Saturday, September 7, 2024

COMPOSITION AND STRUCTURE OF ATMOSPHERE


 

प्रश्न  1                    वायुमंडल किसे कहते हैं ?

उत्तर :           वायुमंडल विभिन्न गैसों का मिश्रण है जो पृथ्वी को चारों ओर से ढके हुए है |

प्रश्न  2                    वायुमंडल के द्रव्यमान का 99 प्रतिशत भाग कितने किलोमीटर की ऊँचाई तक पाया जाता है ?

उत्तर :           32 किलोमीटर

प्रश्न  3                    ऑक्सीजन गैस वायुमंडल में कितनी ऊँचाई तक पाई जाती है ?

उत्तर :           120 किलोमीटर

प्रश्न  4                    जलवाष्प वायुमंडल में कितनी ऊँचाई तक पाई जाती है ?

उत्तर :           90 किलोमीटर

प्रश्न  5                    कार्बन  डाई ऑक्साइड गैस वायुमंडल में कितनी ऊँचाई तक पाई जाती है ?

उत्तर :           90 किलोमीटर

प्रश्न  6                    ओज़ोन गैस वायुमंडल में कहाँ पाई जाती है ?

उत्तर :           ओज़ोन गैस वायुमंडल में समतापम मंडल में पृथ्वी की सतह से 10 से 50 किलोमीटर के बीच पाई जाती है |

प्रश्न  7                    ओज़ोन गैस पर संक्षिप्त नोट लिखों |

उत्तर :           ओज़ोन गैस वायुमंडल में समतापम मंडल में पृथ्वी की सतह से 10 से 50 किलोमीटर के बीच पाई जाती है | यह वायुमंडल का महत्वपूर्ण घटक है | इस गैस कि परत एक फिल्टर की तरह कार्य करती है | यह सूर्य से निकलने वाली पैराबैंगनी किरणों को अवशोषित कर लेती है और उनको पृथ्वी तक नहीं पहुँचने देती | जिससे पृथ्वी का तापमान अधिक नहीं हो पाता | ये पैराबैंगनी किरणों के हानिकारक प्रभावों से मानव तथा जीवों को बचाती है |

प्रश्न  8                    वायुमंडल के संघटन की व्याख्या करें |

अथवा

वायुमंडल में पाई जाने वाली विभिन्न गैसों, जलवाष्प तथा धूलकणों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए |

 

उत्तर :           वायुमंडल विभिन्न गैसों का मिश्रण है जो पृथ्वी को चारों ओर से ढके हुए है | इसके संघटन में विभिन्न प्रकार की गैसें, जैसे नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, आर्गन, कार्बन डाई ऑक्साइड, ओजोन, हीलियम, हाइड्रोजन, निओन, फ़्रीओन,  क्रेप्टो, जेनन आदि शमिल हैं |  इनके अलावा वायुमंडल में जलवाष्प तथा धूलकण भी पायें जाते हैं |  जिनकी संक्षिप्त व्याख्या निम्नलिखित है |

  1.  नाइट्रोजन गैस  : इस गैस की मात्रा वायुमंडल में सबसे अधिक पाई जाती है | जो कि वायुमंडल के कुल द्रव्यमान का 78.8 प्रतिशत है | यह गैसे आसानी से अन्य तत्वों के साथ रासायनिक अभिक्रिया नहीं करती | यह मृदा में स्थिर हो जाती है | इस गैस का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह वस्तुओं को तेजी से जलने से बचाती है | नाइट्रोजन पेड़ –पौधों में प्रोटीन का निर्माण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है | नाइट्रोजन गैस के कारण ही वायुदाब, पवनों की शक्ति तथा प्रकाश के परावर्तन का पता चलता है |
  2.  ऑक्सीजन गैस : यह गैस जीवन दायनी गैस है | क्योंकि इसके बिना हम साँस नहीं ले सकते | ऑक्सीजन वायुमंडल के कुल द्रव्यमान का 20.95 भाग है | यह गैस वायुमंडल की निचली परतों में पाई जाती है | वायुमंडल में 120 किलोमीटर की ऊँचाई के बाद ऑक्सीजन गैस की मात्रा नगण्य हो जाती है | यह गैस ईंधन को जलाने के लिए आवश्यक है |  
  3.   आर्गन गैस  :     यह वायुमंडल में तीसरी सबसे अधिक मात्रा में पाई जाने वाली गैस है | जो वायुमंडल के कुल द्रव्यमान का 0.93 प्रतिशत है |
  4.  कार्बन डाई ऑक्साइड गैस:  यह गैस वायुमंडल में केवल यह गैस वायुमंडल वायुमंडल के कुल आयतन का केवल 0.036 भाग ही है | जो वायुमंडल में 90 किलोमीटर की ऊँचाई तक पाई जाती है | यह एक भारी गैस है और वायुमंडल की निचली परतों में पाई जाती है | इसका अधिकांश भाग पृथ्वी कि सतह के निकट ही होता है | कम मात्रा के होने के बावजूद भी यह एक महत्वपूर्ण गैस है | क्योंकि पेड़-पौधों के लिए प्रकाश संश्लेषण की क्रिया के लिए अनिवार्य गैस है | इसके अलावा यह लघु तरंगदैधर्य वाली सौर विकिरण के लिए पारगम्य है लेकिन दीर्घ तरंगदैधर्य वाली पार्थिव विकिरण के लिए अपारगम्य है | अत: यह गैस ग्रीन हाउस प्रभाव (हरित गृह प्रभाव) के लिए उत्तरदायी है | और वायुमंडल की निचली परतों को गर्म रखती है | जैव ईंधन के अधिक जलाए जाने के कारण इस गैस की मात्रा तेजी से बढ़ रही है |
  5. ओजोन गैस : ओज़ोन गैस वायुमंडल में समतापम मंडल में पृथ्वी की सतह से 10 से 50 किलोमीटर के बीच पाई जाती है | यह वायुमंडल का महत्वपूर्ण घटक है | इस गैस कि परत एक फिल्टर की तरह कार्य करती है | यह सूर्य से निकलने वाली पैराबैंगनी किरणों को अवशोषित कर लेती है और उनको पृथ्वी तक नहीं पहुँचने देती | जिससे पृथ्वी का तापमान अधिक नहीं हो पाता | ये पैराबैंगनी किरणों के हानिकारक प्रभावों से मानव तथा जीवों को बचाती है |
  6. हाइड्रोजन  गैस : यह वायुमंडल में पाई जाने वाली सबसे हल्की गैसों में से एक है | जो वायुमंडल की ऊपरी परतों में पाई जाती है | यह वायुमंडल में बहुत ही कम मात्रा में विद्यमान है | यह बहुत ही ज्वलनशील गैस है |
  7.  हीलियम गैस : यह वायुमंडल में पाई जाने वाली सबसे हल्की गैसों में से एक है | जो वायुमंडल की ऊपरी परतों में पाई जाती है |
  8. अन्य गैसें : उपरोक्त गैसों के अलावा निओन, फ़्रीओन,  क्रेप्टो, तथा जेनन जैसी अन्य गैसें भी वायुमंडल में उपस्थित है|
  9.  जलवाष्प : जलवाष्प वायुमंडल में उपस्थित एक परिवर्तनीय तत्व है | जो ऊँचाई के साथ –साथ घटती है | वायुमंडल में अधिकतम वायुमंडल में अधिकतम यह वायु के द्रव्यमान का 4 प्रतिशत तक होती है | ठंडे ध्रुवीय क्षेत्रो में तथा गर्म रेगिस्तानों जैसे शुष्क प्रदेशों में यह बहुत कम होती है जबकि आर्द्र और उष्ण प्रदेशों में यह अधिक होती है | विषुवत वृत्त से ध्रुवों की ओर जाने पर जलवाष्प की मात्रा में कमी आने लगती है |यह सूर्य से आने वाले ताप के कुछ भाग को अवशोषित करती है तथा पृथ्वी से उत्पन्न ताप को संग्रहित करती है | यह पृथ्वी के वायुमंडल को न टो अधिक गर्म होने देती और न ही अधिक ठंडा इस प्रकार यह पृथ्वी के लिए कम्बल का काम करती है | 
  10.  धूलकण : विभिन्न स्त्रोतों से प्राप्त वायुमंडल में उपस्थित छोटे –छोटे कण जैसे समुद्री नमक, महीन मिट्टी, धुएँ की कालिमा, राख, पराग, उल्काओं के टूटे हुए कण आदि को सम्मलित रूप से धूलकण कहा जाता है | धूलकण  प्राय: वायुमंडल के निचले भाग में ही मौजूद होते है | लेकिन कभी कभार संवहनीय धाराओं के द्वारा ये वायुमंडल में काफी ऊँचाई तक पहुँच जाते है | धूलकण आर्द्र्ताग्राही केन्द्र की तरह काम करते हैं इनके चारों ओर जलवाष्प की बूंदे संघनित हो जाती है और मेघों (बादलों) का निर्माण करती है | आकाश का नीला रंग भी धूलकणों के कारण ही दिखाई देता है | सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय आकाश का नारंगी तथा लाल रंग का दिखना इन्हीं के कारण होता है |

Friday, August 30, 2024

Lesson water

Pradhan Mantri Krishi Sinchayee Yojana (PMKSY) 
Pradhan Mantri Krishi Sinchayee Yojana has been launched by the Central Government during 2015-16 with an overarching vision to ensure access to some means of protective irrigation for all agricultural farms in the country, thus bringing much desired rural prosperity. 
Some of the broad objectives of the this programmes are to: 
• Enhance the physical access of water on the farm and expand cultivable area under assured irrigation (Har khet ko pani) 
• Promote integration of water source, distribution and its efficient use, to make best use of water through appropriate technologies and practices.
• Improve on-farm water use efficiency to reduce wastage and increase availability both in duration and exent; irrigation and other water saving technologies (Per drope more crop) • Introduce sustainable water conservation practices 
• Ensure the integrated development of rain-fed areas using the waters held approach towards soil and water conservation, regeration of ground water, providing livelihood options, etc.

Watershed management 
Watershed management basically refers to efficient management and conservation of surface and groundwater resources.

 It involves prevention of runoff and storage and recharge of groundwater through various methods like percolation tanks, recharge wells, etc. 
However, in broad sense watershed management includes conservation, regeneration and judicious use of all resources – natural (like land, water, plants and animals) and human with in a watershed.
 Watershed management aims at bringing about balance between natural resources on the one hand and society on the other. 

The success of watershed development largely depends upon community participation.

The Central and State Governments have initiated many watershed development and management programmes in the country. 

Some of these are being implemented by nongovernmental organisations also. 

Haryali Haryali Haryali is a watershed development project sponsored by the Central Government which aims at enabling the rural population to conserve water for drinking, irrigation, fisheries and afforestation. The Project is being executed by Gram Panchayats with people’s participation.
 Atal Bhujal Yojana (Atal Jal) is being implemented in 8220 water stressed Gram Panchayats of 229 administrative blocks/ talukas in 80 districts of seven states,viz. Gujarat, Haryana, Karnataka, Madhya Pradesh, Maharashtra, Rajasthan, and Uttar Pradesh. The selected States account for about 37 per cent of the total number of water-stressed (over-exploited, critical and semi-critical) blocks in India. One of the key aspects of ATAL JAL is to bring in behavioural changes in the community, from the prevailing attitude of consumption to conservation and smart water management. 

Neeru-Meeru (Water and You) programme (in Andhra Pradesh) and Arvary Pani Sansad (in Alwar, Rajasthan) have taken up constructions of various water-harvesting structures such as percolation tanks, dug out ponds (Johad), check dams, etc., through people’s participation.

Tamil Nadu has made water harvesting structures in the houses compulsory. No building can be constructed without making structures for water harvesting. Watershed development projects in some areas have been successful in rejuvenating environment and economy. 

However, there are only a few success stories. In majority of cases, the programme is still in its nascent stage. There is a need to generate awareness regarding benefits of watershed development and management among people in the country, and through this integrated water resource management approach water availability can be ensured on sustainable basis.
Rainwater harvesting is a method to capture and store rainwater for various uses. 

It is also used to recharge groundwater aquifers. It is a low cost and eco-friendly technique for preserving every drop of water by guiding the rain water to borewell, pits and wells.

Rainwater harvesting

Rainwater harvesting increases water availability, checks the declining groundwater table, 
improves the quality of groundwater through dilution of contaminants, like fluoride and nitrates, prevents soil erosion, and flooding and arrests salt water intrusion in coastal areas if used to recharge aquifers.
Rainwater harvesting has been practised through various methods by different communities in the country for a long time. 
Traditional rainwater harvesting in rural areas is done by using surface storage bodies, like lakes, ponds, irrigation tanks, etc. 
In Rajasthan, rainwater harvesting structures locally known as Kund or Tanka (a covered underground tank) are constructed near or in the house or village to store harvested rainwater 
There is a wide scope to use rainwater harvesting technique to conserve precious water resource. 
It can be done by harvesting rainwater on rooftops and open spaces. 
Harvesting rainwater also decreases the community dependence on groundwater for domestic use. 
Besides bridging the demand supply gap, it can also save energy to pump groundwater as recharge leads to rise in groundwater table. 
These days rainwater harvesting is being taken up on massive scale in many states in the country. 
Urban areas can specially benefit from rainwater harvesting as water demand has already outstripped supply in most of the cities and towns. 
Apart from the above mentioned factors, the issue desalinisation of water particularly in coastal areas and brackish water in arid and semi-arid areas,
transfer of water from water surplus areas to water deficit areas through inter-linking of rivers can be important remedies for solving water problem in India. 
However, the most important issue from the point of view of individual users, household and communities is pricing of water.

The objective of the National Water Policy, 2012 is to assess the existing situation and to propose a framework for a plan of action with a unified national perspective. 
In order to achieve the objective of the Policy, a number of recommendations have been made therein for conservation, development and improved management of water resources of the country. 
Some of the salient features of national water policy 2012 are:
• Emphasis on the need for a national water framework law, comprehensive legislation for optimum development of inter-State rivers and river valleys. 
• Water, after meeting the pre-emptive needs for safe drinking water and sanitation, achieving food security, supporting poor people dependent on agriculture for their livelihood and high priority allocation for minimum eco-system needs, be treated as economic good so as to promote its conservation and efficient use. • Adaptation strategies in view of climate change for designing and management of water resources structures and review of acceptability criteria has been emphasized. 
• A system to evolve benchmarks for water uses for different purposes, i.e., water footprints, and water auditing be developed to ensure efficient use of water. 
• Removal of large disparity in stipulations for water supply in urban areas and in rural areas has been recommended. • Water resources projects and services should be managed with communi

Thursday, July 25, 2024

NATIONALISM IN INDIA LESSON 2 (INDIA AND CONTEMPORARY WORLD-II) CLASS 10TH HISTORY BOOK QUESTION ANSWER

 

अध्याय  (LESSON) 2

भारत में राष्ट्रवाद (NATIONALISM IN INDIA )

भारत और समकालीन विश्व (INDIA AND CONTEMPORARY WORLD-II)

कक्षा 10 वीं

प्रश्न  1                    सत्याग्रह के विचार का क्या मतलब है ?

उत्तर :           सत्याग्रह के विचार में सत्य के आग्रह पर और सत्य की खोज पर जोर दिया जाता है  इसका अर्थ यह है कि अगर आपका उद्देश्य सच्चा है, यदि आपका संघर्ष अन्याय के खिलाफ है तो उत्पीडक से मुकाबला करने के लिए आपको शारीरिक बल की आवश्यकता नहीं है

प्रतिशोध की भावना आक्रमकता का सहारा लिए बिना सत्याग्रही केवल अहिंसा के सहारे भी अपने संघर्ष में सफल हो सकता है | इसके लिए दमनकारी शत्रु की चेतना को झिंझोड़ना चाहिए | उत्पीडक शत्रु को ही नहीं बल्कि सभी लोगों को हिंसा के द्वारा सत्य को स्वीकार करने पर की बजाय सच्चाई को देखने और सहज भाव से स्वीकार करने के लिए प्रेरित करती है | इस संघर्ष में अंततः सत्य की ही जीत होती है |

प्रश्न  2                    जलियाँवाला बाग हत्याकांड पर संक्षिप्त  नोट लिखो |

उत्तर :     सन् 1919 में इम्पीरियल लेजिस्लेटिव काउन्सिल ने जल्दबाजी में रॉल्ट एक्ट कानून पास किया | पूरे देश में लोग इस कानून का विरोध करने लगे | लोगों के विरोध को देखते हुए 10 अप्रैल को अमृतसर में मार्शल लॉ लगा दिया था | अमृतसर में जनरल डायर ने कमान संभाल ली थी |  13 अप्रैल  सन् 1919 को अमृतसर के जलियाँवाला बाग में बैसाखी के वार्षिक मेले में लोग शामिल होने आए थे | कुछ लोग रॉल्ट एक्ट कानून का विरोध करने के लिए शामिल हुए थे | शहर के बाहर के लोगों को यह नहीं पता था कि अमृतसर में मार्शल लॉ लगाया जा चुका  है | जनरल डायर हथियार बंद सैनिकों के साथ वहाँ पहुँचा और जाते ही उसने मैदान से बाहर जाने के सारे रास्ते बंद कर दिए  और सिपाहियों को गोलियाँ चलाने का आदेश दे दिया | सिपाहियों ने अंधाधुंध गोलियाँ चला दी  जिससे सकड़ों लोग मारे गए |

प्रश्न  3                    सत्याग्रह पर महात्मा गाँधी के विचार क्या थे ?

उत्तर :           गाँधी जी के अनुसार सत्याग्रह शारीरिक बल नहीं है | सत्याग्रही अपने शत्रु को कष्ट नहीं पहुँचाता | सत्याग्रह के प्रयोग में दुर्भावना के  लिए कोई स्थान नहीं होता | सत्याग्रह तो शुद्ध आत्म बल है | सत्य ही आत्मा का आधार होता है | इसलिए इस बल को सत्याग्रह का नाम दिया गया है | महात्मा गाँधी जी को विश्वास था कि अहिंसा का धर्म सभी भारतियों को एकता के सूत्र में बाँध सकता है |

प्रश्न  4                    उपनिवेशों में राष्ट्रवाद के उदय की प्रक्रिया उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन से जुड़ी हुई क्यों थी ? व्याख्या करें |

उत्तर :           दूसरे उपनिवेशों की तरह भारत में भी आधुनिक राष्ट्रवाद के उदय की परिघटना उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन के साथ गहरे तौर पर जुड़ी हुई थी | औपनिवेशिक शासकों के खिलाफ संघर्ष के दौरान लोग आपसी एकता को पहचानने लगे थे | उत्पीडन और दमन के साझा भाव ने विभिन्न समूहों को एक –दूसरे से बाँध दिया था | लोग समझने लगे थे कि एकजुट होकर ही औपनिवेशी ताकतों को देश से बाहर निकला जा सकता है | उपनिवेश विरोधी इसी भावना ने राष्ट्रवाद के उदय में सहायता पहुँचाई |

प्रश्न  5                    प्रथम विश्व युद्ध ने भारत में राष्ट्रीय आंदोलन के विकास में किस प्रकार योगदान दिया ? व्याख्या करें |

अथवा

प्रथम विश्व युद्ध ने एक नयी आर्थिक और  राजनीतिक स्थिति पैदा कर दी थी | व्याख्या करें |

उत्तर :           पहले विश्व युद्ध ने एक नयी आर्थिक और  राजनीतिक स्थिति पैदा कर दी थी | जिसके कारण भारत के राष्ट्रीय आंदोलन का विकास तेजी से हुआ | प्रथम विश्व युद्ध के कारण उत्पन्न निम्नलिखित परिस्थितयों के कारण राष्ट्रीय आंदोलन को बढ़ावा मिला | 

i)        प्रथम विश्व युद्ध के कारण रक्षा व्यय में काफी इज़ाफ़ा हुआ |  इस खर्च की भरपाई करने के लिए युद्ध के नाम पर कर्जे लिए गए  और करों में वृद्धि की गई | सीमा शुल्क बढ़ा दिया गया | आयकर के रूप में नया कर शुरू कर दिया गया |

ii)      युद्ध के कारण कीमतें तेजी से बढ़ रही थी | सन् 1913 से 1918 बीच कीमतें दोगुनी हो चुकी थी | जिसके कारण आम लोगों की मुश्किलें बढ़ गई |

iii)    गाँवों में सिपाहियों को जबरन भर्ती किया जाने लगा जिसके कारण ग्रामीण इलाकों में उपनिवेशिक सरकार के प्रति व्यापक गुस्सा था |  

iv)    1918 -19 और 1920-21 में देश में बहुत सारे हिस्सों में फसल खराब हो गई | जिसके कारण खाद्य पदार्थों का भारी अभाव हो गया | उसी समय फ्लू की बिमारी फ़ैल गई |  1921 की जनगणना के अनुसार दुर्भिक्ष (आकाल) के कारण और महामारी के कारण 120 -130 लोग मारे गए |

लोगों को उम्मीद थी कि युद्ध खत्म होने के बाद उनकी मुसीबतें कम हो जायेगी मगर ऐसा नहीं हुआ | इन सभी कारणों ने  राष्ट्रीय आंदोलन के विकास में अपना योगदान दिया |

प्रश्न  6                    रॉल्ट एक्ट कानून पर नोट लिखो ?

अथवा

भारतीय लोग रॉल्ट एक्ट के विरोध में क्यों थे ? व्याख्या करें |

उत्तर :           भारतीय लोग रॉल्ट एक्ट के विरोध में थे | इसके निम्नलिखित कारण थे|

i)        सन् 1919 में इम्पीरियल लेजिस्लेटिव काउन्सिल ने जल्दबाजी में रॉल्ट एक्ट  नाम का कानून पास किया |

ii)      भारतीय सदस्यों के  भारी विरोध के बावजूद इस कानून को पास किया गया था |

iii)    इस कानून के द्वारा सरकार को राजनीतिक गतिविधियों को कुचलने और राजनीतिक कैदियों को दो साल तक बिना मुकदमा चलाए जेल में बंद रखने का अधिकार मिल गया था |  

iv)    भारतीय लोग किसी भी वक्त बंदी बनाए जाने के भय से चिंतित रहने लगे थे |

 

प्रश्न  7                    गाँधी जी ने असहयोग आंदोलन वापस लेने का फैसला क्यों लिया ? व्याख्या करें |

उत्तर :           फरवरी 1922 गाँधी जी ने असहयोग आंदोलन वापस लेने का फैसला कर लिया | जिनके निम्नलिखित कारण थे |

i)        उन्हें लगता था कि आंदोलन हिंसक होता जा रहा है और सत्याग्रहियों को व्यापक प्रशिक्षण की जरूरत है | 

ii)      गोरखपुर के चौरी –चौरा में हिंसक घटना भड़क उठी |यहाँ बाज़ार में शांतिपूर्ण जुलुस पुलिस के साथ हिंसक टकराव में बदल गया | इस घटना में बीस से अधिक पुलिसकर्मी मारे गए | इस घटना के बारे में सुनते ही महात्मा गाँधी ने असहयोग आंदोलन रोकने का आह्वान किया |

iii)    कांग्रेस के कुछ नेता इस तरह के जनसंघर्षों से थक चुके थे | साथ ही वे 1919 के गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट के तहत गठित की गई प्रांतीय परिषद के चुनावों में हिस्सा लेना चाहते थे |

प्रश्न  8                    अध्याय  2 (भारत में  राष्ट्रवाद का उदय)  में दी गई भारत माता की छवि और अध्याय  1 (यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय) में दी गई  जर्मेनिया   की छवि की तुलना कीजिए |

उत्तर :           राष्ट्र की पहचान सबसे ज्यादा किसी तस्वीर में अंकित की जाती है  | इससे लोगों को ऐसी छवि गढ़ने में मदद मिलती है जिसके द्वारा वे राष्ट्र को पहचान सके | जर्मनी में राष्ट्रवाद के उदय के समय जर्मेनिया जर्मनी का राष्ट्र प्रतीक और भारत में राष्ट्रवादी आंदोलन के समय भारत माता की छवि भारतीय राष्ट्र का प्रतीक बन गई | इन दोनों की छवियों में को हम निम्नप्रकार से देखते हैं |

भारत माता की छवि

भारत माता की छवि स्वदेशी आंदोलन के परिणाम स्वरूप अबनिन्द्रनाथ टैगोर के द्वारा चित्रित की गई | उनके द्वारा बनाई गई छवि में भारत माता को सन्यासिनी के रूप में दिखाया गया है | वह शांत, गंभीर दैवी और अध्यात्मिक गुणों से युक्त दिखाई देती है | बाद में इस छवि को बड़े पैमाने पर तस्वीरों में उतारा जाने लगा | विभिन्न कलाकार यह तस्वीर बनाने लगे तो भारत माता की छवि को विविध रूपों में चित्रित किया जाने लगा | तस्वीरों में भारत माता को हाथ में त्रिशूल लिए दिखाया गया है | वह हाथी और शेर के बीच खड़ी है जो दोनों शक्ति और सत्ता के प्रतीक है |

जर्मेनिया की छवि

जर्मन राष्ट्र की प्रतीक जर्मेनिया की छवि को चित्रकार फिलिप वेट ने सन् 1848 में चित्रित किया है | जर्मेनिया की यह तस्वीर उस समय जर्मन राष्ट्र का रूपक बन गई थी | इस तस्वीर में जर्मेनिया को बलूत वृक्ष के पत्तों का मुकुट पहने दिखाया गया है | क्योंकि जर्मन बलूत वीरता का प्रतीक माना जाता है | एक अन्य छवि में जर्मेनिया को हाथ में तलवार लिए हुए राइन नदी की सुरक्षा करते हुए दर्शाया गया है |

           

प्रश्न  9                    1921 में असहयोग आंदोलन में शामिल होने वाले सभी सामाजिक समूहों की सूची बनाइए | इसके बाद उनमें से किन्हीं तीन को चुन कर उनकी आशाओं और संघर्षों के बारे में लिखते हुए यह दर्शाइए कि वे आंदोलन में शामिल क्यों हुए?

उत्तर :           1921 के असहयोग आंदोलन में कई सामाजिक समूहों ने हिस्सा लिया | जिनमें शहरों में विद्यार्थी, शिक्षक, वकील तथा उद्योगपति और व्यापारी शामिल हुए जबकि ग्रामीण क्षेत्रों से अवध के किसान, आंध्र प्रदेश की गुडेम पहाड़ियों के आदिवासी किसान और असम के बागान मजदूर शामिल हुए | असहयोग आंदोलन में भाग लेने वाले विभिन्न सामाजिक समूहों की अपनी-अपनी आशाएं थी | इन समूहों के संघर्ष के तरीके भी उनकी आशाओं के अनुरूप थे | उनमें से कुछ की आशाओं और संघर्षों को निम्नलिखित रूप से समझा जा सकता है |

                  अवध के किसान

                  अवध में सन्यासी बाबा रामचंद्र किसानों का नेतृत्व कर रहे थे | बाबा रामचन्द्र इससे पहले फिजी में गिरमिटिया मजदूर के तौर पर काम कर चुके थे | उनका आंदोलन तालुकदारों और जमींदारों का खिलाफ था | जो किसानों से भारी भरकम लगान और तरह-तरह के कर वसूल करते थे | किसानों को बेगार करनी पड़ती थी | किसानों की माँग थी कि लगान कम किया जाए और बेगार खत्म हो | साथ ही दमनकारी जमींदारों का सामाजिक बहिष्कार किया जाए |  

                              1921 में जब असहयोग आंदोलन फैला तो  किसानों कि ओर से तालुकदारों और व्यापारियों के मकानों पर हमले होने लगे | बाजारों में लूटपाट होने लगी और किसानों के द्वारा अनाज के गोदामों पर कब्जा कर लिया गया | बहुत सारे स्थानीय नेताओं ने किसानों को समझाया कि  गाँधी जी ऐलान कर दिया है कि अब कोई लगान नहीं भरेगा और जमीन गरीबों में बाँट दी जायेगी | महात्मा गाँधी का नाम लेकर सभी लोग अपनी कार्यवाहियों और आकांक्षाओं को सही ठहरा रहे थे |

आदिवासी किसान

आदिवासी किसानों ने महात्मा गाँधी के संदेश और स्वराज के विचार का कुछ और ही मतलब निकाला | इसके परिमाण स्वरूप आंध्रप्रदेश की गुडेम पहाड़ियों में 1920 के दशक की शुरुआत में एक अत्यंत गुरिल्ला आंदोलन फ़ैल गया | इस गुरिल्ला आंदोलन का नेतृत्व अल्लूरी सीताराम राजू कर रहे थे | क्योंकि अन्य वन क्षेत्रों की तरह यहाँ भी अंग्रेजों ने बड़े –बड़े जंगलों में लोगों के दाखिल होने पर पाबंदी लगा दी | लोग इन जंगलों में न तो मवेशियों को चरा सकते थे न ही जलावन के लिए लकड़ी और फल इक्कट्ठा कर सकते थे | न केवल उनकी रोजी –रोटी पर असर पड़ रहा था बल्कि उन्हें लगता था कि उनके परम्परागत अधिकार भी उनसे छीने जा रहे हैं | सरकार ने जब इन आदिवासी लोगों को सड़क निर्माण के इये बेगार करने पर मजबूर कर दिया तो लोगों ने बगावत कर दी |

इन समस्याओं के समाधान के लिए गुडेम पहाड़ियों के आदिवासियों ने असहयोग आंदोलन में भाग लिया | उनके नेता अल्लूरी सीताराम राजू का मानना था कि भारत अहिंसा के बल पर नहीं बल्कि केवल बल प्रयोग द्वारा ही आजाद हो सकता है | इसलिए गुडेम विद्रोहियों ने पुलिस थानों पर हमले किए, ब्रिटिश अधिकारियों को मारने की कोशिश की और स्वराज की प्राप्ति के लिए गुरिल्ला युद्ध चलाते रहे |

                  असम के बागान मजदूर

                  महात्मा गाँधी के विचारों और स्वराज की अवधारणा के बारे में असम के बागान मजदूरों कि अपनी समझ  थी  |            असम के बागान मजदूरों के लिए आजादी का मतलब यह था कि वे उन चार दीवारियों से जब चाहे जा सकते है जिनमें उनको बंद करके रखा गया था | उनके लिए आजादी का मतलब था कि वे अपने गाँवों से सम्पर्क रख पाएँगें और स्वतंत्र रूप से अपने गाँव और बागान आ सकेगें | क्योंकि 1859 के इनलैंड इमिग्रेशन एक्ट के तहत काम करने वाले मजदूरों को बिना इजाजत बागान से बाहर जाने की छूट नहीं होती थी और यह इजाजत उन्हें कभी कभार ही मिलती थी |

                              जब बागान मजदूरों ने असहयोग आंदोलन के बारे में सुना तो हजारों मजदूर अपने अधिकारियों की अवहेलना करने लगे | उन्होंने बागान छोड़ दिए और अपने घरों को चल दिए | उनको लगता था कि अब गाँधी राज आ रहा है इसलिए हर व्यक्ति को गाँव में जमीन मिल जाएगी | रेलवे और स्टीमरों की हड़ताल के कारण ए लोग अपनी मंजिल तक नहीं पहुँच सके और रास्ते में ही फँसे रह गए | उन्हें पुलिस ने पकड़ लिया और उनकी बुरी तरह पिटाई हुई |

प्रश्न  10                नमक यात्रा की चर्चा करते हुए स्पष्ट करे कि यह उपनिवेशवाद के खिलाफ प्रतिरोध का एक असरदार प्रतीक था ?

उत्तर :           देश को एक जुट करने के लिए महात्मा गाँधी को नमक एक शक्तिशाली प्रतीक दिखाई दिया | 31 जनवरी 1930 को उन्होंने वायसराय इरविन को एक पत्र लिखा | इस पत्र में उन्होंने 11 माँगों का उल्लेख किया | इनमें से एक महत्वपूर्ण माँग नमक पर लगे कर (टैक्स) को खत्म करने के बारे में थी | नमक अमीर – गरीब सभी इस्तेमाल करते थे | यह भोजन का अभिन्न हिस्सा था इसलिए नमक पर कर और उसके उत्पादन पर सरकारी इजारेदारी को महात्मा गाँधी ने ब्रिटिश सरकार का सबसे दमनकारी  पहलू बताया था |

                              महात्मा गाँधी का यह पत्र एक चेतावनी की तरह था | उन्होंने लिखा था कि अगर 11 मार्च तक उनकी माँगें न मानी गई तो कांग्रेस सविनय अवज्ञा आंदोलन छेड़ देगी | जब ब्रिटिश सरकार ने उनकी माँगे नहीं मानी तो गाँधी जी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन का आरम्भ कर दिया | महात्मा गाँधी ने अपने अपने 78 विश्वनीय वॉलेंटियरों के साथ नमक यात्रा शुरू कर दी |  12 मार्च 1930 को अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से चलकर  6 अप्रैल को 240 किलोमीटर दूर दांडी  नामक कस्बे में पहुँचकर खत्म हुई वहाँ गाँधी जी ने नमक बनाकर नमक कानून तोड़ा |

यह यात्रा और नमक कानून तोडना उपनिवेशवाद के खिलाफ विरोध का प्रतीक बन गई | पूरे देश में लोगों ने सरकारी कानूनों को भंग करना शुरू दिया गया | हजारों स्थानों पर नमक कानून तोडा गया | सरकारी नमक कारखानों के सामने प्रदर्शन किए गए | विदेही कपड़ों का बहिष्कार किया जाने लगा | शराब की दुकानों की पिकेटिंग की जाने लगी | गाँवों में तैनात कर्मचारी इस्तीफे देने लगे | किसानों ने लगान चुकाने और चौकीदारी कर देने से मना कर दिया | बहुत सारे स्थानों पर जंगलों में रहने वाले लोग वन कानूनों का उल्लंघन करने लगे |

प्रश्न  11                कल्पना कीजिए कि आप सिविल नाफरमानी आंदोलन में हिस्सा लेने वाली महिला है | बताइए कि इस अनुभव का आपके जीवन में क्या अर्थ होता ?

उत्तर :                       सिविल नाफरमानी (सविनय अवज्ञा)  आंदोलन 1930 में चलाया गया | यह सत्य और अहिंसा पर आधारित एक विशाल जन आंदोलन था |  सविनय अवज्ञा आंदोलन में एक महिला के रूप में भागीदार बनना एक गौरव की बात थी | मैं गाँधी जी से बहुत प्रभावित हुई थी | मेरे जैसे हजारों पुरुषों, महिलाओं और बच्चों भी उनसे अत्यधिक प्रभावित थे | बहुत सारी महिलाओं की तरह इस आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और जेल भी गई | गाँधी जी के आह्वान के बाद औरतों को राष्ट्र की सेवा करना अपना दायित्व समझ लिया था मैं भी राष्ट्र सेवा में इस दायित्व को निभाने में अपना योगदान दिया |

पहली बार मैंने अपने घर का एकांत छोड़ा, सत्याग्रह किया, विरोध मार्च में पुरुषों के साथ चली | शराब और विदेशी कपड़े बेचने वाली दुकानों के सामने पिकेटिंग की | इस आंदोलन के अनुभव ने मुझे स्वतंत्र भारत में भी सत्य के लिए और किसी भी अन्याय के खिलाफ लड़ने के लिए प्रेरणा दी |

प्रश्न  12                राजनीतिक नेता पृथक (अलग) निर्वाचिका के सवाल पर क्यों बँटें हुए थे ?

उत्तर :           राजनीतिक नेता पृथक निर्वाचिका के सवाल पर बँटें  हुए थे | जिसके निम्नलिखित कारण थे |

कांग्रेस ने लम्बे समय तक दलितों पर ध्यान नहीं दिया क्योंकि कांग्रेस रूढ़िवादी स्वर्ण हिंदू सनातनियों से डरी हुई थी | महात्मा गाँधी के द्वारा अस्पर्श्यता को खत्म करने के लिए ऐलान किया गया | उनको अछूत कहने की बजाय हरिजन कहना शुरू किया |  मंदिरों,  सार्वजनिक तालाबों, सड़कों और कुओं पर समान अधिकार दिलाने के बहुत से कार्य किए | लेकिन बहुत सारे दलितों नेता अपने समुदाय की समस्याओं का अलग समाधान चाहते थे | वे खुद को संगठित करने लगे | उन्होंने शिक्षण संस्थानों में आरक्षण के लिए आवाज उठाई  और अलग निर्वाचन क्षेत्रों की बात कही ताकि वहाँ से विधायी परिषदों के लिए दलितों को ही चुनकर भेजा जा सके | उनका मानना था कि उनकी सामाजिक अपंगता केवल राजनीतिक सशक्तिकरण से ही दूर हो सकती है |

डॉ॰ भीमराव अम्बेडकर ने 1930 में दलितों को दमित वर्ग  एसोसिएशन (Depressed Classes Association) में संगठित किया | दलितों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्रों के सवाल पर दूसरे गोलमेज सम्मलेन में महात्मा गाँधी के साथ उनका काफी विवाद हुआ | अंग्रेजों ने अम्बेडकर की बात मान ली तो गाँधी जी  अनशन पर बैठ गए |  क्योंकि उनका मानना था कि ऐसा होने पर भारत में सामाजिक एकीकरण की प्रक्रिया धीमी पड़ जाएगी | आखिरकार सितम्बर 1932 में अम्बेडर ने गाँधी जी की राय मान ली और पूना पैक्ट पर हस्ताक्षर किए | इस समझौते के अनुसात दमित वर्गों (अनुसूचित जातियों )  को प्रांतीय और केन्द्रीय विधायी परिषदों में आरक्षित सीटें मिल गई | हालाँकि उनके लिए मतदान समान्य निर्वाचन क्षेत्रों में ही होता था |

असहयोग और खिलाफत आंदोलन के शांत होने के बाद मुसलमानों का एक बड़ा तबका कांग्रेस से कटने लगा था |कांग्रेस हिंदू महासभा जैसे हिंदू धार्मिक संगठनों के करीब आने लगी थी | इससे हिंदू मुसलमानों के बीच संबंध खराब होते चले गए | उनके बीच दूरियाँ बढ़ती चली गई | कांग्रेस और मुस्लिम लीग ने एकता स्थापित करने का प्रयास किया लेकिन महत्वपूर्ण मतभेद भावी विधान सभाओं में प्रतिनिधि के सवाल पर थे | मुस्लिम लीग के नेताओं में से एक, मोहम्मद अली जिन्ना का कहना था कि अगर मुसलमानों को केन्द्रीय सभा में आरक्षित सीटें दी जाएँ और मुस्लिम बहुल प्रान्तों (पंजाब और बंगाल) में  मुसलमानों की आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व दिया जाए तो वे मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचिका की माँग छोड़ने के लिए तैयार हैं |

मुस्लिम लीग के अध्यक्ष  मोहम्मद इकबाल ने मुसलमानों के लिए अल्पसंख्यक राजनीति के हितों, संस्कृति और परम्परा की  रक्षा के उद्देश्य से पृथक निर्वाचिका की जरूरत पर जोर दिया | उन्हें डर था कि हिंदू  बहुमत के प्रभाव में मुसलमानों की संस्कृति और पहचान डूब जाएगी |

प्रश्न  13                आर्थिक स्तर पर असहयोग आंदोलन के प्रभावों का वर्णन कीजिए ?

उत्तर :           आर्थिक मोर्चे पर असहयोग आंदोलन का असर और भी ज्यादा नाटकीय रहा जिसे हम निम्न प्रकार से समझ सकते है |

1         विदेशी सामानों का बहिष्कार किया गया |

2         शराब की दुकानों की पिकेटिंग की गई |

3         विदेशी कपड़ों की होली जलाई गई |

4         1921से 1922 के बीच विदेशी कपड़ों का आयात आधा रह गया था | उसकी कीमत 102 करोड़ से घटकर 57 करोड़ रह गई थी |

5         बहुत सारे स्थानों पर  व्यापारियों ने विदेशी वस्तुओं का व्यापार करने और विदेशी व्यापार में पैसा लगाने से इनकार कर दिया |

6         लोग आयातित विदेशी कपड़े को छोड़कर भारतीय कपड़ा पहनने लगे तो भारतीय कपड़ा मिलो और हथकरघों का उत्पादन भी बढ़ने लगा | 

प्रश्न  1                    पहला विश्व युद्ध कब शुरू हुआ ?

उत्तर :           सन् 1914

प्रश्न  2                    1921 की जनगणना के अनुसार दुर्भिक्ष (आकाल) और महामारी के कारण कितने लोग मारे गए?

उत्तर :           120-130 लाख लोग

प्रश्न  3                    जबरन भर्ती से क्या अभिप्राय है ?

उत्तर :           ऐसी प्रक्रिया जिसमें अंग्रेज भारत के लोगों को जबदस्ती सेना में भर्ती कर लेते थे |

प्रश्न  4                    महात्मा गाँधी दक्षिणी अफ्रीका भारत कब लौटे ?

उत्तर :           जनवरी 1915 ई०

प्रश्न  5                    महात्मा गाँधी ने दक्षिणी अफ्रीका की नस्लभेदी सरकार से किस प्रकार लोहा किस पद्दति से लिया था ?

उत्तर :           सत्याग्रह के द्वारा   

प्रश्न  6                    महात्मा गाँधी के अनुसार सत्याग्रह के विचार में  किस विचार पर जोर दिया जाता है ?

उत्तर :           महात्मा गाँधी के अनुसार सत्याग्रह के विचार में सत्य की शक्ति पर आग्रह और सत्य की खोज पर जोर दिया जाता है |

प्रश्न  7                    सन् 1917 में गाँधी जी ने दमनकारी बागान व्यवस्था के खिलाफ किसानों को प्रेरित किया और सत्याग्रह आदोलन कहाँ चलाया ?

उत्तर :           चम्पारण (बिहार)

प्रश्न  8                    गाँधी जी ने गुजरात खेडा जिले के किसानों के की मदद के लिए सत्याग्रह क्यों किया था ?

उत्तर :           सन् 1917 में फसल खराब हो जाने और प्लेग की महामारी के कारण किसान लगान चुकाने की हालत में नहीं थे | इसलिए गाँधी जी ने गुजरात खेडा जिले के किसानों के की मदद के लिए सत्याग्रह  किया था |

प्रश्न  9                    सन् 1918  में गाँधी जी सूती कपड़ा कारखानों के मजदूरों के  साथ सत्याग्रह  करने के लिए कहाँ गए ?

उत्तर :           अहमदाबाद

प्रश्न  10                सन् 1919 में इम्पीरियल लेजिस्लेटिव काउन्सिल ने जल्दबाजी में किस कानून को पास किया था ?

उत्तर :           रॉल्ट एक्ट

प्रश्न  11                जलियाँवाला बाग  हत्याकांड की घटना कब और कहाँ हुई ?

उत्तर :           13 अप्रैल  सन् 1919 को अमृतसर के जलियाँवाला बाग में हुई |

प्रश्न  12                जलियाँवाला बाग  में एकत्रित लोगों पर अंधाधुंध गोलियाँ चलाने का आदेश किसने दिया था ?

उत्तर :           जनरल डायर ने

प्रश्न  13                प्रथम विश्व युद्ध कब से कब तक चला ?

उत्तर:            सन् 1914 से 1919 तक

प्रश्न  14                प्रसिद्ध पुस्तक 'हिंद स्वराज' के लेखक कौन हैं

उत्तर:            महात्मा गाँधी 

प्रश्न  15                प्रथम विश्व युद्ध के समय इस्लामिक विश्व का आध्यात्मिक नेता (खलीफा) कौन था?

उत्तर:            ऑटोमन सम्राट 

प्रश्न  16                बम्बई में खिलाफत समिति का उत्तर गठन किसने किया था

उत्तर:            मोहमद अली और शौकत अली नाम के अली बंधुओं ने।

प्रश्न  17                खिलाफत समिति का गठन क्यों किया गया ?

उत्तर :           प्रथम विश्व युद्ध के बाद तुर्की की हार के कारण ऑटोमन सम्राट (खलिफा) की शक्तियों को कम किया जा रहा था। जिसे बचाने के लिए मार्च 1919 में बम्बई में खिलाफत समिति का गठन किया गया।

प्रश्न  18                सितम्बर 1920 में कांग्रेस का अधिवेशन कहां हुआ?

उत्तर :           कलकत्ता

प्रश्न  19                सितम्बर 1920 का कांग्रेस का कलकत्ता अधिवेशन क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर :           इस अधिवेशन में गांधी जी ने कांग्रेस के नेताओं को खिलाफत आंदोलन के समर्थन और असहयोग आन्दोलन शुरू करने के लिए राजी कर लिया था। 

प्रश्न  20                दिसम्बर  1920 में कांग्रेस का अधिवेशन कहां हुआ?

उत्तर :           नागपुर(महाराष्ट्र )

प्रश्न  21                गाँधी जी की सबसे प्रसिद्ध पुस्तक कौन सी है ?

उत्तर ;     हिंद स्वराज (1909 में प्रकाशित हुई)

प्रश्न  22                असहयोग आंदोलन कब शुरू हुआ ?

उत्तर :           सन 1921 में

प्रश्न  23                गाँधी जी ने असहयोग आंदोलन वापस कब लिया ?

उत्तर :           फरवरी 1922

प्रश्न  24                इनलैंड इमिग्रेशनएक्ट कब पास किया गया ?

उत्तर :           1859 ईस्वी में

प्रश्न  25                गाँधी जी ने असहयोग आंदोलन वापस लेने का निर्णय क्यों लिया ?

उत्तर :           उत्तरप्रदेश के गोरखपुर में चौरी –चौरा नामक स्थान पर हुई हिंसक घटना के कारण गाँधी जी ने असहयोग आंदोलन वापस लेने का फैसला लिया था |

प्रश्न  26                अल्लुरी सीताराम राजू को फाँसी कब दी गई ?

उत्तर :           सन् 1924  में

प्रश्न  27                भारत में  उपनिवेशी शासन के दौरान प्रांतीय परिषदों का गठन किस एक्ट के तहत किया गया ?

उत्तर :           1919 के गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट के तहत

प्रश्न  28                विश्व व्यापी आर्थिक मंदी किस दशक में रही ?

उत्तर : 1930 के दशक में (1926 से 1930 के बीच इसका सबसे अधिक प्रभाव रहा )

प्रश्न  29                साइमन कमीशन भारत का आया ?

उत्तर :           सन् 1928

प्रश्न  30                भारत में साइमन कमीशन का विरोध क्यों हुआ ?

उत्तर :           क्योंकि उसमें सात सदस्य थे जिनमें से कोई भी भारतीय नहीं था |

प्रश्न  31                साइमन कमीशन के अध्यक्ष कौन थे ?

उत्तर :           सर जॉन साइमन

प्रश्न  32                डोमीनियन स्टेट का दर्जा कब किसने और क्यों दिया दिया ?

उत्तर :           साइमन कमीशन के प्रति लोगों के विरोध को शांत करने के लिए 1929 ई० में भारत के वायसराय लार्ड इरविन ने अक्टूबर 1929 में भारत को डोमीनियन स्टेट का दर्जा देने का ऐलान किया था 

प्रश्न  33                लाहौर में हुए दिसम्बर 1929 के कांग्रेस के अधिवेशन के अध्यक्ष कौन थे ?

उत्तर :           जवाहर लाल नेहरु

प्रश्न  34                पूर्ण स्वराज की माँग कब और कहाँ की गई ?

उत्तर :           लाहौर में हुए दिसम्बर 1929 के कांग्रेस के अधिवेशन में

प्रश्न  35                भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने लेजिस्लेटिव एसेम्बली में बम्ब कब फेंका ?

उत्तर :           अप्रैल 1929

प्रश्न  36             कांग्रेस के किस  अधिवेशन में यह तय किया गया कि 26 जनवरी 930 को स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा और उस दिन लोग पूर्ण स्वराज के लिए संघर्ष की शपथ लेंगे |

उत्तर :           लाहौर में हुए दिसम्बर 1929 के कांग्रेस के अधिवेशन में

प्रश्न  37                सविनय अवज्ञा आंदोलन गाँधी जी के द्वारा कब शुरू किया गया ?

उत्तर :           6 अप्रैल 1930 गाँधी जी ने दांडी पहुँचकर नमक कानून तोडा और इसी के साथ सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू हो गया |

प्रश्न  38                महात्मा गाँधी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन पहली बार कब वापस लिया ?

उत्तर :           5  मार्च  1931 को

प्रश्न  39                दूसरा गोलमेज सम्मेलन कब और कहाँ आयोजित किया गया 

उत्तर :           दिसम्बर  1931 को लंदन में