अध्याय 5
खनिज और
ऊर्जा संसाधन
समकालीन
भारत- II (भूगोल)
कक्षा -10
प्रश्न
: निम्नलिखित में से कौन सा खनिज अपक्षयित पदार्थ के अवशिष्ट भाग के अवशिष्ट भार
को त्यागता हुआ चट्टानों के अपघटन से बनता है ?
(क).
कोयला |
(ख).
बॉक्साइट |
(ग).
सोना |
(घ).
जस्ता |
उत्तर
: बॉक्साइट
प्रश्न
:झारखण्ड में स्थित कोडरमा निम्नलिखित में से किस खनिज का अग्रणी उत्पादक है ?
(क).
बॉक्साइट |
(ख).
अभ्रक |
(ग).
लौह अयस्क |
(घ).
ताँबा |
उत्तर
: अभ्रक
प्रश्न
:निम्नलिखित चट्टानों में से किस चट्टान के स्तरों में खनिजों का निक्षेपण और
संचयन होता है ?
(ङ).
तलछटी चट्टानें |
(च).
आग्नेय चट्टानें |
(छ).
कायांतरित चट्टानें |
(ज).
इनमें से कोई नहीं |
उत्तर
: अभ्रक
प्रश्न
:मोनाजाईट रेत में निम्नलिखित में से कौन –सा
खनिज पाया जाता है ?
(झ).
खनिज तेल |
(ञ).
यूरेनियम |
(ट).
थोरियम |
(ठ).
कोयला |
उत्तर
: अभ्रक
प्रश्न: खनिजों
का हमारे जीवन में महत्व बताओ |
उत्तर :
खनिजों का हमारे जीवन में महत्व को हम निम्नलिखित प्रकार से समझ सकते हैं |
(i)
खनिजों का हमारे
जीवन में महत्व खनिज हमारे जीवन के अति अनिवार्य भाग है | लगभग हर चीज जो प्रयोग
करते हैं |
(ii)
एक छोटी सुई से
लेकर एक बड़ी इमारत तक या फिर एक बड़ा जहाज आदि सभी खानिजों से बने हैं |
(iii)
रेलवे लाइन और
सड़क के पत्थर हमारे औज़ार तथा मशीनें सभी खनिजों से बने हैं |
(iv)
कारें बसें,
रेलगाडियाँ, हवाई जहाज सभी खनिजों से निर्मित हैं
और धरती से प्राप्त ऊर्जा के साधनों द्वारा चालित हिते हैं |
(v)
यहाँ तक कि भोजन
में भी खनिज होते हैं | जिसे हम खाते हैं |
(vi)
मनुष्य ने विकास
की सभी अवस्थाओं में अपनी जीविका तथा सजावट, त्योहारों व धार्मिक अनुष्ठान के लिए
भी खनिजों का प्रयोग किया जाता है |
प्रश्न :
खनिज से आप क्या समझते हैं ?
अथवा
प्रश्न :
खनिज क्या हैं ?
उत्तर:
भू वैज्ञानिकों के अनुसार खनिज एक प्राकृतिक रूप से विद्यमान समरूप तत्व है जिसकी
एक निश्चित आंतरिक संरचना हैं | खनिज प्रकृति में अनेक रूपों में पाए जाते हैं |
जैसे हीरा कठोर है तो चूना पत्थर नरम खनिज है |
प्रश्न : भूवैज्ञानिक
किन विशेषताओं के आधार पर खनिजों का वर्गीकरण करते हैं ?
उत्तर : एक खनिज
विशेष जो निश्चित तत्वों का योग है, उन
तत्वों का निर्माण उस समय के भौतिक व रासायनिक
परिस्थितियों का परिणाम है | इसके फलस्वरूप ही खनिजों में विविध रंग,
कठोरता, चमक, घनत्व तथा विविध क्रिस्टल पाए जाते हैं | भूवैज्ञानिक इन्हीं विशेषताओं के आधार पर खनिजों का वर्गीकरण करते
हैं |
प्रश्न : धात्विक खनिज किसे कहते हैं ? धात्विक खनिजों के प्रकारों का
वर्णन कीजिए |
अथवा
प्रश्न : लौह , अलौह तथा बहुमूल्य धात्विक खनिजों में अन्तर स्पष्ट
कीजिए |
उत्तर
: वे खनिज जिनमें धातु का अंश अधिक पाया जाता है धात्विक खनिज कहलाते हैं | जैसे
लौह अयस्क, मैंगनीज, निकल, कोबाल्ट, ताँबा,
बॉक्साइट, सीसा, जस्ता, सोना, चाँदी आदि | इन खनिजों को निम्नलिखित प्रकारों में
बाँटा जा सकता है |
लौह
धात्विक खनिज : इन
खनिजों में लौह धातु का अंश अधिक पाया जाता है | जैसे : लौह अयस्क , मैंगनीज, निकल
तथा कोबाल्ट आदि |
अलौह
धात्विक खनिज :
इन खनिजों में लौह धातु का अंश नहीं पाया जाता जैसे : ताँबा, बॉक्साइट,
सीसा तथा जस्ता आदि |
बहुमूल्य
धात्विक खनिज : इन खनिजों का व्यापारिक मूल्य अधिक
होता है | जैसे : सोना, चाँदी तथा प्लेटिनम आदि |
प्रश्न : अधात्विक
खनिज किसे कहते हैं ? मुख्य अधात्विक खनिजों के नाम बताओं |
उत्तर : वे खनिज
जिनमें धातु का अंश नहीं पाया जाता अधात्विक खनिज कहलाते हैं | अभ्रक, नमक, पोटाश,
सल्फर, चूनाश्म, चूना पत्थर, संगमरमर तथा बलुआ पत्थर आदि मुख्य अधात्विक खनिज हैं
|
प्रश्न : ऊर्जा
खनिज किसे कहते हैं ? मुख्य ऊर्जा खनिजों के नाम बताओं |
उत्तर : वे खनिज
जिनका प्रयोग ऊर्जा प्राप्त करने के लिए किया जाता है ऊर्जा खनिज कहलाते हैं |
जैसे कोयला, पैट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस |
प्रश्न : अयस्क किसे कहते हैं ?
उत्तर : किसी भी खनिज में अन्य अवयवों या
तत्वों के मिश्रण या संचयन हेतु अयस्क शब्द का प्रयोग किया जाता है |
प्रश्न : आग्नेय तथा कायांतरित
चट्टानों में खनिजों का निर्माण कैसे होता है ? इन चट्टानों में कौन कौन से खनिज
पाए जाते हैं ?
उत्तर : आग्नेय तथा कायांतरित चट्टानों में
खनिज दरारों, जोड़ो, भ्रंशों व विदरों में मिलते हैं | छोटे जमाव के रूप में और
बृहत जमाव परत के रूप पाए जाते हैं | इनका निर्माण भी अधिकतर उस समय होता है जब ये
तरल अथवा गैसीय अवस्था में दरारों के सहारे भू-पृष्ठ की ओर धकेले जाते हैं | ऊपर
आते हुए ये ठंडे होकर जम जाते हैं | मुख्य
धात्विक खनिज जैसे: जस्ता, ताँबा, जिंक और सीसा आदि इसी तरह की शिराओं व जमावों के
रूप में प्राप्त होते हैं |
प्रश्न : अवसादी चट्टानों में खनिज कहाँ
पाए जाते है ? अवसादी चट्टानों में खनिजों
का निर्माण कैसे होता है ? इन चट्टानों
में कौन कौन से खनिज पाए जाते हैं ?
उत्तर : अनेक खनिज अवसादी चट्टानों के अनेक
खनिज संस्तरों में पाए जाते हैं | इनका निर्माण क्षैतिज परतों में निक्षेपण,
संचयन व जमाव का परिणाम हैं | कोयला तथा कुछ अन्य प्रकार के लौह अयस्कों का
निर्माण लंबी अवधि तक अत्यधिक ऊष्मा व दबाव का परिणाम है | अवसादी चट्टानों में
दूसरी श्रेणीं के खनिजों में जिप्सम, पोटाश, नमक व सोडियम सम्मिलित हैं | इनका
निर्माण विशेषकर शुष्क प्रदेशों में वाष्पीकरण के फलस्वरूप होता है |
प्रश्न : धरातलीय चट्टानों का अपघटन
से प्राप्त खनिज कैसे प्राप्त होते हैं ? किस खनिज का निर्माण धरातलीय चट्टानों का
अपघटन से होता है ?
उत्तर : खनिजों के निर्माण की एक अन्य विधि धरातलीय चट्टानों का
अपघटन है | चट्टानों के घुलनशील तत्वों के अपरदन के पश्चात अयस्क वाली अवशिष्ट
चट्टानें रह जाती हैं | बॉक्साइट का निर्माण इसी प्रकार होता है |
प्रश्न : प्लेसर
निक्षेप किसे कहते हैं ? प्लेसर निक्षेप के रूप में कौन से खनिज पाए जाते हैं?
उत्तर : पहाड़ियों के
आधार तथा घाटी तल की रेत में जलोढ़ जमाव के रूप में कुछ खनिज पाए जाते हैं | ये
निक्षेप ‘प्लेसर निक्षेप’ के नाम से जाने जाते हैं | इनमें प्राय: ऐसे खनिज होते
हैं जो जल द्वारा धर्षित नहीं होते | इन खनिजों में सोना, चाँदी, टिन व प्लेटिनम
प्रमुख हैं |
प्रश्न : “महासागरीय
जल में पाए जाने वाले खनिजों की आर्थिक
सार्थकता कम है |” कारण बताओ | महासागरीय जल में पाए जाने वाले खनिजों के नाम
बताओं |
उत्तर : महासागरीय जल
में भी विशाल मात्रा में खनिज पाए जाते हैं | लेकिन इनमें अधिकाशं के व्यापक रूप
से विसरित होने के कारण इनकी आर्थिक सार्थकता कम हैं |
महासागरीय जल में सामान्य नमक, मैग्नीशियम तथा ब्रोमाइन नामक खनिज
पाए जाते हैं | महासागरीय तली भी मैंगनीज ग्रंथिकाओं में धनी हैं |
प्रश्न : रैट होल खनन से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर : उत्तरी
पूर्वी भारत के अधिकाँश जनजातीय क्षेत्रों में खनिजों का स्वामित्व व्यक्तिगत व
समुदायों को प्राप्त है | मेघालय में कोयला, लौह-अयस्क, चूना पत्थर व डोलामाइट के
विशाल निक्षेप पाए जाते हैं | जोवाई व चेरापूँजी में कोयले का खनन परिवार के लोगों
द्वारा एक लंबी संकीर्ण सुरंग के रूप में किया जाता है जिसे रैट होल खनन कहते हैं | नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इन
क्रियाकलापों को अवैध घोषित किया है और सलाह दी जाती है कि इसे तुरंत रोक दिया
जाना चाहिए |
प्रश्न :
भारत में खनिजों का वितरण असमान है ? स्पष्ट कीजिए |
उत्तर : भारत अच्छे
और विविध प्रकार के खनिज संसाधनों में सौभाग्यशाली है | लेकिन भारत में खनिजों का
वितरण असमान है | जो निम्न प्रकार से है |
(i)
मोटे तौर पर प्रायद्वीपीय
चट्टानों में कोयले, धात्विक खनिज, अभ्रक व अन्य अनेक अधात्विक खनिजों के अधिकाँश
भण्डार संचित है |
(ii)
प्रायद्वीप के पश्चिम और
पूर्वी पार्श्वों (किनारों) पर गुजरात और असम की तलहटी चट्टानों में अधिकाँश खनिज
तेल निक्षेप पाए जाते है |
(iii)
प्रायद्वीपीय शैल क्रम के
साथ राजस्थान में अनेक अलौह खनिज पाए जाते हैं |
(iv)
उत्तरी भारत के विस्तृत जलोढ़
मैदान आर्थिक महत्व के खनिजों से लगभग विहीन है |
खानिजों
के वितरण में ये विभिन्नताएँ खनिजों की रचना में अन्तरग्रस्त भू-गर्भिक संरचना,
प्रक्रियाओं और समय के कारण हैं |
प्रश्न : कौन
सा आधारभूत खनिज औद्योगिक विकास की रीढ़ है
? इसकी मुख्य विशेषताएँ लिखें |
अथवा
प्रश्न :
भारत में पाए जाने वाले लौह अयस्क के प्रकारों
का उल्लेख कीजिए |
अथवा
प्रश्न :
मैग्नेटाइट और हेमेटाइट अयस्क में अन्तर स्पष्ट कीजिए |
उत्तर : लौह अयस्क एक
आधारभूत खनिज है तथा औद्योगिक विकास की रीढ़ है |
भारत में लौह अयस्क
के विपुल संसाधन विद्यमान है | भारत उच्च कोटि के लोहांश युक्त लौह अयस्क में धनी
है | यहाँ निम्नलिखित प्रकार का लौह अयस्क
पाया जाता है |
मैग्नेटाइट
मैग्नेटाइट सर्वोत्तम
प्रकार का लौह अयस्क है जिसमें 70 प्रतिशत लोहांश पाया
जाता है | इसमें सर्वश्रेष्ठ चुम्बकीय गुण होते हैं जो विद्युत उद्योगों में विशेष
रूप से उपयोगी हैं |
हेमेटाइट
हेमेटाइट
सर्वाधिक महत्वपूर्ण औद्योगिक लौह अयस्क है जिसका अधिकतम मात्रा में उपभोग हुआ है
| इसमें लोहांश की मात्रा मैग्नेटाइट की अपेक्षा
थोड़ी-सी कम होती है | इसमें लोहांश 50 से 60 प्रतिशत तक पाया जाता है |
प्रश्न : भारत
में लौह अयस्क उत्पादन पर नोट लिखें |
उत्तर : भारत में लौह
अयस्क के विपुल संसाधन विद्यमान है | भारत उच्च कोटि के लोहांश युक्त लौह अयस्क
में धनी है | यहाँ निम्न प्रकार का लौह अयस्क
पाया जाता है | मैग्नेटाइट और हेमेटाइट |
भारत में लौह अयस्क का उत्पादन
भारत में वर्ष 2018-19
में लौह अयस्क का लगभग 97 प्रतिशत उत्पादन
ओडिसा, छतीसगढ़ , कर्नाटक और झारखण्ड से प्राप्त हुआ था | शेष 3 प्रतिशत उत्पादन अन्य राज्यों में हुआ था |
प्रश्न : भारत
में लौह –अयस्क के वितरण क्षेत्र का वर्णन कीजिए |
अथवा
प्रश्न : भारत
में लौह –अयस्क की विभिन्न पेटियों का वर्णन करो |
उत्तर : भारत
में लौह –अयस्क की चार पेटीयाँ है | इनका
संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित है |
ओडिसा - झारखण्ड पेटी
ओडिसा
में उच्च कोटि का हेमेटाइट किस्म का लौह-अयस्क मयूरभंज व केन्दुझर जिलों में बादाम
पहाड़ की खदानों से निकाला जाता है | इसी से सन्निकट झारखण्ड के सिंहभूम जिलें में
गुआ तथा नोआमुंडी से हेमेटाइट अयस्क का खनन किया जाता है |
दुर्ग - बस्तर - चंद्रपुर पेटी
यह पेटी महाराष्ट्र व छतीसगढ़ राज्यों के अंतर्गत
पाई जाती है | छतीसगढ़ के बस्तर जिले में बेलाडिला पहाड़ी की श्रंखलाओं में अति
उत्तम कोटि का हेमेटाइट पाया जाता है |जिसमें इस गुणवत्ता के लौहे के 14 जमाव मिलते हैं | इसमें इस्पात बनाने में आवश्यक
सर्वश्रेष्ठ भौतिक गुण विद्यमान हैं | इन खादानों का लौह अयस्क विशाखापट्टनम पत्तन
से जापान तथा कोरिया को निर्यात किया जाता है |
बल्लारी - चित्रदुर्ग, चिक्कमंगलूरू - तुमकुरु पेटी
कर्नाटक की इस पेटी में लौह- अयस्क की बृहत राशि
संचित है | कर्नाटक में पश्चिमी घाट में अवस्थित कुद्रेमुख की खानें शत प्रतिशत
निर्यात इकाई है | कुद्रेमुख निक्षेप संसार के सबसे बड़े निक्षेपों में से एक माने
जाते हैं | यहाँ से लौह-अयस्क कर्दम (Slurry) रूप में पाइपलाइन द्वारा मंगलुरु के निकट एक पत्तन पर भेजा जाता है |
महाराष्ट्र –गोआ पेटी
यह पेटी गोआ तथा महाराष्ट्र राज्य के रत्नागिरी
जिले में स्थित है | यद्यपि यहाँ का लौहा उत्तम प्रकार का नहीं है फिर भी इसका
दक्षता से दोहन किया जाता है | मरमागाओ पत्तन से इसका बिर्यत किया जाता है |
प्रश्न : कुद्रेमुख
तथा बैलाडीला का क्या अर्थ है ?
उत्तर : कन्नड़ भाषा
में ‘कुद्रे’ शब्द का अर्थ है ‘घोड़ा’ | कर्नाटक के पश्चिमी घाट की सबसे ऊँची चोटी
घोड़े के मुख से मिलती जुलती है | इसलिए इस चोटी का नाम कुद्रेमुख पड़ा | यह कर्नाटक की मुख्य लौह- अयस्क की खादान है |
बेलाडीला की पहाडियाँ
बैल के डील (hump) से मिलती –जुलती है | जिसके कारण इसका
यह नाम पड़ा | बेलाडीला छतीसगढ़ की प्रमुख लौह –अयस्क की खादान है |
प्रश्न : मैंगनीज़ का उपयोग किन उद्योगों में किया जाता है
?
मैंगनीज़ मुख्य रूप से
इस्पात के निर्माण में प्रयोग किया जाता है | एक टन इस्पात बनाने में लगभग 10 किलोग्राम मैंगनीज़ की आवश्यकता होती है | इसका उपयोग ब्लीचिंग पाउडर
बनाने, कीटनाशक दवाएँ बनाने और पेंट बनाने में किया जाता है |
प्रश्न : भारत में मैंगनीज़ के उत्पादन के बारे में बताए
|
सन् 2018-19 अनुसार
भारत में मैंगनीज़ का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश है जहाँ पर देश के कुल
उत्पादन का 33 प्रतिशत मैंगनीज़ का उत्पादन किया जाता है |
इसके अलावा महाराष्ट्र (27 प्रतिशत ), ओडिसा (16 प्रतिशत), कर्नाटक
(12 प्रतिशत ) तथा आन्ध्रप्रदेश (10 प्रतिशत)
मैंगनीज़ उत्पादन करते हैं | अन्य राज्य
शेष 2 प्रतिशत मैंगनीज़ का उत्पादन करते हैं |
प्रश्न :
किस प्रकार के खनिजों का भण्डार और उत्पादन भारत में कम है ? कुछ खनिजों के नाम
बताएँ | इस खनिजों का क्या महत्व (उपयोग) है ?
उतर : भारत में अलौह
खनिजों की संचित राशि व उत्पादन अधिक संतोष जनक नहीं है |
इन खनिजों में ताँबा,
बॉक्साइट, सीसा और सोना आदि शामिल है |
इन खनिजों का प्रयोग
धातु शोधन, इंजीनियरिंग तथा विद्युत उद्योगों में किया जाता है |
प्रश्न :
ताँबे का उपयोग मुख्य रूप से किन उद्योगों में किया जाता है और क्यों ?
उतर : घात्वर्ध्य, तन्य और ताप सुचालक होने के कारण
ताँबे का उपयोग मुख्यत: बिजली के तार बनाने, इलैक्ट्रोनिक्स और अन्य रसायन
उद्योगों में किया जाता है |
प्रश्न :
भारत में ताँबे के भण्डार व उत्पादन पर नोट लिखें |
उत्तर : भारत में
ताँबे के भण्डार व उत्पादन क्रांतिक रूप से न्यून (कम) हैं |
मध्यप्रदेश की
बालाघाट की खदानें देश का लगभग 52 प्रतिशत ताँबा उत्पन्न
करती हैं |
झारखण्ड का सिंहभूम
जिला भी ताँबे का मुख्य उत्पादक है |
राजस्थान की खेतड़ी की
खदाने भी ताँबे के लिए प्रसिद्ध थी |
प्रश्न : एक
मिट्टी या क्ले (Clay) जैसे दिखने
वाले पदार्थ का नाम बताएँ जिसमें से एल्युमिना और बाद में एल्युमिनियम प्राप्त हो
है | इसके गठन, उपयोग और भारत में इसके वितरण के बारे में बताएँ |
उत्तर : क्ले (Clay) या मिट्टी जैसे दिखने वाले पदार्थ बॉक्साइट है जिससे एल्युमिना तथा एल्युमिनियम प्राप्त
किया जाता है | सबसे अधिक एल्युमिना
बॉक्साइट से ही प्राप्त किया जाता है |
बॉक्साइट
का गठन या रचना
बॉक्साइट निक्षेपों
की रचना एल्यूमिनियम सिलिकेटों से समृद्ध व्यापक भिन्नता वाली चट्टानों के विघटन
से होती है
एल्युमिनियम
का उपयोग
एल्युमिनियम एक महत्वपूर्ण
धातु है क्योंकि यह लोहे जैसी शक्ति के साथ –साथ अत्यधिक हल्का एवं सुचालक भी होता
है | इसमें अत्यधिक घात्वर्ध्यता भी पाई जाती है |
भारत
में बॉक्साइट का वितरण तथा उत्पादन
भारत में बॉक्साइट के
निक्षेप मुख्यत: अमरकंटक पठार, मैकाल पहाडियों तथा बिलासपुर –कटनी के पठारी प्रदेश में पाए जाते हैं |
सन् 2018-19 के अनुसार ओडिसा भारत
का सबसे बड़ा बॉक्साइट उत्पादक राज्य है | यह राज्य देश का 65 प्रतिशत बॉक्साइट का उत्पादन करता
है | यहाँ के कोरापुट जिले में पंचपतमाली निक्षेप राज्य के सबसे महत्वपूर्ण बॉक्साइट निक्षेप हैं |
इसके बाद झारखण्ड (10 प्रतिशत) गुजरात (9प्रतिशत), छतीसगढ़
तथा महाराष्ट्र (6 प्रतिशत), मध्यप्रदेश
(3 प्रतिशत) बॉक्साइट
का उत्पादन करने वाले मुख्य राज्य हैं |
प्रश्न : अभ्रक
विद्युत व इलैक्ट्रॉनिक उद्योगों में प्रयुक्त होने वाला अपरिहार्य खनिज क्यों है
? तीन कारण बताएँ |
अथवा
प्रश्न
: “अभ्रक विद्युत व इलैक्ट्रॉनिक
उद्योगों का महत्वपूर्ण खनिज है |”
व्याख्या करें |
उत्तर : अभ्रक एक ऐसा
खनिज है जो प्लेटों अथवा पत्रण क्रम में पाया जाता है | इसका चादरों (परतों ) में
विपाटन (split) आसानी से हो सकता है | ये परतें इतनी महीन हो सकती हैं कि इसकी एक हज़ार
परतें कुछ सेंटीमीटर ऊँचाई में समाहित हो सकती हैं |अभ्रक विद्युत व इलैक्ट्रॉनिक
उद्योगों में प्रयुक्त होने वाला अपरिहार्य खनिज है | इसके निम्नलिखित कारण हैं |
(i)
ये परतें इतनी महीन हो सकती
हैं कि इसकी एक हज़ार परतें कुछ सेंटीमीटर ऊँचाई में समाहित हो सकती हैं |
(ii)
इसकी सर्वोच्च
परावैद्युत शक्ति के कारण |
(iii)
अभ्रक में ऊर्जा ह्रास का
निम्न गुणांक पाया जाता है |
(iv)
इसमें विंसवाहन के गुण होते
हैं |
(v)
अभ्रक में उच्च वोल्टेज की
प्रतिरोधिता का गुण पाया जाता है |
प्रश्न : एक
अधात्विक खनिज का नाम बताएँ जिसे आसानी से महीन परतों में बदला जा सकता है | इसके
उपयोग भी लिखें |
उत्तर : अभ्रक एक ऐसा
खनिज है जो प्लेटों अथवा पत्रण क्रम में पाया जाता है | इसका चादरों (परतों ) में
विपाटन (split) आसानी से हो सकता है | ये परतें इतनी महीन हो सकती हैं कि इसकी एक हज़ार
परतें कुछ सेंटीमीटर ऊँचाई में समाहित हो सकती हैं | अभ्रक पारदर्शी, काले, हरे,
लाल, पीले अथवा भूरे रंग का हो सकता है |
अभ्रक के उपयोग :
(i)
इसकी सर्वोच्च
परावैद्युत शक्ति, ऊर्जा ह्रास का निम्न
गुणांक, विंसवाहन के गुण और उच्च वोल्टेज की प्रतिरोधिता के कारण अभ्रक विद्युत व
इलैक्ट्रॉनिक उद्योगों
में प्रयुक्त होने वाला अपरिहार्य खनिजों में से एक है |
(ii)
इसके पारदर्शी और चमकदार
होने के कारण इसका प्रयोग टूथ पेस्ट और सौंदर्य प्रसाधनों में किया जाता है |
(iii)
इसे पेंट में रंजक के
विस्तार के रूप में प्रयोग किया जाता है |
(iv)
रंगों के रंजकों को चमकाने
में अभ्रक का प्रयोग किया जाता है |
प्रश्न : भारत
में अभ्रक के मुख्य क्षेत्र कौन कौन से हैं ?
उत्तर : भारत में
अभ्रक के निक्षेप छोटानागपुर पठार के उत्तरी पठारी किनारों पर पाए जाते हैं |
बिहार – झारखण्ड की
कोडरमा- गया – हजारीबाग पेटी अग्रणी उत्पादक पेटी है |
राजस्थान के मुख्य अभ्रक
क्षेत्र अजमेर के आस पास हैं |
आंध्र प्रदेश की
नेल्लोर अभ्रक पेटी भी देश की महत्वपूर्ण अभ्रक उत्पादक पेटी है |
प्रश्न :
चूना पत्थर किस प्रकार की चट्टानों में पाया जाता है ?
उत्तर : चूना पत्थर (Limestone) कैल्शियम
कार्बोनेट तथा मैग्नीशियम कार्बोनेट से बनी चट्टानों में पाया जाता है | यह अधिकांशतः अवसादी चट्टानों में पाया जाता है
|
प्रश्न :
चूना पत्थर किस उद्योग का आधारभूत कच्चा माल है ?
उत्तर : चूना पत्थर सीमेंट उद्योग का एक आधारभूत कच्चा माल होता
है | यह लौह –प्रगलन की भट्टियों के लिए अनिवार्य है |
प्रश्न : भारत में चूना पत्थर के उत्पादन का संक्षिप्त
वर्णन करें |
उत्तर : सन् 2018-19 के
आँकड़ों के अनुसार भारत में चूना पत्थर के
उत्पादन में राजस्थान का प्रथम स्थान है | जो 22 प्रतिशत
चूना पत्थर उत्पादन करता है | इसके बाद आंध्रप्रदेश, मध्य प्रदेश, छतीसगढ़ , कर्नाटक,
तेलंगाना, गुजरात, तमिलनाडु तथा महाराष्ट्र प्रमुख चूना पत्थर उत्पादक राज्य हैं |
प्रश्न :
कोयले का महत्व बताओ |
उत्तर : भारत में कोयला बहुतायात में
पाया जाने वाला जीवाश्म ईंधन है | यह देश
की ऊर्जा आवश्यकताओं का महत्वपूर्ण भाग प्रदान करता है |
(i)
इसका उपयोग ऊर्जा उत्पादन तथा
उद्योगों और घरेलू ज़रूरतों के लिए ऊर्जा की आपूर्ति के लिए किया जाता है |
(ii)
भारत अपनी वाणिज्यिक ऊर्जा
आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए मुख्य रूप से कोयले पर निर्भर है |
(iii)
कोयले का लोहे के प्रगलन में विशेष महत्व है |
(iv)
कोयले का उपयोग ताप विद्युत केन्द्रों पर
विद्युत उत्पादन में किया जाता है |
प्रश्न
: कोयले का निर्माण किस प्रकार हुआ ?
अथवा
प्रश्न
: कोयले की निर्माण प्रक्रिया को समझाइए |
उत्तर : कोयले का
निर्माण पादप (पेड़ –पौधों) के लाखों वर्षों तक संपीडन (दबने) से हुआ है | दाब तथा
पृथ्वी के भीतरी भाग की गर्मी के कारण ये पेड़ पौधे कोयले में बदल गए |
प्रश्न :
कोयले के प्रकारों का वर्णन कीजिए ?
उत्तर : कोयले का
निर्माण पादप (पेड़ –पौधों) के लाखों वर्षों तक संपीडन (दबने) से हुआ है | इसलिए
संपीडन की मात्रा , गहराई और दबने के समय के आधार पर कोयला अनेक रूपों में पाया
जाता है | जो निम्नलिखित है |
पीट
कोयला : दलदलों में क्षय होते पादपों (पेड़ –पौधों)
से पीट कोयले की उत्पत्ति होती है | जिसमें कार्बन की मात्रा कम तथा नमी की मात्रा
अधिक होती है | इसमें निम्न ताप क्षमता होती है |
लिग्नाइट
कोयला : लिग्नाइट कोयला एक निम्न कोटि को भूरा
कोयला होता है | यह मुलायम होने के साथ अधिक अमियुक्त होता है | भारत में लिग्नाइट
के प्रमुख भण्डार तमिलनाडु के नैवेली में
मिलते है जिसका उपयोग विद्युत उत्पादन में किया जाता है |
बिटुमिनस कोयला : गहराई में दबे
तथा अधिक तापमान से प्रभावित कोयले को बिटुमिनस कोयला कहा जाता है | वाणिज्यिक
प्रयोग में यह सर्वाधिक लोकप्रिय है | धातु शोधन में उच्च श्रेणी के बिटुमिनस
कोयले का प्रयोग किया जाता है | जिसका लोहे के प्रगलन में विशेष महत्व है |
ऐन्थ्रासाइट
: यह सर्वोतम गुण वाला कोयला है | जो धुँआ तथा
राख नहीं छोड़ता | इसमें कार्बन की मात्रा 90 प्रतिशत तक
होती है |
प्रश्न : भारत
में कोयले के वितरण का वर्णन कीजिए |
उत्तर : भारत में कोयला बहुतायात में पाया जाने वाला जीवाश्म ईंधन है
| यह देश की ऊर्जा आवश्यकताओं का
महत्वपूर्ण भाग प्रदान करता है |
भारत में कोयला दो
प्रमुख भू गर्भिक युगों की शैल क्रम में पाया जाता है |
गोंडवाना
निक्षेप : गोंडवाना क्रम की आयु 200
लाख वर्ष से कुछ अधिक है | गोंडवाना कोयला निक्षेप में धातु शोधन
कोयला पाया जाता है | इस कोयले के प्रमुख क्षेत्र दामोदर घाटी (पश्चिमी बंगाल तथा
झारखण्ड) , झरिया, रानीगंज तथा बोकारो में स्थित है | जो महत्वपूर्ण कोयला क्षेत्र
हैं | गोदावरी, महानदी, सोन व वर्धा नदी घाटियों में भी कोयले के जमाव पाए जाते
हैं |
टर्शियरी
(टरशियरी) निक्षेप : टरशियरी निक्षेप लगभग 55 लाख वर्ष पुराने हैं | टरशियरी समय के कोयला क्षेत्र उत्तर- पूर्वी
राज्यों जैसे मेघालय, असम, अरुणाचल प्रदेश व नागालैंड में पाया जाता है |
प्रश्न :
भारी उद्योग तथा ताप विद्युत गृह कोयला क्षेत्रों के निकट स्थापित क्यों किए जाते
हैं ?
उत्तर : कोयला एक
स्थूल पदार्थ है | जिसका प्रयोग करने पर भार घटता है क्योंकि यह राख में परिवर्तित
हो जाता है | इसी कारण भारी उद्योग तथा ताप विद्युत गृह कोयला क्षेत्रों में या उनके निकट स्थापित किए जाते हैं
प्रश्न : पैट्रोलियम
का महत्व बताओ | यह कहाँ पाया जाता है ? भारत में पैट्रोलियम उत्पादक प्रमुख
क्षेत्र कौन से हैं ?
उत्तर : पैट्रोलियम का महत्व
भारत
में कोयले के पश्चात ऊर्जा का दूसरा
प्रमुख साधन पैट्रोलियम या खनिज तेल है |
यह ताप व
प्रकाश के लिए ईंधन. मशीनों को स्नेहक और अनेक विनिर्माण उद्योगों को कच्चा माल
प्रदान करता है |
तेल शोधन
शालौएँ –संश्लेषित वस्त्र, उर्वरक तथा असंख्य रासायन उद्योगों में एक नोडीय बिंदु
का काम करती हैं |
पैट्रोलियम का प्राप्ति स्थान
भारत में
अधिकाँश पैट्रोलियम की उपस्थिति टर्शियरी युग की शैल संरचनाओं के अपनति व भ्रंश
ट्रैप में पाई जाती है | वलन, अपनति और गुम्बदों वाले प्रदेशों में यह वहाँ पाया
जाता है जहाँ उद्ववलन के शीर्ष में तेल ट्रैप हुआ होता है | तेल धारक परत चूना
पत्थर या बालुपत्थर होता है | जिसमें से तेल प्रवाहित हो सकता है | मध्यवर्ती
असरंध्र परतें तेल को ऊपर उठने व नीचे रिसने से रोकती हैं | पैट्रोलियम
सरंध्र और असरंध्र चट्टानों के बीच भ्रंश ट्रैप में भी पाया जाता है | प्राकृतिक
गैस हल्की होने के कारण खनिज तेल के ऊपर पाई जाती है |
भारत में पैट्रोलियम उत्पादक प्रमुख क्षेत्र
भारत
में मुंबई हाई, गुजरात और असम प्रमुख
पैट्रोलियम उत्पादक क्षेत्र हैं | अंकलेश्वर गुजरात का सबसे महत्वपूर्ण तेल
क्षेत्र है | असम भारत का सबसे पुराना तेल उत्पादक राज्य है | डिगबोई, नहरकाटिया और
मोरें –हुगरीजन इस राज्य के महत्वपूर्ण तेल उत्पादक क्षेत्र हैं |
प्रश्न : प्राकृतिक
गैस कहाँ पाई जाती है ? इसका क्या महत्व है ?
भारत में प्राकृतिक गैस के भण्डार कहाँ –कहाँ स्थित है ?
उत्तर : प्राकृतिक
गैस पैट्रोलियम के भण्डार के साथ पाई जाती है प्राकृतिक गैस हल्की होने के कारण
खनिज तेल के ऊपर पाई जाती है | और जब कच्चे तेल को सतह पर लाया जाता है तो यह
मुक्त हो जाती है |
इसका उपयोग घरेलू और औद्योगिक ईंधन के रूप में किया जाता सकता
है इसका उपयोग बिजली क्षेत्रों में ईंधन
के रूप में बिजली पैदा करने के लिए, उद्योगों में हीटिंग के उद्देश्य के लिए,
रासायनिक, पैट्रोकैमिकल और उर्वरक उद्योगों में कच्चे माल के रूप में, परिवहन ईंधन
के रूप में और खाना पकाने के ईंधन के रूप में किया जाता है |
गैस एक बुनियादी ढाँचे के विस्तार और स्थानीय शहर गैस वितरण (सी.ओ.डी.) नेटवर्क विस्तार के साथ प्राकृतिक गैस पसंदीदा
परिवहन ईंधन, सी. एन. जी. (CNG) और घरों में खाना पकाने के
ईंधन पी. एन. जी. (PNG) के रूप में भी उभर रहा है |
भारत के प्रमुख गैस भण्डार मुंबई हाई और अन्य संबद्ध क्षेत्र
पश्चिमी तट पर पाए जाते हैं | जिनको खंभात बेसिन में पाए जाने वाले क्षेत्र
सम्पूरित करते हैं | पूर्वी तट पर कृष्णा-गोदावरी बेसिन में प्राकृतिक गैस के नए
भण्डार की खोज की गई है |
प्रश्न
: गैस ऑथोरिटी ऑफ इंडिया लिमिटिड द्वारा निर्मित गैस पाइपलाइनों का वर्णन करें|
उत्तर : गेल (गैस
ऑथोरिटी ऑफ इंडिया लिमिटिड) द्वारा निर्मित पहली गैस पाइपलाइन हजीरा –विजयपुर –जगदीशपुर
(HVJ) क्रॉस कंट्री गैस पाइपलाइन है | यह 1700 किलोमीटर
लंबी है |
यह पाइपलाइन
मुंबई हाई और बसीन गैस क्षेत्रों को पश्चिमी और उत्तरी भारत में विभिन्न उर्वरक,
बिजली और औद्योगिक परिसरों से जोड़ा गया है |
इन गैस
पाइपलाइनों ने भारतीय बाज़ार के विकास को गति प्रदान की है |
कुल मिलाकर भारत गैस के बुनियादी ढाँचे का
विस्तार क्रॉस कंट्री गैस पाइपलाइन के 1700 किलोमीटर से बढ़कर 18500
किलोमीटर तक, दस गुना से अधिक हो गया है | और पूर्वोत्तर राज्यों सहित देशभर में सभी गैस
स्त्रोतों और उपभोक्ता बाज़ारों को जोड़कर गैस ग्रिड के रूप में जल्द ही 34000
किलोमीटर से अधिक तक पहुँचने की संभावना है |
प्रश्न
: खनन को घातक उद्योग (Killer indutry) बनने से रोकने के लिए क्या अनिवार्य है
?
उत्तर : खनन
को घातक उद्योग बनने से रोकने के लिए दृढ सुरक्षा विनियम और पर्यावरणीय कानूनों का
क्रियान्वयन अनिवार्य है |
प्रश्न
: भारत में विद्युत उत्पादन पर नोट लिखें |
उत्तर :
आधुनिक विश्व में विद्युत के अनुप्रयोग इतने ज्यादा विस्तृत हैं कि इसके प्रति
व्यक्ति उपभोग को विकास का सूचकांक माना जाता है | विद्युत मुख्यतः दो प्रकार से
उत्पन्न की जाती है |
(क) जल
विद्युत : प्रवाही जल के द्वारा विद्युत उत्पन्न की जाती
है | तेज बहते जल को टरबाइन पर गिराकर हाइड्रो
–टटरबाइन चलाए जाते हैं और उससे जल विद्युत उत्पन्न की जाती है | यह एक नवीकरण
योग्य संसाधन है | भारत में अनेक बहु-उद्देश्यीय परियोजनाएँ है जो जल विद्युत
उत्पन्न करती हैं | जैसे –भाखड़ा नांगल परियोजना, दामोदर घाटी कार्पोरेशन और कोपिली
हाइडल परियोजना आदि |
(ख) ताप विद्युत : कोयला, पैट्रोलियम व
प्राकृतिक गैस के जलाने से टरबाइन चलाकर ताप विद्युत उत्पन्न की जाती है | ताप
विद्युत गृह अनवीकरण योग्य जीवाश्मी ईंधन का प्रयोग कर विद्युत उत्पन्न करते हैं
| भारत में विभिन्न स्थानों पर ताप
विद्युत केन्द्र स्थापित किए गए है जैसे :
उकई (गुजरात), तलचर (ओडिसा), नवेली (तमिलनाडु), इन्नौर (तमिलनाडु),
रामागुंडम (तेलंगाना), नामरूप (असम) तथा कोरबा (छतीसगढ़) आदि |
प्रश्न
: खनिजों का संरक्षण क्यों अनिवार्य है ?
उत्तर : खनिजों
का संरक्षण अनिवार्य है इसके निम्नलिखित कारण हैं |
(i)
हम सभी को उद्योग और कृषि की खनिज और उनसे
विनिर्मित पदार्थों पर भारी निर्भरता सुप्रेक्षित है |
(ii)
खनन योग्य निक्षेप की कुल राशि असार्थक अंश
है, अर्थात भू-पर्पटी का एक प्रतिशत है |
(iii)
जिन खनिज संसाधनों के निर्माण व सांद्रण में
लाखों वर्ष लगे हैं , हम उनका शीघ्रता से उपभोग कर रहे हैं |
(iv)
खनिज निर्माण की भूगार्भिक प्रक्रियाएँ इतनी
धीमी है कि उनके वर्तमान उपभोग की दर की तुलना में उनके पुनर्भरण की दर अपरिमित
रूप से थोड़ी है | इसलिए खनिज संसाधन सीमित तथा अनवीकरण योग्य हैं |
(v)
समृद्ध खनिज निक्षेप हमारे देश की अत्यधिक मुल्वान
संपत्ति हैं | लेकिन ये अल्पजीवी हैं | अयस्कों के निरंतर उत्खनन से लागत बढ़ती है
क्योंकि खनिजों के उत्खनन की गहराई बढ़ने के साथ –साथ उनकी गुणवत्ता घटती जाती है |
प्रश्न
: खनिजों का संरक्षण के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं ?
उत्तर : खनिजों
का संरक्षण के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं |
(i)
खनिज संसाधनों को सुनियोजित एवं सतत् पोषणीय
ढंग से प्रयोग से लिए एक प्रयोग करने के लिए एक तालमेल युक्त प्रयास करना होगा |
(ii)
निम्न कोटि के अयस्कों का कम लागत पर प्रयोग
करने के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी का सतत् विकास करते रहना होगा |
(iii)
धातुओं का पुन: चक्रण, रद्दी धातुओं का प्रयोग
तथा प्रतिस्थापनों का उपयोग भविष्य में हमारे खनिज संसाधनों के संरक्षण के उपाय
हैं |
प्रश्न
: ऊर्जा का महत्व
ऊर्जा सभी
क्रियाकलापों के लिए आवश्यकता हैं | खाना पकाने में, रोशनी व ताप के लिए, गाड़ियों
के संचालन तथा उद्योगों में मशीनों के संचालन में ऊर्जा की आवश्यकता होती है |
ऊर्जा का
उत्पादन ईंधन खनिजों जैसे – कोयला, पैट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, यूरेनियम तथा
विद्युत से किया जाता है | ऊर्जा संसाधनों को परम्परागत तथा गैर- परम्परागत साधनों
में वर्गीकृत किया जा सकता है |
प्रश्न : भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा के लिए किन साधनों का
प्रयोग किया जाता है ? इससे सबंधित अब क्या समस्याएँ सामने आ रही हैं ?
उत्तर
: ग्रामीण भारत में लकड़ी व उपले बहुतायत में प्रयोग किए जाते हैं | एक अनुमान के अनुसार ग्रामीण घरों में आवश्यक
ऊर्जा का 70
प्रतिशत से अधिक इन दो साधनों से प्राप्त होता है | लेकिन अब घटते
वन क्षेत्र के कारण इनका उपयोग करते रहना कठिन होता जा रहा है | इसके अतिरिक्त
उपलों का उपभोग भी हतोत्साहित किया जा रहा है | क्योंकि इससे सर्वाधिक मूल्यवान
खाद का उपभोग होता है जिसे कृषि में प्रयोग किया जा सकता है |
प्रश्न : गैर –परम्परागत
ऊर्जा के साधनों की आवश्यकता क्यों है ?
अथवा
प्रश्न : परम्परागत ऊर्जा
संसाधनों (जीवाश्मी ईंधनों) के प्रयोग से कौन –कौन सी समस्याएँ उत्पन्न हुई हैं ?
इन समस्याओं से निपटने के लिए किस प्रकार के ऊर्जा संसाधनों के प्रयोग की जरूरत है
?
उत्तर
: ऊर्जा के बढ़ते उपभोग ने देश को कोयला,तेल और गैस जैसे जीवाश्मी ईंधनों पर निर्भर
कर दिया है | गैस व तेल की बढ़ती कीमतों तथा इनकी संभाव्य कमी ने भविष्य में ऊर्जा
आपूर्ति की सुरक्षा के प्रति अनिश्चितताएँ
उत्पन्न कर दी हैं | इसके राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि पर गंभीर
प्रभाव पड़ते हैं | इसके अतिरिक्त जीवाश्मी ईंधनों का प्रयोग गंभीर पर्यावरणीय
समस्याएँ उत्पन्न करता है | अत : नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों जैसे –सौर ऊर्जा, पवन
ऊर्जा, जैविक ऊर्जा तथा अवशिष्ट पदार्थ जनित ऊर्जा के उपभोग की बहुत ज़रूरत है | ये
ऊर्जा के गैर –परम्परागत साधन कहलाते हैं |
भारत धूप (सूर्य का प्रकाश), तथा जीवभार साधनों में समृद्ध है | भारत में
नवीकरण योग्य ऊर्जा संसाधनों के विकास हेतु बृहत कार्यक्रम बनाए गए हैं |
प्रश्न : परमाणु ऊर्जा अथवा आणविक ऊर्जा पर संक्षिप्त नोट लिखे |
उत्तर
: परमाणु ऊर्जा अथवा आणविक ऊर्जा अणुओं की संरचना को बदलने से प्राप्त की जाती है
| जब ऐसा परिवर्तन किया जाता है तो ऊष्मा के रूप में काफी ऊर्जा विमुक्त होती है
और इसका उपभोग विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करने में किया जाता है |
यूरेनियम और थोरियम जो झारखंड और राजस्थान की अरावली पर्वत
श्रंखला में पाए जाते हैं | इनका प्रयोग परमाणु अथवा आणविक ऊर्जा के उत्पादन में
किया जाता है | केरल में मिलने वाली मोनाजाइट रेत में भी थोरियम की मात्रा पाई
जाती है |
प्रश्न : भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य उज्ज्वल हैं क्यों?
अथवा
प्रश्न : सौर ऊर्जा ने किस प्रकारभारत में ऊर्जा की समस्या को कुछ हद
तक कम किया है | अपने विचार में बताएँ |
उत्तर
: सौर ऊर्जा एक नवीकरणीय तथा गैर
परम्परागत ऊर्जा संसाधन हैं |भारत एक उष्ण –कटिबंधीय देश है | यहाँ सौर ऊर्जा के
दोहन की असीम सम्भावनाएँ हैं |
(i)
फोटोवोल्टाइक प्रौद्योगिकी द्वारा धूप (सूर्य
के प्रकाश) को सीधे विद्युत में परिवर्तित किया जाता है |
(ii)
भारत के ग्रामीण तथा सुदूर क्षेत्रों में सौर
ऊर्जा तेजी से लोकप्रिय हो रही है |
(iii)
कुछ बड़े सौर ऊर्जा संयंत्र देश के विभिन्न
भागों में स्थापित किए जा रहे हैं |
(iv)
ऐसी अपेक्षा है कि सौर ऊर्जा के प्रयोग से
ग्रामीण घरों में उपलों तथा लकड़ी पर निर्भरता को कम किया जा सकेगा |
(v)
फलस्वरूप यह ऊर्जा संरक्षण में योगदान देगा और
कृषि में भी खाद की पर्याप्त आपूर्ति होगी |
प्रश्न : भारत में पवन ऊर्जा के उत्पादन के बारे में बताएँ |
उत्तर
: पवन ऊर्जा एक नवीकरणीय तथा गैर
परम्परागत ऊर्जा संसाधन हैं | भारत में पवन ऊर्जा के उत्पादन की महान संभावनाएँ
हैं |
भारत
में पवन ऊर्जा फार्म के विशालतम पेटी तमिलनाडु में नागरकोइल से मदुरई तक अवस्थित
है |
इसके
अतिरिक्त आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, गुजरात,केरल, महाराष्ट्र तथा लक्षद्वीप में भी
महत्पूर्ण पवन ऊर्जा फ़ार्म हैं |
तमिलनाडु
के नागरकोइल तथा राजस्थान के जैसलमेर देश में पवन ऊर्जा के प्रभावी प्रयोग के लिए
जाने जाते हैं |
प्रश्न : बायोगैस किस प्रकार उत्पन्न की जाती है ? किसानों को इसका
क्या लाभ है ?
उत्तर : बायोगैस एक नवीकरणीय तथा गैर
परम्परागत ऊर्जा संसाधन हैं | ग्रामीण इलाकों में झाडियों, कृषि अपशिष्टों, पशुओं
और मानव जनित अपशिष्ट के उपयोग से घरेलू उपभोग हेतु बायोगैस उत्पन्न की जाती है |
जैविक पदार्थों के अपघटन से गैस उत्पन्न होती है |
बायोगैस की तापीय क्षमता मिट्टी के
तेल, उपलों व चारकोल की अपेक्षा अधिक होती
है |
बायोगैस संयत्र नगरपालिका, सहकारिता
तथा निजी स्तर पर लगाए जाते है |
पशुओं का गोबर का प्रयोग करने वाले
संयत्र ग्रामीण भारत में ‘गोबर गैस प्लांट’ के नाम से जाने जाते हैं |
बायोगैस संयत्र
किसानों को लाभ
बायोगैस संयत्र किसानों को
दो प्रकार से लाभान्वित करते हैं |
1.
एक ऊर्जा के रूप में और दूसरा
उन्नत प्रकार के उर्वरक के रूप में |
2.
बायोगैस अब तक गोबर का प्रयोग
करने में सबसे दक्ष है |
3.
यह उर्वरक की गुणवत्ता को बढ़ाता
है |
4.
यह उपलों तथा लकड़ी को जलाने से
होने वाले वृक्षों के नुकसान को रोकता है |
5.
यह पर्यावरण के अनुकूल है क्योंकि यह प्रदूषण
नहीं फैलाते |
प्रश्न : ज्वारीय ऊर्जा से विद्युत का निर्माण कैसे होता है | भारत में ज्वारीय ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए
आदर्श दशाएँ कहाँ उपस्थित हैं ?
उत्तर
: ज्वारीय ऊर्जा एक नवीकरणीय तथा गैर
परम्परागत ऊर्जा संसाधन हैं | इसमें महासारीय तरंगों का प्रयोग विद्युत उत्पादन के
लिए किया जाता है | इसके लिए जहाँ सँकरी खाड़ी होती है उसके आर पार बाँध बनाए जाते
हैं | उच्च ज्वार में इस सँकरी खाड़ीनुमा प्रवेश द्वार से पानी भीतर भर जाता है और द्वार बंद होने पर बाँध में
ही रह जाता है | बाढ़ द्वार के बहार ज्वार उतरने पर, बाँध के पानी को इसी रस्ते
पाइप द्वारा समुद्र की तरफ बहाया जाता है जो इसे ऊर्जा उत्पादक टरबाइन की ओर ले
जाता है |
भारत
में ज्वारीय ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए आदर्श दशाओं वाले स्थान
भारत में खम्बात की खाड़ी, कच्छ की खाड़ी तथा
पश्चिमी तट पर गुजरात में और पश्चिम बंगाल में सुदूर वन क्षेत्र में गंगा के
डेल्टा में ज्वारीय तरंगों द्वारा ज्वारीय ऊर्जा उत्पन्न करने की आदर्श दशाएँ
उपस्थित हैं |
प्रश्न : भू –तापीय ऊर्जा से विद्युत का निर्माण कैसे होता है | भारत
में भू - तापीय ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए परियोजनाएँ कहाँ स्थित हैं ?
उत्तर :
पृथ्वी के आंतरिक भागों में ताप का प्रयोग क् उत्पन्न की जाने वाली विद्युत को भू –तापीय
ऊर्जा कहते हैं | भू -तापीय ऊर्जा एक नवीकरणीय तथा गैर परम्परागत ऊर्जा संसाधन हैं
| भू –तापीय ऊर्जा इसलिए अस्तित्व में होती है क्योंकि बढ़ती गहराई के साथ पृथ्वी
प्रगामी ढंग से तप्त (गर्म) होती जाती है | जहाँ भी भू –तापीय प्रवणता अधिक होती
हैं वहाँ उथली गहराइयों पर भी अधिक तापमान पाया जाता है | ऐसे क्षेत्रों में
भूमिगत जल चट्टानों से ऊष्मा का अवशोषण कर तप्त (गर्म) हो जाता है | यह इतना गर्म
हो जाता कि यह पृथ्वी की सतह की ओरउठता है जिससे यह भाप में परिवर्तित हो जाता है
| इसी भाप का उपयोग टरबाइन चलाने और विद्युत उत्पन्न करने के लिए किया जाता है |
भारत में
सैकड़ों गर्म पानी के चश्में हैं, जिनका विद्युत उत्पादन में प्रयोग किया जा सकता
है | भू –तापीय ऊर्जा के दोहन के लिए भारत में दो प्रायोगिक परियोजनाएँ शुरू की गई
हैं | एक हिमाचल प्रदेश के मणिकरण के निकट पार्वती घाटी में स्थित है और दूसरा
लद्दाख में पुगा घाटी में स्थित है |
प्रश्न
: ऊर्जा संसाधनों का संरक्षण क्यों आनिवार्य है ?
उत्तर
: आर्थिक विकास के लिए ऊर्जा एक आधारभूत
आवश्यकता है | राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के प्रत्येक सेक्टर –कृषि, उद्योग, परिवहन,
वाणिज्य व घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए ऊर्जा के निवेश की आवश्यकता है |
स्वतंत्रता-
प्राप्ति के पश्चात क्रियान्वित आर्थिक विकास की योजनाओं को चालू रखने के लिए
ऊर्जा की बड़ी मात्रा की आवश्यकता थी | फलस्वरूप पूरे देश में ऊर्जा के सभी
प्रकारों का उपभोग धीरे –धीरे बढ़ रहा है |
प्रश्न : ऊर्जा संसाधनों का संरक्षण
करने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं ?
अथवा
प्रश्न : आखिर ऊर्जा की बचत ही ऊर्जा का उत्पादन हैं| इस कथन की
सार्थकता को स्पष्ट कीजिए |
उत्तर : इस
पृष्ठभूमि में ऊर्जा के विकास के सतत् पोषणीय मार्ग के विकसित करने की तुरंत
आवश्यकता है | ऊर्जा संरक्षण की प्रोन्नति और नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों का बढ़ता
प्रयोग सतत् पोषणीय ऊर्जा के दो आधार हैं | वर्तमान में भारत विश्व के अल्पतम
ऊर्जादक्ष देशों में गिना जाता है |
हमें ऊर्जा
के सीमित संसाधनों के न्यायसंगत उपयोग के लिए सावधानीपूर्ण उपागम अपनाना होगा |
उदाहरणार्थ
एक जागरूक नागरिक के रूप में हम यातायात के लिए निजी वाहन की अपेक्षा सार्जनिक
वाहन का उपयोग करके |
जब प्रयोग न
हो रही हो तो बिजली बंद करके विद्युत बचत करने वाले उपकरणों के प्रयोग से तथा गैर
पारम्परिक ऊर्जा साधनों के प्रयोग से हम अपना छोटा योगदान दे सकते हैं | आखिर
ऊर्जा की बचत ही ऊर्जा का उत्पादन हैं|
प्रश्न
: खनन का खनिकों के स्वास्थ्य तथा पर्यावरण
पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर : खनन का
खनिकों के स्वास्थ्य तथा पर्यावरण पर निम्नलिखित प्रभाव होते हैं |
(i)
खदानों में काम करने वाले श्रमिक लगातार धूल व
हानिकारक धुएँ में साँस लेते हुए फेफड़ों
संबंधी बीमारियों के शिकार हो जाते हैं |
(ii)
खदानों की छतों के गिरने, सैलाब आने
(जलप्लावित होना या पानी भर जाना), कोयले की खदानों में आग लगने आदि खतरे खदान
श्रमिकों के लिए स्थाई हैं |
(iii)
खदान क्षेत्रों में खनन के कारण जल स्त्रोतों
में प्रदूषण बढ़ता है |
(iv)
अवशिष्ट पदार्थों तथा खनिज तरल के मलबे के
खत्ता (ढेर) लगाने से भूमि तथा मिट्टी का अवक्षय (निम्नीकरण) होता है |
(v)
अवशिष्ट पदार्थों तथा खनिज तरल के मलबे को
सरिताओं तथा नदियों में डालने पर इनमें प्रदूषण बढ़ता है |
प्रश्न :
दाँतों की स्वच्छता के लिए कौन से खनिज दंतमंजन में प्रयोग किए जाते है ?
उत्तर
: सिलिका, चूना पत्थर, एल्युमिनियम
ऑक्साइड व विभिन्न फॉस्फेट आदि खनिज दाँतों की स्वच्छता के लिए दंतमंजन में प्रयोग
किए जाते है |
प्रश्न
: दाँतों को गलने से कौन सा पदार्थ रोकता है यह किस खनिज से प्राप्त होता है ?
उत्तर
: फ्लूराइड (Fluoride)
दाँतों को
गलने से रोकता है | यह फ्लुओराइट नामक
खनिज से प्राप्त होता है |
प्रश्न
: दाँतों को सफेद करने के लिए दंतमंजन में किसका प्रयोग किया जाता है ? यह पदार्थ कौन
से खनिज से प्राप्त किए जाते है ?
उत्तर
: दाँतों को सफेद करने के लिए अधिकतर दंतमंजन टिटेनियम ऑक्साइड का प्रयोग करते हैं
| यह रयुटाइल , इल्मेनाइट तथा ऐनाटेश नामक खनिजों से प्राप्त होते हैं |
प्रश्न
: दाँतों में चमक लाने के लिए दंतमंजन में किस खनिज को मिलाया जाता है ?
उत्तर
: अभ्रक
प्रश्न
: टूथब्रश व टूथ पेस्ट की ट्यूब किससे बनी होती है ?
उत्तर
: टूथब्रश व टूथ पेस्ट की ट्यूब पैट्रोलियम से प्राप्त प्लास्टिक की बनी होती है |
प्रश्न : ऊर्जा के परम्परागत तथा गैर परम्परागत साधनों में अन्तर स्पष्ट
कीजिए |
उत्तर
: ऊर्जा के परम्परागत तथा गैर परम्परागत साधनों में अन्तर निम्नलिखित हैं |
ऊर्जा के परम्परागत साधन
परम्परागत
साधनों में लकड़ी, उपले, कोयला, पैट्रोलियम, प्राकृतिक गैस तथा विद्युत (दोनों जल
विद्युत व ताप विद्युत) शामिल हैं | ये
अनवीकरण योग्य संसाधन हैं | ये वायु तथा
जल प्रदूषण फैलाते हैं | इनके द्वारा विद्युत का उत्पादन मंहगा पड़ता है | ये कुछ
ही वर्षों के लिए बचे हुए है |
ऊर्जा के गैर परम्परागत साधन
गैर
परम्परागत साधनों में सौर, पवन, ज्वारीय , भू तापीय, बायोगैस तथा परमाणु ऊर्जा
शामिल किए जाते हैं | ये नवीकरणीय संसाधन
हैं | ये किसी प्रकार का प्रदूषण नहीं फैलाते हैं | इनके द्वारा विद्युत उत्पादन
शुरू में महंगा पड़ता है परन्तु बाद में कोई लागत नहीं लगती | ये लंबे समय तक चलने
वाले हैं |
प्रश्न : सभी सजीव वस्तुओं को खनिजों की आवश्यकता होती है | स्पष्ट
करें |
अथवा
प्रश्न : “ खनिज हमारे जीवन का अनिवार्य अंग है |” इस कथन की उदाहरण
सहित पुष्टि करें |
उत्तर : खनिज
हमारे जीवन का अनिवार्य अंग है | यह सभी
के लिए अनिवार्य है क्योंकि खनिजों के बिना जीवन प्रक्रिया नहीं चल सकती | हमारे
कुल पौष्टिक भोजन का केवल 0.3 प्रतिशत भाग खनिज हैं | लेकिन ये महत्वपूर्ण है कि इनके बिना हम 99.7
प्रतिशत भोज्य पदार्थों का उपयोग करने में असमर्थ रहेंगें |
प्रश्न
: कब खनिज निक्षेप या भण्डार खदान में परिवर्तित हो जाते हैं ?
उत्तर : अयस्क
में खनिज का सांद्रण उत्खनन की सुगमता और बाज़ार की निकटता, किसी संचय (Reserve) की आर्थिक जीव्यता (Viability) को प्रभावित करने
में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं | अत : माँग की पूर्ति के लिए अनेक संभव
विकल्पों में से चयन करना पड़ता है | ऐसा हो जाने के बाद एक खनिज निक्षेप अथवा
भण्डार में परिवर्तित हो जाता है |
प्रश्न : लौह
खनिज का क्या महत्व हैं ?
उत्तर : लौह खनिज
धात्विक खनिजों के कुल उत्पादन का तीन चौथाई भाग का योगदान करते हैं | ये खनिज
धातु शोधन उद्योगों के विकास को मजबूत आधार प्रदान करते हैं |
प्रश्न
: एल्युमिनियम की खोज के बाद कौन अपने कपड़ों पर एल्युमिनियम के बटन पहनता था और
अपने खास मेहमानों को एल्युमिनियम से बने
बर्तनों में भोजन परोसता था ?
उत्तर :
फ्रांस का सम्राट नेपोलियन तृतीय
प्रश्न
: रोशनी देने वाले बल्ब में कितने खनिज प्रयुक्त होते हैं ?
उत्तर :
रोशनी देने वाले बल्ब में काँच, टंगस्टन, बॉक्साइट, आदि खनिज प्रयुक्त होते हैं |
1 comment:
Excellent and easy for the 10th class students
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