Friday, December 3, 2021

Lesson 4 Climate class 9th

  

कक्षा 9वीं

समकालीन भारत (भूगोल)

अध्याय : 4  (जलवायु)

प्रश्न: नीचे दिए गए स्थानों में से किस स्थान पर विश्व की सबसे अधिक वर्षा होती है ?                                   

   क).            सिलचर

  ख).            चेरापूंजी

    ग).            मासिनराम

   घ).            गुवाहाटी

उत्तर: मासिनराम

प्रश्न: ग्रीष्म ऋतु में उत्तरी मैदानों में बहने वाली पवन कों निम्नलिखित में से क्या कहा जाता है ?

   क).            काल बैसाखी  

  ख).            व्यापारिक पवने

    ग).            लू

   घ).            इनमें से कोई नहीं  

उत्तर: लू

प्रश्न: : निम्नलिखित में सेकौन-सा कारण भारत के उत्तर-पश्चिम भाग में शीत ऋतु में होने वाली वर्षा के लिए उत्तरदायी है ?

   क).            चक्रवातीय अवदाब   

  ख).            पश्चिमी विक्षोभ  

    ग).            मानसून की वापसी

   घ).            दक्षिणी पश्चिमी मानसून   

उत्तर: पश्चिमी विक्षोभ 

प्रश्न: भारत में मानसून का आगमन निम्नलिखित में से कब होता है ?

   क).            मई के प्रारम्भ में    

  ख).            जून के प्रारम्भ में    

    ग).            जुलाई  के प्रारम्भ में    

   घ).            अगस्त के प्रारम्भ में    

उत्तर: जून के प्रारम्भ में   

प्रश्न: निम्नलिखित में से कौन-सी भारत में शीत ऋतु की विशेषता है ?

   क).            गर्म दिन व गर्म रातें     

  ख).            गर्म दिन व ठण्डी रातें     

    ग).            ठंडा दिन व ठण्डी रातें   

   घ).            ठंडा दिन व गर्म रातें     

उत्तर: गर्म दिन व ठण्डी रातें

प्रश्न: भारत की जलवायु कों प्रभावित करने वाले कारक कौन-कौन से है ?

उतर: भारत की जलवायु कों प्रभावित करने वाले मुख्य कारक निम्नलिखित है |

1.       अक्षांश (भूमध्य रेखा से दूरी)

2.       ऊँचाई (समुद्र तल से ऊँचाई)

3.       वायुदाब एवं पवन तंत्र

4.       समुद्र से दूरी

5.       उच्चावच लक्षण (भौतिक संरचना)

 

प्रश्न: भारत में मानसूनी प्रकार की जलवायु क्यों है ?

उतर: मानसून का अर्थ है एक वर्ष के दौरान ऋतु के अनुसार पवनों की दिशा में परिवर्तन होना | भारत में भी ऋतु के अनुसार पवनों की दिशा बदल जाती है | ग्रीष्म ऋतु में यहाँ पर पवने दक्षिण-पश्चिम दिशा से उत्तर पूर्व दिशा की ओर चलती है जबकि शीत ऋतु में पवनों की दिशा ठीक इसके विपरीत हो जाती है | शीत ऋतु में भारत में पवनों की दिशा उत्तर पश्चिम से दक्षिण पूर्व की ओर हो जाती है |  इसलिए ही भारत की जलवायु मानसूनी प्रकार की है |

प्रश्न: भारत में किस भाग में दैनिक तापमान अधिक होता है और क्यों ?

उतर: भारत के थार के मरुस्थल में दैनिक तापमान अधिक होता है | इसका कारण यह है कि यहाँ के विशाल क्षेत्र में रेत फैली हुई है | रेत जल्दी गर्म   होती है इसलिए इस क्षेत्र में तापमान जल्दी बढने लगता है |  

 

प्रश्न: किन पवनों के कारण मालाबार तट पर वर्षा होती है ?

उत्तर: मालाबार तट पर वर्षा दक्षिणी –पश्चिमी मानसूनी पवनों के द्वारा होती है |

प्रश्न: जेट धाराएँ क्या है ? तथा वे किस प्रकार भारत की जलवायु कों प्रभावित करती है ?

उत्तर: जेट धारा का अर्थ

            जेट धाराएँ क्षोभमंडल में अत्यधिक ऊँचाई पर एक संकरी पट्टी में स्थित पश्चिमी हवाएं होती है | ये वायु धाराएँ  क्षोभमंडल में 12000 मीटर (12 किलोमीटर) की ऊँचाई पर चलती है | इनकी गति गर्मियों में 110 किलोमीटर प्रति घंटा तथा सर्दियों में 184किलोमीटर प्रति घंटा होती है |

जेट धाराओं का भारत की जलवायु पर प्रभाव  

जेट धाराएँ 270 उत्तरी अक्षांश से 300 उत्तरी अक्षांश के बीच पश्चिम से पूर्व की ओर प्रवाहित होती है | इसलिए इन्हें उपोष्ण कटिबन्धीय पश्चिमी जेट धारा कहते है |  ये भारतीय क्षेत्र के ऊपर प्रवाहित होती है | ये धाराएँ ग्रीष्म ऋतु कों छोडकर पूरे वर्ष हिमालय के दक्षिण में प्रवाहित होती है | जबकि ग्रीष्म ऋतु में विशेषकर जून के महीने में ये धाराएँ हिमालय कों पार करके हिमालय के उत्तर में प्रवाहित होने लगती है | परिणाम स्वरूप एक और जेट धारा इसका स्थान ले लेती है | जो पूर्व से पश्चिम की ओर प्रवाहित होती है | इस जेट धारा कों उष्ण कटिबन्धीय पूर्वी जेट धारा कहते है | यह  धारा गर्मियों के महीने में 140 उत्तरी अक्षांश के आस-पास प्रायद्वीपीय भारत के ऊपर बहने लगती है | इसी के कारण पूरे देश में मानसून का आगमन और प्रसार होता है |  

प्रश्न: मानसून कों परिभाषित करें ? मानसून में विराम से आप क्या समझते है ?

उत्तर:   मानसून

‘मानसून’ शब्द की उत्पत्ति अरबी भाषा के ‘मौसिम’ शब्द से हुई है | जिसका अर्थ है वर्ष के दौरान ऋतु के बदलने पर पवनों की दिशा का उलट जाना | अर्थात मानसून का अर्थ एक ऐसी ऋतु से है जिसमें पवनों की दिशा बिल्कुल उलट जाती है |

मानसून  में विराम

मानसूनी वर्षा लगातार नहीं होती | यह एक समय में कुछ दिनों तक होती है और फिर रुक जाती है| इस तरह बिना वर्षा का समय आता है जिसे शुष्क अंतराल कहा जाता है | मानसूनी वर्षा के समय इस शुष्क अंतराल कों ही मानसून में  विराम कहते है |

        मानसून में विराम का कारण मानसूनी गर्त की स्थिति में परिवर्तन होना है | यह मानसूनी गर्त कभी उत्तर तो कभी दक्षिण भारत की ओर खिसकता है | जब यह मानसूनी गर्त उत्तर की ओर खिसक जाता है तो उत्तरी भारत में वर्षा होती है और दक्षिण में मानसून विराम की स्थिति होती है |  जब यह गर्त दक्षिण की ओर खिसकता है तो वर्षा दक्षिण भारत के राज्यों में होती है और उत्तर भारत के मैदानों में मानसून में विराम की स्थिति होती है |

प्रश्न: मानसून कों एक सूत्र में बांधने वाला क्यों समझा जाता है ?

उत्तर: भारत एक विशाल देश है | इस विशालता के परिणाम स्वरूप  भारत के धरातल, जलवायु , वनस्पति तथा लोगों के जीवन में भी विविधताएँ पाया जाना स्वभाविक है | लेकिन मानसून एक ऐसा कारक है जो इन विविधताओं कों एकता के सूत्र में बाँधने का कार्य करता है |  जैसे

1)      पवन की दिशाओं का ऋतु के अनुसार परिवर्तन होता है | इसी के कारण वर्षा के आगमन की ऋतु में पूरे भारत में वर्षा प्राप्त होती है | इसी प्रकार अन्य ऋतुओं की दशाएँ भी इसी के कारण बनती है और ऋतु चक्र कों गति मिलती है |

2)      मानसूनी वर्षा की अनिश्चितताएँ और उसका असमान वितरण पूरे भारत में अपनी एक ही विशेषता लिए हुए है |

3)      संपूर्ण भारत के भूदृश्य , इसके जीव –जंतु , वनस्पति का विकास , कृषि चक्र,  मानव का जीवन तथा उनके त्योंहार उत्सव सभी मानसून से प्रभावित होते है |

4)      उत्तर से दक्षिण तथा पूर्व से पश्चिम तक सभी भारतीय प्रतिवर्ष मानसून के आगमन की प्रतीक्षा करते है |

5)      मानसूनी वर्षा के द्वारा हमें जल प्राप्त होता है | जिससे कृषि कार्य में तेजी आती है |

6)      भारतीय नदियाँ भी मानसून के समय अपने वेग से बहती है |

इसलिए मानसून कों एकता के सूत्र में बाँधने वाला कहा जाता है | 

प्रश्न : उत्तर भारत में पूर्व से पश्चिम की ओर वर्षा की मात्रा क्यों घटती जाती है ?

उत्तर : भारत में मानसूनी पवनें बंगाल की खाड़ी और अरब सागर  से  चलती है | बंगाल की खाड़ी से आने वाली मानसून पवनें सबसे पहले ब्रह्मपुत्र तथा असम की घाटी में पहुँचती है और भारी वर्षा करती है | हिमालय से टकरा कर ये पवनें पूर्व से पश्चिम की ओर चलने लगती है | पश्चिम की ओर जाते - जाते  इन पवनों में जलवाष्प की मात्रा कम होती जाती है | परिणाम स्वरूप उत्तर भारत में पूर्व से पश्चिम की ओर वर्षा की मात्रा घटती जाती है |

प्रश्न : कारण बताएँ कि भारतीय उपमहाद्वीप में वायु की दिशा में मौसमी परिवर्तन क्यों होता है ?

उत्तर :  जल और स्थल पर तापमान की भिन्नता के कारण वायुदाब में भी भिन्नता आती है | इसी के परिणाम स्वरूप वायु की दिशा में मौसमी परिवर्तन होता है |हम जानते है कि जल स्थल कि अपेक्षा देरी से गर्म होता है और देरी से ठंडा होता है | भारत का मैदानी क्षेत्र ग्रीष्म ऋतु में अधिक गर्म हो जाता है | जबकि अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी कि वायु का तापमान अपेक्षाकृत कम है | इसी कारण से मैदानी क्षेत्रों में निम्न वायुदाब का क्षेत्र का बन जाता है और सागरीय क्षेत्र में अधिक वायुदाब के कारण पवनें समुद्र से भारत के आंतरिक भाग कि ओर चलने लगती है | सर्दियों में स्थिति बिल्कुल उल्ट जाती है |  मैदानी क्षेत्र शीत ऋतु में अधिक ठंडा  हो जाता है | जबकि अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी कि वायु का तापमान अपेक्षाकृत अधिक होता है | इसी कारण से मैदानी क्षेत्रों में उच्च वायुदाब का क्षेत्र का बन जाता है और सागरीय क्षेत्र में निम्न  वायुदाब के कारण पवनें भारत के आंतरिक भाग से  समुद्र कि ओर चलने लगती है | यही कारण है कि भारतीय उपमहाद्वीप में वायु की दिशा में मौसमी परिवर्तन होता है |

प्रश्न : कारण बताएँ  कि भारत की अधिकतर वर्षा कुछ ही महीनों में  होती है |

उत्तर : भारत में अधिकांश वर्षा जून से सितम्बर के बीच होती है | जिसका प्रमुख कारण यह है कि ग्रीष्म ऋतु के दौरान मैदानी क्षेत्रों में निम्न वायुदाब का क्षेत्र का बन जाता है और सागरीय क्षेत्र में अधिक वायुदाब के कारण पवनें समुद्र से भारत के आंतरिक भाग कि ओर चलने लगती है | ये मानसूनी पवनों के रूप में भारत में आती है | ये पवनें जलवाष्प से भरी होती है और भारत के अधिकाँश स्थानों पर वर्षा करती है | ये मानसून पवनें जून से सितम्बर तक चलती है | इसके बाद तापमान तथा वायुदाब  संबंधी परिस्थितियाँ बिल्कुल उल्ट जाती है ओर पवनें स्थल से समुद्र कि ओर चलने लगती है | इस पवनों में जलवाष्प नहीं होती जिससे ये वर्षा भी नहीं करती है | यही कारण है कि भारत की अधिकतर वर्षा कुछ ही महीनों में  होती है |

प्रश्न: कारण बताएँ कि तमिलनाडु के तट पर शीत ऋतु में वर्षा होती है |

उत्तर : ग्रीष्म ऋतु में तमिलनाडु के तट पर आगे बढते हुए मानसून की ऋतु में वर्षा नहीं होती यह क्षेत्र शुष्क रह जाता है | लेकिन शीत ऋतु में पीछे हटते हुए मानसून की ऋतु के समय बंगाल की खाड़ी में उच्च वायुदाब की स्थिति होती है और तमिलनाडु के तट पर निम्न वायुदाब की स्थिति होती है | परिणाम स्वरुप पवनें बंगाल की खाड़ी से तमिलनाडु के तट की ओर चलने लगती है ये पवनें अपने साथ पर्याप्त मात्रा में जलवाष्प लेकर आती है और तमिलनाडु के तट से टकरा कर यहाँ वर्षा करती है |यही कारण है की  तमिलनाडु के तट पर शीत ऋतु में वर्षा होती है |

प्रश्न: कारण बताएँ कि पूर्वी तट के डेल्टा वाले क्षेत्र में प्राय: चक्रवात आते है |

उत्तर : पीछे हटते  हुए मानसून की ऋतु में नवम्बर के महीने में उत्तरी भारत में उच्च वायुदाब बन जाता है जो ग्रीष्म ऋतु में निम्न वायुदाब का क्षेत्र होता है | यह निम्न वायुदाब का क्षेत्र यहाँ से खिसक कर बंगाल की खाड़ी में चला जाता है |  निम्न वायुदाब होने के कारण इस क्षेत्र में पवनें चारों ओंर से आने लगती है और बंगाल की खाड़ी में चक्रवात बन जाता है |  पूर्वी तट पर गोदवरी, कावेरी तथा कृष्ण नदी के डेल्टाई भागों में निम्न वायुदाब का क्षेत्र होता है जिससे ये चक्रवात पूर्वी तट पर टकराते है और अत्यधिक हानि पहुँचातें है |  

प्रश्न: कारण बताएँ कि राजस्थान, गुजरात के कुछ भाग तथा पश्चिमी घाट का वृष्टि –छाया क्षेत्र सूखा प्रभावित क्षेत्र है |

उत्तर :  राजस्थान में अरावली प्रमुख पर्वत श्रृंखला है | यह  पर्वत श्रृंखला मानसूनी पवनों  की दिशा के समानांतर रहती है | परिणाम स्वरुप यह पर्वत श्रृंखला मानसूनी पवनों कों नहीं रोक पाती और ये पवनें बिना वर्षा के ही आघे निकल जाती है | जिससे राजस्थान में बहुत कम वर्षा होती है | यही कारण है कि यह क्षेत्र सूखा प्रभावित क्षेत्र है |  

            गुजरात कुछ भाग तथा पश्चिमी घाट का वृष्टि –छाया क्षेत्र है अर्थात यहाँ पर मानसूनी पवनों का पवनविमुखी ढलान होता है जिससे मानसूनी पवनों के द्वारा यहाँ पर वर्षा बहुत कम होती है | पर्याप्त वर्षा नहीं मिलने के कारण ये क्षेत्र भी  सूखा प्रभावित क्षेत्र है |