Monday, August 8, 2022

Distribution of Continents and Oceans Lesson 4 class 11th Geography

अध्याय 4

महासागरों और महाद्वीपों का वितरण

(भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत )  कक्षा -11

 

प्रश्न : निम्न में से किसने सर्वप्रथम यूरोप, अफ्रीका व अमेरिका के साथ स्थित होने की सम्भावना व्यक्त की ?

उत्तर : अब्राहम ऑरटेलियस (Abraham Ortelius)

प्रश्न : पोलर फ्लीइंग बल (ध्रुवीय फ्लीइंग बल) निम्नलिखित में से किससे संबंधित है ?

क.     पृथ्वी का परिक्रमण

ख.     पृथ्वी का घूर्णन

ग.      गुरुत्वाकर्षण

घ.      ज्वारीय बल

 

 

उत्तर : पृथ्वी का घूर्णन

इनमें से कौन सी लघु प्लेट नहीं है ?

   क).            नजका

  ख).            फिलिपिन

    ग).            अरब

   घ).            अंटार्कटिक

उतर : अंटार्कटिक

प्रश्न :  सागरीय अधस्थल विस्तार सिद्धांत की व्याख्या करते हुए हैस ने निम्न में से किस अवधारणा पर विचार नहीं किया ?

   क).            मध्य महासागरीय कटकों  के साथ ज्वालामुखी क्रियाएँ  |

  ख).            महासागरीय नितल की चट्टानों में सामान्य व उत्क्रमण चुम्बकत्व क्षेत्र की पट्टियों का होना | 

    ग).            विभिन्न महाद्वीपों में जीवाश्मों का वितरण |

   घ).            महासागरीय तल की चट्टानों की आयु |

उतर : विभिन्न महाद्वीपों में जीवाश्मों का वितरण |

प्रश्न : हिमालय पर्वतों के साथ  भारतीय प्लेट की सीमा किस तरह की प्लेट सीमा है ?

   क).            महासागरीय - महाद्वीपीय अभिसरण

  ख).            अपसारी सीमा

    ग).            रूपान्तरण सीमा

   घ).            महाद्वीपीय - महाद्वीपीय अभिसरण

उतर : महाद्वीपीय - महाद्वीपीय अभिसरण

प्रश्न : महाद्वीपों के प्रवाह के लिए वेगनर ने किन बलों का उल्लेख किया है ?

उतर :  महाद्वीपों के प्रवाह के लिए वेगनर ने जिन  बलों का उल्लेख किया है  वे निम्नलिखित है |

   क).            पोलर फ्लीइंग बल (ध्रुवीय फ्लीइंग बल)   

यह बल पृथ्वी के घूर्णन से संबंधित है |  पृथ्वी भूमध्य रेखा पर उभरी हुई है जो ध्रुवीय फ्लीइंग बल के कारण ही है |

  ख).            ज्वारीय बल 

यह बल सूर्य और चंद्रमा के आकर्षण से संबंधित है | जिससे महासागरों में ज्वार पैदा होते है |

प्रश्न : मेंटल में संवहन धाराओं के आरम्भ होने तथा बने रहने के क्या कारण है ?

उतर :  पृथ्वी की मेंटल  परत में रेडियों एक्टिव (रेडियोधर्मी) पदार्थों से उत्पन्न ताप में भिन्नता पाई जाती है | इसी ताप भिन्नता के कारण ही मेंटल में संवहन धाराएँ  आरम्भ होती है और लगातार बनी रहती है |  आर्थर होम्स के अनुसार इस तरह की संवहन धाराएँ पुरे मेंटल परत में विद्यमान है |

प्रश्न : प्लेट की रूपान्तरण सीमा, अभिसरण सीमा और अपसारी सीमा में मुख्य अन्तर क्या है ?

उत्तर : प्लेट की रूपान्तरण सीमा, अभिसरण सीमा और अपसारी सीमा में अन्तर निम्न प्रकार से स्पष्ट है |

रूपान्तर सीमा ( Transform Boundaries):

जब  दो प्लेटें एक दूसरे के क्षैतिज दिशा में गति करती है  तो उन दोनों प्लेटों के बीच की सीमा कों रूपांतर सीमा कहते है | इन प्लेटों के द्वारा न तो नई पर्पटी निर्माण होता है और न ही विनाश क्योंकि इन सीमा पर प्लेटें एक दूसरे के साथ  क्षैतिज दिशा में सरक जाती है | इन्हें संरक्षी प्लेट सीमा भी कहते है |

चित्र : रूपान्तर सीमा

अभिसरण सीमा (Convergent Boundaries):

जब दो प्लेटें एक दूसरे के निकट आती है तो उन दोनों प्लेटों के बीच की सीमा कों अभिसारी सीमा कहते है | एक दूसरे के निकट आने  पर इन प्लेटों के किनारों का विनाश होता है |  क्योंकि एक प्लेट दूसरी प्लेट के नीचे धँस जाती है और टूट जाती है |  इन प्लेटों कों इसलिए विनाशकारी प्लेटें भी कहते है |

चित्र : अभिसरण सीमा

अपसारी सीमा (Divergent Boundaries ):

 जब दो प्लेटें एक दूसरे के विपरीत दिशा में गति करती है तो उन दोनों प्लेटों के बीच की सीमा कों अपसारी सीमा कहते है | एक दूसरे से दूर जाने पर इन प्लेटों के बीच नई पर्पटी का निर्माण होता है |  इन प्लेटों कों इसलिए रचनात्मक प्लेटें भी कहते है |

                             

                                                          चित्र : अपसारी सीमा

प्रश्न : दक्कन ट्रैप के निर्माण के दौरान भारतीय  स्थल खंड की स्थिति क्या थी ?

उत्तर :  दक्कन ट्रैप  का निर्माण आज से लगभग 6  करोड़ वर्ष पहले आरम्भ हुआ | इस समय  भारतीय  स्थल खंड  भूमध्य रेखा के निकट  स्थित था | यह भूमध्य रेखा के दक्षिण में  था |

प्रश्न : पृथ्वी के कितने प्रतिशत भाग पर महाद्वीप (स्थल ) है ?

उत्तर : 29 प्रतिशत

प्रश्न : पृथ्वी के कितने प्रतिशत भाग पर महासागर  (जल ) है ?

उत्तर : 71 प्रतिशत

प्रश्न : अब्राहम ऑरटेलियस कौन थे ?

उत्तर : अब्राहम ऑरटेलियस एक डच मानचित्रवेता थे जिन्होंने सन् 1596  में सर्वप्रथम यह सम्भावना व्यक्त की थी कि उत्तर और दक्षिणी अमेरिका, यूरोप तथा अफ्रीका एक साथ जुड़े हुए थे |

प्रश्न : किस विद्वान ने उत्तर और दक्षिणी अमेरिका, यूरोप तथा अफ्रीका महाद्वीपों कों अपने मानचित्र में इकट्ठा दिखाया था ?

उत्तर : एन्टोनियो पैलेग्रीनी  ( Antonio Pellegrini )

प्रश्न :  महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत कब और किसने दिया ?

उत्तर : सन् 1912 में जर्मन मौसमविद अल्फ्रेड वेगनर (Alfred Wegner) ने |

प्रश्न :  महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत किससे संबंधित है ?

उत्तर : महाद्वीपों और महासागरों के वितरण से

प्रश्न : अल्फ्रेड वेगनर ने सभी महाद्वीपों से जुड़े बड़े भू खंड कों क्या माना था ?

उत्तर : पेंजिया

प्रश्न : पेंजिया का क्या अर्थ है ?

उत्तर :संपूर्ण पृथ्वी

प्रश्न : अल्फ्रेड वेगनर ने सभी महाद्वीपों से जुड़े बड़े भू खंड कों  चारों ओर से घेरे हुए विशाल महासागर कों क्या माना था ?

उत्तर : पैन्थालासा

प्रश्न : पैन्थालासा का क्या अर्थ है ?

उत्तर : पैन्थालासा का अर्थ है जल ही जल |

प्रश्न : अल्फ्रेड वेगनर के महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत के अनुसार पेंजिया का विभाजन कब हुआ ?

उत्तर : लगभग 20 करोड़ वर्ष पहले |

प्रश्न : अल्फ्रेड वेगनर के महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत के अनुसार पेंजिया का विभाजन किन दो बड़े महाद्वीपों के रूप में हुआ ?

उत्तर : लारेसिया  (Laurasia ) : यह उत्तरी भूखंड  के नाम से जाना जाता है |

गोंडवानालैंड (Gondwana land ) : यह दक्षिणी भू खंड  के नाम से जाना जाता है |

प्रश्न :  लारेसिया  (Laurasia ) तथा गोंडवानालैंड (Gondwana land ) के बीच कौन से सागर की उत्पत्ति हुई ?

उत्तर : टेथिस सागर

प्रश्न :   कंप्यूटर प्रोग्राम की सहायता से अटलांटिक (अंध महासागर ) के तटों कों जोड़ते हुए मानचित्र  कब और किसने तैयार किया ?

 उत्तर : सन् 1964 में  बुलर्ड (Bullard)

प्रश्न : टिलाइट (Tillite) क्या है ?

उत्तर :टिलाइट वे अवसादी चट्टानें है जो हिमानी निक्षेपण से निर्मित होती है |

प्रश्न : संवहन धारा सिद्धांत (Conventional Current Theory) कब और किसने प्रतिपादित किया ?

 उत्तर :  1930 के दशक में आर्थर होम्स  (Arthur Homes) ने | 

प्रश्न : गहराई व उच्चावच के प्रकार के आधार पर महासागरीय तल कों कितने प्रमुख भागों में विभाजित किया जाता है ? उनके नाम बताओ |

उत्तर :  गहराई व उच्चावच के प्रकार के आधार पर महासागरीय तल कों तीन प्रमुख भागों में विभाजित किया जाता है |

1.       महाद्वीपीय सीमा

2.       गहरे समुद्री बेसिन

3.       मध्य- महासागरीय कटक

प्रश्न : महाद्वीपीय सीमा से आप क्या समझते है ? इसमें महासागरीय तल की कौन कौन से भाग शामिल है ?

उत्तर :   महासागरीय तल वह भाग जो महाद्वीपीय किनारों और गहरे समुद्री बेसिन के बीच होता है महाद्वीपीय सीमा कहलाता है | इसके अंतर्गत निम्नलिखित भाग शामिल किए जाते है |

1.       महाद्वीपीय मग्नतट

2.       महाद्वीपीय ढाल

3.       महाद्वीपीय उभार

4.       गहरी महासागरीय खाइयाँ

 प्रश्न : वितलीय मैदान से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर : महासागरीय तल के विस्तृत मैदान  भाग जो महाद्वीपीय  तटों और मध्य महासागरीय कटकों के बीच स्थित है उसे वितलीय मैदान कहते है |  इन्हें गहरे समुद्री बेसिन समुद्री बेसिन भी कहते है |  वितलीय मैदान वह क्षेत्र है जहाँ महाद्वीपों से बहाकर लाए गए अवसाद इनके तटों से दूर निक्षेपित होते है |

प्रश्न :  मध्य- महासागरीय कटक किसे कहते है ?

उत्तर:  मध्य- महासागरीय कटक  आपस में जुड़े हुए पर्वतों की एक श्रंखला है जो महासागरीय जल में डूबी हुई है |  ये मध्य- महासागरीय कटक  पृथ्वी के धरातल पर पाई जाने वाली सबसे बड़ी पर्वत श्रंखला है | ये ज्वालामुखी से निर्मित है और निरंतर इसमें  निर्माण प्रकिया चलती रहती है | क्योंकि ये सक्रिय ज्वालामुखी क्षेत्र है |

प्रश्न : किन क्षेत्रों पर भूकंप के उद्गम क्षेत्र कम गहराई पर होते है ?

उत्तर: मध्य- महासागरीय कटकों के क्षेत्र

प्रश्न : किन क्षेत्रों पर भूकंप के उद्गम क्षेत्र अधिक  गहराई पर होते है ?

 उत्तर: अल्पाइन हिमालय पट्टी तथा प्रशांत महासागरीय किनारे

प्रश्न : रिंग ऑफ फायर (अग्नि वलय ) किसे कहते है ?

उत्तर: प्रशांत महासागर के  किनारे सक्रिय ज्वालामुखी के क्षेत्र है इसी कारण से प्रशांत महासागर के चारों ओर के क्षेत्र कों  रिंग ऑफ फायर (अग्नि वलय ) कहते है |

प्रश्न : सागरीय अधस्थल विस्तार (Sea Floor Spreading) परिकल्पना किसने प्रतिपादित की ?

उत्तर: हैरी हैस ने  सन् 1961 में

प्रश्न : प्लेट विवर्तनिकी (प्लेट टक्टोनिक्स) की अवधारणा किन विद्वानों की देन है ?

उत्तर: प्लेट विवर्तनिकी की अवधारणा सन् 1968 में मैक्कैन्जी, पार्कर तथा मोर्गन इन तीन विद्वानों की सम्मलित विचारधारा कों कहा गया |

प्रश्न : दुर्बलता मंडल (एस्थेनोंस्फीयर ) (Asthenosphere) किसे कहते है ?

उत्तर:  पृथ्वी की ठोस ऊपरी प्लेटों के नीचे मैंटल परत में ऐसा मंडल है जिस पर प्लेटे तैरती रहती है उसे दुर्बलता मंडल कहते है |

प्रश्न : महाद्वीपीय प्लेट किसे कहते है ?

उत्तर: एक प्लेट कों महाद्वीपीय प्लेट कहते है यदि उसका अधिकतर भाग महाद्वीप से संबंधित  हो | जैसे अंटार्कटिक प्लेट, यूरेशियन प्लेट , अफ्रीकन प्लेट, उत्तरी अमेरिकन प्लेट , दक्षिणी अमेरिकन प्लेट तथा इंडो-ऑस्ट्रेलियन प्लेट आदि |

प्रश्न: महासागरीय प्लेट किसे कहते है ?

उत्तर: एक प्लेट कों महासागरीय प्लेट कहते है यदि उसका अधिकतर भाग महासागर से संबंधित हो | प्रशांत महासागरीय प्लेट,

प्रश्न: बड़ी प्लेटे कितनी है? उनके नाम बताओ |

उत्तर: कुल बड़ी प्लेटे सात है | यूरेशियन प्लेट , अफ्रीकन प्लेट, उत्तरी अमेरिकन प्लेट , दक्षिणी अमेरिकन प्लेट,  इंडो-ऑस्ट्रेलियन प्लेट प्रशांत महासागरीय प्लेट तथा अंटार्कटिक प्लेट |

प्रश्न: छोटी प्लेटें कितनी है? कुछ महत्वपूर्ण छोटी प्लेटों के नाम बताओ |

उत्तर: विद्वानों के अनुसार लगभग 20 छोटी प्लेटें है | जिनमें से कुछ महत्वपूर्ण निम्नलिखित है |

नजका प्लेट, कोकोस प्लेट , अरेबियन प्लेट, फिलिपिन प्लेट, कैरोलिन प्लेट तथा फ्यूजी प्लेट |

प्रश्न: किस प्लेट की प्रवाह दर सबसे कम है ?

उत्तर: आर्कटिक कटक  (प्रवाह दर 2.5 सेंटीमीटर प्रति वर्ष)

प्रश्न: किस प्लेट की प्रवाह दर सबसे अधिक  है ?

उत्तर: ईस्टर द्वीप के निकट प्रशांत महासागरीय उभार  जो चिली से पश्चिम की ओर 3400  किलोमीटर दूर  दक्षिणी प्रशांत महासागर में है | (प्रवाह दर 5 सेंटीमीटर प्रति वर्ष) |


WATER TRANSPORT (Merits, Main Ocean Routes, Suez Canal and Panama Canal) Lesson 8 Transport and Communication, Class 12th Geography

    

     

जलमार्ग

जल परिवहन मानव द्वारा प्रयोग किए जाने वाले यातायात के साधनों में से सबसे प्राचीन साधनों में से एक है | प्राचीन समय से ही वस्तुओं और यात्रियों के परिवहन के लिए नदियों, झीलों तथा समुद्री मार्गों का प्रयोग करता अ रहा है | यह परिवहन का सबसे सस्ता साधन है |

जल मार्गों  के प्रकार

जल मार्गों कों दो मुख्य प्रकारों में विभक्त किया जा सकता है | (1) समुद्री जलमार्ग या महासागरीय जलमार्ग  (2) आंतरिक जलमार्ग

जलमार्गों के लाभ

    जलमार्गों के निम्नलिखित लाभ हैं | 

1)      जल परिवहन बहुत ही सस्ता साधन है | क्योंकि जल का घर्षण स्थल की अपेक्षा बहुत कम होता है | जिससे ईंधन की बचत होती है | अत: जल परिवहन में ऊर्जा लागत बहुत कम होती है |

2)      समुद्री जल परिवहन के लिए मार्गों का निर्माण नहीं करना पड़ता | महासागर एक दूसरे से जुड़ें हुए हैं | जिनमें विभिन्न आकारों के  समुद्री जहाज आसानी से चलाए जा सकते हैं |  केवल महासागरों के किनारों पर जहाजों के लिए पत्तनों की आवश्यकता होती है |

3)      महासागरों में जलयान किसी भी दिशा में स्वतंत्र रूप से जा सकते हैं |

4)      एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक अधिक मात्रा में तक स्थूल तथा शीघ्र खराब ना होने वाली वस्तुएँ  ले जाने के लिए अगर उपलब्ध हो तो यह सबसे उत्तम साधन है |  क्योंकि यह स्थल और वायु परिवहन कीअपेक्षा सस्ता पड़ता है |

 

1.       समुद्री जलमार्ग या महासागरीय जलमार्ग

महासागर सभी दिशाओं में मुड़ सकने वाले ऐसे महामार्ग होते हैं जिनके रख रखाव की कोई लागत नहीं होती | समुद्री जहाजों द्वारा महासागरों का मार्गों के रूप में प्रयोग करना मनुष्य की पर्यावरण के साथ अनुकूलन की महत्वपूर्ण घटना है | क्योंकि जिन महासागरों से उसे डर लगता था उसी का प्रयोग वह परिवहन के सबसे सस्ते साधन के रूप में कर रहा है |  

आधुनिक समय में समुद्री मार्गों का महत्व बढ़ने के कारण

आधुनिक समय में समुद्री मार्गों का महत्व बढ़ने के निम्नलिखित कारण हैं | 

1)      आधुनिक यात्री जहाज और माल वाहक पोत राडार, बेतार के तार (वायरलेस)  व अन्य नौ परिवहन संबंधी सुविधाओं से युक्त हैं | जिससे मौसम तथा दिशा संबंधी जानकारी उपलब्ध होती है | इसी प्रकार यात्रियों की सुविधाओं में भी बढोतरी हुई है |’ 

2)      शीघ्र खराब हो जाने वाली स्तुओं जैसे दुग्ध तथा दुग्ध से बने पदार्थों, माँस, सब्जियों तथा फल आदि के लिए प्रतिशीतित कमरों (प्रतिशीतन कोष्टक) का प्रयोग किया जाने लगा है | टैंकरों तथा विशेषीकृत जहाजों ने नौभार के परिवहन कों उन्नत बना दिया है |

3)      कंटेनरों के प्रयोग से न सिर्फ माल कों चढ़ाना- उतारना आसान हुआ है | इससे विश्व के प्रमुख पत्तनों पर इस नौभार के निपटान में भी सुविधा हुई है क्योंकि कंटेनरों के सामान कों सड़क तथा रेल परिवहन के द्वाराइनकी माँग स्थलों तक पहुँचाना आसान हुआ है |

   विश्व के प्रमुख समुद्री मार्ग

1.       उत्तरी अटलांटिक समुद्री मार्ग

                                यह समुद्री जलमार्ग पश्चिमी यूरोप के देशों को उत्तरी अमेरिका के पूर्वी तट  पर स्थित उत्तरी -पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका के क्षेत्रों से मिलाता है |  ये दोनों ही क्षेत्र औद्योगिक दृष्टि से विकसित है | विश्व का एक चौथाई (25 प्रतिशत) समुद्री व्यापार इसी मार्ग से होता है | अत: यह विश्व का सबसे व्यस्त व्यापारिक मार्ग है | इसलिए इसे  “बृहद ट्रंक मार्ग” भी कहा जाता है | इस मार्ग के दोनों तटों पर पत्तन और पोताश्रयों की उन्नत सुविधा उपलब्ध है | विश्व के 28 बड़े पत्तन इस मार्ग के दोनों तटों पर स्थित है | जिनमें न्यूयार्क, मॉन्ट्रियल, क्यूबेक, हैलीफैक्स, बोस्टन आदि पत्तन उत्तरी अमेरिका के तट पर स्थित प्रमुख पत्तन हैं | लन्दन, लिवरपूल, ग्लासगो, मानचेस्टर, साउथ हैम्पटन, हैम्बर्ग, लिस्बन, कोपेनहेगन तथा ओसलो पश्चिमी यूरोप के तट पर स्थित प्रमुख पत्तन हैं |

2.       भूमध्यसागर –हिंद महासागरीय समुद्री मार्ग

                                                            यह समुद्री मार्ग प्राचीन विश्व का हृदय स्थल कहे जाने वाले क्षेत्रों से गुजरता है | किसी अन्य समुद्री मार्ग की अपेक्षा अधिक देशों और लोगों कों सेवाएँ प्रदान करता है |

यह व्यापारिक मार्ग पश्चिमी यूरोप के औद्योगिक  रूप से उन्नत देशों कों पूर्वी अफ्रीका, दक्षिणी अफ्रीका, दक्षिणी –पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के वाणिज्यिक कृषि तथा पशुपालन आधारित अर्थव्यवस्थाओं से जोड़ता है | 

            पोर्ट सईद, अदन, मुंबई, कोलंबो और सिंगापुर इस मार्ग के महत्वपूर्ण पत्तनों में से है | उत्तमाशा अंतरीप से होकर जाने वाले आरम्भिक मार्ग की तुलना में स्वेज नहर निर्माण से इन देशों के बीच होने वाले व्यापार में समय और दूरी में अत्यधिक कमी हुई है |

 3.       उत्तमाशा अंतरीप समुद्री मार्ग

                            अटलांटिक महासागर और हिंद महासागर होते हुए यह एक महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग है | यह मार्ग पुरे अफ्रीका महाद्वीप का चक्कर लगाता है  और बहुत ही लम्बा है | स्वेज नहर मार्ग से 6400 किलोमीटर लम्बा है |  यह मार्ग लिवरपूल  कों कोलंबो से जोड़ता है | वर्तमान में अधिकाँश जलयान इस मार्ग का प्रयोग नहीं करते | बड़े-बड़े जहाज जो स्वेज नहर कों पार नहीं कर सकते अब भी इसी मार्ग से होकर जाते हैं | कुछ जहाज स्वेज नहर के भारी कर (टैक्स ) से बचने के लिए भी इस मार्ग का प्रयोग करते हैं | यह मार्ग पश्चिमी यूरोप के देशों कों पश्चिमी अफ्रीका के देशों से जोड़ता हुआ, दक्षिणी एशिया, दक्षिणी –पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया तथा न्यूजीलैंड से मिलाता है |

पिछले कुछ वर्षों में  स्वतंत्रता प्राप्त करने वाले अफ़्रीकी देशों में तेजी से आर्थिक विकास हुआ है | क्योंकि महत्वपूर्ण खनिज जैसे- सोना, हीरे, ताँबा, टिन, क्रोमियम तथा अभ्रक और कृषि उत्पादों जैसे - मूँगफली  गिरि का तेल, कहवा और फलों का  के व्यापार में वृद्धि हुई है | जिससे पूर्वी और पश्चिमी अफ्रीका तट पर स्थित पत्तनों के द्वारा उत्तमाशा अंतरीप होकर जाने वाले जहाजों से व्यापार और यातायात की मात्रा में वृद्धि हुई है 

4.      दक्षिणी अटलांटिक  समुद्री मार्ग

                                    यह जलमार्ग पश्चिम अफ्रीकी देशों का संबंध दक्षिण अमेरिका में स्थित ब्राजील, अर्जेंटाइना तथा उरुग्वे के साथ स्थापित करता है | इस मार्ग का व्यापारिक महत्व उत्तर अटलांटिक महासागर के मार्ग की अपेक्षा कम है | क्योंकि दक्षिणी अटलांटिक महासागर के दोनों तटों पर स्थित दक्षिणी अमेरिका और अफ्रीका के देशों में जनसंख्या विरल है | इन देशों का आर्थिक विकास भी अधिक नहीं हुआ है | केवल दक्षिणी-पूर्वी  ब्राजील, प्लाटा ज्वारनदमुख और दक्षिणी अफ्रीका के कुछ भाग ही औद्योगिक दृष्टि से विकसित है | दक्षिणी अमेरिका के देश ब्राजील के प्रमुख व्यापारिक केन्द्र रियो डी जेनेरो और दक्षिणी अफ्रीका के प्रमुख व्यापारिक केन्द्र केपटाउन के बीच भी व्यापार बहुत कम है क्योंकि इन दोनों ही क्षेत्रों के  उत्पाद तथा संसाधन एक जैसे हैं | 

5.       उत्तरी प्रशांत समुद्री मार्ग

विस्तृत उत्तरी प्रशांत महासागर के आर पार कई मार्गों के द्वारा व्यापार होता है | इनमें से अधिकाँश मार्ग होनोलूलू में आकार मिलते हैं | यहाँ पर जलयान मरम्मत तथा ईंधन और अन्य जरुरी वस्तुओं के लिए रुकते हैं | बृहत वृत्त पर स्थित सीधा मार्ग है जो संयुक्त राज्य  अमेरिका के वैंकूवर कों जापान के याकोहामा से जोड़ता है |  जो यात्रा की दूरी कों कम करके (2480 किलोमीटर) आधा कर देता है |

यह समुद्री मार्ग उत्तरी अमेरिका के पश्चिमी तट पर स्थित पत्तनों कों एशिया के पत्तनों से जोड़ता है | उत्तरी अमेरिका के तट पर वैंकूवर, सीएटल, पोर्टलैंड, सान-फ्रांसिस्को आदि प्रमुख पत्तन हैं |  इन पत्तनों से गेहूँ , लकड़ी, कागज के लिए लुगदी, मत्स्य उत्पाद तथा दुग्ध उत्पादों का निर्यात एशिया के देशों कों किया जाता है | एशिया के तट पर स्थित प्रमुख पत्तन याकोहामा, कोबे, शंघाई, हांगकांग, मनीला और सिंगापुर हैं | इन पत्तनों से वस्त्र, विद्युत उपकरण, के साथ –साथ दक्षिणी पूर्वी एशिया के उष्ण कटिबंधीय प्रदेशों से अमेरिका के उद्योगों के लिए कच्चामाल  जैसे- रबड़, नारियल गिरी, ताड़ का तेल, और टिन का निर्यात किया जाता है |

 6.       दक्षिणी प्रशांत समुद्री मार्ग

        यह समुद्री मार्ग पश्चिमी यूरोप और उत्तरी अमेरिका कों ऑस्ट्रलिया, न्यूजीलैंड और पनामा नहर से होते हुए प्रशांत महासागर में प्रकीर्णित ( बिखरे हुए )  द्वीपों से मिलाता है | इस मार्ग का प्रयोग हांगकांग, फिलीपींस और इंडोनेशिया पहुँचने के लिए किया जाता है | इस मार्ग पर चलने वाले जलयानों कों अत्यधिक दूरी तय करनी पड़ती है | जैसे सिडनी से पनामा के बीच की दूरी 12000 किलोमीटर से भी अधिक है | होनोलूलू इस मार्ग के बीच में पड़ने वाला महत्वपूर्ण पत्तन है |

तटीय नौ परिवहन

तटीय नौ परिवहन लंबी तट रेखा वाले देशों के लिए एक सुगम परिवहन का माध्यम है | यदि तटीय नौ परिवहन का विकास किया जाए तो इसके द्वारा स्थल परिवहन पर होने वाली  यातायात की भीड़ कों कम किया जा सकता है | संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन तथा भारत जैसे देशों के लिए यह बहुत लाभकारी है |  यूरोप के शेनेगन देशों की स्थिति तटीय नौ परिवहन की दृष्टि से उपयुक्त है , जो एक सदस्य देश के तट कों दूसरे सदस्य देश के तट से जोड़ता है |

नौ परिवहन नहरें

स्वेज और पनामा दो ऐसी महत्वपूर्ण नौ परिवहन नहरें अथवा जलमार्ग हैं जो मानव द्वारा निर्मित है | ये दोनों नहरें पूर्वी तथा पश्चिमी विश्व के देशों के लिए प्रवेश द्वार का काम करती हैं | इनसे समय तथा दूरी दोनों में अत्यधिक बचत हुई है | इन दोनों का संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित है | 

           स्वेज नहर

स्वेज नहर का निर्माण कार्य एक फ्रांसीसी इंजिनियर फर्दीनन्द- द- लेपेप्स को सन् 1854 को सौंपा गया था |  सन् 1869 में बनकर यह तैयार हुई |

स्वेज नहर  का निर्माण मिस्त्र देश के उत्तर में मध्य भूमध्यसागर पर स्थित पोर्ट सईद और दक्षिण में लाल सागर पर स्थित पोर्ट स्वेज कों जोड़ने के लिए किया गया | इसके लिए स्वेज जलडमरूमध्य कों काटा गया था | यह नहर ग्रेट बिटर झील, लिटिल झील तथा टीमसा झील से होकर गुजरती है | ये सभी झीलें खारे पानी की झीलें हैं | नील नदी से एक नौगम्य ताजा पानी की नहर इस्माइलिया से स्वेज नहर में मिलती है | इस नहर से पोर्ट सईद तथा पोर्ट स्वेज नगरों कों ताजे पानी की आपूर्ति की जाती है | एक रेलमार्ग इस नहर के सहारे स्वेज तक जाता है जिसकी एक शाखा इस्माइलिया से कैरो तक जाती है |  

यह नहर लगभग 160 किलोमीटर लंबी और  11 से 15 मीटर गहरी है | इस नहर की अधिकतम चौड़ाई 365 मीटर है | इस नहर में प्रतिदिन लगभग 100 जलयान आवागमन करते हैं | इस नहर कों पार करने में 10 से 12 घण्टे का समय लगता है |   

इस नहर के निर्माण के बाद यूरोप एवं  पूर्वी अफ्रीका के तथा देशों और  दक्षिणी एशिया और दक्षिणी पूर्वी एशिया के बीच दूरी  में 6400 किलोमीटर की कमी है | जिससे समय की बहुत अधिक बचत हुई है |  इस नहर के निर्माण से यूरोपीय देशों विशेषकर ब्रिटेन कों बहुत अधिक लाभ मिला है | इसी कारण से स्वेज नहर कों ‘ब्रिटेन की स्नायु-नाड़ी’ भी कहा जाता है |

माल तथा यात्री किराया अत्यधिक होने के कारण वे जहाज जिनके लिए समय की देरी महत्वपूर्ण नहीं है टैक्स (किराया) से बचने के लिए सस्ते परन्तु लम्बे उत्तमाशा मार्ग का प्रयोग करते हैं | बड़े आकार वाले जहाज भी स्वेज नहर के मार्ग का प्रयोग नहीं करते है |

पनामा नहर

                यह नहर में अटलांटिक महासागर कों पश्चिम में प्रशांत महासागर से जोड़ती है | इस नहर का निर्माण उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका के बीच पनामा गणराज्य के पनामा जलडमरूमध्य कों काटकर किया गया है | इसका निर्माण पनामा जलडमरूमध्य के आर-पार पनामा नगर एवं कोलोन के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका के द्वारा किया गया | अमेरिका ने इसके लिए दोनों ही ओर के 8  किलोमीटर क्षेत्र कों खरीद कर इसे नहर मंडल का नाम दिया है | इस नहर का निर्माण कार्य सन् 1906 में शुरू हुआ और यह सन् 1914 में बनकर तैयार हुई |

            पनमा नहर लगभग 72 किलोमीटर लंबी है जो लगभग 12 किलोमीटर लंबी कटान से युक्त है |  91 मीटर से 350 मीटर चौड़ी  है | इस नहर में कुल छ: जल प्रबंध तंत्र हैं | पनामा की खाड़ी में प्रवेश करने से पहले इन जल प्रबंधकों से होकर विभिन्न ऊँचाई की समुद्री सतह कों पार करते हैं |  जो 12.5 मीटर से 26 मीटर ऊँचाई के बीच है | इस नहर कों पार करने में 7 से 8 घण्टे का समय लगता है | इस नहर से रोजाना 48 जहाज गुजरते है |

            इस नहर के द्वारा समुद्री मार्ग से न्यूयार्क एवं सैनफ्रांसिस्को के मध्य लगभग 13000 किलोमीटर की दूरी कम हो गई है | इसी प्रकार पश्चिमी यूरोप और संयुक्त अमेरिका के पश्चिमी तट के बीच दूरी कम होने से व्यापार में बहुत अधिक वृद्धि हुई है | उत्तरी –पूर्वी और मध्य संयुक्त राज्य अमेरिका और पूर्वी तथा दक्षिणी पूर्वी एशिया के मध्य की दूरी भी कम हो गई है | इस नहर का आर्थिक महत्व स्वेज नहर की अपेक्षा कम है | फिर भी दक्षिणी अमेरिका की अर्थव्यवस्था में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है |