Wednesday, January 26, 2022

Agencies engaged in exploration of minerals in India and Distribution of Minerals in India Mineral belts in India

 

भारत में खनिजों के अन्वेषण में संलग्न अभिकरण (Agencies engaged in exploration of minerals in India)

भारत में खनिजों के व्यवस्थित सर्वेक्षण, पूर्वेक्षण (Prospecting)  तथा अन्वेषण (खोज) के कार्य निम्नलिखित अभिकरण (संस्थाएँ) कर रही है |

1)      भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (Geological Survey of India) (GSI)

2)      तेल और प्राकृतिक गैस आयोग (Oil and Natural Gas Commission) (ONGC)

3)      खनिज अन्वेषण निगम लिमिटिड (Mineral Exploration Corporation Ltd.) (MECL)

4)      राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (National Mineral Development Corporation) (NMDC)

5)      इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस (Indian Bureau of Mines) (IBM)

6)      भारत गोल्ड माइंस लिमिटिड (Bharat Gold Mines Ltd.) (BGML)

7)      हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटिड (Hindustan Copper Ltd.) (HCL)

8)      राष्ट्रीय एल्युमिनियम कंपनी लिमिटिड (National Aluminium Company Ltd.) (NALCO)

 

इनके अलावा विभिन्न राज्यों के खादान एवं भू विज्ञान विभाग भी इस कार्य के शामिल है |

 

भारत में  खनिजों का वितरण

भारत में खनिजों के वितरण से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण तथ्य है  जो निम्नलिखित हैं |  

1.       भारत में अधिकाँश धात्विक खनिज प्रायद्वीपीय पठारी क्षेत्र की प्राचीन क्रिस्टलीय शैलों में पाए जाते हैं |

2.       कोयले का लगभग 97 प्रतिशत भाग दामोदर, सोन, महानदी और गोदावरी नदियों की घाटियों में पाया जाता है |

3.       पेट्रोलियम के आरक्षित भंडार असम, गुजरात तथा मुंबई हाई अर्थात अरब सागर के अतटीय क्षेत्र में पाए जाते है | नए आरक्षित क्षेत्र कृष्णा-गोदावरी तथा कावेरी बेसिनों में पाए गए हैं |

4.       अधिकाँश प्रमुख खनिज मंगलौर से कानपुर कों जोड़ने वाली कल्पित रेखा के पूर्व में पाए जाते हैं |

भारत में खनिज पट्टियाँ

भारत में खनिज मुख्यतः तीन विस्तृत पट्टियों में सांद्रित है | उत्तरी – पूर्वी पठारी प्रदेश, दक्षिण-पश्चिम पठारी प्रदेश तथा उत्तर-पश्चिमी प्रदेश | इनके अलावा कुछ भंडार यत्र-तत्र  एकाकी खंडों में भी पाए जाते है | भारत में खनिजों की पट्टियों का संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित है |

               क).            उत्तरी – पूर्वी पठारी प्रदेश

इस पट्टी के अंतर्गत छोटानागपुर (झारखंड), ओडिशा के पठार, पश्चिम बंगाल तथा छतीसगढ़ के कुछ भाग आते हैं | प्रमुख लौह और  इस्पात उद्योग  इस क्षेत्र में अवस्थित है | इस क्षेत्र में लौह अयस्क, कोयला, मैंगनीज, बॉक्साइट तथा अभ्रक के भंडार अधिक मिलते है |

              ख).            दक्षिण-पश्चिम पठारी प्रदेश

यह पट्टी कर्नाटक, गोवा कर्नाटक के साथ लगती तमिलनाडु की उच्च भूमि और केरल पर विस्तृत है | यह पट्टी लौह धातुओं तथा  बॉक्साइट से समृद्ध है | इस पेटी में उच्च कोटि का लौह-अयस्क,मैंगनीज तथा चूना-पत्थर मिलता है | लिगनाइट कोयले कों छोड़कर इस पेटी में कोयले का अभाव है |  केरल में मोनाजाइट रेत में थोरियम तथा बॉक्साइट क्ले के निक्षेप हैं | गोवा में लौह अयस्क के निक्षेप पाए जाते है | इस पट्टी में उत्तरी पूर्वी पट्टी की तरह खनिजों के निक्षेप विविधता पूर्ण नहीं है |

                ग).            उत्तर-पश्चिमी प्रदेश

यह पट्टी राजस्थान तथा गुजरात के कुछ भाग पर विस्तृत है | इस पेटी के खनिज धारवाड़ क्रम की चट्टानों से संबंधित है | ताँबा तथा जिंक यहाँ के प्रमुख खनिज हैं | राजस्थान का क्षेत्र बलुआ पत्थर, ग्रेनाइट, संगमरमर तथा जिप्सम जैसे भवन निर्माण वाले पत्थरों से समृद्ध है | इनके अलावा यहाँ मुल्तानी मिट्टी के विस्तृत निक्षेप पाए जाते है | डोलामाइट तथा चूना पत्थर सीमेंट के लिए कच्चा माल उपलब्ध करवाते हैं | गुजरात अपने पट्रोलियम निक्षेपों के लिए प्रसिद्ध है | इनके अलावा राजस्थान तथा गुजरात दोनों ही राज्यों में नमक के समृद्ध स्त्रोत है |   

               घ).            अन्य क्षेत्र

इन तीन पट्टियों के अलावा एक अन्य खनिज पट्टी भी है | यह पेटी हिमालय पट्टी कहलाती है | यहाँ ताँबा, सीसा, जस्ता, कोबाल्ट तथा रंगरत्न पाया जाता है | ये खनिज हिमालय के पूर्वी और पश्चिमी दोनों भागों में पाए जाते है | असम घाटी में खनिज तेलों (पट्रोलियम) के निक्षेप है |

इनके अतिरिक्त मुंबई के अपतटीय क्षेत्रों में भी खनिज तेलों के निक्षेप पाए जाते हैं |

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