कक्षा
-11वीं
भौतिक भूगोल
के मूल सिद्धांत
अध्याय 1 भूगोल
एक विषय के रूप में
भूगोल का अर्थ
भूगोल
कों अंग्रेजी भाषा में ज्योग्राफी (Geography) कहा जाता है | जो दो शब्दों Geo + graphy से मिलकर
बना है | यह ग्रीक भाषा के शब्द “Geographos” का रूपान्तरण
है | जिसमें “Geo” का अर्थ है पृथ्वी और “Graphos” का अर्थ है वर्णन | अत: Geography का अर्थ है
पृथ्वी का वर्णन | इस प्रकार भूगोल के विद्वान भूगोल कों मानव निवास के रूप में
पृथ्वी का अध्ययन मानते है |
ज्योग्राफी (Geography)
शब्द का सबसे पहले प्रयोग ग्रीक विद्वान इरेटोस्थेनीज ने किया था |
भूगोल की परिभाषा
भूगोल का अध्ययन एक विस्तृत अध्ययन है | इसे
कुछ शब्दों के द्वारा और सीमाओं में रखकर परिभाषित नहीं किया जा सकता | फिर भी
भूगोल के विभिन्न विद्वानों ने भूगोल कों अनेक प्रकार से परिभाषित किया है | उनमें
से कुछ की परिभाषाएँ निम्नलिखित है |
अल्फेर्ड हेटनर के अनुसार, “भूगोल
धरातल के विभिन्न भागों में कारणात्मक रूप से सम्बन्धित तथ्यों में भिन्नता का
अध्ययन करता है |”
रिचार्ड हार्टशोर्न के अनुसार, “भूगोल
का उद्देश्य धरातल की प्रादेशिक भिन्नता का वर्णन तथा व्याख्या करना है |”
मोंकहाउस के अनुसार, “
भूगोल मानव के आवास के रूप में पृथ्वी का विज्ञान है |”
फिन्च और ट्रिवार्था के अनुसार,
“ भूगोल भू-पृष्ठ का विज्ञान है | इसमें भूतल पर विभिन्न वस्तुओं के वितरण
प्रतिमानों तथा प्रादेशिक संबंधों के वर्णन एवं व्याख्या करने का प्रयास किया जाता
है |”
उपरोक्त परिभाषाओं से
स्पष्ट है कि एक विषय के रूप में भूगोल मानव तथा पृथ्वी के अन्तर्सम्बन्धों का अध्ययन
करता है | यह पृत्वी पर पायी जाने वाली
भिन्नताओं का अध्ययन भी करता है | साथ ही
वह उन कारकों का भी अध्ययन करता है जिनके प्रभाव से मानव तथा पृथ्वी के
अन्तर्सम्बन्धों में ये भिन्नताएँ पायी जाती है |
स्वतंत्र विषय के रूप में भूगोल के
अंतर्गत किस प्रकार की जानकारी प्राप्त
होती है
स्वतंत्र
विषय के रूप में भूगोल के अंतर्गत तीन मुख्य कारकों के बारे में जानकारी प्राप्त
होती है ये निम्नलिखित है |
1. भौतिक
पर्यावरण
2. मानवीय
क्रियाएँ
3. भौतिक
पर्यावरण और मानवीय क्रियाओं के बीच अंतरप्रक्रियात्मक सम्बन्ध
एक छात्र के रूप में हमें भूगोल
क्यों पढ़ना चहिये
एक छात्र के रूप में
हमें भूगोल निम्नलिखित कारणों से पढ़ना चाहिए |
1. पृथ्वी
हमारा घर है | अत: पृथ्वी के विभिन्न घटकों, उसके पर्यावरण और उसके विभिन्न
संसाधनों के कारण हमारा जीवन प्रभावित होता है | इन घटकों, हमारे आसपास के
पर्यावरण और हमारे लिए उपयोगी संसाधनों का अध्ययन हम भूगोल में करते है | इसलिए
भूगोल का अध्ययन आवश्यक है |
2. विभिन्न
संसाधनों जैसे भूमि, जल, खनिज, मृदा आदि
का उपयोग करते हुए हम भोजन प्राप्त करतें है और विभिन्न क्रियाकलाप करते हुए जीवन
यापन करते है | विभिन्न क्षेत्रों में कौन
–कौन से संसाधन है और कितनी मात्रा में है उनके क्या उपयोग है इन सभी का अध्ययन हम
भूगोल में करते है | इसलिए भूगोल का अध्ययन आवश्यक है |
3. हम
विभिन्न प्रकार की जलवायु में रहते है और इसी
तरह विभिन्न मौसम हमारे जीवन कों प्रभावित करते है | जलवायु और मौसम के तत्वों,
उनको प्रभावित करने वाले कारकों का अध्ययन
हम भूगोल के अध्ययन के रूप में करते है और जलवायु और मौसम के मानव जीवन के
प्रभावों और उसके कारण उत्त्पन्न भिन्नताओं का अध्ययन हम भूगोल के अंतर्गत ही करते
है अत: हमें भूगोल पढ़ना चाहिए |
4. मानव
द्वारा किए जाने वाले विभिन्न क्रियाकलाप
और उनके पर्यावरण पर प्रभावों का अध्ययन हम भूगोल के अंतर्गत करते है इसलिए भी
भूगोल का अध्ययन जरुरी है |
5. विभिन्न
प्रकार की पर्यावरणीय समस्याओं के कारण, प्रभाव और उनका क्षेत्रीय अध्ययन हम भूगोल
में मुख्य रूप से करते है | साथ ही उनसे निपटने के उपायों का भी अध्ययन इस विषय
में प्रमुखता से किया जाता है |
6. भूगोल
विविधता कों समझने और ऐसी विविधताओं कों उत्त्पन्न करने वाले कारकों का अध्ययन
करता है अत: इसका अध्ययन आवश्यक है |
7. समय और स्थान के साथ होने वाले परिवर्तनों
का अध्ययन भूगोल के अंतर्गत किया जाता है
| जिससे इन्हें समझने में आसानी होती है |
8. भूगोल
के द्वारा हम मानचित्र में परिवर्तित ग्लोब कों समझने में सहायता मिलती है |
9. इस
विषय के अध्यन्न से मानचित्र में दिए गए दृश्य कों समझने की क्षमता विकसित होती है
|
10. भूगोल
में आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों जैसे भौगोलिक सूचना तंत्र (GIS), कंप्यूटर आधारित मानचित्र कला आदि में आपको ज्ञान प्रदान किया जाता है
जिससे आप राष्ट्रीय स्तर पर अपना योगदान दे सकते है |
भूगोल की
प्रकृति बहु-आयामी है या
भूगोल
बहु-आयामी पृथ्वी का अध्ययन
भूगोल वास्तविकता या
यथार्थता का अध्ययन करता है | पृथ्वी की वास्तविकता भी बहु-आयामी है | क्योंकि हम
पृथ्वी के विभिन्न भौतिक पक्षों जैसे भौमिकी, मृदा, जलवायु समुद्रों और वनों के साथ-साथ मानवीय पक्षों जैसे जनसँख्या संबंधी
विशेषताएँ जैसे घनत्व, लिंग अनुपात, आर्थिक क्रियाकलाप आदि का अध्ययन करते है जो
बहु आयामी हो जाता है | अनेक प्राकृतिक विज्ञानों जैसे भौमिकी, मृदा विज्ञान,
जलवायु विज्ञान, समुद्रों विज्ञान और वनस्पति विज्ञान, जीव विज्ञान और मौसम विज्ञान
आदि और विभिन्न सामाजिक विज्ञानों जैसे समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, इतिहास,
अर्थशास्त्र और नृ-विज्ञान आदि की सहायता से पृथ्वी की वास्तविक और बहु-आयामी
प्रकृति का अध्यन्न भूगोल का मुख्य कार्य है इसलिए ही भूगोल की प्रकृति बहु-आयामी
है |
भूगोल क्षेत्रीय विभिन्नता का अध्ययन
भूगोल पृथ्वी का अध्ययन है | भू-तल पर बहुत
भिन्नताएँ देखने कों मिलती है | ये भिन्नताएँ प्राकृतिक और सांस्कृतिक वातावरण से
सम्बन्धित होती है | अनेक तत्वों में
समानताओं के साथ-साथ असमानताएँ भी होती है इन्ही असमानताओं कों क्षेत्रीय विभिन्नता
का नाम दिया जाता है | इन सभी भिन्नताओं
का अध्ययन हम भूगोल में करते है | अत: भूगोल कों भूगोल क्षेत्रीय विभिन्नता का
अध्ययन भी कहते है | क्षेत्रीय विभिन्न्ताओं का अध्ययन करना भूगोल के मुख्य
उद्देश्यों में से एक है | इस प्रकार भूगोल उन सभी तथ्यों का अध्ययन करता है जो
क्षेत्रीय संदर्भ में भिन्नता लिए हुए है | इस तथ्य कों ध्यान में रखते हुए रिचार्ड हार्टशोर्न महोदय ने भूगोल कों निम्न प्रकार से परिभाषित
किया है |
रिचार्ड हार्टशोर्न के अनुसार, “भूगोल
का उद्देश्य धरातल की प्रादेशिक भिन्नता का वर्णन तथा व्याख्या करना है |”
भूगोल में हम केवल धरातल में
विभिन्नता का अध्ययन नहीं करते बल्कि उन कारकों का भी अध्ययन करते है जो इन
विभिन्नताओं के कारण है | उदाहरण के लिए फसल का स्वरूप एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश
में भिन्न होता है किन्तु यह भिन्नता
मिट्टी, जलवायु, बाज़ार कि माँग, किसानों की व्यय क्षमता और तकनीकी निवेश कि
उपलब्धता आदि में भिन्नता से प्रभावित
होती है | अत: भूगोल किन्ही दो तत्वों के बिच कार्य-कारण सम्बन्ध भी ज्ञात करता है
| इस तथ्य कों ध्यान में रखते हुए अल्फेर्ड हेटनर महोदय ने भूगोल कों निम्न प्रकार
से परिभाषित किया है |
अल्फेर्ड हेटनर के अनुसार, “भूगोल धरातल
के विभिन्न भागों में कारणात्मक रूप से सम्बन्धित तथ्यों में भिन्नता का अध्ययन
करता है |”
भूगोल एक गत्यात्मक अध्ययन या
भूगोल एक परिवर्तनशील अध्ययन
भूगोल में हम भौतिक और मानवीय तथ्यों का अध्ययन
करते है | भौतिक और मानवीय दोनों ही प्रकार के तथ्य स्थैतिक नहीं है बल्कि
गत्यात्मक है | ये तथ्य या कारक परिवर्तित होते रहते है चाहे मंद हो या तीव्र चाहे
दिखाई दे या नहीं लेकिन लगातार बदलते रहते है | हम ये कह सकते है कि ये तथ्य सतत
परिवर्तनशील पृथ्वी और अथक एवं निरंतर प्रयत्नशील मानव के बीच होने वाली
अंतर्प्रक्रियाओं के कारण समय के साथ-साथ परिवर्तनशील रहते है | परिवर्तनशील अथवा गत्यात्मक तथ्यों का अध्ययन भूगोल
के मुख्य उद्देश्यों में से एक है | इसी कारण ही भूगोल गत्यात्मक या परिवर्तनशील
अध्ययन कहलाता है |
भूगोल एक समाकलनात्म्क और संश्लेषित विज्ञान या
भूगोल समाकलन और संश्लेषण का अध्ययन
प्राकृतिक
और सामाजिक दोनों ही प्रकार के विज्ञानों
का मूल उद्देश्य वास्तविकता (यथार्थता)
कों ज्ञात करना | इसलिए प्रत्येक विज्ञान सभी अन्य विज्ञानों से सम्बन्ध स्थापित
करता हुआ वास्तविकता (यथार्थता) कों
प्राप्त करना चाहता है | भूगोल भी अनेक प्राकृतिक विज्ञानों जैसे जैसे भौमिकी,
मृदा विज्ञान, जलवायु विज्ञान, समुद्रों विज्ञान और वनस्पति विज्ञान, जीव विज्ञान
और मौसम विज्ञान आदि और विभिन्न सामाजिक विज्ञानों जैसे समाजशास्त्र, राजनीति
विज्ञान, इतिहास, अर्थशास्त्र और नृ-विज्ञान आदि की सहायता से पृथ्वी तल पर चल रही
प्रत्येक घटना की वास्तविकता कों जानता है |
इनके सहयोग से भौगोलिक अध्ययन सरल हो जाता है | विभिन्न विज्ञानों के साथ
मिलकर अध्ययन करने कों ही समाकलन कहते है अत: स्पष्ट है कि भूगोल एक समाकलनात्म्क
विज्ञान है |
भूगोल का विज्ञान की कई शाखाओं से निकट का
सम्बन्ध स्थापित है | इन विज्ञानों के विभिन्न घटकों से प्राप्त ज्ञान कों
स्नाश्लेषित करके भूगोल में इनका संश्लेषित अध्ययन होता है इसलिए ही भूगोल कों
संश्लेषित विज्ञान कहा जाता है |
भौतिक भूगोल और मानव भूगोल के संश्लेषण का
समर्थन प्रसिद्ध भूगोलवेता एच॰ जे॰ मैकिण्डर ने किया था | उनके अनुसार भौतिक भूगोल
के बिना मानव भूगोल का कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं है |
भूगोल प्रकृति तथा मानव के बीच अंतर्प्रक्रियाओं का अध्ययन
भौगोलिक तथा मानवीय दोनों ही प्रकार के कारक
स्थैतिक (स्थाई) ना होकर हमेशा गतिशील (गत्यात्मक) रहते है | ये तथ्य या कारक
परिवर्तित होते रहते है चाहे मंद हो या तीव्र चाहे दिखाई दे या नहीं लेकिन लगातार
बदलते रहते है | हम ये कह सकते है कि ये तथ्य सतत परिवर्तनशील पृथ्वी अथक एवं
निरंतर प्रयत्न शील मानव के बीच होने वाली अंतर्प्रक्रियाओं के कारण समय के साथ-साथ
परिवर्तनशील रहते है | आदिमानव समाज अपने पर्यावरण पर ही निर्भर रहता था और उसी के
अनुसार व्यवहार करता था | समय के साथ-साथ तकनीक उपलब्ध होने पर अब ऐसा नहीं है वह
अपने अनुसार वातावरण कों ढालने लगा है | इस तरह आदिम समाज से लेकर वर्तमान तक
प्रकृति और मानव के बीच के विभिन्न अंत: प्रक्रियाएं होती रही | इन अंतर्प्रक्रियाओं
का अध्ययन हम भूगोल में करते है इसलिए
भूगोल कों अंतर्प्रक्रियाओं का अध्ययन कहा जाता है |
एक वैज्ञानिक विषय के रूप में भूगोल तीन वर्गों के प्रश्नों से
सम्बन्धित है
एक
वैज्ञानिक विषय के रूप में भूगोल तीन वर्गों के प्रश्नों से सम्बन्धित है | ये
निम्नलिखित है |
1. क्या-
कुछ प्रश्न ऐसे होते है जो भूतल पर पाई जाने वाली प्राकृतिक और सांस्कृतिक
विशेताओं के प्रतिरूप की पहचान से जुड़े होते है | जिसका मतलब होता है, ये क्या है ? अत: ये प्रश्न “क्या” से
सम्बन्धित होते है |
2. कहाँ-
कुछ प्रश्न ऐसे होते है जो भूतल पर पाई जाने वाली प्राकृतिक और सांस्कृतिक
विशेताओं के वितरण से जुड़े होते है |
जिसका मतलब होता है, कोई वस्तु या तत्व
कहाँ पर स्थित है ? अत: ये प्रश्न “कहाँ ” से सम्बन्धित होते है |
3. क्यों-
तीसरे प्रकार के प्रश्न व्याख्या से सम्बन्धित होते है जो
तत्वों और तथ्यों के किसी स्थान पर होने या ना होने के कारण से जुड़े होते है | ये तत्वों और तथ्यों के बीच कार्य –कारण सम्बन्ध से
जुड़े होते है | जिसका मतलब है कोई वस्तु या तत्व किसी स्थान पर “क्यों” है? अत: ये
प्रश्न “क्यों ” से सम्बन्धित होते है |
भूगोल का प्राकृतिक (भौतिक) विज्ञानों और सामाजिक विज्ञानों के साथ संबंध
भूगोल
भौतिक और सामाजिक विज्ञानों कों आपस में जोड़ने का काम करता है | इसका कारण यह है
कि अपनी अंतर्वस्तु या विषय सामग्री के कारण भूगोल भौतिक और सामाजिक विज्ञानों पर
बहुत अधिक निर्भर हो जाता है | साथ ही यह इन भौतिक और सामाजिक विज्ञानों का विकास
में भी योगदान देता है |अत: भूगोल की प्रकृति अंतर्विषयक है |
भूगोल के साथ इन भौतिक और सामाजिक
विज्ञानों का संबंध हम दो हिस्सों में बाँट सकते है जिसमें भूगोल की शाखा भौतिक
भूगोल का संबंध भौतिक या प्राकृतिक विज्ञानों से है तथा दूसरी प्रमुख शाखा मानव
भूगोल का संबंध सामाजिक विज्ञानों से है | भूगोल के साथ विभिन्न भौतिक और सामाजिक विज्ञानों
से सम्बन्धों के बारे में चर्चा की जा रही है |
a) भूगोल
तथा भूगर्भ विज्ञान
पृथ्वी की उत्पत्ति, पृथ्वी
पर पाई जाने वाली विभिन्न प्रकार की स्थ्लाकृतियों के बनने, चट्टानों का निर्माण और प्रकार, भूकंप तथा
ज्वालामुखी संबंधी क्रियाएँ इन सभी का अध्ययन करने के लिए भूगोल कों भूगर्भ
विज्ञान का सहारा लेना पड़ता है |
b) भूगोल
तथा खगोल विज्ञान
ब्रहमांड की उत्पत्ति,
ब्रहमांड में पाए जाने वाले विभिन्न आकाशगंगायें, सौरमंडल, तारे, ग्रह उपग्रह तथा
अन्य तत्वों के निर्माण, इनके बीच की दूरी, गतियों, सूर्य की किरणों का उतरायण तथा
दक्षिणायन होना, ऋतु परिवर्तन होना आदि | इन सभी का अध्ययन करने के लिए भूगोल कों खगोल विज्ञान पर निर्भर होना पड़ता है
|
c) भूगोल
तथा भौतिकी
भौतिकी के नियमों की सहायता
से पृथ्वी तथा अंतरिक्ष में पाए जाने वाले
अन्य पिण्डों की गतियों के अध्ययन के लिए भूगोल वेता कों भौतिकी की आवश्यकता पडती
है | इसके अलावा पवनों की गति तथा दिशा, वायुदाब, भूकंप, ज्वार-भाटा अपक्षय तथा
अपरदन जैसी प्रक्रियाओं कों समझने के लिए भी भौतिकी का सहारा लेना पड़ता है | अत:
भूगोल का संबंध भौतिकी से भी है |
d) भूगोल
तथा गणित
पृथ्वी की आकृति भू आभ है
| इसकों भूगोलवेता मानचित्र के द्वारा
प्रदर्शित करता है | इसके निर्माण के लिए गणित तथा कला में निपुणता होनी चाहिए |
इसके अलावा अक्षांश तथा देशांतर के निर्धारण, समय के निर्धारण और दो स्थानों के
बीच समय अंतराल का पता लगाने के लिए गणितीय तथा सांख्यिकी की आवश्यकता पडती है | अत : भूगोल का गणित से
भी गहरा संबंध है |
e) भूगोल
तथा रसायन विज्ञान
वायुमंडल में पाई जाने वाली विभिन्न गैसों,
विभिन्न प्रकार के खनिजों, मृदा के गुणों चट्टानों के गुण आदि के बारे में जानकारी
के लिए हम रसायन विज्ञान की सहायता लेते है |
f) भूगोल
तथा वनस्पति विज्ञान
भूगोल में हम विश्व के
विभिन्न प्रदेशों में पाई जाने वाली वनस्पति के प्रकारों के उगने के लिए अनुकूल
वातावरण, भूमि, मृदा आदि के साथ –साथ उनके आर्थिक और सामाजिक महत्व के बारे में
अध्ययन करते हैं | वनस्पति विज्ञान में पेड़ –पौधों के प्रकार, उनके लिए अनुकूल
वातावरण और उनकी जातियों के जानकारी मिलती है | अत : वनस्पति से संबंधित आधारभूत
जानकारी लेने के लिए भूगोल का संबंध
वनस्पति विज्ञान से है |
g) भूगोल
तथा प्राणी विज्ञान
प्राणी विज्ञान जंतुओं के जातियों तथा
उपजातियों के जीवन के बारे में अध्ययन करता है | भूगोल में भी हम हमारे पर्यावरण
में पाए जाने वाले विभिन्न प्राणियों के प्रकार, उनके जीवन पर भौगोलिक तत्वों के
प्रभाव, पर्यावरण के अन्य तत्वों से उनके संबंध इन सभी का अध्ययन करते हैं | इसके
साथ ही विभिन्न प्राणियों का विश्व वितरण का भी हम भूगोल में अध्ययन करते हैं | इस
सभी जानकारियों के लिए भूगोल का वनस्पति विज्ञान के साथ संबंध स्थापित किए गए है |
इन विज्ञानों के अतिरिक्त जलविज्ञान तथा मृदा
विज्ञान आदि प्राकृतिक विज्ञानों का भी भूगोल के साथ निकटता का संबंध है |
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