जनसंख्या के वितरण कों प्रभावित करने वाले कारक
विष
की जनसंख्या के वितरण प्रारूप से पता चलता है कि विश्व में जनसंख्या का वितरण
असमान है | इस असमान वितरण का मुख्य कारण वे विभिन्न कारक हैं जो लोगों कों किसी
क्षेत्र में रहने या वहाँ से चले जाने के लिए प्रेरित करते हैं | इन कारकों कों
भौतिक (प्राकृतिक ), कारक तथा मानवीय कारकों में वर्गीकृत किया जाता है | मानवीय
कारकों कों पुन: आर्थिक, सामजिक, सांस्कृतिक तथा राजनैतिक कारकों में विभाजित किया
जाता है | इन कारकों का संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित है |
जनसंख्या
कों प्रभावित करने वाले भौतिक कारक
जनसंख्या
के वितरण कों प्रभावित करने वाले जो कारक प्राकृतिक कारणों होते हैं उन्हें भौतिक
या प्राकृतिक कारक कहते है | इन कारकों में जल की उपलब्धता, भू-आकृति, जलवायु तथा
मृदा कों शामिल किया जाता है | इनका वर्णन निम्नलिखित है |
1. जल
की उपलब्धता
जल जीवन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारक है | जल
का उपयोग पीने, नहाने, भोजन बनाने, पशुओं के लिए, फसलों में सिंचाई के लिए ,
उद्योगों में तथा नौका चालन आदि कार्यों में किया जाता है | अत: लोग उन् क्षेत्रों
में बसना अधिक पसंद करते हैं, जहाँ जल आसानी से उपलब्ध हो सके | यही कारण है कि
नदी घाटियाँ विश्व के सबसे सघन बसे क्षेत्र हैं |
2. भू-आकृति
(उच्चावच )
उच्चावच जनसंख्या कों
प्रभावित करने वाले कारकों में सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक है |ऊँचे पर्वत,
उबड-खाबड क्षेत्र तथा पठारी क्षेत्र विरल जनसंख्या वाले क्षेत्र होते हैं |
पर्वतीय प्रदेशों में ढाल अधिक होने के कारण जनसंख्या की वृद्धि के लिए अवरोध
उत्पन्न करते है | क्योंकि समतल भू भाग नहीं होने से इन क्षेत्रों में बसाव
स्थानों की समस्या होती है | अधिक ढाल के कारण भूमि के कम उपलब्ध होने तथा मृदा अपरदन से मिट्टी की पतली परत हो जाने से
कृषि का विकास भी नहीं हो पाता | परिवहन के साधनों का विकास इन क्षेत्रों में कम
होता है | पर्वतीय क्षेत्रों में ये सुविधाएँ मैदानोंकी अपेक्षा कम विकसित हो पाती
है | इसलिए लोग पहाड़ी क्षेत्रों में कम
रहना पसंद करते है |
जबकि जनसंख्या का बड़ा हिस्सा
समतल मैदानों और मंद ढाल वाले क्षेत्रों में रहता है | इसके निम्नलिखित कारण है | इन
क्षेत्रों में कृषि करना आसान है | परिवहन के साधनों का विकास इन क्षेत्रों में
तेजी से हो सकता है | उद्योगों के विकास के लिए समतल भूमि का होना आवश्यक है |
3. जलवायु
जलवायु जनसंख्या कों प्रभावित करने वाले
कारकों में दूसरा महत्वपूर्ण कारक है | क्योंकि मनुष्य तापमान, वर्षा तथा आर्द्रता
की कुछ अनुकूल परिस्थितियों में ही रह सकता है | प्राय: वह सम जलवायु की दशाएँ
ही जनसंख्या कों किसी क्षेत्र में अर्हें
के लिए आकृषित करती है |
अति
उष्ण तथा अति शीत मरुस्थलीय क्षेत्र ऐसे क्षेत्र है जहाँ विषम जलवायु पाई जाती है
| प्रतिकूल जलवायु के कारण इन क्षेत्रों
में विरल जनसंख्या पाई जाती है | जैसे
सहारा मरुस्थल, उत्तरी ध्रुव का साइबेरिया क्षेत्र तथा दक्षिणी ध्रुवीय प्रदेश, अत्यधिक
विषम जलवायु के कारण विरल जनसंख्या वाले क्षेत्र है |
अधिकतापमान के साथ अधिक
आर्द्रता भी स्वाथ्य के लिए अनुकूल नहीं होती | इस तरह की जलवायु में पेचिश,
मलेरिया तथा पीलिया जैसी बीमारियाँ अधिक होती है | इसी कारण से अफ्रीका के जायरे
बेसिन तथा दक्षिणी अमेरिका में अमेजन बेसिन क्षेत्र जो भूमध्यरेखीय प्रदेशों में
आते है विरल जनसंख्या वाले क्षेत्र है |
जबकि वे क्षेत्र जहाँ सम
जलवायु मिलती है | अनुकूल और आराम दायक होने के
कारण मानव बसाव कों प्रोत्साहित करती है |
जिससे यहाँ सघन जनसंख्या मिलती है | जैसे मानसून एशिया, उतरी पश्चिमी
यूरोप का भूमध्य सागरीय प्रदेश तथा उत्तरी
अमेरिका उत्तरी पूर्वी भाग सम जलवायु होने के कारण सघन बसे क्षेत्र है |
4. मृदा
जिन
क्षेत्रों में उपजाऊ मृदा मिलती है | उन् क्षेत्रों में कृषि तथा उससे संबंधित
क्रियाएँ अधिक विकसित होती हैं | इसलिए अधिक उपजाऊ मृदा वाले क्षेत्रों में अधिक
जनसंख्या मिलती है | भारत में नदी घाटी क्षेत्र में आत्याधिक जनसंख्या रहती है |
जबकि मरुस्थलीय भाग मैं अनुपजाऊ मृदा के कारण कम जनसंख्या निवास करती है |
जनसंख्या
कों प्रभावित करने वाले आर्थिक कारक
जनसंख्या
के वितरण कों प्रभावित करने वाले आर्थिक कारणों में खनिजों की उपलब्धता, नगरीकरण
तथा औद्योगिकीकरण कों शामिल किया जाता है | जिनका संक्षिप्त वर्णन इस प्रकार है |
1. खनिजों
की उपलब्धता
खनिजों के निक्षेप से युक्त
क्षेत्र उद्योग कों अपनी ओर आकृषित करते हैं | परिणाम स्वरूप खनन कार्य और
उद्योगों में उत्पन्न रोजगार लोगों कों अपनी ओर आकृषित करते है | लोग रोजगार की
तलाश में इन क्षेत्रों में आकार बसने लगते है | इन क्षेत्रों में कुशल तथा
अर्द्धकुशल श्रमिकों के आने ये क्षेत्र अत्यधिक
जनसंख्या वाले बन जाते है |
उदाहरण के लिए अफ्रीका महाद्वीप में कटंगा -
जाम्बिया तांबा पेटी खनिजों की उपलब्धता के कारण सघन जनसंख्या वाला क्षेत्र है |
इसी तरह भारत का छोटा नागपुर का पठारी क्षेत्र भी खनिजों की बहुलता के कारण सघन
बसा हुआ है |
2. नगरीकरण
नगरीय क्षेत्र में रोजगार के
बेहतर अवसर उपलब्ध होते हैं | इसके अलावा यहाँ शिक्षा व चिकित्सा संबंधी सुविधाएँ
भी बेहतर होती है | परिवहन और संचार के साधन विकसित होते है | इसके अतिरिक्त नगरीय
जीवन में ग्रामीण सामजिक व्यवस्था से राहत मिलती है | इसलिए अच्छी सुविधाओं और
नगरीय जीवन की स्वतंत्रता के आकर्षण के कारण लोग नगरों में आकार बसने लगते है |
ग्रामीण जनसंख्या का नगरों की ओर प्रवास इन्हीं कारणों से करती है | जिससे ये
क्षेत्र सघन जनसंख्या वाले हो जाते है | विश्व के सभी महानगर जैसे लन्दन, पेरिस,
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, न्यूयार्क, सिडनी, बीजिंग, शंघाई मास्को आदि सभी नगर अत्यधिक सघन बसे है और
इनमें अब भी तेजी से जनसंख्या बढ़ रही रही है |
3. औद्योगिकीकरण
औद्योगिक क्षेत्र रोजगार के अवसर उपलब्ध कराते
हैं | यहाँ कारखानों में काम करने वाले श्रमिकों के अलावा परिवहन परिचालक, दुकानदार,
बैंककर्मी, डॉक्टर, अध्यापक तथा अन्य विभिन्न प्रकार की सेवाएँ उपलब्ध कराने वाले लोग
बड़ी संख्या में आकर्षित होकर यहाँ बसने लगते है | जिससे इन क्षेत्रों में सघन
जनसंख्या निवास करती है | उदाहरण के लिए जापान का कोबे ओसाका प्रदेश अनके प्रकार
के उद्योगों के कारण सघन बसा है | इसी प्रकार भारत में भी दिल्ली, मुम्बई कोलकाता,
गुरुग्राम कानपुर तथा मद्रास आदि सघन औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण सघन बसे है
|
जनसंख्या कों प्रभावित करने वाले सामाजिक
कारक
जिन
क्षेत्रों में धर्म, भाषा जाति आदि के
कारण सामजिक एकरूपता पाई रहती है | उन क्षेत्रों में सामाजिक संबंध अच्छे रहते है
| लोग अपनी भाषा, धर्म, जाति आदि के लोगों के बीच रहना पसंद करते है | जिससे ऐसे
क्षेत्रों में जनसंख्या बढ़ने लगती है |
इसके विपरीत जिन क्षेत्रों में सामाजिक आधार
पर दंगे जैसे जाति, धर्म या भाषा के आधार पर होने वाले दंगें उन क्षेत्रों से लोगों के पलायन कों बढ़ावा देते
है | इस तरह के क्षेत्र कम बसे क्षेत्र हो जाते है |
जनसंख्या
कों प्रभावित करने वाले सांस्कृतिक कारक
कुछ
स्थान धार्मिक या सांस्कृतिक महत्व के कारण अधिक लोगों कों आकृषित करते हैं और सघन जनसंख्या के केन्द्र बन जाते हैं | जैसे जेस्र्सलम
और मक्का-मदीना अपने धार्मिक महत्व के कारण सघन बसे है |इसी भारत में हरिद्वार,
मथुरा, वाराणसी, अमृतसर, इलाहाबाद, मदुरै, उज्जैन आदि नगर अपने धार्मिक महत्व के
कारण सघन बसे है |
जनसंख्या
कों प्रभावित करने वाले राजनैतिक कारक
किसी
भी देश की राजनैतिक व्यवस्था वहाँ के लोगों आकृषित भी कर सकती है और वहाँ से जाने
ले लिए मजबूर भी कर सकती है | अगर देश या क्षेत्र में राजनैतिक कारणों से अशांति
उत्पन्न होती है तो लोग वहाँ से चले जाते है |
क्योंकि उन क्षेत्रों में राजनैतिक अस्थिरता आ जाता है | इसके विपरीत किसी
प्रदेश राजनैतिक की स्थिरता लोगों कों उस प्रदेश में रहने के लिए प्रोत्साहित करती
है |
इसके अलावा जब सरकार की नीतियाँ भी जनसंख्या के वितरण कों प्रभावित
करती है | जैसे सरकार किसी क्षेत्र विशेष में लोगों कों बसाने के लिए विभिन्न
प्रकार की सुविधायें देती है तो लोग उन क्षेत्रों में जाकर बसने लगते हैं |
सरकारें कई बार लोगों कों भीड़ -भाड़ वाले स्थानों से चले जाने ले लिए वहाँ कर अधिक
लगा देती है और वहाँ से विरल जनसंख्या वाले क्षेत्रों में बसने के लिए प्रोत्साहित
करती है | जैसे भारत की राजधानी दिल्ली के भीड़ भाड इलाकों से लोगों कों चले जाने
के लिए प्रोत्साहित किया गया था | साथ ही यहाँ पर उद्योगों के लिए कम
सुविधाएँ तथा अधिक सख्त नियम बना दिए गए|जिससे लोग दिल्ली से बहार की ओर बसने लगे |
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