Sunday, July 11, 2021

विश्व जनसंख्या : वितरण और घनत्व ( कक्षा-12)

 

अध्याय -2

विश्व जनसंख्या :  वितरण घनत्व और वृद्धि

मानव भूगोल के मूल सिद्धांत (कक्षा-12)

 

एक देश के निवासी (लोग) ही उसके वास्तविक धन होते है | (एक देश की पहचान उसके लोगों से होती है |)

किसी देश में रहले वाले लोग ही देश के संसाधनों का उपयोग करते है और उस देश की नीतियों का निर्धारण करते है | अत: लोग ही देश के वास्तविक धन होते है | और उस देश की पहचान उसमें रहनें वाले लोगों से ही होती है |

जनसंख्या वितरण से अभिप्राय

जनसंख्या वितरण शब्द का अर्थ इस बात से लगाया जाता है कि भू-पृष्ठ पर लोग किस प्रकार वितरित है | 

विश्व में जनसंख्या का वितरण 

21वीं शताब्दी के प्रारम्भ में विश्व की जनसंख्या 600 करोड़ से अधिक मानी गयी थी | जो 2010 के विश्व के जनसंख्या के आँकड़ों के अनुसार अनुमानित जनसंख्या 6 अरब 90 करोड़ (690 करोड़) हो गयी| यह जनसंख्या एक समान रूप से विश्व के सभी भागों में फैली हुई नहीं है | विश्व में जनसंख्या का वितरण असमान है | मोटे तौर पर विश्व की जनसंख्या के वितरण कों निम्न प्रकार से समझा जा सकता है कि जनसंख्या का 90 प्रतिशत विश्व के 10 प्रतिशत स्थलभाग पर रहता है |

विश्व के दस सर्वाधिक जनसंख्या वाले देशों में विश्व की 60 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है | अन्य सभी देशों में विश्व की शेष 40 प्रतिशत जनसंख्या रहती है | दस सर्वाधिक जनसंख्या वाले देशों में से छह देश एशिया महाद्वीप में ही है | जिनमें चीन, भारत,इंडोनेशिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश तथा जापान शामिल है |  इनके अलावा संयुक्त राज्य अमेरिका उत्तर अमेरिका में, ब्राजील दक्षिणी अमेरिका में, नाइजीरिया अफ्रीका में है | रूस एशिया और यूरोप दोनों महाद्वीपों में है |

विश्व के तीन अधिकतम जनसंख्या वाले देशों (चीन,भारत तथा संयुक्त राज्य अमेरिका) में विश्व की 40 प्रतिशत जनसंख्या रहती है | चीन सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है | यहाँ विश्व की कुल जनसंख्या की 21.03 प्रतिशत जनसंख्या चीन में रहती है | इस हिसाब से विश्व का हर पाँचवां व्यक्ति चीनी है | इसके बाद भारत दूसरे स्थान पर है | यहाँ पर विश्व की 16.87 प्रतिशत जनसंख्या रहती है | अत: विश्व का हर छठा व्यक्ति भारतीय है |

अगर विभिन्न महाद्वीपों मन जनसंख्या के प्रतिशत को देखते है तो स्पष्ट होता है कि एशिया में 59.5 प्रतिशत, अफ्रीका में 16.9 प्रतिशत,  यूरोप में 9.7 प्रतिशत,  दक्षिणी अमेरिका और कैरेबियन द्वीप समूह में  8.5 प्रतिशत,  उत्तरी अमेरिका महाद्वीप में 4.87 प्रतिशत तथा ओशिनिया (ऑस्ट्रेलिया तथा उसके आस-पास के देश ) में केवल 0.5 प्रतिशत जनसंख्या ही निवास करती है |

उपरोक्त विवरण से पता चलता है कि विश्व में जनसंख्या का वितरण असमान है |

जनसंख्या घनत्व का अर्थ 

किसी क्षेत्र की जनसंख्या और  क्षेत्रफल के अनुपातिक संबंध कों उस क्षेत्र का जनसंख्या घनत्व या जन घनत्व कहते है | भूमि की प्रत्येक इकाई में उस पर रह रहे लोगों के पोषण की सीमित क्षमता होती है | अत: लोगों की संख्या और भूमि के अनुपात कों समझना आवश्यक हो जाता है | यह सामान्यत: प्रति वर्ग किलोमीटर में रहने वाले व्यक्तियों के रूप में मापा जाता है |

जनसंख्या घनत्व का माप

जनसंख्या का घनत्व जनसंख्या के वितरण का विश्लेषणात्मक  अध्ययन  करने का  महत्वपूर्ण  माप  है |  इसे तीन  प्रकार से मापा जा सकता है |

1.       अंकगणितीय घनत्व ,

2.       कायिक (पोषक घनत्व )

3.       कृषि घनत्व |

इनका संक्षिप्त वर्णन इस प्रकार है |

1.       अंकगणितीय घनत्व : 

प्रति इकाई क्षेत्रफल में रहने वाले लोगों की संख्या कों उस क्षेत्र का जनसंख्या घनत्व कहते है | यह जनसंख्या तथा भूमि के क्षेत्रफल के बीच एक साधारण अनुपात है |  इसे व्यक्ति प्रतिवर्ग किलोमीटर में व्यक्त करते हैं | इसे निम्नलिखित सूत्र द्वारा व्यक्त किया जाता है |

जनसंख्या घनत्व = कुल जनसंख्या/ कुल क्षेत्रफल

उदाहरण के लिए एक प्रदेश का क्षेत्रफल 100 वर्ग किलोमीटर है | और उसकी 1,50,000 जनसंख्या है | तो जनसंख्या घनत्व इस तरह निकाला जाएगा |

जनसंख्या घनत्व = 1,50,000 / 100     = 1500 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर

2.       कायिक या पोषक घनत्व )

किसी क्षेत्र की कुल जनसंख्या तथा वहाँ की शुद्ध कृषि क्षेत्र के बीच के अनुपात कों कायिक या पोषक घनत्व कहते है | इसे निम्नलिखित सूत्र द्वारा व्यक्त किया जाता है |

कायिक घनत्व = कुल जनसंख्या/ शुद्ध कृषि क्षेत्र

उदाहरण के लिए भारत की कुल जनसंख्या लगभग 121 करोड़ है तथा  शुद्ध कृषि योग्य क्षेत्रफल 14.26 लाख वर्ग किलोमीटर है | तो कायिक घनत्व इस तरह निकाला जाएगा |

 कायिक घनत्व = 121 करोड़ / 14.26 लाख वर्ग किलोमीटर     = 848 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर

3.       कृषीय  घनत्व

किसी क्षेत्र की कुल कृषीय जनसंख्या (कृषि कार्यों में लगे लोग) तथा वहाँ की शुद्ध कृषि क्षेत्र के बीच के अनुपात कों कृषीय  घनत्व कहते है | इसे निम्नलिखित सूत्र द्वारा व्यक्त किया जाता है |

कृषीय घनत्व = कुल कृषीय जनसंख्या / शुद्ध कृषि क्षेत्र

उदाहरण के लिए किसी प्रदेश की कुल जनसंख्या लगभग 150,000 है तथा शुद्ध कृषि योग्य क्षेत्रफल 100 वर्ग किलोमीटर है | तो कृषीय घनत्व इस तरह निकाला जाएगा |

 

कृषीय घनत्व = 150,000  / 100     = 1500 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर

 

विश्व में जनसंख्या घनत्व का प्रारूप

विश्व के जनसंख्या का घनत्व असमान तथा अव्यवस्थित है | मोटे तौर पर विश्व की जनसंख्या के वितरण कों समझें तो देखते है कि जनसंख्या का 90 प्रतिशत विश्व के 10 प्रतिशत स्थलभाग पर रहता है | जबकि बाकी 10 प्रतिशत जनसंख्या विश्व के 90 प्रतिशत भाग पर रहती है | विश्व का लगभग 33 प्रतिशत भाग मानव विहीन (निर्जन) है |  विश्व के विभिन्न प्रदेशों कों जनसंख्या घनत्व के आधार पर उच्च जनसंख्या घनत्व, विरल जनसंख्या घनत्व तथा समान्य जनसंख्या घनत्व वाले प्रदेशों में बाँट सकते है | जिनका संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित है |

उच्च जनसंख्या घनत्व वाले प्रदेश

विश्व में कुछ क्षेत्र जनसंख्या के हिसाब से सघन बसे हुए है | इस  प्रदेशों में जनसंख्या घनत्व  200 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है | इन क्षेत्रों कों उच्च जनसंख्या घनत्व वाले प्रदेश कहते है | इनमें निम्नलिखित क्षेत्रों कों शामिल किया जाता है |इन क्षेत्रों में मानसून एशिया  अर्थात पूर्व एशिया, तथा दक्षिण एवं दक्षिण पूर्व एशिया , यूरोप , उत्तर अमेरिका का  पूर्वी तटीय प्रदेश शामिल  है |

सामान्य  (मध्यम) जनसंख्या घनत्व वाले प्रदेश

जिनका जनसंख्या घनत्व 200 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर से कम और 10 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर से अधिक हो साधारण या मध्यम जनसंख्या घनत्व वाले प्रदेश कहलाते है |  इन क्षेत्रों के अंतर्गत एशिया महाद्वीप में  चीन तथा दक्षिणी भारत, यूरोप महाद्वीप में नार्वे तथा स्वीडन देश शामिल है | 

विरल जनसंख्या घनत्व  वाले प्रदेश

जिन क्षेत्रों में 1से 2 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर रहते है | उन्हें विरल जनसंख्या घनत्व वाले प्रदेश कहलाते है | इन क्षेत्रों के अंतर्गत उत्तरी व दक्षिणी ध्रुव, उष्ण तथा शीत मरुस्थल और विषुवत रेखा के निकट उच्च वर्षा के क्षेत्र शामिल हैं |

No comments: