विश्व में नगरीय बस्तियों का विकास
नगरीय
बस्तियाँ प्राचीन काल से ही विकसित होती रही है | लेकिन तीव्र नगरीय विकास एक नई
परिघटना है |कुछ समय पूर्व तक बहुत ही कम
बस्तियाँ कुछ हजार से अधिक जनसंख्या वाली होती थी | औद्योगिक क्रान्ति के बाद इसमें तेजी से बढोतरी
हुई है | विश्व में नगरीय बस्तियों के विकास कों हम निम्न प्रकार से समझ सकते हैं
|
1810
में लन्दन ऐसी पहली नगरीय बस्ती थी जिसकी जनसंख्या दस लाख हुई थी | 1982 में
विश्व के लगभग 175 नगर 10 लाख से अधिक
जनसंख्या वाले हो गए थे |
कुल जनसंख्या में नगरीय जनसंख्या के प्रतिशत
के हिसाब से वृद्धि कों देखने से पता चलता है कि नगरीय जनसंख्या जो सन् 1800 में 3 प्रतिशत थी यह बढ़कर 1850 में 6 प्रतिशत, 1900 में 14 प्रतिशत,
1950 में 30 प्रतिशत, 1982 में 37 प्रतिशत तथा 2001 में 48 प्रतिशत तथा 2011 में 52 प्रतिशत जनसंख्या नगरीय हो गई है |
नगरीय बस्तियों के वर्गीकरण के आधार
नगरीय
बस्तियों का वर्गीकरण जनसंख्या के आकार, व्यवसायिक संरचना, प्रशासनिक निर्णय, स्थिति
(अवस्थिति), नगरों की आकृति तथा नगरों के मुख्य कार्यों के आधारों पर किया जा सकता
है |
जनसंख्या के आकार के आधार पर नगरों का वर्गीकरण
नगरीय
क्षेत्रों कों परिभाषित करने के लिए अधिकतर देशों नें जनसंख्या कों मुख्य मापदंड माना
है | परन्तु नगर कों परिभाषित करने के लिए
जनसंख्या का मापदंड सभी देशों में अलग-अलग है | जो निम्न प्रकार से स्पष्ट है |
a) डेनमार्क,
स्वीडन तथा फिनलैंड में 250 व्यक्तियों की जनसंख्या
वाले सभी क्षेत्र नगरीय क्षेत्र कहलाते है |
b) आइसलैंड
में नगर होने के लिए न्यूनतम जनसंख्या 300 व्यक्ति
होनी चाहिए |
c) कनाडा
और वेनेजुएला में 1000 व्यक्तियों की जनसंख्या
वाले क्षेत्र नगर माने गए है |
d) कोलम्बिया
में नगरीय बस्ती होने के लिए 1500 व्यक्ति होने जरूरी
है |
e) अर्जेंटाइना
तथा पुर्तगाल में 2000 व थाईलैंड में 2500 व्यक्तियों का आवासीय क्षेत्र नगरीय बस्ती कहलाती है |
f) जापान
में 30000 लोगों की बस्ती कों ही नगरीय
बस्ती माना जाता है |
g) भारत
में
5000 लोगों के साथ साथ जनसंख्या का घनत्व न्यूनतम 400 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर होना जरूरी है | साथ ही जनसंख्या का 75 प्रतिशत भाग गैर कृषि कार्यों में संलग्न होना चाहिए |
व्यवसायिक संरचना के आधार पर नगरों का वर्गीकरण
जनसंख्या के आकार के अतिरिक्त कुछ देशों में बस्तियों
कों नगरीय बस्ती मानने के लिए प्रमुख आर्थिक गतिविधियों कों भी एक महत्वपूर्ण
मापदंड माना जाता है | जैसे भारत में यदि किसी क्षेत्र की जनसंख्या का 75 प्रतिशत भाग गैर कृषि कार्यों में लगा होता है तो उसे नगरीय बस्ती माना
जा सकता है | इसी प्रकार इटली में उस बस्ती कों नगरीय बस्ती कहा जा सकता है जिसकी
आर्थिक रूप से उत्पादक जनसंख्या का 50 प्रतिशत भाग गैर कृषि
कार्यों में संलग्न हो |
प्रशासनिक निर्णय के आधार पर नगरों का वर्गीकरण
कुछ देशों में किसी बस्ती कों नगरीय बस्ती में
वर्गीकृत करने के लिए प्रशासनिक ढाँचे कों भी आधार बनाया जाता है | उदाहरण के लिए
भारत में किसी भी आकार की बस्ती कों नगर के रूप में वर्गीकृत किया जाता है | यदि
वहाँ नगरपालिका, छावनी बोर्ड (कैन्टोंमेंट बोर्ड ) हो या प्रशासन के द्वारा
अधिसूचित नगरीय क्षेत्र समिति है | इसी प्रकार लैटिन अमेरिका महाद्वीप के देश ब्राजील
तथा बोलीविया में जनसंख्या आकार का ध्यान नहीं रखते हुए किसी भी प्रशासकीय केन्द्र
कों नगरीय बस्ती मान लिया जाता है |
स्थिति (अवस्थिति ) के आधार पर नगरों का वर्गीकरण
नगरीय केन्द्रों की स्थिति उनके द्वारा किए जा
रहे कार्यों कों ध्यान में रखकर देखी जाती है | क्योंकि अलग-अलग प्रकार के कार्यों
के लिए नगरों की स्थिति भी अलग-अलग ही होती है | जैसे औद्योगिक नगर, सेना नगर,
पत्तन नगर तथा मनोरंजन नगर (अवकास सैर गाह ) आदि नगरों के लिए उनकी स्थिति भी भिन्न भिन्न
होती है | जो निम्नप्रकार से स्पष्ट है |
a) सामरिक
नगरों की स्थिति ऐसी जगह होती है जहाँ उसे प्राकृतिक सुरक्षा मिल सके |
b) खनन
नगरों की स्थिति उन स्थानों पर होती है जहाँ आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण खनिजों
के भंडार मिलते है |
c) औद्योगिक
नगरों के लिए वे स्थान अधिक उपयुक्त होते है जहाँ कच्चा माल आसानी से पहुँच सके, शक्ति
के पर्याप्त साधन उपलब्ध हो, परिवहन की सुविधा पर्याप्त हो तथा तैयार माल के लिए बाजार
आसानी से उपलब्ध हो सके |
d) पत्तन
नगरों के लिए पोताश्रय का होना आवश्यक होता है |
e) पर्यटन
नगर के लिए आकर्षक दृश्य, या सामुद्रिक तट, औषधीय जल वाला झरना या कोई ऐतिहासिक
अवशेष आदि की स्थिति होनी चाहिए |
आकृति के आधार पर नगरों का वर्गीकरण
वास्तव में किसी भी नगर की आकृति, वास्तुकला एवं भवनों की शैली वहाँ के ऐतिहासिक एवं
सांस्कृतिक परम्पराओं की देन होती है | आकृति के आधार पर एक नगरीय बस्ती रेखीय
प्रतिरूप , वर्गाकार प्रतिरूप, तारे के आकार तथा अर्ध चंद्राकार (चापाकार) हो सकती है |
नगरों का प्रकार्यात्मक वर्गीकरण (कार्यों के आधार पर नगरों का वर्गीकरण )
नगरों में विभिन्न प्रकार के कार्य चलते रहते
है | ये कार्य इतने विविध प्रकार के है कि किसी एक नगर कों किसी विशेष प्रकार के
कार्य से जोड़ना कठिन हो जाता है | अत: नगर
एक प्रकार्यात्मक ना होकर बहु प्रकार्यात्मक होते है | लेकिन नगरों में कुछ कार्य
अधिक महत्व रखते है | जैसे कुछ नगरों
सामाजिक आर्थिक महत्व के कार्य होते है | कुछ सैनिक महत्व के लिए बसाये जाते है |
कुछ नगर औद्योगिक कार्य करते है | कुछ नगरों में प्रशासनिक कार्य अधिक किए जाते है |
अत: उनके महत्वपूर्ण कार्यों के आधार पर नगरों कों निम्नलिखित प्रकारों बाँटा जा सकता है |
1.
प्रशासनिक नगर
वे नगर जिनका संबंध जन साधारण के प्रशासन
संबंधी कार्यों से होता है उन्हें प्रशासनिक नगर कहते है | इस प्रकार के नगर,
देशों तथा राज्यों की राजधानियों , जिला एवं अन्य प्रशासनिक इकाइयों के मुख्यालय
होते है | इन नगरों में सरकारी विभागों के मुख्यालय तथा विभिन्न विभागों के सरकारी
कार्यालय होते है |
देश की राजधानी के रूप में प्रशासनिक नगरों के
उदाहरण इंग्लैंड में लन्दन, भारत में नई दिल्ली, फ्रांस में पेरिस, कनाडा में ओटावा,
ऑस्ट्रेलिया में कैनबरा तथा संयुक्त राज्य अमेरिका में वाशिंग्टन डी. सी. आदि है |
जबकि राज्यों के प्रशासनिक नगरों में हरियाणा का चंडीगढ, राजस्थान का जयपुर, मध्य
प्रदेश का भोपाल, उत्तर प्रदेश का लखनऊ, गुजरात का गांधीनगर आदि है |
2. प्रतिरक्षा
नगर
इन
नगरों कों गैरीसन या छावनी नगर या कैंटोनमेंट या कैंट आदि नामों से जाना जाता है
| ये नगर सैनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होते
है | इन नगरों में सेना, नौ सेना तथा वायु सेना के रहने की व्यवस्था के
साथ-साथ, उनके अभ्यास तथा प्रशिक्षण की
व्यवस्था भी होती है | अम्बाला, पुणे, मेरठ
, जोधपुर, जालंधर, देहरादून आदि प्रतिरक्षा नगरों के उदाहरण है |
3. सांस्कृतिक
नगर
वे
नगर जिनमें शिक्षा, कला धार्मिक (सांस्कृतिक) महत्व के कार्य मुख्य रूप से किए
जाते है | उन्हें सांस्कृतिक नगर कहते है | ये मुख्य रूप से दो प्रकार के होते है
| शैक्षिक नगर (शिक्षा नगर) शिक्षा नगर तथा धार्मिक नगर | इनका संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित है |
a) शैक्षिक
नगर (शिक्षा नगर)
कई नगरों का विकास उनमें
शिक्षा संबंधी सुविधाओं की उपस्थिति के कारण होता है | विश्वविद्यालय
(यूनिवर्सिटी), महाविद्यालय (कॉलेज), विद्यालय, छात्रावास आदि की सुविधाएँ इन
नगरों में प्रचुरता मिलती है | ऑक्सफोर्ड, कैम्ब्रिज, रुड़की, आगरा अलीगढ, बनारस ,
खड़गपुर, पिलानी, कोटा तथा शांति निकेतन आदि शैक्षिक नगरोंके प्रमुख उदाहरण है |
b) धार्मिक
नगर
कई नगर विभिन्न धर्मों या
सांस्कृतियों के लोगों के तीर्थ स्थानों के रूप में विकसित हो जाते है | इन नगरों
का धार्मिक महत्व होता है | रोम में वेटिकन सिटी पोप के कारण, तिब्बत में ल्हासा
दलाई लामा के कारण, मक्का पैगाम्बर मोहम्मद के कारण, जेरूसलम ईसा मसीह के कारण,
अमृतसर सिखों के गुरु स्थान के कारण, वाराणसी, हरिद्वार, मथुरा, द्वारका, पुष्कर
तथा उज्जैन आदि हिंदू धर्म के पूज्य स्थलों के रूप में धार्मिक महत्व के नगर है |
4.
खनन नगर
जिन स्थानों पर खनिज पाए
जाते है | उन क्षेत्रों के आस पास नगरों का
विकास हो जाता है | जिन्हें खनन नगर या खनन केन्द्र कहते हैं | जैसे दक्षिण
अफ्रीका में जोहान्सबर्ग, ऑस्ट्रेलिया में कूलगार्डी, भारत में डिगबोई, झरिया,
रानीगंज, कोलार तथा खेतडी आदि खनन नगर है |
5. औद्योगिक
नगर
निर्माण उद्योगों के विकास के
साथ-साथ नए नगरों का भी उद्भव होता है | जिन्हें औद्योगिक नगर कहते है | इन नगरों
का विकास औद्योगिक उन्नति पर ही निर्भर होता है | इंग्लैंड में मानचेस्टर,जापान
में टोकियो, जर्मनी में पिट्सबर्ग, भारत में जमशेदपुर, कानपुर, अहमदाबाद, सूरत,
राउरकेला, भिलाई, फरीदाबाद, बडौदा आदि प्रमुख औद्योगिक नगरों के उदाहरण है |
6. बाजार
नगर
इन नगरों कों मंडियां भी कहते
हैं | इन नगरों में व्यापारी तथा व्यापारी संगठनों से संबंधित कार्यालय जैसे बैंक,स्टॉक
एक्सचेंज, बीमा कम्पनियों के कार्यालय तथा अन्य वितीय संगठन होते है | भारत में
हापुड, मुज्जफरनगर तथा मेरठ आदि बाजार नगरों के उदाहरण है |
7. पतन
नगर
समुद्र तटीय भागों में पत्तनों
के पास बड़े-बड़े नगर विकसित हो जाते है | ये नगर व्यापारिक केन्द्र तथा वितरण
केन्द्र के रूप में यहाँ विकसित हो जाते है | इन नगरों कों ही पत्तन नगर कहते है |
इन नगरों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के द्वारा किए जाने वाले आयात-निर्यात संबंधी
कार्य अधिक होते है | विभिन्न देशों में टोकियो, सिंगापुर, हांगकांग, लन्दन
न्यूयार्क लिवरपूल आदि तथा भारत में मुम्बई, चेन्नई, कोलकाता, सूरत, कांडला,
विशाखापट्टनम तथा तिरुवनंतपुरम प्रमुख पत्तन नगर है |
8. विनोद
प्रिय नगर
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