Tuesday, July 13, 2021

भारत का भौतिक स्वरूप (भूगोल ) कक्षा 9वीं अभ्यास के प्रश्न उत्तर

 

अभ्यास के प्रश्न उत्तर

अध्याय 2 , भारत का भौतिक स्वरूप  (भूगोल ) कक्षा 9वीं

 

प्रश्न : एक स्थलीय भाग जो तीन ओर से समुद्र से घिरा हो उसे क्या कहते है ?

क.     तट

ख.     प्रायद्वीप

ग.      द्वीप

घ.      इनमें से कोई नहीं

उत्तर : प्रायद्वीप

प्रश्न : भारत के पूर्वी भाग में म्यांमार की सीमा का निर्धारण करने वाले पर्वतों का संयुक्त नाम क्या है ?

क.     हिमाचल

ख.     पूर्वांचल

ग.      उत्तरांचल

घ.      इनमें से कोई नहीं

उत्तर : पूर्वांचल

प्रश्न : गोवा के दक्षिण में स्थित तटीय पट्टी कों किस तट के नाम से जानते है ?

क.     कोरोमंडल

ख.     कन्नड़

ग.      कोंकण

घ.      उत्तरी सरकार

उत्तर : कन्नड़

प्रश्न : पूर्वी घाट का सर्वोच्च शिखर कौन-सा है?

क.     अनाइमुदी

ख.     महेंद्रगिरि

ग.      कंचनजुंगा

घ.      खासी

उत्तर : महेन्द्रगिरि

प्रश्न : ‘भाबर’ क्या है ?

उत्तर : भाबर उत्तर के विशाल मैदान का भाग है | जहाँ हिमालय से निकलने वाली नदियाँ पहाड़ी क्षेत्र से निकलते ही तुरंत इन मैदान में प्रवेश करती है और अपने साथ लाए रेत, कंकड, बजरी तथा पत्थर आदि का निक्षेप करती है | मैदान के इस भाग में नदियाँ लुप्त हो जाती है | इसका कारण यह है कि इस क्षेत्र में नदियाँ भूमि टल पर बहने की बजाय बड़े-बड़े पत्थरों के बीच भूमि के नीचे बहती है | भाबर का मैदान 8 से 16 किलोमीटर की चौड़ाई में फैला है और शिवालिक की तलहटी में सिंधु नदी से लेकर तिस्ता नदी तक स्थित है |

प्रश्न : हिमालय के तीन प्रमुख विभागों के नाम उत्तर से दक्षिण के क्रम में बताइए |

उत्तर : उत्तर से दक्षिण के क्रम में हिमालय के तीन प्रमुख भाग निम्नलिखित है|

1.       महान हिमालय अथवा हिमाद्री अथवा आंतरिक हिमालय

2.       मध्य हिमालय या हिमाचल

3.       बाह्य हिमालय अथवा शिवालिक

प्रश्न : अरावली और विंध्याचल की पहाडियों के बीच कौन-सा पठार स्थित है ?

 उत्तर : अरावली और विंध्याचल की पहाडियों के बीच मालवा का पठार स्थित है |

प्रश्न : भारत के उन् द्वीपों के नाम बताइए जो प्रवाल भित्ति के है |

उत्तर : लक्षद्वीप समूह प्रवाल भित्ति के है |

प्रश्न : बांगर और खादर में अन्तर स्पष्ट कीजिए |

उत्तर : बांगर और खादर भारत के विशाल मैदान के भाग है | इन दोनों में निम्नलिखित अन्तर है |

बांगर

खादर

    1. मैदान का वह भाग  जो पुरानी जलोढ़ मिट्टी का बना है|उसे बांगर कहते है |

    2. इस क्षेत्र में बाढ़ नहीं आती |

   3. बांगर कम उपजाऊ मैदानी क्षेत्र हैं|क्योंकि इसमें प्रतिवर्ष बाढ़ नहीं आती जिससे नई जलोढ़ मिट्टी का निर्माण नहीं होता |

    4.इस क्षेत्र की मृदा में चूनेदार निक्षेप पाए जाते है | जिन्हें स्थानीय भाषा में कंकड कहते है |

       1.  मैदान का वह भाग  जो नई जलोढ़ मिट्टी का बना है | उसे खादर कहते है |

    2. इस क्षेत्र में  प्रतिवर्ष बाढ़ आती |

   3. खादर अधिक उपजाऊ मैदानी क्षेत्र हैं |  क्योंकि इसमें प्रतिवर्ष बाढ़ आती जिससे नई जलोढ़ मिट्टी का निर्माण होता हैं |

    4. इस क्षेत्र की मृदा में चूने दार निक्षेप नहीं पाए जाते |

 

प्रश्न :पूर्वी घाट तथा पश्चिमी घाट में अन्तर स्पष्ट कीजिए |

उत्तर : पूर्वी घाट और पश्चिमी घाट में निम्नलिखित अन्तर है |

पूर्वी घाट

पश्चिमी घाट

1..       ये दक्कन के पठार के पूर्वी किनारे स्थित है |

2. पूर्वी घाट अनियमित है | क्योंकि बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियों ने इसे काट दिया है | ये अलग –अलग पहाडियों के रूप में दिखाई देते है |

3.      ये पश्चिमी घाट की अपेक्षा कम ऊँचे हैं |  इनकी औसत ऊँचाई 600 मीटर है |

4.       इस घाट में कोई भी महत्वपूर्ण दर्रा नहीं है |

 

5.       इस घाट की सबसे ऊँची चोटी महेंद्रगिरि है जो    1500 मीटर ऊँची है |

6.       पूर्वी तटीय मैदान अधिक समतल तथा चौड़ा है |

   1.  ये दक्कन के पठार के पश्चिमी किनारे स्थित है |

     2.  ये नियमित (सतत) है | किसी बड़ी नहीं ने इनको नहीं काटा है |

 

    3. ये पूर्वी घाट की अपेक्षा ऊँचे हैं |  इनकी औसत ऊँचाई 900 मीटर से 1600 मीटर है |

    4. इस घाट में तीन महत्वपूर्ण दर्रें है |  जो थाल घाट, भोर घाट और  पाल घाट के नाम से जाने जाते है |   

    5. इस घाट की सबसे ऊँची चोटी  अनाईमुदी है जो 2695 मीटर ऊँची है |

     6.  पश्चिमी तटीय मैदान बहुत ही असमान तथा  कम चौड़ा है |

 

प्रश्न : भारत के प्रमुख भू-आकृतिक विभाग कौन-से हैं ?  हिमालय क्षेत्र तथा प्रायद्वीपीय पठार के उच्चावच लक्षणों में क्या अन्तर है ?

उत्तर : भारत के छ: प्रमुख भू-आकृतिक विभाग है | जो निम्नलिखित है |

1.       हिमालय पर्वत श्रृंखला

2.       उत्तरी मैदान

3.       भरतीय मरुस्थल

4.       प्रायद्वीपीय पठार

5.       तटीय मैदान

6.       द्वीप समूह

हिमालय तथा प्रायद्वीपीय पठार के उच्चावच लक्षणों में निम्नलिखित अन्तर है |

1.       हिमालय अपेक्षाकृत युवा एवं वलित पर्वत है | जबकि प्रायद्वीपीय पठार प्राचीन भूखंड है | जिसका निर्माण ज्वालामुखी क्रिया द्वारा हुआ है |

2.       हिमालय पर्वत का निर्माण तलछटी चट्टनों से हुआ है | जबकि प्रायद्वीपीय पठार का निर्माण आग्नेय चट्टानों से हुआ है |

3.       हिमालय पर्वत एक चापाकार रूप से पश्चिम से पूर्व में फैला है |  जबकि प्रायद्वीपीय पठार त्रिभुजाकार रूप में फैला है |

4.       हिमालय पर्वत की औसत ऊँचाई 5100 मीटर है | जबकि प्रायद्वीपीय पठार की औसत ऊँचाई 600 से 900 मीटर है |

5.       हिमालय पर्वत का ढाल दक्षिण की ओर है | जबकि प्रायद्वीपीय पठार का ढाल पूर्व की ओर है |

6.       हिमालय पर्वत श्रृंखला में विश्व के सबसे ऊँचे शिखर पाए जाते है | जिनकी ऊँचाई 6000 से अधिक है | उदाहरण के लिए माउंट एवरेस्ट, कंचनजुंगा तथा नंदा देवी आदि | जबकि प्रायद्वीपीय पठार में कम ऊँचाई वाले शिखर पाए जाते है | जिनकी ऊँचाई 2500 मीटर तक ही है | जैसे अनाईमुदी, डोडाबेटा, महेन्द्रगिरि आदि |

प्रश्न : भारत के उत्तरी मैदान का वर्णन कीजिए |

उत्तर :भारत का उत्तरी मैदान तीन प्रमुख नदी प्रणालियों  सिंधु, गंगा तथा ब्रह्मपुत्र और इनकी सहायक नदियों के द्वारा बना है | ये नदियाँ लाखों वर्षों से हिमालय से अपने साथ अवसाद लेकर आती रही है और इस अवसाद कों हिमालय के गिरिपाद के स्थित बेसिन (द्रोणी) में जलोढ़ (अवसाद) निक्षेपित करती रही है | जिससे इस उपजाऊ मैदान का निर्माण हुआ है | ये नदियाँ आज भी अपना ये कार्य कर रही है |

इस मैदान का विस्तार 7 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर है | यह मैदान लगभग 2400 किलोमीटर लंबा तथा 240 से 300 किलोमीटर चौड़ा है | उपजाऊ मैदान होने के कारण ये कृषि के लिए अत्यधिक उत्पादक क्षेत्र है | इसलिए यह सघन जनसंख्या वाला क्षेत्र है |

क्षेत्रीय आधार पर उत्तरी मैदान के तीन भाग है | पंजाब का मैदान, गंगा का मैदान तथा ब्रह्मपुत्र का मैदान | इनका संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित है |

पंजाब का मैदान

उत्तरी मैदान के पश्चिमी भाग कों पंजाब का मैदान कहते है | यह सिंधु तथा इसकी सहायक नदियों (सतलुज, रावी,व्यास, झेलम तथा चेनाब ) द्वारा निर्मित मैदान है | इस मैदान का बहुत बड़ा भाग  पाकिस्तान में स्थित है |  इस मैदान में दो आबों की संख्या बहुत अधिक है |

गंगा का मैदान

इस मैदान का विस्तार घघ्घर तथा तिस्ता नदियों के बीच है |  इस मैदान का निर्माण गंगा तथा इसकी सहायक नदियों यमुना, घघ्घर, कालीन नदी, कोसी, गंडक, सोन, चम्बल तथा बेतवा आदि नदियों के द्वारा निक्षेपित अवसाद से हुआ है | यह मैदान उत्तरी भारत के राज्यों हरियाणा, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखण्ड के कुछ भाग तथा पश्चिम बंगाल में फैला है |  

ब्रह्मपुत्र का मैदान

यह मैदान गंगा नदी के पूर्व में विशेषकर असम में फैला है | इस मैदान का निर्माण  ब्रह्मपुत्र तथा इसकी सहायक नदियों द्वारा निर्मित है |

प्रश्न : मध्य हिमालय पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए |

उत्तर : हिमालय पर्वत की वह श्रृंखला जो महान हिमालय (हिमाद्री) के दक्षिण में  फैली है मध्य हिमालय कहलाती है | इस श्रृंखला की औसत चौड़ाई 50 किलोमीटर और ऊँचाई 3700 से 4500 मीटर है | पीरपंजाल तथा धौलाधार श्रेणी इसकी प्रमुख श्रेणियाँ हैं | नेपाल में स्थित महाभारत श्रेणी भी इसी हिमालय का भाग है | डलहौजी, धर्मशाला, शिमला, मसूरी, नैनीताल तथा दार्जिलिंग मध्य हिमालय के प्रमुख पर्वतीय नगर है |  

प्रश्न : मध्य उच्च भूमि पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए |

उत्तर : नर्मदा नदी के उत्तर में स्थित प्रायद्वीपीय पठार के भाग  कों मध्य उच्च भूमि कहते है | इसका अधिकतर भाग मालवा के पठार  के नाम से जाना जाता है | यह दक्षिण में विंध्य श्रृंखला (विंध्याचल पर्वत)  तथा उत्तर पश्चिम में अरावली से घिरी हुई है | पश्चिम में यह धीरे – धीरे राजस्थान की बलुई मिट्टी में तथा पथरीले मरुस्थल में मिल जाता है |  इस पठार के पूर्वी विस्तार कों स्थानीय रूप से बुन्देलखंड तथा बघेलखंड के नाम से जाना जाता है | इसकी पूर्वी सीमा  पर छोटा नागपुर का पठार स्थित है |

मध्य उच्च भूमि पश्चिम में चौड़ी तथा पूर्व में संकीर्ण है | इस क्षेत्र में बहने वाली प्रमुख नदियाँ चम्बल, बेतवा , सिंध तथा केन  है | ये दक्षिण पश्चिम से उत्तर पूर्व की  ओर बहती है | जो इस क्षेत्र के ढाल  कों दर्शाती है |

 प्रश्न : भारत के द्वीप समूह पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए |

उत्तर :  भारत की मुख्य भूमि से अलावा दो मुख्य द्वीप समूह है | अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा लक्षद्वीप समूह | इनका संक्षिप्त वर्णन निम्न प्रकार से है |

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह 

बंगाल की खाड़ी में उत्तर से दक्षिण की ओर द्वीपों की एक श्रृंखला है | द्वीपों की इस श्रृंखला कों अंडमान और निकोबार द्वीप समूह कहा जाता है | ये द्वीप आकार में बड़े हैं | ये संख्या में अधिक है |  ये बिखरे हुए है | ये द्वीप जल में डूबी हुई पहाड़ियों के शिखर हैं |  ये द्वीप भूमध्य रेखा के समीप स्थित होने के कारण यहाँ की जलवायु भूमध्य रेखीय हैं | ये घने वनों से ढके हुए है |  इन द्वीपों में कुछ ज्वालामुखी द्वारा निर्मित है | एक  सक्रिय ज्वालामुखी बैरेन द्वीप पर है | जिसे  बैरेन ज्वालामुखी कहा जाता है |

            अंडमान और निकोबार द्वीप समूह  मुख्यत: दो हिस्सों में बाँटे ज सकते है | उत्तर में अंडमान द्वीप समूह तथा दक्षिण में निकोबार द्वीप समूह | 100  चैनल अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को अलग करता है | इन द्वीप समूह का प्रशासनिक कार्यालय (राजधानी) पोर्ट ब्लेयर है | भारत का सबसे दक्षिणी बिंदु जिसे इंदरा बिंदु के नाम से जाना जाता है | निकोबार द्वीप समूह में  स्थित है |

लक्षद्वीप समूह

केरल तट के पश्चिम में अरब सागर में छोटे-छोटे अनेक द्वीप है जिन्हें लक्षद्वीप समूह के नाम से जाना जाता है | इनका निर्माण सूक्ष्म प्रवाल जीवों से मरने तथा उनके जमाव से हुआ है | इसलिए इन द्वीपों कों प्रवाल द्वीप भी कहते है |  पहले इन द्वीपों कों लकादीव, मिनिकाय  तथा एमिनदीव के नाम से जाना जाता था | सन् 1973 में इन्हें संयुक्त रूप से लक्षद्वीप का नाम दिया गया | ये द्वीप केवल 32 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में ही फैले हैं |

     इस द्वीप समूह पर बहुत से  प्रकार के पेड़ -पौधे (पादप ) और जन्तु पाए जाते है | पिटली  द्वीप ऐसा द्वीप है जिस पर किसी मनुष्य का निवास नहीं है | इस द्वीप पर एक पक्षी अभ्यारण है | जिसे पिटली  पक्षी अभ्यारण के नाम से जआना जाता है | इन द्वीप समूह का प्रशासनिक कार्यालय (राजधानी) कावारती  है |   

Sunday, July 11, 2021

विश्व जनसंख्या : वितरण और घनत्व ( कक्षा-12)

 

अध्याय -2

विश्व जनसंख्या :  वितरण घनत्व और वृद्धि

मानव भूगोल के मूल सिद्धांत (कक्षा-12)

 

एक देश के निवासी (लोग) ही उसके वास्तविक धन होते है | (एक देश की पहचान उसके लोगों से होती है |)

किसी देश में रहले वाले लोग ही देश के संसाधनों का उपयोग करते है और उस देश की नीतियों का निर्धारण करते है | अत: लोग ही देश के वास्तविक धन होते है | और उस देश की पहचान उसमें रहनें वाले लोगों से ही होती है |

जनसंख्या वितरण से अभिप्राय

जनसंख्या वितरण शब्द का अर्थ इस बात से लगाया जाता है कि भू-पृष्ठ पर लोग किस प्रकार वितरित है | 

विश्व में जनसंख्या का वितरण 

21वीं शताब्दी के प्रारम्भ में विश्व की जनसंख्या 600 करोड़ से अधिक मानी गयी थी | जो 2010 के विश्व के जनसंख्या के आँकड़ों के अनुसार अनुमानित जनसंख्या 6 अरब 90 करोड़ (690 करोड़) हो गयी| यह जनसंख्या एक समान रूप से विश्व के सभी भागों में फैली हुई नहीं है | विश्व में जनसंख्या का वितरण असमान है | मोटे तौर पर विश्व की जनसंख्या के वितरण कों निम्न प्रकार से समझा जा सकता है कि जनसंख्या का 90 प्रतिशत विश्व के 10 प्रतिशत स्थलभाग पर रहता है |

विश्व के दस सर्वाधिक जनसंख्या वाले देशों में विश्व की 60 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है | अन्य सभी देशों में विश्व की शेष 40 प्रतिशत जनसंख्या रहती है | दस सर्वाधिक जनसंख्या वाले देशों में से छह देश एशिया महाद्वीप में ही है | जिनमें चीन, भारत,इंडोनेशिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश तथा जापान शामिल है |  इनके अलावा संयुक्त राज्य अमेरिका उत्तर अमेरिका में, ब्राजील दक्षिणी अमेरिका में, नाइजीरिया अफ्रीका में है | रूस एशिया और यूरोप दोनों महाद्वीपों में है |

विश्व के तीन अधिकतम जनसंख्या वाले देशों (चीन,भारत तथा संयुक्त राज्य अमेरिका) में विश्व की 40 प्रतिशत जनसंख्या रहती है | चीन सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है | यहाँ विश्व की कुल जनसंख्या की 21.03 प्रतिशत जनसंख्या चीन में रहती है | इस हिसाब से विश्व का हर पाँचवां व्यक्ति चीनी है | इसके बाद भारत दूसरे स्थान पर है | यहाँ पर विश्व की 16.87 प्रतिशत जनसंख्या रहती है | अत: विश्व का हर छठा व्यक्ति भारतीय है |

अगर विभिन्न महाद्वीपों मन जनसंख्या के प्रतिशत को देखते है तो स्पष्ट होता है कि एशिया में 59.5 प्रतिशत, अफ्रीका में 16.9 प्रतिशत,  यूरोप में 9.7 प्रतिशत,  दक्षिणी अमेरिका और कैरेबियन द्वीप समूह में  8.5 प्रतिशत,  उत्तरी अमेरिका महाद्वीप में 4.87 प्रतिशत तथा ओशिनिया (ऑस्ट्रेलिया तथा उसके आस-पास के देश ) में केवल 0.5 प्रतिशत जनसंख्या ही निवास करती है |

उपरोक्त विवरण से पता चलता है कि विश्व में जनसंख्या का वितरण असमान है |

जनसंख्या घनत्व का अर्थ 

किसी क्षेत्र की जनसंख्या और  क्षेत्रफल के अनुपातिक संबंध कों उस क्षेत्र का जनसंख्या घनत्व या जन घनत्व कहते है | भूमि की प्रत्येक इकाई में उस पर रह रहे लोगों के पोषण की सीमित क्षमता होती है | अत: लोगों की संख्या और भूमि के अनुपात कों समझना आवश्यक हो जाता है | यह सामान्यत: प्रति वर्ग किलोमीटर में रहने वाले व्यक्तियों के रूप में मापा जाता है |

जनसंख्या घनत्व का माप

जनसंख्या का घनत्व जनसंख्या के वितरण का विश्लेषणात्मक  अध्ययन  करने का  महत्वपूर्ण  माप  है |  इसे तीन  प्रकार से मापा जा सकता है |

1.       अंकगणितीय घनत्व ,

2.       कायिक (पोषक घनत्व )

3.       कृषि घनत्व |

इनका संक्षिप्त वर्णन इस प्रकार है |

1.       अंकगणितीय घनत्व : 

प्रति इकाई क्षेत्रफल में रहने वाले लोगों की संख्या कों उस क्षेत्र का जनसंख्या घनत्व कहते है | यह जनसंख्या तथा भूमि के क्षेत्रफल के बीच एक साधारण अनुपात है |  इसे व्यक्ति प्रतिवर्ग किलोमीटर में व्यक्त करते हैं | इसे निम्नलिखित सूत्र द्वारा व्यक्त किया जाता है |

जनसंख्या घनत्व = कुल जनसंख्या/ कुल क्षेत्रफल

उदाहरण के लिए एक प्रदेश का क्षेत्रफल 100 वर्ग किलोमीटर है | और उसकी 1,50,000 जनसंख्या है | तो जनसंख्या घनत्व इस तरह निकाला जाएगा |

जनसंख्या घनत्व = 1,50,000 / 100     = 1500 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर

2.       कायिक या पोषक घनत्व )

किसी क्षेत्र की कुल जनसंख्या तथा वहाँ की शुद्ध कृषि क्षेत्र के बीच के अनुपात कों कायिक या पोषक घनत्व कहते है | इसे निम्नलिखित सूत्र द्वारा व्यक्त किया जाता है |

कायिक घनत्व = कुल जनसंख्या/ शुद्ध कृषि क्षेत्र

उदाहरण के लिए भारत की कुल जनसंख्या लगभग 121 करोड़ है तथा  शुद्ध कृषि योग्य क्षेत्रफल 14.26 लाख वर्ग किलोमीटर है | तो कायिक घनत्व इस तरह निकाला जाएगा |

 कायिक घनत्व = 121 करोड़ / 14.26 लाख वर्ग किलोमीटर     = 848 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर

3.       कृषीय  घनत्व

किसी क्षेत्र की कुल कृषीय जनसंख्या (कृषि कार्यों में लगे लोग) तथा वहाँ की शुद्ध कृषि क्षेत्र के बीच के अनुपात कों कृषीय  घनत्व कहते है | इसे निम्नलिखित सूत्र द्वारा व्यक्त किया जाता है |

कृषीय घनत्व = कुल कृषीय जनसंख्या / शुद्ध कृषि क्षेत्र

उदाहरण के लिए किसी प्रदेश की कुल जनसंख्या लगभग 150,000 है तथा शुद्ध कृषि योग्य क्षेत्रफल 100 वर्ग किलोमीटर है | तो कृषीय घनत्व इस तरह निकाला जाएगा |

 

कृषीय घनत्व = 150,000  / 100     = 1500 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर

 

विश्व में जनसंख्या घनत्व का प्रारूप

विश्व के जनसंख्या का घनत्व असमान तथा अव्यवस्थित है | मोटे तौर पर विश्व की जनसंख्या के वितरण कों समझें तो देखते है कि जनसंख्या का 90 प्रतिशत विश्व के 10 प्रतिशत स्थलभाग पर रहता है | जबकि बाकी 10 प्रतिशत जनसंख्या विश्व के 90 प्रतिशत भाग पर रहती है | विश्व का लगभग 33 प्रतिशत भाग मानव विहीन (निर्जन) है |  विश्व के विभिन्न प्रदेशों कों जनसंख्या घनत्व के आधार पर उच्च जनसंख्या घनत्व, विरल जनसंख्या घनत्व तथा समान्य जनसंख्या घनत्व वाले प्रदेशों में बाँट सकते है | जिनका संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित है |

उच्च जनसंख्या घनत्व वाले प्रदेश

विश्व में कुछ क्षेत्र जनसंख्या के हिसाब से सघन बसे हुए है | इस  प्रदेशों में जनसंख्या घनत्व  200 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है | इन क्षेत्रों कों उच्च जनसंख्या घनत्व वाले प्रदेश कहते है | इनमें निम्नलिखित क्षेत्रों कों शामिल किया जाता है |इन क्षेत्रों में मानसून एशिया  अर्थात पूर्व एशिया, तथा दक्षिण एवं दक्षिण पूर्व एशिया , यूरोप , उत्तर अमेरिका का  पूर्वी तटीय प्रदेश शामिल  है |

सामान्य  (मध्यम) जनसंख्या घनत्व वाले प्रदेश

जिनका जनसंख्या घनत्व 200 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर से कम और 10 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर से अधिक हो साधारण या मध्यम जनसंख्या घनत्व वाले प्रदेश कहलाते है |  इन क्षेत्रों के अंतर्गत एशिया महाद्वीप में  चीन तथा दक्षिणी भारत, यूरोप महाद्वीप में नार्वे तथा स्वीडन देश शामिल है | 

विरल जनसंख्या घनत्व  वाले प्रदेश

जिन क्षेत्रों में 1से 2 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर रहते है | उन्हें विरल जनसंख्या घनत्व वाले प्रदेश कहलाते है | इन क्षेत्रों के अंतर्गत उत्तरी व दक्षिणी ध्रुव, उष्ण तथा शीत मरुस्थल और विषुवत रेखा के निकट उच्च वर्षा के क्षेत्र शामिल हैं |

मोटे अनाज (ज्वार बाजरा तथा रागी ) पाठ :2, कृषि 10TH

 प्रश्न : ज्वार की खेती के लिए उपयुक्त भौगोलिक परिस्थितियों का वर्णन करें | भारत में इसके उत्पादन तथा वितरण का वर्णन कीजिए |

अथवा

प्रश्न : ज्वार की खेती के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ कौन-सी है ? भारत में ज्वार कहाँ-कहाँ पैदा किया जाता है ?

भारत में उगाए जाने वाले प्रमुख मोटे अनाजों में से  ज्वार एक है | इसका प्रयोग चारे के लिए भी किया जाता है | उत्पादन की दृष्टि से यह भारत की तीसरी सबसे महत्वपूर्ण फसल है | यह पोषक तत्वों से भरपूर होता है | इसकी खेती के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ तथा इसके प्रमुख उत्पादक राज्य निम्नलिखित है |

ज्वार की  खेती के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ

1.       तापमान : यह अधिक तापमान में होने वाली फसल है | भारत के दक्षिणी राज्यों में यह खरीफ तथा रबी दोनों ही ऋतुओं में बोया जाता है | जबकि उत्तरी भारत में केवल खरीफ ऋतु में ही बोया जाता है |

2.       वर्षा : इसकी खेती के लिए वर्षा पर निर्भर करती है | यह अधिकतर आर्द्र प्रदेशों में उगाई जाती है | जहाँ सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती ||

3.       मिट्टी : यह जलोढ़ मिट्टी तथा काली मिट्टी वाले प्रदेशों में अच्छी तरह से उगता और विकसित होता है |

प्रमुख उत्पादक क्षेत्र :

महाराष्ट्र भारत का सबसे बड़ा ज्वार त्पादक राज्य है |  जो देश के कुल ज्वार उत्पादन का आधे से अधिक उत्पादन करता है | इसके कर्नाटक, आंध्रप्रदेश तथा मध्यप्रदेश  ज्वार उत्पादन करने वाले प्रमुख राज्य है |

प्रश्न :  बाजरे की खेती के लिए उपयुक्त भौगोलिक परिस्थितियों का वर्णन करें | भारत में इसके उत्पादन तथा वितरण का वर्णन कीजिए |

 अथवा

प्रश्न : बाजरे की  खेती के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ कौन-सी है ? भारत में बाजरा  कहाँ-कहाँ पैदा किया जाता है ?

उत्तर : बाजरा भारत में उगाए जाने वाले प्रमुख मोटे अनाजों में से एक है | यह पोषक तत्वों से भरपूर होता है | लोहे के मात्रा इसमें बहुत अधिक होती है | इसकी खेती के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ तथा इसके प्रमुख उत्पादक राज्य निम्नलिखित है |

बाजरे की  खेती के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ

1.       तापमान : यह एक खरीफ की फसल है | इसके लिए अधिक तापमान की आवश्यकता होती है |

2.       वर्षा : इसकी खेती के लिए कम वर्षा की आवश्यकता होती है | 50 सेंटीमीटर से कम वर्षा वाले क्षेत्रों में यह आसानी से बोया ज सकता है |

3.       मिट्टी : बाजरा रेतीली (बलुआ) मिट्टी या उथली काली मिट्टी वाले प्रदेशों में अच्छी तरह से उगता और विकसित होता है |

प्रमुख उत्पादक क्षेत्र :

राजस्थान भारत का सबसे बड़ा बाजरा उत्पादक राज्य है | इसके बाद उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात तथा हरियाणा बाजरा उत्पादन करने वाले प्रमुख राज्य है |

 

प्रश्न : रागी की खेती के लिए उपयुक्त भौगोलिक परिस्थितियों का वर्णन करें | भारत में इसके उत्पादन तथा वितरण का वर्णन कीजिए |

अथवा

प्रश्न : रागी की खेती के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ कौन-सी है ? भारत में रागी कहाँ-कहाँ पैदा की जाती है ?

उत्तर : रागी भारत में उगाए जाने वाले प्रमुख मोटे अनाजों में से एक है | यह पोषक तत्वों से भरपूर होता है | इसमें लोहे, कैल्शियम तथा पेट कों साफ़ करने वाले तत्व पाए जाते हैं | इसकी खेती के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ तथा इसके प्रमुख उत्पादक राज्य निम्नलिखित है |

रागी की  खेती के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ

1.       तापमान : यह शुष्क क्षेत्रों  की फसल है | इसके लिए अधिक तापमान की आवश्यकता होती है |

2.       वर्षा : इसकी खेती के लिए अन्य मोटे अनाज की अपेक्षा अधिक वर्षा की आवश्यकता होती है | |

3.       मिट्टी : रागी लाल, काली, दोमट तथा रेतीली मिट्टी वाले प्रदेशों में अच्छी तरह उगती है |

प्रमुख उत्पादक क्षेत्र :

कर्नाटक तथा तमिलनाडु राज्य भारत में सबसे अधिक रागी उत्पन्न करते हैं | इसके बाद हिमाचलप्रदेश  उत्तराखंड, सिक्किम तथा अरुणाचल प्रदेश उत्पादन करने वाले प्रमुख राज्य है |

Friday, July 2, 2021

पाठ 1 (भारत आकार और स्थिति ) प्रश्न उत्तर

 प्रश्न : कर्क रेखा किस राज्य से नहीं गुजरती है ?

1)      राजस्थान

2)      उड़ीसा

3)      छतीसगढ़

4)      त्रिपुरा

उत्तर : उड़ीसा

प्रश्न : भारत का सबसे पूर्वी देशांतर कौन सा है ?

1)      97 0 25’ पूर्व

2)      770 6’ पूर्व

3)      680 7’  पूर्व

4)      820 32’ पूर्व

उत्तर : 97 0 25’ पूर्व

प्रश्न : उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, बिहार और सिक्किम की सीमाएँ किस देश कों छूती हैं ?

1)      चीन  

2)      नेपाल

3)      भूटान

4)      म्यांमार

उत्तर : नेपाल

प्रश्न : ग्रीष्म अवकाश में यदि आप कावारती जाना चाहते हैं तो किस केन्द्र शासित प्रदेश में जायेंगे ?

1)      पुडुचेरी

2)      लक्षद्वीप

3)      अंडमान और निकोबार

4)      दीव और दमन  

उत्तर : लक्षद्वीप

 प्रश्न : मेरे मित्र एक ऐसे देश का निवासी हैं जिस देश की सीमा भारत के साथ नहीं लगती |आप बताइए वह देश कौन सा है ?

1)      भूटान

2)      तजाकिस्तान

3)      बांग्लादेश

4)      नेपाल

उत्तर : तजाकिस्तान

प्रश्न : अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में स्थित द्वीप समूह के नाम बताइए | दक्षिण में कौन-कौन  से द्वीपीय देश हमारे पडोसी है ?

उत्तर : अरब सागर में लक्षद्वीप समूह तथा बंगाल की खाड़ी में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह है | दक्षिण में दो द्वीपीय देश श्री लंका और मालदीव हमारे पड़ोसी है |

प्रश्न: उन देशों के नाम बताइए जो क्षेत्रफल में भारत से है ?

उत्तर: रूस, कनाडा, संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, ब्राजील  तथा  ऑस्ट्रेलिया क्षेत्रफल के हिसाब से भारत से बड़े देश है |

प्रश्न: हमारे उत्तर –पश्चिमी, उत्तरी तथा उत्तरी पूर्वी पडोसी देशों के नाम बताइए |

उत्तर: भारत के उत्तर –पश्चिमी, उत्तरी तथा उत्तरी पूर्वी पडोसी देशों के नाम निम्नलिखित हैं |

 पश्चिम (उत्तर- पश्चिम ) में पकिस्तान तथा अफगानिस्तान |

उत्तर में चीन, नेपाल तथा भूटान |

उत्तर -पूर्व में बांग्लादेश तथा म्याँमार |

प्रश्न : भारत के किन- किन राज्यों से कर्क रेखा गुजरती है , उनके नाम बताएँ ?

उत्तर: कर्क रेखा भारत के निम्नलिखित राज्यों से होकर गुजरती है |

गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छतीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, मिजोरम |

प्रश्न : सूर्योदय अरुणाचलप्रदेश के पूर्वी भाग में गुजरात के पश्चिमी भाग की अपेक्षा 2घंटे पहले क्यों होता है, जबकि दोनों राज्यों में घड़ी एक ही समय दर्शाती है ? स्पष्ट कीजिए |

उत्तर : अरुणाचलप्रदेश का पूर्वी भाग   97 0 25’ पूर्वी देशांतर पर स्थित है | जबकि गुजरात का पश्चिमी भाग 680 7’ (68 डिग्री  7 मिनट ) पूर्वी देशांतर पर स्थित है | इस प्रकार भारत का देशांतरीय विस्तार लगभग 300 का है | एक डिग्री देशांतर तय करने में सूर्य का प्रकाश कों 4 मिनट लगते है | इस कारण से 300 देशांतर  तय करने में  4 x 30 =120 मिनट या दो घंटे का समय लगेगा | इसलिए अरुणाचलप्रदेश  में गुजरात दो घंटे पहले सूर्योदय होता है |

भारत का मानक समय  82030’ पूर्वी देशांतर रेखा से लिया गया है | इस रेखा पर जो समय होगा पूरे देश में उसी समय कों मानक समय माना जाता है | पूरे देश की घड़ियाँ इसी मानक समय के अनुसार चलती है | इसलिए अरुणाचलप्रदेश और गुजरात की घड़ियाँ एक ही समय बताती है |

प्रश्न : हिंद महासागर में भारत की केन्द्रीय स्थिति से इसे किस प्रकार लाभ प्राप्त है ?

उत्तर : भारत भूमि एशिया महाद्वीप के पूर्व और पश्चिम के बीच स्थित है | जबकि भारत का दक्षिणी भाग एशिया महाद्वीप का दक्षिणी विस्तार है | इसके दक्षिण में हिंद महासागर है जो तीन ओर से भारत कों घेरे हुए है | इस कारण से हिंद महासागर में भारत कों केन्द्रीय स्थिति प्राप्त है | हिंद महासागर में भारत की केन्द्रीय स्थिति के भारत कों प्राचीन काल से लाभ प्राप्त होते रहे है | जिनमें से कुछ लाभ  निम्नलिखित है |

1.       हिंद महासागर पश्चिम में यूरोपीय देशों और  पूर्व में पूर्वी एशिया के देशों से मिलाता है | और इन देशों के मध्य केन्द्रीय स्थिति प्रदान करता है |दक्षिण का पठार हिंद महासागर में शीर्षवत फैला हुआ है | इस कारण भारत जलमार्गों द्वारा पूर्वी अफ्रीका, पश्चिमी एशिया,  के देशों के साथ पश्चिमी तट से और दक्षिणी तथा दक्षिणी-पूर्वी एशिया और पूर्वी एशिया के देशों के साथ  पूर्वी तट के माध्यम से निकटतम संबंध बनाए हुए है |

2.       हिंद महासागर में किसी देश की तटीय सीमा भारत के जैसी नहीं हैं | इसी महत्वपूर्ण स्थिति के कारण भारत (हिंद) के साथ लगते इस महासागर का नाम हिंद महासागर पड़ा है |

प्रश्न : उपमहाद्वीप किसे कहते है ?

उत्तर : एक बड़ी भौगोलिक इकाई जो महाद्वीप के बाकी भागों से अलग दिखाई पडती है | उसे उपमहाद्वीप कहते है |

प्रश्न : भारतीय उपमहाद्वीप से क्या अभिप्राय है ? यह किन देशों से मिलकर बना है ?

अथवा

प्रश्न : भारतीय उपमहाद्वीप में कौन-कौन से देश शामिल हैं ?

उत्तर :  भारत तथा उसके पड़ोसी देश एशिया महाद्वीप में स्थित होते हुए भी  एक अलग भौगोलिक इकाई के रूप में  दिखाई देते है | जिससे  ये देश र एक उपमहाद्वीप का कहलाते है | भारतीय उपमहाद्वीप में भारत, पाकिस्तान, नेपाल, भूटान तथा बांग्लादेश शामिल है |

प्रश्न : “भारत का अक्षांशीय और देशांतरीय विस्तार लगभग 30 का है , फिर भी भारत का उत्तर दक्षिणी विस्तार पूर्व –पश्चिम के विस्तार से अधिक है |” इसका क्या कारण है ?

अथवा

प्रश्न : क्या कारण है कि भारत का उत्तर-दक्षिण विस्तार (किलोमीटर में ) पूर्व –पश्चिम विस्तार की तुलना में अधिक है, जबकि उसका अक्षांशीय और देशांतरीय विस्तार अंश (डिग्री) में  लगभग समान है |

उत्तर : यह सही है कि भारत का अक्षांशीय और देशांतरीय विस्तार लगभग 30 का है | लेकिन जब इसके विस्तार कों हम किलोमीटर में मापते है तो हम देखते है कि ये बराबर नहीं है | इसका निम्न कारण है |

अक्षांश रेखाएँ भूमध्य रेखा के समानांतर होती है और केवल धुर्वों कों छोड़कर प्रत्येक अक्षांश रेखा के बीच की दूरी हर स्थान अपर समान है | लेकिन देशांतर रेखाएँ भूमध्य रेखा पर एक दूसरे से अधिक दूर होती हैं और धुर्वों की ओर जाते हुए इनके बीच की दूरी कम होती जाती है |  इस कारण से अंशों (डिग्री) में समान विस्तार होने के बावजूद भी देशांतर रेखाओं के बीच का विस्तार किलोमीटर में कम रह जाता है | इसलिए ही भारत का अक्षांशीय और देशांतरीय विस्तार लगभग 30 का है , फिर भी भारत का उत्तर दक्षिणी विस्तार किलोमीटर में पूर्व –पश्चिम के विस्तार से अधिक है |

प्रश्न : भारत का अक्षांशीय विस्तार कितना है ? इसके क्या प्रभाव है ?

उत्तर : भारत का अक्षांशीय विस्तार 80 4’ ( 8 डिग्री 4 मिनट ) उत्तरी अक्षांश  से  370 6’ (37 डिग्री 6 मिनट) उत्तरी अक्षांश तक है | भूमध्य रेखा के उत्तर में स्थित होने के कारण यह उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित है | इसका कुल अक्षांशीय विस्तार 30का है | इसके निम्नलिखित प्रभाव हैं |

कर्क रेखा इसके मध्य से गुजरती है | जिससे भारत में दो जलवायु कटिबंध पाए जाते है | कर्क रेखा के दक्षिण में उष्णकटिबंध तथा कर्क रेखा के उत्तर में समशीतोष्ण (उपोष्ण) कटिबंध |

भूमध्य रेखा के पास वाले अक्षांशों में  जैसे कन्याकुमारी में दिन और रात की अवधि में अधिक अन्तर नहीं होता लेकिन जैसे जैसे उत्तर की और चलते है तो जम्मूकश्मीर में यह अन्तर अधिक होता है |

प्रश्न : भारत का देशांतरीय विस्तार कितना है ? इसके क्या प्रभाव है ?

उत्तर : भारत का देशांतरीय  विस्तार 680 7’ (68 डिग्री  7 मिनट ) पूर्व देशांतर से 97 0 25’ (97 डिग्री  25 मिनट ) पूर्व देशांतर  तक है | इसका कुल देशांतरीय विस्तार भी लगभग 30का है | एक डिग्री देशांतर तय करने में सूर्य का प्रकाश कों 4 मिनट लगते है | इस कारण से 300 देशांतर  तय करने में  4 x 30 =120 मिनट या दो घंटे का समय लगेगा | इसलिए अरुणाचलप्रदेश   जो भारत के सबसे पूर्व में है और गुजरातजो भारत के सबसे पश्चिम में है इस दोनों स्थानों के स्थानीय समय में दो घंटे  का अन्तर हो जाता है | इसी कारण अरुणाचलप्रदेश  में गुजरात से दो घंटे पहले सूर्योदय होता है |

प्रश्न : कन्याकुमारी और कश्मीर में दिन रात कि अवधि में अन्तर क्यों है ?

अथवा

प्रश्न : क्या कारण है कि कन्याकुमारी में दिन और रात के समय में अन्तर पता नहीं चलता, परन्तु कश्मीर में ऐसा नहीं है ?

अथवा

प्रश्न : क्या कारण है कि कन्याकुमारी में दिन और रात कि अवधि में केवल 45 मिनट का अन्तर है , जबकि भारत के सबसे उत्तरी छोर अर्थात जम्मूकश्मीर में यह अन्तर बढ़कर 5 घंटे हो जाता है ?

उत्तर :  किसी भी स्थान का उत्तर-दक्षिण का विस्तार दिन रात की अवधि में अन्तर पैदा करता है | भारत का अक्षांशीय विस्तार 80 4’ ( 8 डिग्री 4 मिनट ) उत्तरी अक्षांश  से  370 6’ (37 डिग्री 6 मिनट) उत्तरी अक्षांश तक है |  इसका कुल अक्षांशीय विस्तार 30का है |  80 4’ ( 8 डिग्री 4 मिनट ) उत्तरी अक्षांश  भूमध्य रेखा के पास वाले अक्षांशों में है | भूमध्य रेखा के पास सूर्य की किरणें सीधी पडती हैं | इस कारण से कन्याकुमारी में दिन और रात की अवधि में अधिक अन्तर नहीं होता | यह केवल 45 मिनट का  होता है | लेकिन जैसे जैसे भूमध्य रेखा से दूर उत्तर की और चलते है तो सूर्य की किरणें तिरछी पडने लगती  हैं | परिणाम स्वरूप दिन रात की अवधि में अन्तर अधिक होता जाता है | जम्मूकश्मीर  भूमध्य रेखा से दूर  स्थित है इस कारण जम्मूकश्मीर में यह अन्तर अधिक होता है | जो बढ़ाकर 5 घंटे हो जाता है |