Wednesday, January 26, 2022

IRON ORE (Production and distribution in India )

 

लौह अयस्क

लौह अयस्क प्रमुख लौह युक्त धात्विक खनिज है | यह उद्योगों के विकास के लिए एक सुदृढ़ आधार प्रदान करता है | लौहे कों आज की सभ्यता की रीढ़ भी कहा जाता है | किसी भी प्रदेश के आर्थिक विकास और जीवन स्तर का अनुमान इस बात से भी लगाया जाता है कि वहाँ कितनी मात्रा में लौहे का प्रयोग किया जाता है |  

भारत में लौह अयस्क के भंडार

भारत में लौह अयस्क के प्रचुर संसाधन है | यहाँ एशिया के विशालतम लौह अयस्क के भंडार आरक्षित है | हमारे देश में लौह अयस्क के दो प्रमुख प्रकार हेमेटाइट तथा मैग्नेटाइट पाए जाते है |  ये अयस्क सर्वोतम गुणवत्ता के है इसलिए विश्व के विभिन्न देशों में भारी माँग है  |

      लौह अयस्क की खदानें देश के उत्तर-पूर्वी पठारी प्रदेश में कोयला क्षेत्रों के निकट स्थित है जो इसके लिए लाभदायक है |

हमारे देश में 2004-05 में लौह अयस्क के आरक्षित भंडार लगभग 200 करोड़ टन थे  | लौह अयस्क के कुल आरक्षित भंडारों का लगभग 95 प्रतिशत भाग ओडिशा, झारखंड, छतीसगढ़, कर्नाटक, गोवा, आंध्र प्रदेश तथा तमिलनाडु राज्यों में स्थित हैं |

भारत में लौह का उत्पादन तथा वितरण

भारत में सन् 1950-51 में 42 लाख टन लौह-अयस्क का उत्पादन हुआ था जो बढ़कर सन् 2010-11 में  2080 लाख टन हो गया | अत : लौहे के उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है | भारत के विभिन्न राज्यों में लौह अयस्क के  वितरण कों निम्न प्रकार से समझा जा सकता है |

कर्नाटक

कर्नाटक भारत के कुल लौह अयस्क उत्पादन का लगभग 25 प्रतिशत (एक चौथाई ) लौह अयस्क पैदा करके प्रथम स्थान पर है | यहाँ लौह अयस्क के निक्षेप वल्लारी जिले के बेलारी, संदूरतथा हासपेट क्षेत्र में लौह अयस्क की खानें है | चिकमंगलूर जिले बाबा बूदन पहाडियों, कालाहांडी तथा केमानगुडी प्रमुख खानें है | इनके अलावा कुद्रेमुख तथा शिवमोगा, चित्रदुर्ग और तुमकुरु जिलों के कुछ हिस्सों में पाए जाते हैं |     

छतीसगढ़

यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा लौह अयस्क उत्पादक राज्य है | यह राज्य भारत के कुल लौह अयस्क उत्पादन का लगभग 20 प्रतिशत  लौह अयस्क पैदा करता है | इस राज्य में लौह अयस्क की पट्टी दुर्ग, दांतेवाड़ा और बैलाडीला तक विस्तृत है | दांतेवाड़ा जिले का बैलाडीला तथा दुर्ग जिले के डल्ली और राजहरा में देश की महत्वपूर्ण लौह अयस्क की खदानें हैं | इनके अलावा रायगढ़, बिलासपुर तथा सरगुजा अन्य उत्पादक जिले है | यहाँ का अधिकाँश लौहा अयस्क विशाखापट्टनम पत्तन के द्वारा जापान कों निर्यात कर दिया जाता है |

ओडिशा

यहाँ भारत का 19 प्रतिशत से अधिक लौह अयस्क पैदा किया जाता है | इस राज्य में लौह अयस्क सुंदरगढ़, मयूरभंज, झार स्थित पहाड़ी श्रंखलाओं में पाया जाता है | यहाँ की महत्वपूर्ण खदानें गुरुमहिसानी, सुलाएपत, बदामपहाड़ (मयूरभंज), किरुबुरु (केन्दुझर) तथा बोनाई (सुंदरगढ़) है |  

गोवा

पिछले कुछ दशकों से गोवा तेजी से महत्वपूर्ण उत्पादक के रूप में उभरा है | यह राज्य भारत के कुल लौह अयस्क उत्पादन का लगभग 16 प्रतिशत  लौह अयस्क पैदा करके चौथे स्थान पर है |यहाँ का लौहा अयस्क घटिया किस्म का है जिसमें 40 से 60 प्रतिशत तक ही शुद्ध लौहा प्राप्त होता है | यहाँ के लौह अयस्क कों मारमागाओ (मारमागोवा) पत्तन से निर्यात कर दिया जाता है |  

झारखंड

इस राज्य में भारत का 15 प्रतिशत लौह अयस्क का उत्पादन करता है | झारखंड में भी ओडिशा की तरह पहाड़ी श्रंखलाओं में कुछ सबसे पुरानी लौह अयस्क की खदानें है | इस राज्य में लौह अयस्क की अधिकतर खादानें लौह एवं इस्पात संयंत्र के आस पास ही है | नोआमंडी और गुआ जैसी महत्वपूर्ण खदानें इस राज्य के पूर्वी और पश्चिमी जिलों में स्थित है | सिंहभूम, पलामू धनबाद, हजारीबाग, संथाल परगना तथा राँची मुख्य उत्पादक जिले है |

महाराष्ट्र

इस राज्य की प्रमुख खदानें चंद्रपुर, भंडारा और रत्नागिरी जिलों में पाइ जाती है |

तेलंगाना

इस राज्य की मुख्य खदानें करीमनगर , वारांगल जिले में स्थित है |

आन्ध्रप्रदेश

यहाँ के कुरुनूल, कुडप्पा तथा अनंतपुर जिलों में लौह अयस्क के भंडार है |

तमिलनाडु

इस राज्य के सेलम तथा नीलगिरी जिले लौह अयस्क के मुख्य क्षेत्र है |

 हरियाणा

इस राज्य के महेंद्रगढ़ जिले के नारनौल क्षेत्र में लौह अयस्क के भंडार हैं |

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