खनिज का अर्थ
एक खनिज निश्चित रासायनिक एवं भौतिक गुणधर्मों
(विशिष्टताओं) के साथ कार्बनिक या अकार्बनिक उत्पत्ति का एक प्राकृतिक पदार्थ है |
खनिजों की सामान्य विशेताएँ
सभी प्रकार के खनिजों में निम्नलिखित तीन सामान्य
विशेषताएँ होती हैं |
1) खनिज
विभिन्न क्षेत्रों में असमान रूप से वितरित होते हैं |
2) खनिजों
की मात्रा और गुणवत्ता के बीच प्रतिलोमी (विलोम) संबंध पाया जाता है अर्थात अधिक
गुणवत्ता वाले खनिज कम मात्रा में मिलते है और कम गुणवत्ता वाले खनिज अधिक मात्रा
में पाए जाते है |
3) सभी
खनिज समय के साथ-साथ समाप्त होते जाते है अर्थात समाप्य है | भूगार्भिक दृष्टि से
इन्हें बनने में लंबा समय लगता है | आवश्यकता के समय इनका पुनर्भरण नहीं किया जा
सकता | अत : इन्हें संरक्षित किया जाना चाहिए | इनका दुरूपयोग नहीं करना
चाहिए क्योंकि इन्हें दुबारा उत्पन्न करने
में समय लगता है इन्हें तुरंत उत्पन्न नहीं किया जा सकता |
खनिजों का आर्थिक महत्व
खनिज किसी भी देश के आर्थिक विकास में
महत्वपूर्ण योगदान देते हैं | जो निम्नप्रकार से स्पष्ट है |
1) खनिज
उद्योगों कों आधार प्रदान करते है |
2) अनेक
प्रकार के उद्योग कच्चे माल के लिए खनिजों पर आधारित है |
3) कोयला,
पट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैसे जैसे खनिज ऊर्जा प्रदान करते है |
खनिजों के प्रकार
रासायनिक एवं भौतिक गुणधर्मों के आधार पर
खनिजों कों दो मुख्य श्रेणियों में बाँटा जा सकता है |
1. धात्विक
खनिज
2. अधात्विक
खनिज
इनका संक्षिप्त वर्णन निम्नप्रकार से है |
धात्विक खनिज
वे खनिज जिसमें धातुओं का अंश पाया जाता है |
उन्हें धात्विक खनिज कहते है | खनिजों की उत्पत्ति अकार्बनिक तत्वों से हुई है | जैसे
लौहा, मैगनीज, टंगस्टन, ताँबा,सीसा, सोना, चाँदी, तथा निकिल आदि |
धात्विक खनिजों में निम्नलिखित विशेषताएँ होती
है |
1) ये
खनिज सख्त और चमकीले होते हैं |
2) ये
प्राय: आग्नेय चट्टानों में पाए जाते है |
3) ये
लचीले होते है | इन्हें पीटकर कोई भी रूप दिया जा सकता है | इन्हें खींच कर लम्बा
किया जा सकता है |
4) ये
चोट मारने पर टूट कर बिखरते नहीं है |
धात्विक खनिजों के प्रकार
धात्विक खनिजों कों पुनः दो प्रकारों लौहयुक्त
धात्विक खनिज तथा अलौहयुक्त धात्विक खनिज में बाँटा जाता है |
अ. लौहयुक्त
धात्विक खनिज
वे खनिज जिनमें लौह
धातु का अंश पाया जाता है उन्हें लौहयुक्त धात्विक खनिज कहते हैं | जैसे लौहा,
मैगनीज, टंगस्टन तथा निकिल आदि | ये मैटमैले,स्लेटी तथा घूसर रंग के होते है |
आ. अलौहयुक्त
धात्विक खनिज
वे खनिज जिनमें लौह
धातु का अंश नहीं पाया जाता है उन्हें अलौहयुक्त धात्विक खनिज कहते हैं | जैसे
ताँबा,सीसा, सोना, चाँदी, टिन,
बॉक्साईट तथा मैंगनीशियम आदि | ये
अनेक रंगों में मिलते है |
अधात्विक खनिज
वे खनिज जिसमें धातुओं का अंश नहीं पाया जाता
है | उन्हें अधात्विक खनिज कहते है | इन खनिजों की उत्पत्ति कार्बनिक तथा
अकार्बनिक दोनों ही प्रकार के तत्वों से हुई है | जैसे कोयला, पेट्रोलियम,
प्राकृतिक गैस, अभ्रक (माइका), स्लेट, चूना पत्थर, ग्रेफाईट, डोलोमाईट, जिप्सम तथा
फ़ॉस्फेट आदि |
अधात्विक खनिजों में निम्नलिखित विशेषताएँ
होती है |
1) ये
खनिज कम चमकदार होते हैं |
2) ये
प्राय: परतदार चट्टानों में पाए जाते है |
3) ये
कम लचीले होते है | इन्हें पीटकर कोई भी रूप नहीं दिया जा सकता है | इन्हें खींच
कर लम्बा भी नहीं किया जा सकता है |
4) ये
चोट मारने पर टूट कर बिखर जाते है |
अधात्विक खनिजों के प्रकार
अधात्विक खनिजों कों पुनः दो प्रकारों कार्बनिक
अधात्विक खनिज तथा अकार्बनिक अधात्विक खनिज में बाँटा जाता है |
अ. कार्बनिक
अधात्विक खनिज
वे खनिज जिनकी
उत्पत्ति कार्बनिक तत्वों से हुई है | इनमें जीवाश्म होते है | इन्हें ईंधन खनिज
भी कहते हैं | जैसे कोयला, पेट्रोलियम तथा
प्राकृतिक गैस आदि |
आ. अकार्बनिक
अधात्विक खनिज
वे खनिज जिनकी
उत्पत्ति अकार्बनिक तत्वों से हुई है | इनमें जीवाश्म नहीं होते | जैसे अभ्रक (माइका), स्लेट, चूना पत्थर,
ग्रेफाईट, डोलोमाईट, जिप्सम तथा फ़ॉस्फेट आदि |
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