Wednesday, July 6, 2022

Railways (Developemnt, importance, railway gauges, distribution of railway in world and Trans–Continental Railways)

 

रेल परिवहन

रेलमार्ग स्थल परिवहन की वह  विधा जो लंबी दूरी तक अधिक संख्या में यात्रियों और अधिक मात्रा में स्थूल वस्तुओं कों एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुँचाती है |  

रेलमार्गों का विकास

अठारहवीं शताब्दी में भाप के इंजन के अविष्कार के बाद  परिवहन में क्रान्ति आई | रेलों का विकास हुआ | संभवत : पहला सार्वजनिक  रेलमार्ग सन् 1825 में उत्तरी इंग्लैंड के स्टॉकटन और डर्लिंगटन स्थानों के बीच प्रारम्भ किया गया | 19 वीं सदी तक आते आते रेलमार्ग परिवहन के अत्यधिक लोकप्रिय और तीव्रतम साधन हो गए |     

रेल परिवहन का महत्व या लाभ 

यह स्थल परिवहन में लम्बी दूरियों और स्थूल सामान ढोने का सस्ता साधन है |

रेलें कृषि उत्पादों कों उपभोक्ताओं तक  और कच्चे माल कों कारखानों तक पहुँचाने में सुविधाजनक है |

रेल परिवहन देश  के विकास में महत्वपूर्ण  योगदान देता है | यह उद्योगों तथा बाजार के बीच सामंजस्य स्थापित करता है |

रेल लाइनों की चौड़ाई (रेल गेज)

प्रत्येक देश में रेल लाइनों की चौड़ाई अलग –अलग होती है | गेज या चौड़ाई के अनुसार समान्यतया रेल लाइनों कों निम्नलिखित वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है |

1.       बड़ी लाइन :- यह 1.5 मीटर से अधिक चौड़ी होती है |

2.       मानक लाइन :- यह 1.44 मीटर चौड़ी होती है | मानक रेल गेज का प्रयोग ब्रिटेन में किया जाता है |

3.       मीटर लाइन :- यह एक मीटर चौड़ी होती है |

4.       छोटी लाइन :- ये एक मीटर से कम चौड़ी होती है |

दैनिक आवागमन की रेलें

ये रेलें सामान्यत: छोटी दूरी पर चलने वाली गाडियाँ होती है | जो लाखों की संख्या में  यात्रियों कों प्रात: आस-पास के इलाकों से नगरों की ओर लेकर और शाम के समय वापस लेकर जाती है |दैनिक आवागमन की रेलें, ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान और भारत में अत्यधिक लोकप्रिय है |

संसार में रेलों का वितरण प्रतिरूप

विश्व में लगभग 13 लाख किलोमीटर लम्बे रेल यातायात मार्ग है | जो विभिन्न क्षेत्रों में वस्तुओं और यात्रियों का परिवहन कर रहे है | विश्व के  विभिन्न क्षेत्रों में रेलों का वितरण वहाँ के धरातल, औद्योगिक विकास, बाजार, जनसंख्या आदि पर निर्भर करता है | अत : विश्व के विभिन्न भागों में रेलों का वितरण असमान है | विश्व के महाद्वीपों  में रेलों के वितरण कों निम्न प्रकार से समझा जा सकता है |

यूरोप में रेलों का वितरण

यूरोप में विश्व का सघनतम रेल तंत्र पाया जाता है | यहाँ रेल मार्ग लगभग 4 लाख  40 हजार लम्बे रेलमार्ग है | इनमें से अधिकतर रेलमार्ग दोहरे या बहुमार्गी हैं |  बेल्जियम में रेलमार्गों का घनत्व सर्वाधिक है | जो 6.5 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर  लगभग एक किलोमीटर पाया जाता है |

इस महाद्वीप के अधिकाँश देशों में रेल मार्गों का प्रयोग यात्री परिवहन की अपेक्षा लंबी दूरी के स्थूल पदार्थों  जैसे अभ्रक, अनाज, इमारती लकड़ी तथा मशीनरी आदि के परिवहन के कार्य में अधिक होता है |

यूरोप के औद्योगिक प्रदेश विश्व के सघन रेलमार्गों वाले क्षेत्रों में हैं | लन्दन,पेरिस, ब्रुसेल्स, मिलान, बर्लिन और वारसा महत्वपूर्ण रेल केन्द्र हैं |  इंग्लैंड में स्थित यूरो टनल ग्रुप द्वारा प्रचलित सुरंग मार्ग (भूमिगत रेलमार्ग) लन्दन कों पेरिस से जोड़ता है | इस महाद्वीप में पार (ट्राँस) महाद्वीपीय रेलमार्ग, वायुमार्गो और सड़क मार्गों के अपेक्षाकृत लोचदार तंत्रों की तुलना में अपना महत्व खोते जा रहे हैं |

 यूराल पर्वत के पश्चिम में रूस में रेलमार्गों का अत्यंत सघन जाल है | रूस के इस भाग में देश के कुल परिवहन का 90 प्रतिशत भाग रेलमार्गों द्वारा ही किया जाता है | मास्को रूस में रेलवे का एक महत्वपूर्ण मुख्यालय है | मास्को से देश के विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र के विभिन्न भागों में रेलमार्गों का विस्तार है | मास्को में भूमिगत रेलमार्ग और दैनिक आवागमन की गाडियाँ भी अधिक महत्वपूर्ण है |

उत्तरी अमेरिका में रेलों का वितरण

उत्तरी अमेरिका महाद्वीप में सर्वाधिक विस्तृत रेलमार्गों का तंत्र है | जो विश्व के कुल रेलमार्गों का लगभग 40 प्रतिशत है | सर्वाधिक सघन रेल तंत्र पूर्वी मध्य संयुक्त राज्य अमेरिका में है क्योंकि इस क्षेत्र में  उच्च स्तर के औद्योगिक प्रदेश तथा नगरीय प्रदेशों का विकास हुआ है | इस देश में रेलमार्गों का सबसे अधिक उपयोग स्थूल पदार्थों  जैसे खनिज, अनाज, इमारती लकड़ी तथा मशीनरी आदि वस्तुओं के लंबी दूरी के परिवहन के कार्य में होता है |

संयुक्त राज्य अमेरिका से साथ लगते कनाड़ा के उच्च औद्योगिक एवं नगरीय प्रदेश में पाया जाता है | कनाड़ा के रेलमार्ग सार्वजनिक सेक्टर (सार्वजनिक स्वामित्व ) में है | यहाँ पर रेलमार्ग पुरे विरल जनसंख्या वाले क्षेत्रों में वितरित है | यहाँ के महाद्वीप पारीय रेलमार्गों के द्वारा गेहूँ और कोयले के अधिकतर भाग परिवहन किया जाता है |

दक्षिणी अमेरिका में रेलों का वितरण

इस महाद्वीप के दो प्रदेशों में रेलमार्गों का सघन जाल बिछा हुआ है | ये अर्जेंटाइना के पम्पास तथा ब्राजील के कॉफी (कहवा ) उत्पादक प्रदेश हैं | इन दोनों प्रदेशों में दक्षिणी अमेरि़का महाद्वीप के कुल रेलमार्गों का 40 प्रतिशत भाग पाया जाता है |

अर्जेंटाइना तथा ब्राजील के अतिरिक्त  दक्षिणी अमेरिका के शेष देशों में केवल चिली ही एकमात्र ऐसा देश है जहाँ महत्वपूर्ण लम्बाई के रेलमार्ग है | यहाँ  के रेलमार्ग तटीय केन्द्रों कों आंतरिक क्षेत्रों में स्थित खनन स्थलों से जोड़ते हैं |

            पेरू, बोलीविया, इक्वाडोर, कोलंबिया और वेनेजुएला में छोटे एकल मार्ग वाली रेललाइनें पाई जाती है | जो पत्तनों कों आंतरिक क्षेत्रों के साथ जोड़ते हैं | ये रेलमार्ग आपस में जुड़े हुए नहीं हैं |   

दक्षिणी अमेरिका महाद्वीप में एक पार महाद्वीपीय रेलमार्ग है जो एंडीज पर्वतों के पार 3900 मीटर की ऊँचाई पर अवस्थित उसप्लाटा दर्रे से होता हुआ ब्यूनसआयर्स  (अर्जेंटाइना) कों वालपैराइजो से मिलाता है |

ओशिनिया में रेलों का वितरण

ऑस्ट्रेलिया में लगभग 40,000 किलोमीटर लम्बे रेलमार्ग है | इनमें से एक चौथाई  (25 प्रतिशत ) न्यू साउथ वेल्स में पाए जाते है | अधिकाँश रेलमार्ग ऑस्ट्रेलिया के तटीय भागों में ही विकसित हुए है | यहाँ एक अंतरमहाद्वीपीय जो पश्चिमी-पूर्वी ऑस्ट्रेलिया राष्ट्रीय रेलमार्ग के नाम से जाना जाता है | यह पश्चिम में पर्थ कों पूर्व में सिडनी से जोड़ता है |

            न्यूजीलैंड में रेलमार्ग मुख्यत: उत्तरी द्वीप में पाए जाते है | जो कृषि क्षेत्रों कों प्रमुख नगरों से जोड़ते है | दक्षिणी द्वीप में उबड़ खाबड़ भूमि होने के कारण रेलमार्गों का विकास कम हुआ है |

एशिया में रेलों का वितरण 

इस महाद्वीप में जापान, चीन और भारत सघन जनसंख्या वाले क्षेत्र है | इन क्षेत्रों में रेलमार्गों का घनत्व अत्यधिक सघन है |

भारत में लगभग 69,00  रेलवे स्टेशन है | यह  एशिया में सबसे विकसित रेलमार्गों वाला देश है | यहाँ लगभग 82,000 किलोमीटर लम्बे रेलमार्ग है |

चीन में लगभग 35000 किलोमीटर लम्बे रेलमार्ग है जो देश के विस्तार कों देखते हुए कम हैं |

जापान में लगभग 28000 किलोमीटर लम्बे रेलमार्ग है |

एशिया के अन्य देशों में अपेक्षाकृत कम रेलमार्ग विकसित हुए हैं | विकसित मरुस्थल और विरल जनसंख्या के प्रदेशों के कारण इस महाद्वीप के बहुत से देशों में रेल सुविधाओं का विकास न्यूनतम रहा है |

अफ्रीका में रेलों का वितरण 

विश्व का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप होते हुए भी अफ्रीका में केवल 40,000 किलोमीटर लम्बे रेलमार्ग ही है |

अफ्रीका महाद्वीप के कुल रेलमार्गों में से दक्षिणी अफ्रीका देश में ही लगभग 18,000 किलोमीटर लम्बे रेलमार्ग है | जो सोने, हीरे के सांद्रण तथा तांबे-खनन क्रियाकलापों के कारण यहाँ विकसित हुए है | 

अफ्रीका महाद्वीप के मुख्य रेलमार्ग इस प्रकार है |

1)      बेनगुएला रेलमार्ग जो अंगोला से कटंगा –जाम्बिया की ताँबा पट्टी से होकर जाता है |

2)      दूसरा रेलमार्ग तंजानिया रेलमार्ग है जो जाम्बिया की ताँबा पट्टी से होकर समुद्र तट पर स्थित दार- ए- सलाम कों जाता है |

3)      बोत्सवाना (बोसवाना) और जिम्बावे से होते हुए रेलमार्ग जो स्थलरूद्ध राज्यों कों दक्षिण अफ्रीका के रेलतंत्र से जोड़ता है |

4)      दक्षिणी अफ्रीका गणतंत्र में केपटाउन से प्रेटोरिया तक ब्लू ट्रेन रेलमार्ग  |

इस महाद्वीप के अन्य देशों; जैसे अल्जीरिया, सेनेगल, नाइजीरिया, कीनिया और इथोपिया में रेलमार्ग समुद्र तट के पत्तनों कों आंतरिक केन्द्रों से जोड़ते है | लेकिन ना तो यहाँ रेलमार्गों का अच्छा जाल बिछा है और ना ही अन्य देशों कों जोड़ने के अच्छे रेलतंत्र की रचना इस महाद्वीप में की गई है |

अंतरमहाद्वीपीय या पारमहाद्वीपीय रेलमार्ग

वे रेलमार्ग जो किसी महाद्वीप के एक छोर कों दूसरे छोर से जोड़ते हैं उन्हें पार महाद्वीपीयरेलमार्ग कहा जाता है | इन रेलमार्गों का निर्माण आर्थिक और राजनैतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किया जाता है | इनका निर्माण विभिन्न दिशाओं में लंबी यात्राओं की सुविधाएँ प्रदान करने के लिए लिए भी किया गया था | जैसे ट्राँस साइबेरियन  रेलमार्ग यूरोपीय रूस कों साइबेरिया से जोड़ने के लिए बनाया गया ताकि साइबेरिया का आर्थिक विकास किया जा सके | इसी प्रकार कैनेडियन –पैसेफिक रेलमार्ग इसलिए बनाया गया कि ब्रिटिश कोलंबिया की यह शर्त थी कि वह राष्ट्रमण्डल का सदस्य देश तभी बनेगा जब उसे पूर्वी भागों के साथ जोड़ दिया जाए |

विश्व के विभिन्न महाद्वीपों में पार महाद्वीपीय रेलमार्गों का निर्माण किया गया है | जैसे ट्राँस साइबेरियन (पार साइबेरियन) रेलमार्ग,  कैनेडियन –पैसेफिक रेलमार्ग (कनाड़ा –प्रशांत)  रेलमार्ग, ऑस्ट्रेलियाई पार महाद्वीपीय रेलमार्ग, संघ और प्रशांत रेलमार्ग तथा ओरिएंट एक्सप्रेस प्रमुख पार महाद्वीपीय रेलमार्ग हैं इनका संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित है |  

1         पार-साइबेरियन रेलमार्ग

      यह एशिया का सबसे महत्वपूर्ण और विश्व का सबसे लम्बा रेलमार्ग है | जो यूरोपीय रूस के पश्चिमी भाग में स्थित सेंट –पीट्सबर्ग (लेनिनग्राड) से एशियाई रूस के पूर्व में स्थित ब्लाडीवॉस्टक  कों जोड़ता है | यह 9332  किलोमीटर लम्बा है | इसका निर्माण कार्य सन् 1891 में शुरू हुआ |  14 वर्षों  बाद सन् 1905 में यह बनकर तैयार हुआ | यह दोहरे पथ से युक्त विद्युतीकृत पार महाद्वीपीय रेलमार्ग है |

      यह रेलमार्ग रूस के पश्चिम में सेंट पिट्सबर्ग से  शुरू होकर मास्को रूस की राजधानी मास्को होता हुआ कजान,,ओमस्क ट्यूमिन, नोवोसिबिर्स्क, चिता, इरकुस्टस्क और खबरोवस्क से गुजरता हुआ ब्लाडीवॉस्टक तक जाता है |  इस रेलमार्ग ने रूस के एशियाई प्रदेश कों पश्चिमी यूरोपीय बाजारों से जोड़ा है | यह रेलमार्ग यूराल पर्वतों, ओब और येनीसी नदियों से गुजरता है |  यह चिता जो रूस का प्रमुख कृषि केन्द्र है और , इरकुस्टस्क  जो फर केन्द्र है कों जोड़ता है  अर्थात कृषि और औद्योगिक प्रदेशों कों जोड़ने का कार्य करता है | इस रेलमार्ग के महत्व को देखते हुए इसकी कई शाखाओं का निर्माण किया गया है | जैसे दक्षिण में यूक्रेन में स्थित ओडेसा, कैस्पियन सागर तट पर बालू, उज्बेकिस्तान में ताशकंद, मंगोलिया में उलनबटोर, मंचुरिया में रोनयांग (मक्देन) तथा चीन में बीजिंग तक इसकी शाखाएँ  बनाई गई हैं |

पार-साइबेरियन रेलमार्ग का महत्व :-

(क).इस रेलमार्ग का निर्माण प्रशासनिक तथा सैनिक आवश्यकताओं कों पूरा करने के लिए किया गया था | बाद में इसका व्यापारिक और आर्थिक महत्व बढ़ गया |

(ख).            इस रेलमार्ग से संपूर्ण यूरोप का और विशेष रूप से साइबेरिया का आर्थिक विकास हुआ | क्योंकि इस रेलमार्ग के कारण साइबेरिया अपने वन, कृषि तथा पशु संसाधनों के कारण रूस का खजाना (स्टोरहाऊस) कहलाने लगा  है |

(ग). इस रेलमार्ग द्वारा साइबेरिया से कोयला, धातुएँ, लकड़ी, लुगदी, चमड़ा आदि  वस्तुएँ यूरोपीय रूस कों भेजी जाति है और वहाँ से उद्योगों में निर्मित वस्तुएँ मंगवाई जाती है |

(घ). इस रेलमार्ग के विकास से साइबेरिया में उद्योगों का भी विकास हुआ है | 

(ङ). रेलमार्ग के साथ –साथ कई बड़े नगरों का विकास हुआ है |

 

चित्र :-  पार-साइबेरियन रेलमार्ग   
Source:- Class 12th Geography Book, Published by NCERT   

2         कैनेडियन –पैसेफिक रेलमार्ग (कनाड़ा –प्रशांत)  रेलमार्ग

कैनेडियन –पैसेफिक रेलमार्ग की लम्बाई 7050 है |  यह रेलमार्ग पूर्व में अटलांटिक महासागर के तट पर स्थित हैलिफैक्स से शुरू होकर क्यूबेक, मांट्रियल, ओटावा  कडबरी, विनिपेग और कलगैरी होता हुआ  पश्चिम में प्रशांत महासागर के तट पट स्थित बैंकूवर तक जाता है |

इस रेलमार्ग का निर्माण सन् 1866 में एक संधि के अंतर्गत ब्रिटिश कोलंबिया कों राज्यों के संघ में शामिल करने के लिए किया गया | क्योंकि ब्रिटिश कोलंबिया  की यह शर्त थी कि वह राष्ट्रमण्डल का सदस्य देश तभी बनेगा जब उसे पूर्वी भागों के साथ जोड़ दिया जाए | बाद में क्यूबेक –माँट्रियल औद्यिगिक प्रदेश कों प्रेयरी प्रदेश की गेहूँ मेखला से तथा उत्तर में शंकुधारी वन प्रदेश से जोड़ने के कारण इस पार महाद्वीपीय रेलमार्ग का महत्व बढ़ गया है |

कैनेडियन –पैसेफिक रेलमार्ग का महत्व

(क).      इस प्रदेशों में प्रत्येक क्षेत्र एक दूसरे के विकास में सहायता कर रहा है |

(ख).      यह रेलमार्ग विनिपेग कों सुपीरियर झील में स्थित थंडरखाड़ी तक जोड़कर यह संवृत रेलमार्ग विश्व के महत्वपूर्ण जल मार्गों से विनिपेग कों मिलाता है |

(ग).       यह मार्ग गेहूँ और माँस के निर्यात के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है |

(घ).       यह रेलमार्ग कनाडा की आर्थिक धमनी कहलाती है |

(ङ).       जब शीतकाल में जलमार्ग जम जाते है तो ये रेलमार्ग बिना किसी रूकावट के परिवहन का कार्य करते हैं |

(च).      इस रेलमार्ग से कनाडा के पूर्वी भाग में स्थित औद्योगिक क्षेत्रों का निर्मित माल पश्चिम तक पहुँचता है तो पश्चिम में प्रेयरी प्रदेश से गेंहूँ कों पूर्व के क्षेत्रों तक पहुँचाया जाता है जहाँ से इस गेहूँ कों यूरोप के देशों कों निर्यात किया जाता है |

 

      चित्र :- कैनेडियन पैसेफिक रेलमार्ग         
Source:- Class 12th Geography Book, Published by NCERT        

3         ऑस्ट्रेलियाई पार महाद्वीपीय रेलमार्ग

                        यह रेलमार्ग ऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी तट पर स्थित पर्थ से शुरू होकर कलगुर्ली, पोर्ट ऑगस्ता और  ब्रोकन हिल होता हुआ  इस महाद्वीप के पूर्वी तट पर स्थित सिडनी कों मिलाता है | यह पार महाद्वीपीय रेलमार्ग ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप के दक्षिणी भाग में आर-पार पश्चिम से पूर्व तक फैला है | इस रेलमार्ग में अनेक गेज की रेल लाइनें है जिससे समय की बर्बादी होती है | अत: रेल गेज संबंधी कठनाइयों  कों दूर करने के लिए रेल मानकीकरण कमेटी बनाकर योजनाएँ तैयार की जा रही है |


चित्र :- ऑस्ट्रेलियाई पार महाद्वीपीय रेलमार्ग 

Source:- Class 12th Geography Book, Published by NCERT

4          संघ और प्रशांत रेलमार्ग (यूनियन पैसेफिक रेल रोड )

                यह रेलमार्ग अटलांटिक (अंध महासागर ) तट पर स्थित न्यूयार्क कों प्रशांत महासागर तट पर स्थित सान फ्रांसिस्को से मिलाती है |  यह रेलमार्ग न्यूयार्क से क्लीवलैंड, शिकागो, ओमाहा, इवांस, ऑडगन और सैक्रामेंटो  होता हुआ सान फ्रांसिस्को तक जाता है |   इस मार्ग द्वारा अनेक पदार्थ निर्यात किए जाते है | उनमें से अयस्क, अनाज, कागज़, रसायन और मशीनरी  सर्वाधिक मूल्य प्रदान करने वाले पदार्थ हैं |

 

5         ओरिएंट एक्सप्रेस

यह रेल लाइन पेरिस से स्ट्रैसबॅर्ग (स्ट्रैसबॉर्ग), म्यूनिख, विएना, बुडापेस्ट और बेलग्रेड होती हुई इस्तांबुल तक जाती है | इस रेल मार्ग के द्वारा लन्दन से इस्तांबुल तक यात्रा में लगने वाले समय में बहुत अधिक कमी आई है | समुद्री मार्ग से लन्दन से इस्तांबुल तक 10 दिन लगते थे | जिसकी तुलना में इस रेलमार्ग से यह यात्रा केवल 96 घण्टे में पूरी हो जाती है | इस रेल मार्ग से निर्यात होने वाली प्रमुख वस्तुएँ पनीर, सुअर का माँस, जई, शराब, फल और मशीनरी है |

    एक एशियाई रेलवे के निर्माण का भी प्रस्ताव है | जो तुर्की के इस्तांबुल से शुरू होकर ईरान, पाकिस्तान, भारत, बांग्लादेश और म्यांमार कों होते हुए थाईलैंड के बैंकांक तक जाएगा |

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