड़ी, लुगदी, चमड़ा आदि  वस्तुएँ यूरोपीय रूस कों भेजी जाति है और वहाँ से उद्योगों में निर्मित वस्तुएँ मंगवाई जाती है |

(घ). इस रेलमार्ग के विकास से साइबेरिया में उद्योगों का भी विकास हुआ है | 

(ङ). रेलमार्ग के साथ –साथ कई बड़े नगरों का विकास हुआ है |

 

2         कैनेडियन –पैसेफिक रेलमार्ग (कनाड़ा –प्रशांत)  रेलमार्ग

कैनेडियन –पैसेफिक रेलमार्ग की लम्बाई 7050 है |  यह रेलमार्ग पूर्व में अटलांटिक महासागर के तट पर स्थित हैलिफैक्स से शुरू होकर क्यूबेक, मांट्रियल, ओटावा  कडबरी, विनिपेग और कलगैरी होता हुआ  पश्चिम में प्रशांत महासागर के तट पट स्थित बैंकूवर तक जाता है |

इस रेलमार्ग का निर्माण सन् 1866 में एक संधि के अंतर्गत ब्रिटिश कोलंबिया कों राज्यों के संघ में शामिल करने के लिए किया गया | क्योंकि ब्रिटिश कोलंबिया  की यह शर्त थी कि वह राष्ट्रमण्डल का सदस्य देश तभी बनेगा जब उसे पूर्वी भागों के साथ जोड़ दिया जाए | बाद में क्यूबेक –माँट्रियल औद्यिगिक प्रदेश कों प्रेयरी प्रदेश की गेहूँ मेखला से तथा उत्तर में शंकुधारी वन प्रदेश से जोड़ने के कारण इस पार महाद्वीपीय रेलमार्ग का महत्व बढ़ गया है |

कैनेडियन –पैसेफिक रेलमार्ग का महत्व

(क).      इस प्रदेशों में प्रत्येक क्षेत्र एक दूसरे के विकास में सहायता कर रहा है |

(ख).      यह रेलमार्ग विनिपेग कों सुपीरियर झील में स्थित थंडरखाड़ी तक जोड़कर यह संवृत रेलमार्ग विश्व के महत्वपूर्ण जल मार्गों से विनिपेग कों मिलाता है |

(ग).       यह मार्ग गेहूँ और माँस के निर्यात के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है |

(घ).       यह रेलमार्ग कनाडा की आर्थिक धमनी कहलाती है |

(ङ).       जब शीतकाल में जलमार्ग जम जाते है तो ये रेलमार्ग बिना किसी रूकावट के परिवहन का कार्य करते हैं |

(च).      इस रेलमार्ग से कनाडा के पूर्वी भाग में स्थित औद्योगिक क्षेत्रों का निर्मित माल पश्चिम तक पहुँचता है तो पश्चिम में प्रेयरी प्रदेश से गेंहूँ कों पूर्व के क्षेत्रों तक पहुँचाया जाता है जहाँ से इस गेहूँ कों यूरोप के देशों कों निर्यात किया जाता है |

 

3         ऑस्ट्रेलियाई पार महाद्वीपीय रेलमार्ग

यह रेलमार्ग ऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी तट पर स्थित पर्थ से शुरू होकर कलगुर्ली, पोर्ट ऑगस्ता और  ब्रोकन हिल होता हुआ  इस महाद्वीप के पूर्वी तट पर स्थित सिडनी कों मिलाता है | यह पार महाद्वीपीय रेलमार्ग ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप के दक्षिणी भाग में आर-पार पश्चिम से पूर्व तक फैला है | इस रेलमार्ग में अनेक गेज की रेल लाइनें है जिससे समय की बर्बादी होती है | अत: रेल गेज संबंधी कठनाइयों  कों दूर करने के लिए रेल मानकीकरण कमेटी बनाकर योजनाएँ तैयार की जा रही है |

 

4          संघ और प्रशांत रेलमार्ग (यूनियन पैसेफिक रेल रोड )

यह रेलमार्ग अटलांटिक (अंध महासागर ) तट पर स्थित न्यूयार्क कों प्रशांत महासागर तट पर स्थित सान फ्रांसिस्को से मिलाती है |  यह रेलमार्ग न्यूयार्क से क्लीवलैंड, शिकागो, ओमाहा, इवांस, ऑडगन और सैक्रामेंटो  होता हुआ सान फ्रांसिस्को तक जाता है |   इस मार्ग द्वारा अनेक पदार्थ निर्यात किए जाते है | उनमें से अयस्क, अनाज, कागज़, रसायन और मशीनरी  सर्वाधिक मूल्य प्रदान करने वाले पदार्थ हैं |

 

5         ओरिएंट एक्सप्रेस

यह रेल लाइन पेरिस से स्ट्रैसबॅर्ग (स्ट्रैसबॉर्ग), म्यूनिख, विएना, बुडापेस्ट और बेलग्रेड होती हुई इस्तांबुल तक जाती है | इस रेल मार्ग के द्वारा लन्दन से इस्तांबुल तक यात्रा में लगने वाले समय में बहुत अधिक कमी आई है | समुद्री मार्ग से लन्दन से इस्तांबुल तक 10 दिन लगते थे | जिसकी तुलना में इस रेलमार्ग से यह यात्रा केवल 96 घण्टे में पूरी हो जाती है | इस रेल मार्ग से निर्यात होने वाली प्रमुख वस्तुएँ पनीर, सुअर का माँस, जई, शराब, फल और मशीनरी है |

एक एशियाई रेलवे के निर्माण का भी प्रस्ताव है | जो तुर्की के इस्तांबुल से शुरू होकर ईरान, पाकिस्तान, भारत, बांग्लादेश और म्यांमार कों होते हुए थाईलैंड के बैंकांक तक जाएगा |

जलमार्ग

जल परिवहन मानव द्वारा प्रयोग किए जाने वाले यातायात के साधनों में से सबसे प्राचीन साधनों में से एक है | प्राचीन समय से ही वस्तुओं और यात्रियों के परिवहन के लिए नदियों, झीलों तथा समुद्री मार्गों का प्रयोग करता अ रहा है | यह परिवहन का सबसे सस्ता साधन है |

जल मार्गों  के प्रकार

जल मार्गों कों दो मुख्य प्रकारों में विभक्त किया जा सकता है | (1) समुद्री जलमार्ग या महासागरीय जलमार्ग  (2) आंतरिक जलमार्ग

जलमार्गों के लाभ

जलमार्गों के निम्नलिखित लाभ हैं |

1)      जल परिवहन बहुत ही सस्ता साधन है | क्योंकि जल का घर्षण स्थल की अपेक्षा बहुत कम होता है | जिससे ईंधन की बचत होती है | अत: जल परिवहन में ऊर्जा लागत बहुत कम होती है |

2)      समुद्री जल परिवहन के लिए मार्गों का निर्माण नहीं करना पड़ता | महासागर एक दूसरे से जुड़ें हुए हैं | जिनमें विभिन्न आकारों के  समुद्री जहाज आसानी से चलाए जा सकते हैं |  केवल महासागरों के किनारों पर जहाजों के लिए पत्तनों की आवश्यकता होती है |

3)      महासागरों में जलयान किसी भी दिशा में स्वतंत्र रूप से जा सकते हैं |

4)      एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक अधिक मात्रा में तक स्थूल तथा शीघ्र खराब ना होने वाली वस्तुएँ  ले जाने के लिए अगर उपलब्ध हो तो यह सबसे उत्तम साधन है |  क्योंकि यह स्थल और वायु परिवहन कीअपेक्षा सस्ता पड़ता है |

 

1.       समुद्री जलमार्ग या महासागरीय जलमार्ग

महासागर सभी दिशाओं में मुड़ सकने वाले ऐसे महामार्ग होते हैं जिनके रख रखाव की कोई लागत नहीं होती | समुद्री जहाजों द्वारा महासागरों का मार्गों के रूप में प्रयोग करना मनुष्य की पर्यावरण के साथ अनुकूलन की महत्वपूर्ण घटना है | क्योंकि जिन महासागरों से उसे डर लगता था उसी का प्रयोग वह परिवहन के सबसे सस्ते साधन के रूप में कर रहा है |  

आधुनिक समय में समुद्री मार्गों का महत्व बढ़ने के कारण

आधुनिक समय में समुद्री मार्गों का महत्व बढ़ने के निम्नलिखित कारण हैं | 

1)      आधुनिक यात्री जहाज और माल वाहक पोत राडार, बेतार के तार (वायरलेस)  व अन्य नौ परिवहन संबंधी सुविधाओं से युक्त हैं | जिससे मौसम तथा दिशा संबंधी जानकारी उपलब्ध होती है | इसी प्रकार यात्रियों की सुविधाओं में भी बढोतरी हुई है |’ 

2)      शीघ्र खराब हो जाने वाली स्तुओं जैसे दुग्ध तथा दुग्ध से बने पदार्थों, माँस, सब्जियों तथा फल आदि के लिए प्रतिशीतित कमरों (प्रतिशीतन कोष्टक) का प्रयोग किया जाने लगा है | टैंकरों तथा विशेषीकृत जहाजों ने नौभार के परिवहन कों उन्नत बना दिया है |

3)      कंटेनरों के प्रयोग से न सिर्फ माल कों चढ़ाना- उतारना आसान हुआ है | इससे विश्व के प्रमुख पत्तनों पर इस नौभार के निपटान में भी सुविधा हुई है क्योंकि कंटेनरों के सामान कों सड़क तथा रेल परिवहन के द्वाराइनकी माँग स्थलों तक पहुँचाना आसान हुआ है |

   विश्व के प्रमुख समुद्री मार्ग

1.       उत्तरी अटलांटिक समुद्री मार्ग

यह समुद्री जलमार्ग पश्चिमी यूरोप के देशों को उत्तरी अमेरिका के पूर्वी तट  पर स्थित उत्तरी -पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका के क्षेत्रों से मिलाता है |  ये दोनों ही क्षेत्र औद्योगिक दृष्टि से विकसित है | विश्व का एक चौथाई (25 प्रतिशत) समुद्री व्यापार इसी मार्ग से होता है | अत: यह विश्व का सबसे व्यस्त व्यापारिक मार्ग है | इसलिए इसे  “बृहद ट्रंक मार्ग” भी कहा जाता है | इस मार्ग के दोनों तटों पर पत्तन और पोताश्रयों की उन्नत सुविधा उपलब्ध है | विश्व के 28 बड़े पत्तन इस मार्ग के दोनों तटों पर स्थित है | जिनमें न्यूयार्क, मॉन्ट्रियल, क्यूबेक, हैलीफैक्स, बोस्टन आदि पत्तन उत्तरी अमेरिका के तट पर स्थित प्रमुख पत्तन हैं | लन्दन, लिवरपूल, ग्लासगो, मानचेस्टर, साउथ हैम्पटन, हैम्बर्ग, लिस्बन, कोपेनहेगन तथा ओसलो पश्चिमी यूरोप के तट पर स्थित प्रमुख पत्तन हैं |

2.       भूमध्यसागर –हिंद महासागरीय समुद्री मार्ग

यह समुद्री मार्ग प्राचीन विश्व का हृदय स्थल कहे जाने वाले क्षेत्रों से गुजरता है | किसी अन्य समुद्री मार्ग की अपेक्षा अधिक देशों और लोगों कों सेवाएँ प्रदान करता है |

यह व्यापारिक मार्ग पश्चिमी यूरोप के औद्योगिक  रूप से उन्नत देशों कों पूर्वी अफ्रीका, दक्षिणी अफ्रीका, दक्षिणी –पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के वाणिज्यिक कृषि तथा पशुपालन आधारित अर्थव्यवस्थाओं से जोड़ता है | 

            पोर्ट सईद, अदन, मुंबई, कोलंबो और सिंगापुर इस मार्ग के महत्वपूर्ण पत्तनों में से है | उत्तमाशा अंतरीप से होकर जाने वाले आरम्भिक मार्ग की तुलना में स्वेज नहर निर्माण से इन देशों के बीच होने वाले व्यापार में समय और दूरी में अत्यधिक कमी हुई है |

 

3.       उत्तमाशा अंतरीप समुद्री मार्ग

अटलांटिक महासागर और हिंद महासागर होते हुए यह एक महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग है | यह मार्ग पुरे अफ्रीका महाद्वीप का चक्कर लगाता है  और बहुत ही लम्बा है | स्वेज नहर मार्ग से 6400 किलोमीटर लम्बा है |  यह मार्ग लिवरपूल  कों कोलंबो से जोड़ता है | वर्तमान में अधिकाँश जलयान इस मार्ग का प्रयोग नहीं करते | बड़े-बड़े जहाज जो स्वेज नहर कों पार नहीं कर सकते अब भी इसी मार्ग से होकर जाते हैं | कुछ जहाज स्वेज नहर के भारी कर (टैक्स ) से बचने के लिए भी इस मार्ग का प्रयोग करते हैं | यह मार्ग पश्चिमी यूरोप के देशों कों पश्चिमी अफ्रीका के देशों से जोड़ता हुआ, दक्षिणी एशिया, दक्षिणी –पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया तथा न्यूजीलैंड से मिलाता है |

पिछले कुछ वर्षों में  स्वतंत्रता प्राप्त करने वाले अफ़्रीकी देशों में तेजी से आर्थिक विकास हुआ है | क्योंकि महत्वपूर्ण खनिज जैसे- सोना, हीरे, ताँबा, टिन, क्रोमियम तथा अभ्रक और कृषि उत्पादों जैसे - मूँगफली  गिरि का तेल, कहवा और फलों का  के व्यापार में वृद्धि हुई है | जिससे पूर्वी और पश्चिमी अफ्रीका तट पर स्थित पत्तनों के द्वारा उत्तमाशा अंतरीप होकर जाने वाले जहाजों से व्यापार और यातायात की मात्रा में वृद्धि हुई है |

 

4.       दक्षिणी अटलांटिक  समुद्री मार्ग

यह जलमार्ग पश्चिम अफ्रीकी देशों का संबंध दक्षिण अमेरिका में स्थित ब्राजील, अर्जेंटाइना तथा उरुग्वे के साथ स्थापित करता है | इस मार्ग का व्यापारिक महत्व उत्तर अटलांटिक महासागर के मार्ग की अपेक्षा कम है | क्योंकि दक्षिणी अटलांटिक महासागर के दोनों तटों पर स्थित दक्षिणी अमेरिका और अफ्रीका के देशों में जनसंख्या विरल है | इन देशों का आर्थिक विकास भी अधिक नहीं हुआ है | केवल दक्षिणी-पूर्वी  ब्राजील, प्लाटा ज्वारनदमुख और दक्षिणी अफ्रीका के कुछ भाग ही औद्योगिक दृष्टि से विकसित है | दक्षिणी अमेरिका के देश ब्राजील के प्रमुख व्यापारिक केन्द्र रियो डी जेनेरो और दक्षिणी अफ्रीका के प्रमुख व्यापारिक केन्द्र केपटाउन के बीच भी व्यापार बहुत कम है क्योंकि इन दोनों ही क्षेत्रों के  उत्पाद तथा संसाधन एक जैसे हैं |   

 

5.       उत्तरी प्रशांत समुद्री मार्ग

विस्तृत उत्तरी प्रशांत महासागर के आर पार कई मार्गों के द्वारा व्यापार होता है | इनमें से अधिकाँश मार्ग होनोलूलू में आकार मिलते हैं | यहाँ पर जलयान मरम्मत तथा ईंधन और अन्य जरुरी वस्तुओं के लिए रुकते हैं | बृहत वृत्त पर स्थित सीधा मार्ग है जो संयुक्त राज्य  अमेरिका के वैंकूवर कों जापान के याकोहामा से जोड़ता है |  जो यात्रा की दूरी कों कम करके (2480 किलोमीटर) आधा कर देता है |

यह समुद्री मार्ग उत्तरी अमेरिका के पश्चिमी तट पर स्थित पत्तनों कों एशिया के पत्तनों से जोड़ता है | उत्तरी अमेरिका के तट पर वैंकूवर, सीएटल, पोर्टलैंड, सान-फ्रांसिस्को आदि प्रमुख पत्तन हैं |  इन पत्तनों से गेहूँ , लकड़ी, कागज के लिए लुगदी, मत्स्य उत्पाद तथा दुग्ध उत्पादों का निर्यात एशिया के देशों कों किया जाता है | एशिया के तट पर स्थित प्रमुख पत्तन याकोहामा, कोबे, शंघाई, हांगकांग, मनीला और सिंगापुर हैं | इन पत्तनों से वस्त्र, विद्युत उपकरण, के साथ –साथ दक्षिणी पूर्वी एशिया के उष्ण कटिबंधीय प्रदेशों से अमेरिका के उद्योगों के लिए कच्चामाल  जैसे- रबड़, नारियल गिरी, ताड़ का तेल, और टिन का निर्यात किया जाता है |

 

6.       दक्षिणी प्रशांत समुद्री मार्ग

यह समुद्री मार्ग पश्चिमी यूरोप और उत्तरी अमेरिका कों ऑस्ट्रलिया, न्यूजीलैंड और पनामा नहर से होते हुए प्रशांत महासागर में प्रकीर्णित ( बिखरे हुए )  द्वीपों से मिलाता है | इस मार्ग का प्रयोग हांगकांग, फिलीपींस और इंडोनेशिया पहुँचने के लिए किया जाता है | इस मार्ग पर चलने वाले जलयानों कों अत्यधिक दूरी तय करनी पड़ती है | जैसे सिडनी से पनामा के बीच की दूरी 12000 किलोमीटर से भी अधिक है | होनोलूलू इस मार्ग के बीच में पड़ने वाला महत्वपूर्ण पत्तन है |

तटीय नौ परिवहन

तटीय नौ परिवहन लंबी तट रेखा वाले देशों के लिए एक सुगम परिवहन का माध्यम है | यदि तटीय नौ परिवहन का विकास किया जाए तो इसके द्वारा स्थल परिवहन पर होने वाली  यातायात की भीड़ कों कम किया जा सकता है | संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन तथा भारत जैसे देशों के लिए यह बहुत लाभकारी है |  यूरोप के शेनेगन देशों की स्थिति तटीय नौ परिवहन की दृष्टि से उपयुक्त है , जो एक सदस्य देश के तट कों दूसरे सदस्य देश के तट से जोड़ता है |

नौ परिवहन नहरें

स्वेज और पनामा दो ऐसी महत्वपूर्ण नौ परिवहन नहरें अथवा जलमार्ग हैं जो मानव द्वारा निर्मित है | ये दोनों नहरें पूर्वी तथा पश्चिमी विश्व के देशों के लिए प्रवेश द्वार का काम करती हैं | इनसे समय तथा दूरी दोनों में अत्यधिक बचत हुई है | इन दोनों का संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित है | 

स्वेज नहर

स्वेज नहर का निर्माण कार्य एक फ्रांसीसी इंजिनियर फर्दीनन्द- द- लेपेप्स को सन् 1854 को सौंपा गया था |  सन् 1869 में बनकर यह तैयार हुई |

स्वेज नहर  का निर्माण मिस्त्र देश के उत्तर में मध्य भूमध्यसागर पर स्थित पोर्ट सईद और दक्षिण में लाल सागर पर स्थित पोर्ट स्वेज कों जोड़ने के लिए किया गया | इसके लिए स्वेज जलडमरूमध्य कों काटा गया था | यह नहर ग्रेट बिटर झील, लिटिल झील तथा टीमसा झील से होकर गुजरती है | ये सभी झीलें खारे पानी की झीलें हैं | नील नदी से एक नौगम्य ताजा पानी की नहर इस्माइलिया से स्वेज नहर में मिलती है | इस नहर से पोर्ट सईद तथा पोर्ट स्वेज नगरों कों ताजे पानी की आपूर्ति की जाती है | एक रेलमार्ग इस नहर के सहारे स्वेज तक जाता है जिसकी एक शाखा इस्माइलिया से कैरो तक जाती है |  

यह नहर लगभग 160 किलोमीटर लंबी और  11 से 15 मीटर गहरी है | इस नहर की अधिकतम चौड़ाई 365 मीटर है | इस नहर में प्रतिदिन लगभग 100 जलयान आवागमन करते हैं | इस नहर कों पार करने में 10 से 12 घण्टे का समय लगता है |   

इस नहर के निर्माण के बाद यूरोप एवं  पूर्वी अफ्रीका के तथा देशों और  दक्षिणी एशिया और दक्षिणी पूर्वी एशिया के बीच दूरी  में 6400 किलोमीटर की कमी है | जिससे समय की बहुत अधिक बचत हुई है |  इस नहर के निर्माण से यूरोपीय देशों विशेषकर ब्रिटेन कों बहुत अधिक लाभ मिला है | इसी कारण से स्वेज नहर कों ‘ब्रिटेन की स्नायु-नाड़ी’ भी कहा जाता है |

माल तथा यात्री किराया अत्यधिक होने के कारण वे जहाज जिनके लिए समय की देरी महत्वपूर्ण नहीं है टैक्स (किराया) से बचने के लिए सस्ते परन्तु लम्बे उत्तमाशा मार्ग का प्रयोग करते हैं | बड़े आकार वाले जहाज भी स्वेज नहर के मार्ग का प्रयोग नहीं करते है |

पनामा नहर

यह नहर में अटलांटिक महासागर कों पश्चिम में प्रशांत महासागर से जोड़ती है | इस नहर का निर्माण उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका के बीच पनामा गणराज्य के पनामा जलडमरूमध्य कों काटकर किया गया है | इसका निर्माण पनामा जलडमरूमध्य के आर-पार पनामा नगर एवं कोलोन के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका के द्वारा किया गया | अमेरिका ने इसके लिए दोनों ही ओर के 8  किलोमीटर क्षेत्र कों खरीद कर इसे नहर मंडल का नाम दिया है | इस नहर का निर्माण कार्य सन् 1906 में शुरू हुआ और यह सन् 1914 में बनकर तैयार हुई |

            पनमा नहर लगभग 72 किलोमीटर लंबी है जो लगभग 12 किलोमीटर लंबी कटान से युक्त है |  91 मीटर से 350 मीटर चौड़ी  है | इस नहर में कुल छ: जल प्रबंध तंत्र हैं | पनामा की खाड़ी में प्रवेश करने से पहले इन जल प्रबंधकों से होकर विभिन्न ऊँचाई की समुद्री सतह कों पार करते हैं |  जो 12.5 मीटर से 26 मीटर ऊँचाई के बीच है | इस नहर कों पार करने में 7 से 8 घण्टे का समय लगता है | इस नहर से रोजाना 48 जहाज गुजरते है |

            इस नहर के द्वारा समुद्री मार्ग से न्यूयार्क एवं सैनफ्रांसिस्को के मध्य लगभग 13000 किलोमीटर की दूरी कम हो गई है | इसी प्रकार पश्चिमी यूरोप और संयुक्त अमेरिका के पश्चिमी तट के बीच दूरी कम होने से व्यापार में बहुत अधिक वृद्धि हुई है | उत्तरी –पूर्वी और मध्य संयुक्त राज्य अमेरिका और पूर्वी तथा दक्षिणी पूर्वी एशिया के मध्य की दूरी भी कम हो गई है | इस नहर का आर्थिक महत्व स्वेज नहर की अपेक्षा कम है | फिर भी दक्षिणी अमेरिका की अर्थव्यवस्था में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है |

आंतरिक जल मार्ग

नदियों, झीलों तथा नहरों का प्रयोग करने वाले जलमार्ग आंतरिक जलमार्ग कहते हैं | नावें तथा स्टीमर यात्रियों तथा माल वाहन हेतु परिवहन के साधन के रूप में उपयोग किए जाते है | प्राचीनकाल में आंतरिक जलमार्ग का बड़ा महत्व था |

आंतरिक जल मार्गों के विकास की आवश्यक दशाएँ

आंतरिक जलमार्गों के विकास के लिए निम्नलिखित दशाएँ होनी चाहिए |

1         आंतरिक जल मार्गों का विकास नदियों तथा नहरों की नौगम्यता पर निर्भर करता है | अत : नदियों का मार्ग जल मार्ग जल-प्रपातों, सोपानी क्षिप्तिकाओं तथा महाखड्डों से मुक्त होना चाहिए | नदी की चौड़ाई और गहराई नौ परिवहन के लिए पर्याप्त होनी चाहिए |

2         नदी या नहरों में जल का प्रवाह  निरंतर होगा तो  पूरे वर्ष जल मार्ग के रूप में उसका प्रयोग हो सकेगा  | केवल वर्षा ऋतु में जल उपलब्ध करवाने वाली नदियों में जलमार्गों का विकास कम ही होता है |

3         आंतरिक जल परिवहन का विकास उपयोग में लाई जाने वाली वाली परिवहन प्रौद्योगिकी पर निर्भर करता है |

आंतरिक जल मार्गों के गुण (लाभ)

1         सघन वनों में मात्र नदियाँ ही परिवहन का साधन होती हैं |

2         परिवहन के अन्य साधनों की अपेक्षा जलमार्ग सस्ते होने के कारण अत्यधिक भारी वस्तुएँ, जैसे –कोयला, सीमेंट, इमारती लकड़ी तथा धात्विक अयस्क आदि का परिवहन आंतरिक जलमार्गों द्वारा किया जा सकता है |

3         रेल तथा सड़क मार्गों की तरह जल यातायात के लिए विशेष मार्ग बनाने की आवश्यकता नहीं होती | इनकी  देख रेख पर कोई लागत नहीं आती |

आंतरिक जल मार्गों के दोष

1.       आंतरिक जल मार्ग मंद गति से होने के कारण अधिक समय लगाते है अत : शीघ्र नाशवान वस्तुओं के परिवहन और यात्रियों के परिवहन में इनका विशेष महत्व नहीं है |

2.       अधिकाँश नदियाँ माँग वाले क्षेत्रों से दूर बहती है अर्थात बाजार केन्द्रों से दूर होने के कारण इनका अधिक लाभ नहीं उठाया जा सकता |

3.       कई नदियों कों यातायात योग्य बनाने के लिए उनकी तली से रेत, मिट्टी आदि निकालनी पड़ती है | या जल कि गति कों कम करने के लिए उनमें नहरें या जल अवरोध उत्पन्न करने पड़ते है जिससे रख-रखाव का पर व्यय बढ़ जाता है |

4.       वर्षा के करण नदियों में बाढ़ आने व शुष्क मौसम में जल का स्तर कम होने से जल परिवहन में बाधा उत्पन्न होती रहती है |

5.       सिंचाई के लिए नदियों का जल उपयोग में लाने के लिए अलग से नहरें बना देने से जल कि मात्रा में कमी हो जाती है जिससे परिवहन प्रभावित होता है |

आंतरिक जल परिवहन का महत्व कम होने के कारण

प्राचीन काल में आंतरिक जल मार्ग परिवहन के मुख्य राजमार्गों के रूप में प्रयोग किए जाते थे | परन्तु वतर्मान में रेल था सड़क मार्गों के साथ प्रतिस्पर्धा के कारण इनका महत्व का हुआ है | सिंचाई के लिए नदियों का जल उपयोग में लाने  से नदी में परिवहन के लिए पर्याप्त जल नहीं होने के कारण  भी आंतरिक जल परिवहन का महत्व कम हुआ है | खराब रख रखाव के कारण भी इनका महत्व कम होता जा रहा है |

Monday, January 16, 2023