कक्षा
-11वीं
भौतिक भूगोल
के मूल सिद्धांत
अध्याय 1 भूगोल
एक विषय के रूप में
भूगोल का अर्थ
भूगोल कों अंग्रेजी भाषा में ज्योग्राफी (Geography) कहा जाता है | जो दो शब्दों Geo + graphy से मिलकर बना है | यह ग्रीक भाषा के शब्द “Geographos”
का रूपान्तरण है | जिसमें “Geo” का अर्थ है
पृथ्वी और “Graphos” का अर्थ है वर्णन | अत: Geography का अर्थ है पृथ्वी का वर्णन | इस प्रकार भूगोल के विद्वान भूगोल
कों मानव निवास के रूप में पृथ्वी का अध्ययन मानते है |
ज्योग्राफी (Geography)
शब्द का सबसे पहले प्रयोग ग्रीक विद्वान इरेटोस्थेनीज ने किया था |
भूगोल की परिभाषा
भूगोल का अध्ययन एक विस्तृत अध्ययन है | इसे
कुछ शब्दों के द्वारा और सीमाओं में रखकर परिभाषित नहीं किया जा सकता | फिर भी
भूगोल के विभिन्न विद्वानों ने भूगोल कों अनेक प्रकार से परिभाषित किया है | उनमें
से कुछ की परिभाषाएँ निम्नलिखित है |
अल्फेर्ड हेटनर के अनुसार, “भूगोल
धरातल के विभिन्न भागों में कारणात्मक रूप से सम्बन्धित तथ्यों में भिन्नता का
अध्ययन करता है |”
रिचार्ड हार्टशोर्न के अनुसार, “भूगोल
का उद्देश्य धरातल की प्रादेशिक भिन्नता का वर्णन तथा व्याख्या करना है |”
उपरोक्त परिभाषाओं से
स्पष्ट है कि एक विषय के रूप में भूगोल मानव तथा पृथ्वी के अन्तर्सम्बन्धों का
अध्ययन करता है | यह पृत्वी पर पायी जाने
वाली भिन्नताओं का अध्ययन भी करता है | साथ
ही वह उन कारकों का भी अध्ययन करता है जिनके प्रभाव से मानव तथा पृथ्वी के
अन्तर्सम्बन्धों में ये भिन्नताएँ पायी जाती है |
स्वतंत्र विषय के रूप में भूगोल के
अंतर्गत किस प्रकार की जानकारी प्राप्त
होती है
स्वतंत्र
विषय के रूप में भूगोल के अंतर्गत तीन मुख्य कारकों के बारे में जानकारी प्राप्त
होती है ये निम्नलिखित है |
1. भौतिक
पर्यावरण
2. मानवीय
क्रियाएँ
3. भौतिक
पर्यावरण और मानवीय क्रियाओं के बीच अंतरप्रक्रियात्मक सम्बन्ध
एक छात्र के रूप में हमें भूगोल
क्यों पढ़ना चहिये ?
एक छात्र के रूप में
हमें भूगोल निम्नलिखित कारणों से पढ़ना चाहिए |
1. पृथ्वी
हमारा घर है | अत: पृथ्वी के विभिन्न घटकों, उसके पर्यावरण और उसके विभिन्न
संसाधनों के कारण हमारा जीवन प्रभावित होता है | इन घटकों, हमारे आसपास के
पर्यावरण और हमारे लिए उपयोगी संसाधनों का अध्ययन हम भूगोल में करते है | इसलिए
भूगोल का अध्ययन आवश्यक है |
2. विभिन्न
संसाधनों जैसे भूमि, जल, खनिज, मृदा आदि
का उपयोग करते हुए हम भोजन प्राप्त करतें है और विभिन्न क्रियाकलाप करते हुए जीवन
यापन करते है | विभिन्न क्षेत्रों में कौन
–कौन से संसाधन है और कितनी मात्रा में है उनके क्या उपयोग है इन सभी का अध्ययन हम
भूगोल में करते है | इसलिए भूगोल का अध्ययन आवश्यक है |
3. हम
विभिन्न प्रकार की जलवायु में रहते है और
इसी तरह विभिन्न मौसम हमारे जीवन कों प्रभावित करते है | जलवायु और मौसम के
तत्वों, उनको प्रभावित करने वाले कारकों
का अध्ययन हम भूगोल के अध्ययन के रूप में करते है और जलवायु और मौसम के
मानव जीवन के प्रभावों और उसके कारण उत्त्पन्न भिन्नताओं का अध्ययन हम भूगोल के
अंतर्गत ही करते है अत: हमें भूगोल पढ़ना चाहिए |
4. मानव
द्वारा किए जाने वाले विभिन्न क्रियाकलाप
और उनके पर्यावरण पर प्रभावों का अध्ययन हम भूगोल के अंतर्गत करते है इसलिए भी
भूगोल का अध्ययन जरुरी है |
5. विभिन्न
प्रकार की पर्यावरणीय समस्याओं के कारण, प्रभाव और उनका क्षेत्रीय अध्ययन हम भूगोल
में मुख्य रूप से करते है | साथ ही उनसे निपटने के उपायों का भी अध्ययन इस विषय
में प्रमुखता से किया जाता है |
6. भूगोल
विविधता कों समझने और ऐसी विविधताओं कों उत्त्पन्न करने वाले कारकों का अध्ययन
करता है अत: इसका अध्ययन आवश्यक है |
7. समय और स्थान के साथ होने वाले परिवर्तनों
का अध्ययन भूगोल के अंतर्गत किया जाता है
| जिससे इन्हें समझने में आसानी होती है |
8. भूगोल
के द्वारा हम मानचित्र में परिवर्तित ग्लोब कों समझने में सहायता मिलती है |
9. इस
विषय के अध्यन्न से मानचित्र में दिए गए दृश्य कों समझने की क्षमता विकसित होती है
|
10. भूगोल
में आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों जैसे भौगोलिक सूचना तंत्र (GIS), कंप्यूटर आधारित मानचित्र कला आदि में आपको ज्ञान प्रदान किया जाता है
जिससे आप राष्ट्रीय स्तर पर अपना योगदान दे सकते है |
भूगोल की
प्रकृति बहु-आयामी है या
भूगोल
बहु-आयामी पृथ्वी का अध्ययन
भूगोल वास्तविकता या
यथार्थता का अध्ययन करता है | पृथ्वी की वास्तविकता भी बहु-आयामी है | क्योंकि हम
पृथ्वी के विभिन्न भौतिक पक्षों जैसे भौमिकी, मृदा, जलवायु, समुद्रों और वनों के साथ-साथ मानवीय पक्षों जैसे जनसँख्या संबंधी
विशेषताएँ जैसे घनत्व, लिंग अनुपात, आर्थिक क्रियाकलाप आदि का अध्ययन करते है जो
बहु आयामी हो जाता है | अनेक प्राकृतिक विज्ञानों जैसे भौमिकी, मृदा विज्ञान,
जलवायु विज्ञान, समुद्र विज्ञान और वनस्पति विज्ञान, जीव विज्ञान और मौसम विज्ञान
आदि और विभिन्न सामाजिक विज्ञानों जैसे समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, इतिहास,
अर्थशास्त्र और नृ-विज्ञान आदि की सहायता से पृथ्वी की वास्तविक और बहु-आयामी
प्रकृति का अध्यन्न भूगोल का मुख्य कार्य है इसलिए ही भूगोल की प्रकृति बहु-आयामी
है |
भूगोल क्षेत्रीय विभिन्नता का अध्ययन
भूगोल पृथ्वी का अध्ययन है | भू-तल पर बहुत
भिन्नताएँ देखने कों मिलती है | ये भिन्नताएँ प्राकृतिक और सांस्कृतिक वातावरण से
सम्बन्धित होती है | अनेक तत्वों में
समानताओं के साथ-साथ असमानताएँ भी होती है इन्ही असमानताओं कों क्षेत्रीय
विभिन्नता का नाम दिया जाता है | इन सभी
भिन्नताओं का अध्ययन हम भूगोल में करते है | अत: भूगोल कों भूगोल क्षेत्रीय
विभिन्नता का अध्ययन भी कहते है | क्षेत्रीय विभिन्न्ताओं का अध्ययन करना भूगोल के
मुख्य उद्देश्यों में से एक है | इस प्रकार भूगोल उन सभी तथ्यों का अध्ययन करता है
जो क्षेत्रीय संदर्भ में भिन्नता लिए हुए है | इस तथ्य कों ध्यान में रखते
हुए रिचार्ड हार्टशोर्न महोदय ने भूगोल कों निम्न प्रकार से परिभाषित
किया है |
रिचार्ड हार्टशोर्न के अनुसार, “भूगोल
का उद्देश्य धरातल की प्रादेशिक भिन्नता का वर्णन तथा व्याख्या करना है |”
भूगोल में हम केवल धरातल में
विभिन्नता का अध्ययन नहीं करते बल्कि उन कारकों का भी अध्ययन करते है जो इन
विभिन्नताओं के कारण है | उदाहरण के लिए फसल का स्वरूप एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश
में भिन्न होता है किन्तु यह भिन्नता
मिट्टी, जलवायु, बाज़ार कि माँग, किसानों की व्यय क्षमता और तकनीकी निवेश कि
उपलब्धता आदि में भिन्नता से प्रभावित
होती है | अत: भूगोल किन्ही दो तत्वों के बीच कार्य-कारण सम्बन्ध भी ज्ञात करता है
| इस तथ्य कों ध्यान में रखते हुए अल्फेर्ड हेटनर महोदय ने भूगोल कों निम्न प्रकार
से परिभाषित किया है |
अल्फेर्ड हेटनर के अनुसार, “भूगोल धरातल
के विभिन्न भागों में कारणात्मक रूप से सम्बन्धित तथ्यों में भिन्नता का अध्ययन
करता है |”
भूगोल एक गत्यात्मक अध्ययन या
भूगोल एक परिवर्तनशील अध्ययन
भूगोल में हम भौतिक और मानवीय तथ्यों का अध्ययन
करते है | भौतिक और मानवीय दोनों ही प्रकार के तथ्य स्थैतिक नहीं है बल्कि
गत्यात्मक है | ये तथ्य या कारक परिवर्तित होते रहते है चाहे मंद हो या तीव्र चाहे
दिखाई दे या नहीं लेकिन लगातार बदलते रहते है | हम ये कह सकते है कि ये तथ्य सतत
परिवर्तनशील पृथ्वी और अथक एवं निरंतर प्रयत्नशील मानव के बीच होने वाली अंतर्प्रक्रियाओं
के कारण समय के साथ-साथ परिवर्तनशील रहते है |
परिवर्तनशील अथवा गत्यात्मक तथ्यों का अध्ययन भूगोल के मुख्य उद्देश्यों
में से एक है | इसी कारण ही भूगोल गत्यात्मक या परिवर्तनशील अध्ययन कहलाता है |
भूगोल एक समाकलनात्म्क और संश्लेषित विज्ञान या
भूगोल समाकलन और संश्लेषण का अध्ययन
प्राकृतिक
और सामाजिक दोनों ही प्रकार के विज्ञानों
का मूल उद्देश्य वास्तविकता (यथार्थता)
कों ज्ञात करना | इसलिए प्रत्येक विज्ञान सभी अन्य विज्ञानों से सम्बन्ध स्थापित
करता हुआ वास्तविकता (यथार्थता) कों
प्राप्त करना चाहता है | भूगोल भी अनेक प्राकृतिक विज्ञानों जैसे जैसे भौमिकी,
मृदा विज्ञान, जलवायु विज्ञान, समुद्र विज्ञान और वनस्पति विज्ञान, जीव विज्ञान और
मौसम विज्ञान आदि और विभिन्न सामाजिक विज्ञानों जैसे समाजशास्त्र, राजनीति
विज्ञान, इतिहास, अर्थशास्त्र और नृ-विज्ञान आदि की सहायता से पृथ्वी तल पर चल रही
प्रत्येक घटना की वास्तविकता कों जानता है |
इनके सहयोग से भौगोलिक अध्ययन सरल हो जाता है | विभिन्न विज्ञानों के साथ
मिलकर अध्ययन करने कों ही समाकलन कहते है अत: स्पष्ट है कि भूगोल एक समाकलनात्म्क
विज्ञान है |
भूगोल का विज्ञान की कई शाखाओं से निकट का
सम्बन्ध स्थापित है | इन विज्ञानों के विभिन्न घटकों से प्राप्त ज्ञान कों
संश्लेषित करके भूगोल में इनका अध्ययन होता है इसलिए ही भूगोल कों संश्लेषित
विज्ञान कहा जाता है |
भूगोल प्रकृति तथा मानव के बीच अंतर्प्रक्रियाओं का अध्ययन
भौगोलिक तथा मानवीय दोनों ही प्रकार के कारक
स्थैतिक (स्थाई) ना होकर हमेशा गतिशील (गत्यात्मक) रहते है | ये तथ्य या कारक
परिवर्तित होते रहते है चाहे मंद हो या तीव्र चाहे दिखाई दे या नहीं लेकिन लगातार
बदलते रहते है | हम ये कह सकते है कि ये तथ्य सतत परिवर्तनशील पृथ्वी अथक एवं
निरंतर प्रयत्न शील मानव के बीच होने वाली अंतर्प्रक्रियाओं के कारण समय के
साथ-साथ परिवर्तनशील रहते है | आदिमानव समाज अपने पर्यावरण पर ही निर्भर रहता था
और उसी के अनुसार व्यवहार करता था | समय के साथ-साथ तकनीक उपलब्ध होने पर अब ऐसा
नहीं है वह अपने अनुसार वातावरण कों ढालने लगा है | इस तरह आदिम समाज से लेकर
वर्तमान तक प्रकृति और मानव के बीच के विभिन्न अंत: प्रक्रियाएं होती रही | इन अंतर्प्रक्रियाओं का अध्ययन हम भूगोल में करते है इसलिए भूगोल कों अंतर्प्रक्रियाओं
का अध्ययन कहा जाता है |
एक वैज्ञानिक विषय के रूप में भूगोल तीन वर्गों के प्रश्नों से
सम्बन्धित है
एक
वैज्ञानिक विषय के रूप में भूगोल तीन वर्गों के प्रश्नों से सम्बन्धित है | ये
निम्नलिखित है |
1. क्या-
कुछ प्रश्न ऐसे होते है जो भूतल पर पाई जाने वाली प्राकृतिक और सांस्कृतिक विशेताओं
के प्रतिरूप की पहचान से जुड़े होते है | जिसका मतलब होता है, ये क्या है ? अत: ये प्रश्न “क्या” से
सम्बन्धित होते है |
2. कहाँ-
कुछ प्रश्न ऐसे होते है जो भूतल पर पाई जाने वाली प्राकृतिक और सांस्कृतिक
विशेताओं के वितरण से जुड़े होते है |
जिसका मतलब होता है, कोई वस्तु या तत्व
कहाँ पर स्थित है ? अत: ये प्रश्न “कहाँ ” से सम्बन्धित होते है |
3. क्यों-
तीसरे प्रकार के प्रश्न व्याख्या से सम्बन्धित होते है जो
तत्वों और तथ्यों के किसी स्थान पर होने या ना होने के कारण से जुड़े होते है | ये तत्वों और तथ्यों के बीच कार्य –कारण सम्बन्ध से
जुड़े होते है | जिसका मतलब है कोई वस्तु या तत्व किसी स्थान पर “क्यों” है? अत: ये
प्रश्न “क्यों ” से सम्बन्धित होते है |
भूगोल के उपागम (क्रमबद्ध और
प्रादेशिक उपागम में अन्तर)
भूगोल का अध्ययन एक
अंतर्शिक्षण (Interdisciplinary) विषय है | प्रत्येक विषय
का अध्ययन कुछ विशेष उपागमों के अनुसार किया जाता है | इस दृष्टि से भूगोल के
अध्ययन के दो प्रमुख उपागम हैं | (1) विषय वस्तुगत (क्रमबद्ध)
उपागम तथा (2) प्रादेशिक उपागम |
क्रमबद्ध
उपागम (क्रमबद्ध भूगोल)
(i)
भूगोल के क्रमबद्ध उपागम कों
जर्मनी के प्रसिद्ध भूगोलवेता अलक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट के द्वारा प्रवर्तित किया गया
|
(ii)
विषय वस्तुगत भूगोल या सामान्य भूगोल का उपागम, क्रमबद्ध उपागम ही हैं |
(iii)
इस उपागम में एक तथ्य का
पूरे विश्व स्तर पर अध्ययन किया जाता है | उसके बाद क्षेत्रीय स्वरूप के वर्गीकृत
प्रकारों की पहचान की जाती है |
(iv)
उदाहरण के लिए यदि कोई
प्राकृतिक वनस्पति के अध्ययन में रूचि रखता है, तो सर्वप्रथम विश्व स्तर पर उसका
अध्ययन किया जाएगा, फिर वनस्पति के प्रकारों के आधार पर वर्गीकरण जैसे विषुवतरेखीय
सदाबाहर वन, नरम लकड़ी वाले कोणधारी वन अथवा मानसूनी वन इत्यादि की पहचान, उनका
विवेचन तथा सीमांकन करना होगा |
प्रादेशिक
उपागम (प्रादेशिक भूगोल)
(i)
प्रादेशिक भूगोल का विकास
हम्बोल्ट के समकालीन जर्मन भूगोलवेत्ता कार्ल रिटर द्वारा किया गया |
(ii)
प्रादेशिक उपागम में विश्व
कों विभिन्न पदानुक्रमित स्तर के प्रदेशों में विभक्त किया जाता है और फिर एक
विशेष प्रदेश में सभी भौगोलिक तथ्यों का अध्ययन किया जाता है |
(iii)
ये प्रदेश प्राकृतिक,
राजनीतिक या निर्दिष्ट (नामित) प्रदेश हो सकते हैं | एक प्रदेश में तथ्यों का
अध्ययन समग्रता से विविधता में एकता की खोज करते हुए किया जाता है |
विषय
वस्तुगत या क्रमबद्ध उपागम के आधार पर भूगोल की शाखाएँ
भूगोल की इस प्रमुख
शाखा में निम्नलिखित उपशाखाएँ शामिल की जाती हैं | भू –आकृति विज्ञान, जलवायु
विज्ञान, जल विज्ञान तथा मृदा भूगोल | इनका संक्षिप्त वर्णन निम्न
लिखित है |
भू –आकृति विज्ञान:
यह
भू-आकृतियों, उनके क्रम विकास एवं संबंधित प्रक्रियाओं का अध्ययन करता है |
जलवायु विज्ञान:
इसके
अंतर्गत वायुमंडल की संरचना, मौसम तथा
जलवायु के तत्व, जलवायु के प्रकार तथा जलवायु प्रदेश का अध्ययन किया जाता है |
जल विज्ञान:
यह
धरातल के जल परिमंडल जिसमें समुद्र, नदी , झील तथा अन्य जलाशय सम्मिलित हैं तथा
उसका मानव सहित विभिन्न प्रकार के जीवों एवं उनके कार्यों पर प्रभाव का अध्ययन है
|
मृदा भूगोल:
यह
मिट्टी के निर्माण की प्रक्रियाओं, मिट्टी के प्रकार, उनका उत्पादकता स्तर, वितरण
एवं उपयोग आदि के अध्ययन से सम्बन्धित है |
मानव भूगोल
यह
भूगोल की दूसरी प्रमुख शाखा है इसके
अंतर्गत निम्नलिखित उपशाखाओं का अध्ययन किया जाता है | सामजिक /सांस्कृतिक
भूगोल, जनसंख्या एवं अधिवास भूगोल, आर्थिक भूगोल. ऐतिहासिक भूगोल राजनीतिक भूगोल आदि | इनका संक्षिप्त वर्णन
निम्नलिखित है |
सामाजिक /सांस्कृतिक
भूगोल :
इसके
अंतर्गत समाज तथा इसकी स्थानिक /प्रादेशिक गत्यात्मकता एवं समाज के योगदान से
निर्मित सांस्कृतिक सांस्कृतिक तत्वों का अध्ययन किया जाता है |
जनसंख्या भूगोल :
यह
ग्रामीण तथा नगरीय क्षेत्रों में जनसंख्या वृद्धि उसका वितरण, घनत्व, लिंग –अनुपात,
प्रवास एवं व्यवसायिक संरचना आदि का अध्ययन करता है |
अधिवास भूगोल
अधिवास
भूगोल में ग्रामीण तथा नगरीय अधिवासों के वितरण प्रारूप तथा अन्य विशेषताओं का
अध्ययन किया जाता है |
आर्थिक भूगोल:
यह
मानव की आर्थिक क्रियाओं, जैसे –कृषि, उद्योग, पर्यटन, व्यापार एवं परिवहन, अवस्थापना
तत्व एवं सेवाओं का अध्ययन है |
ऐतिहासिक भूगोल:
ऐतिहासिक
भूगोल उन ऐतिहासिक प्रक्रियाओं का अध्ययन करता है जो क्षेत्र कों संगठित करती हैं |
प्रत्येक प्रदेश वर्तमान स्थिति में आने से पूर्व ऐतिहासिक अनुभवों से गुजरता है |
भौगोलिक तत्वों में भी सामयिक परिवर्तन होते रहते हैं और इसी की व्याख्या ऐतिहासिक
भूगोल का उद्देश्य है |
राजनीति भूगोल:
राजनीति
भूगोल क्षेत्र कों राजनीतिक घटनाओं की दृष्टि से देखता है | यह सीमाओं, निकटस्थ
पड़ोसी इकाइयों के मध्य भू –वैन्यासिक संबंध, निर्वाचन क्षेत्र का परिसीमन एवं
चुनाव परिदृश्य का विश्लेषण करता है | साथ ही जनसंख्या के राजनीतिक व्यवहार कों
समझने के लिए सैद्धांतिक रूप रेखा विकसित करता है |
जीव भूगोल :
भौतिक भूगोल एवं मानव भूगोल के अन्तरापृष्ठ (Interface)
के फलस्वरूप जीव –भूगोल का अभ्युदय हुआ | इसके अंतर्गत निम्नलिखित शाखाएँ आती हैं
| जीव भूगोल, वनस्पति भूगोल, पारिस्थैतिक विज्ञान तथा पर्यावरण भूगोल | इनका
संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित है |
जीव भूगोल:
भूगोल
की इस शाखा में पशुओं एवं उनके निवास क्षेत्र के स्थानिक स्वरूप एवं भौगोलिक
विशेषताओं का अध्ययन होता है |
वनस्पति भूगोल :
यह
शाखा प्राकृतिक वनस्पति का उसके निवास क्षेत्र (Habitat) में स्थानिक प्रारूप का अध्ययन करती है |
पारिस्थैतिक विज्ञान:
जीव
भूगोल की इस शाखा में प्रजातियों (Species)
के निवास/स्थिति क्षेत्र का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है |
पर्यावरण भूगोल:
सम्पूर्ण
विश्व में पर्यावरण प्रतिबोधन के फलस्वरूप पर्यावरणीय समस्याओं, जैसे भूमि ह्रास (भूमि
निम्नीकरण), प्रदूषण, संरक्षण की चिंता आदि का अनुभव किया गया | जिसके अध्ययन के
लिए भूगोल की इस शाखा का विकास हुआ |
प्रादेशिक उपागम
पर आधारित भूगोल की शाखाएँ
प्रादेशिक अध्ययन पर आधारित
भूगोल की निम्नलिखित शाखाएँ हैं |
(i)
बृहद, मध्यम, लघु स्तरीय प्रादेशिक/क्षेत्रीय
अध्ययन
(ii)
ग्रामीण/इलाका नियोजन तथा
शहर एवं नगर नियोजन सहित प्रादेशिक नियोजन |
(iii)
प्रादेशिक विकास
(iv)
प्रादेशिक विवेचना /विश्लेषण
क्रमबद्ध और प्रादेशिक उपागमों के अतिरिक्त दो उभयनिष्ठ पक्ष
क्रमबद्ध और प्रादेशिक उपागमों के अतिरिक्त दो पक्ष ऐसे हैं
जो सभी विषयों के लिए उभयनिष्ठ हैं |ये दो विषय हैं दर्शन तथा विधितंत्र एवं तकनीक
दर्शन :
दर्शन के अंतर्गत (i) भौगोलिक चिंतन और (ii)भूमि एवं मानव अंतर्प्रक्रिया/ मानव पारिस्थिकी शामिल किए जाते हैं |
विधितंत्र एवं तकनीक:
इनके अंतर्गत निम्नलिखित शामिल है |
(i)
सामान्य एवं संगणक आधारित मानचित्रण ,
(ii)
परिमाणात्मक एवं सांख्यिकी
(iii)
क्षेत्र सर्वेक्षण विधियाँ
(iv)
भू –सूचना विज्ञान तकनीक (Geoinformatics) जैसे –दूर संवेदन तकनीक (Remote Sensing Technology), भौगोलिक सूचना तंत्र (Geographical Information System –G.I.S.), वैश्विक स्थितीय तंत्र (Global
Positioning System-G.P.S.) |
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