लौह अयस्क
लौह अयस्क प्रमुख लौह युक्त धात्विक खनिज है |
यह उद्योगों के विकास के लिए एक सुदृढ़ आधार प्रदान करता है | लौहे कों आज की
सभ्यता की रीढ़ भी कहा जाता है | किसी भी प्रदेश के आर्थिक विकास और जीवन स्तर का
अनुमान इस बात से भी लगाया जाता है कि वहाँ कितनी मात्रा में लौहे का प्रयोग किया
जाता है |
भारत में लौह अयस्क के भंडार
भारत में लौह अयस्क के प्रचुर संसाधन है |
यहाँ एशिया के विशालतम लौह अयस्क के भंडार आरक्षित है | हमारे देश में लौह अयस्क
के दो प्रमुख प्रकार हेमेटाइट तथा मैग्नेटाइट पाए जाते है | ये अयस्क सर्वोतम गुणवत्ता के है इसलिए विश्व
के विभिन्न देशों में भारी माँग है |
लौह
अयस्क की खदानें देश के उत्तर-पूर्वी पठारी प्रदेश में कोयला क्षेत्रों के निकट
स्थित है जो इसके लिए लाभदायक है |
हमारे देश में 2004-05
में लौह अयस्क के आरक्षित भंडार लगभग 200 करोड़
टन थे | लौह अयस्क के कुल आरक्षित भंडारों
का लगभग 95 प्रतिशत भाग ओडिशा, झारखंड, छतीसगढ़, कर्नाटक,
गोवा, आंध्र प्रदेश तथा तमिलनाडु राज्यों में स्थित हैं |
भारत में लौह का उत्पादन तथा वितरण
भारत में सन् 1950-51
में 42 लाख टन लौह-अयस्क का उत्पादन हुआ था जो
बढ़कर सन् 2010-11 में 2080 लाख टन हो गया | अत : लौहे
के उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है | भारत के विभिन्न राज्यों में लौह अयस्क
के वितरण कों निम्न प्रकार से समझा जा
सकता है |
कर्नाटक
कर्नाटक भारत के कुल लौह अयस्क उत्पादन का
लगभग 25 प्रतिशत (एक चौथाई ) लौह अयस्क पैदा करके प्रथम स्थान पर है | यहाँ लौह
अयस्क के निक्षेप वल्लारी जिले के बेलारी, संदूरतथा हासपेट क्षेत्र में लौह अयस्क
की खानें है | चिकमंगलूर जिले बाबा बूदन पहाडियों, कालाहांडी तथा केमानगुडी प्रमुख
खानें है | इनके अलावा कुद्रेमुख तथा शिवमोगा, चित्रदुर्ग और तुमकुरु जिलों के कुछ
हिस्सों में पाए जाते हैं |
छतीसगढ़
यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा लौह अयस्क उत्पादक
राज्य है | यह राज्य भारत के कुल लौह अयस्क उत्पादन का लगभग 20 प्रतिशत लौह अयस्क पैदा करता है |
इस राज्य में लौह अयस्क की पट्टी दुर्ग, दांतेवाड़ा और बैलाडीला तक विस्तृत है | दांतेवाड़ा
जिले का बैलाडीला तथा दुर्ग जिले के डल्ली और राजहरा में देश की महत्वपूर्ण लौह
अयस्क की खदानें हैं | इनके अलावा रायगढ़, बिलासपुर तथा सरगुजा अन्य उत्पादक जिले
है | यहाँ का अधिकाँश लौहा अयस्क विशाखापट्टनम पत्तन के द्वारा जापान कों निर्यात
कर दिया जाता है |
ओडिशा
यहाँ भारत का 19 प्रतिशत से अधिक लौह अयस्क
पैदा किया जाता है | इस राज्य में लौह अयस्क सुंदरगढ़, मयूरभंज, झार स्थित पहाड़ी
श्रंखलाओं में पाया जाता है | यहाँ की महत्वपूर्ण खदानें गुरुमहिसानी, सुलाएपत,
बदामपहाड़ (मयूरभंज), किरुबुरु (केन्दुझर) तथा बोनाई (सुंदरगढ़) है |
गोवा
पिछले कुछ दशकों से गोवा तेजी से महत्वपूर्ण
उत्पादक के रूप में उभरा है | यह राज्य भारत के कुल लौह अयस्क उत्पादन का लगभग 16 प्रतिशत लौह अयस्क पैदा करके चौथे
स्थान पर है |यहाँ का लौहा अयस्क घटिया किस्म का है जिसमें 40 से 60 प्रतिशत तक ही शुद्ध लौहा प्राप्त होता है | यहाँ के लौह अयस्क कों मारमागाओ
(मारमागोवा) पत्तन से निर्यात कर दिया जाता है |
झारखंड
इस राज्य में भारत का 15 प्रतिशत लौह अयस्क का
उत्पादन करता है | झारखंड में भी ओडिशा की तरह पहाड़ी श्रंखलाओं में कुछ सबसे
पुरानी लौह अयस्क की खदानें है | इस राज्य में लौह अयस्क की अधिकतर खादानें लौह
एवं इस्पात संयंत्र के आस पास ही है | नोआमंडी और गुआ जैसी महत्वपूर्ण खदानें इस
राज्य के पूर्वी और पश्चिमी जिलों में स्थित है | सिंहभूम, पलामू धनबाद, हजारीबाग,
संथाल परगना तथा राँची मुख्य उत्पादक जिले है |
महाराष्ट्र
इस राज्य की प्रमुख खदानें चंद्रपुर, भंडारा
और रत्नागिरी जिलों में पाइ जाती है |
तेलंगाना
इस राज्य की मुख्य खदानें करीमनगर , वारांगल
जिले में स्थित है |
आन्ध्रप्रदेश
यहाँ के कुरुनूल, कुडप्पा तथा अनंतपुर जिलों
में लौह अयस्क के भंडार है |
तमिलनाडु
इस राज्य के सेलम तथा नीलगिरी जिले लौह अयस्क
के मुख्य क्षेत्र है |
हरियाणा
इस राज्य के महेंद्रगढ़ जिले के नारनौल क्षेत्र
में लौह अयस्क के भंडार हैं |