Wednesday, June 8, 2022

Transport, meaning importance, medium, transport web, and road transport (Lesson 8 : Transport and Communication)

 

कक्षा- 12

विषय - भूगोल

अध्याय – परिवहन और संचार

मानव भूगोल के मूल सिद्धांत

परिवहन

वस्तुओं और सेवाओं कों एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने की प्रक्रिया कों परिवहन कहते हैं | किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के तीव्र विकास के लिए सक्षम परिवहन के साधनों की आवश्यकता होती है | परिवहन के लिए मनुष्यों, पशुओं तथा विभिन्न प्रकार के वाहनों का प्रयोग किया जाता है |

परिवहन का महत्व

परिवहन मनुष्य की गतिशीलता और  समाज की आधारभूत आवश्यकताओं कों पूरा करने के लिए निर्मित एक संगठित उद्योग है | इसके अंतर्गत परिवहन मार्गों, लोगों और वस्तुओं के वहन के लिए गाड़ियों के रख रखाव, मार्गों के रख रखाव, वस्तुओं के लदान, उतराव तथा वितरण का निपटान करने के लिए संस्थाओं का उपयोग किया जाता है |

परिवहन किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी है | देश का आर्थिक विकास काफी हद तक परिवहन पर ही आश्रित होता है |इसे देश के औद्योगिक  विकास की रीढ़ परिवहन कहा जाता है | क्योंकि उद्योगों के लिए कच्चा माल और उनका विनिर्मित माल उपभोक्ता तक पहुँचाने का कार्य परिवहन तंत्र पर ही निर्भर होता है | अत: स्पष्ट है कि एक सक्षम परिवहन तंत्र किसी भी देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है |

प्रत्येक देश ने प्रतिरक्षा के उद्देश्य के लिए विभिन्न प्रकार के परिवहन का विकास किया है | दक्ष संचार व्यवस्था से युक्त आश्वासित और तीव्र गामी परिवहन प्रकीर्ण लोगों के बीच सहयोग एवं एकता कों प्रोन्नत (प्रोत्साहित) करता है |  

परिवहन जाल या जाल तंत्र

विभिन्न स्थानों के बीच जब विभिन्न प्रकार की परिवहन व्यवस्थाएँ विकसित होती है तो वे स्थान इनसे से जुड़कर परिवहन व्यवस्थाओं का  जाल बना देते है | जिसे परिवहन जाल या जाल तंत्र कहते है | जाल-तंत्र का निर्माण नोड और योजक  के द्वारा होता है |  जब अनेक योजक तथा नोड मिलते है तो एक जाल तन्त्र बनता है | एक विकसित जाल तंत्र में जितने अधिक योजक होंगे वह जाल तंत्र उतना ही विकसित है और जाल तन्त्र के स्थान अधिक सुसंबंद्ध (अच्छी तरह से जुड़ें हुए) होंगे |

परिवहन के माध्यम

वस्तुओं और सेवाओं कों एक स्थान से दूसरे स्थान तक वहन करने के लिए परिवहन के विभिन्न माध्यमों का प्रयोग किया जाता है | जैसे स्थल, जल वायु तथा पाइप लाइन आदि | परिणाम स्वरूप परिवहन के तीन मुख्य माध्यम है | जिन्हें क्रमश: स्थल, जल तथा वायु परिवहन कहा जाता है |

सड़कें तथा रेलमार्ग स्थल परिवहन के साधन है | नौपरिवहन जल परिवहन तथा वायुमार्ग वायु परिवहन के दो अन्य प्रकार है | इन मुख्य माध्यमों के अतिरिक्त पाइपलाइनें भी परिवहन का मध्यम है | इनके द्वारा पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, तरल अवस्था में अयस्क तथा जल आदि का परिवहन किया जाता है |

परिवहन का चयन  (परिवहन की विधा की सार्थकता)

या

सुप्रबंधित परिवहन प्रणाली में विभिन्न विधाएं एक –दूसरे के संपूरक होती है

   वस्तुओं और सेवाओं कों एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने की प्रक्रिया कों परिवहन कहते हैं | वस्तुओं और सेवाओं कों एक स्थान से दूसरे स्थान तक वहन करने के लिए परिवहन के विभिन्न विधाओं का प्रयोग किया जाता है | जैसे स्थल, जल वायु तथा पाइप लाइन आदि | इनमें से किसी भी विधा (परिवहन के माध्यम) की सार्थकता ढोई (परिवहित की जाने वाली) वस्तुओं और सेवाओं के प्रकार, परिवहन की लागतों और परिवहन के लिए उपलब्ध विधा (साधनों) पर निर्भर करता है |  उदाहरण के लिए, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थूल तथा भारी-भरकम वस्तुओं का परिवहन जलमार्गों समुद्री मालवाहकों द्वारा किया जाता है | लेकिन ये देश के आंतरिक भागों में सीमित रह जाते है | कम दूरी के लिए सड़क परिवहन अपेक्षाकृत सस्ता पड़ता है | यह तेजी से वस्तुओं कों पहुँचाता है | एक स्थान से उठाकर सीधे उपभोक्ता तक सामान पहुँचाने का यह सबसे अच्छा साधन है | क्योंकि यह घर के दरवाजे तक सामान कों पहुँचाने में सक्षम है |  परन्तु लंबी दूरी में स्थूल तथा भारी सामान पहुंचाना हो तो रेलमार्ग सबसे अच्छा परिवहन का साधन है | किसी भी देश में लंबी दूरियों की यात्रा के लिए भी रेलमार्ग ही सबसे अच्छा है | इसके विपरीत उच्च मूल्य वाली, हल्की तथा शीघ्र खराब होने वाली वस्तुओं  के लिए वायु परिवहन सबसे उत्तम साधन है | अत: स्पष्ट है कि एक सुप्रबंधित परिवहन प्रणाली में परिवहन के विभिन्न साधन  एक दूसरे के पूरक और सहयोगी होते है | इससे यह भी स्पष्ट होता है कि  साधनों का चयन व उनकी सार्थकता परिवहन की उपलब्धता, लागत और वस्तुओं तथा सेवाओं के प्रकार पर निर्भर करतें है | 

स्थल परिवहन का ऐतिहासिक विकास

अधिकाँश वस्तुओं एवं सेवाओं का संचलन स्थल मार्गों के माध्यम से होता है | प्राचीन काल से लेकर वर्तमान तक स्थल परिवहन में अनेक बदलाव देखने कों मिलते है | इन बदलावों कों हम स्थल परिवहन के समय के साथ –साथ आए बदलावों कों जानकार समझ सकते हैं |

            आरम्भिक दिनों में मानव स्वयं वाहक का कार्य करता था | जैसे किसी दुल्हन कों डोली या पालकी में बैठाकर चार व्यक्ति लेकर जाते थे | कुछ समय बाद पशुओं का उपयोग बोझा ढोने के लिए किया जाने लगा | घोडों  गधों, खच्चरों, ऊँटों तथा बैलों आदि पशुओं का प्रयोग किया जाता था |  पहिये के अविष्कार के बाद पशुओं द्वारा खींची जाने वाली गाड़ियों और माल डिब्बों का प्रयोग लगातार बढ़ता जा रहा है | आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में तथा छोटे कस्बों में इनका प्रयोग सामान ढोने के लिए किया जाता है |

अठारहवीं शताब्दी में भाप के इंजन के अविष्कार के बाद  परिवहन में क्रान्ति आई | रेलों का विकास हुआ | संभवत : पहला सार्वजनिक  रेलमार्ग सन् 1825 में उत्तरी इंग्लैंड के स्टॉकटन और डर्लिंगटन स्थानों के बीच प्रारम्भ किया गया | 19 वीं सदी तक आते आते रेलमार्ग परिवहन के अत्यधिक लोकप्रिय और तीव्रतम साधन हो गए |      

अन्तर्दहन इंजन के आविष्कार के बाद सड़कों परिवहन का तेजी से विकास हुआ | सड़कों की गुणवत्ता और उन पर चलने वाले वाहनों (कार, ट्रक, बस आदि ) के संदर्भ में सड़क परिवहन में क्रान्ति आ गई | वर्तमान में ये सबसे महत्वपूर्ण स्थल परिवहन के साधन है |

स्थल परिवहन में नवीनतम विकास के रूप में पाइपलाइनों, रजजुमार्गों या तारमार्गों  कों शामिल किया जाता है | पाइपलाइनों के द्वारा तरल पदार्थों जैसे खनिज तेल, नाली का मल तथा जल का परिवहन किया जाता है | जिन क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण उपयुक्त नहीं होता उन क्षेत्रों में में तारमार्ग (रज्जुमार्ग) का प्रयोग  परिवहन के साधनों के रूप में किया जाता है | पर्वतीय क्षेत्रों या तीव्र ढाल वाले क्षेत्रों में तथा खदानों में ये परिवहन के प्रमुख साधन है |

सड़क परिवहन

स्थलीय यातायात के साधनों में से सड़क मार्ग सबसे अधिक प्रयोग किया जाने वाला साधन है | पगडंडी से लेकर आधुनिक मोटर मार्ग तक सभी को सड़क मार्ग कहते है | ये छोटी दूरी के लिए तीव्र गति के परिवहन की सुविधा प्रदान करते है | खेत तथा खलिहानों से लेकर करखानों तक व करखानों  से निर्मित माल बाजारों तथा उपभोक्ता के द्वार तक सड़कों द्वारा ही पहुँचाया जाता है |

सड़कों के प्रकार

निर्माण की दृष्टि से समान्यतः सड़कें दो प्रकार की होती है | कच्ची सड़के तथा पक्की सड़कें |

a)      कच्ची सड़कें

कच्ची सड़के निर्माण की दृष्टि से आसान तथा सस्ता पड़ता है | लेकिन ये सभी ऋतुओं में प्रभावी और प्रयोग नहीं रहती | वर्षा ऋतु में इन पर वाहन चलाना कठिन होता है |

b)      पक्की सड़कें

पक्की सड़कों कों बनाना अधिक कठिन तथा महंगा पड़ता है | ये सभी ऋतुओं में प्रयोग की जाने वाली होती हैं | लेकिन भारी वर्षा और बाढ़ के दौरान ये भी टूट जाती है और अधिक उपयोगी नहीं रहती | |

 सड़क मार्गों के लाभ –

सड़कों से हमें निम्नलिखित लाभ होते है |

1         सड़कों द्वारा कृषि उत्पादों की बिक्री के स्थायी बाज़ार उपलब्ध होने लगे और वस्तुओं की कीमतें बड़े-बड़े क्षेत्रों में एक समान होने लगीं |

2         सड़कों के विकास से औद्योगिक विकास को बड़ी सहायता मिलती है | क्योंकि सड़कों द्वारा उद्योग के लिए कच्चे माल तथा निर्मित माल का परिवहन सुगम हो जाता है |

3         सामान तथा यात्रियों कों एक स्थान से दूसरे स्थान तक सडकों द्वारा आसानी से पहुँचाया जा सकता है |

4         कम दूरी के लिए सड़क परिवहन अत्यंत सुविधाजनक है |

5         कम दूरी के लिए सड़क परिवहन  रेल परिवहन की अपेक्षा आर्थिक दृष्टि से लाभदायक होता है |

6         सड़क परिवहन घर-घर सेवाएँ उपलब्ध करवाता है | जिससे सामान को उतारने  और चढाने की लागत भी अन्य परिवहन के साधनों की अपेक्षा कम होती है |

7         सड़क दुर्गम पहाड़ी तथा बीहड़ क्षेत्रों में भी बनाई जा सकती है |  ऐसे क्षेत्रों में रेलों और जलमार्गों का पहुँचना संभव लगभग असम्भव होता है |

8         शीघ्र खराब होने वाली वस्तुओं जैसे फल, सब्जियाँ, दूध तथा दूध से बने अन्य पदार्थ, माँस आदि कों इनकी माँग वाले क्षेत्रों में शीघ्र पहुँचाने के लिए यह सर्वोतम साधन है |

9         सड़कें गावों कों कस्बों तथा नगरों तथा बाजारों कों आपस में जोड़ने का कार्य करती है  |

10     सड़कें किसी भी देश के व्यापार और वाणिज्य कों विकसित करने तथा पर्यटन कों बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है |

11     सड़क परिवहन, अन्य परिवहन के साधनों के उपयोग में कड़ी का काम करता है | जैसे सड़कें, रेलवे स्टेशनों, वायु पत्तनों  तथा  समुद्री पत्तनों कों जोड़ती है |  

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